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खलनायक बनता खेल यादों में बसते खिलाड़ी

खलनायक बनता खेल यादों में बसते खिलाड़ी

By सौरभ अग्रवाल

खेल को जीवन का एक प्रमुख अंग माना जाता है। खेलने से मनुष्य स्वस्थ रहता है और मस्तिष्क का विकास होता है। खिलाडिय़ों के लिए तो मानो खेल ही जीवन है। खेल में सफल होने के लिए एक खिलाड़ी कड़ी मेहनत व संघर्ष के कई इम्तिहानों से गुजरता है, परंतु जब एक खिलाड़ी खेल के दौरान चोटिल हो जाता है और उसका खेल जीवन समाप्त हो जाता है तो न सिर्फ उससे जुड़े सभी व्यक्तियों को धक्का पहुंचता है। प्रशंसकों का दिल टूट जाता है और स्वयं उस खिलाड़ी की तो मानों जीवनलीला ही समाप्त हो जाती है।

क्या इससे भी भयावह स्थिति हो सकती है? जी हां, अगर खेल के दौरान खिलाड़ी की जीवनलीला वाकई समाप्त हो गई हो। ऐसा ही कुछ हुआ था 27 नवंबर को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर। ऑस्ट्रेलिया के शीर्षक्रम के बल्लेबाज फिलिप ह्यूज को घरेलू मैच में बाउंसर बॉल लगने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। 25 वर्षीय ह्यूज को 22 वर्षीय सीन एबाट की गेंद पुल करने के प्रयास में गर्दन के पास लगी थी। ऐसा क्रिकेट में या किसी अन्य खेल में हुआ पहला हादसा नहीं है।

ह्यूज की मृत्यु के बाद क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ पड़ी। दुनिया भर के किक्रेट प्रेमी व सभी विख्यात क्रिकेटरों ने इस दुखद समाचार के बाद अपना शोक व्यक्त किया। इस वाकिये के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों ने खेल के नियमों में बदलाव की भी मांग की है। ऑस्ट्रेलिया व इंग्लैंड के कई पूर्व तेज गेंदबाज बाउंसर को बैन करने के हक में हैं तो वहीं भारत के विस्फोटक बल्लेबाज विरेंद्र सहवाग बाउंसर के हक में हैं।

20-12-2014

20-12-2014

किसकी गलती और कैसे बचें
क्या फिल की मौत के लिए गेंदबाज सीन एबाट को दोषी ठहराना सही होगा? शायद नहीं। फिल की तरह सीन भी अपना काम  कर रहा था। तेज गेंदबाजी करना उसका रोज का काम है और बांउसर का प्रयोग पूरी तरह नियमों के दायरे में है। इसे मात्र फिल की खराब किस्मत ही कही जा सकती है कि वे बांउसर को ठीक से नहीं खेल सके। अब सवाल उठता है कि क्या ऐसे भयानक हादसों को रोका नहीं जा सकता?  रोका तो जा सकता है और उपाय भी हैं। नियमों के साथ छेड़छाड़ करने की भी जरूरत नहीं है। जरूरत है तो बस सुरक्षा तकनीक व क्रिकेट उपकरणों में  बदलाव और एहतियात के साथ-साथ स्टेडियम में अस्पताल की व्यवस्था की। उम्मीद है कि फिल की तरह किसी दूसरे खिलाड़ी को अपनी जान से हाथ न धोना पड़े।

फिल के परिवार की ओर से जारी वक्तव्य
‘हम सभी हमारे प्यारे बेटे और भाई की अचानक हुई मृत्यु से सदमें में हैं। पिछले कुछ दिन मुश्किल भरे रहे। हम सभी रिश्तेदारों, दोस्तों, खिलाडिय़ों, फैंस और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के निरंतर साथ और सहारे के लिए उनके शुक्रगुजार हैं। क्रिकेट फिल की जिंदगी था और परिवार होने के नाते हम उसके इस प्यार को उसके साथ बांटते थे। हम ग्राउंड स्टाफ व मेडिकल टीम के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने फिल के साथ कड़ी मेहनत की। हम तुमसे प्यार करते हैं फिल।’

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