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व्यावहारिकता समाज के लिये महत्वपूर्ण

व्यावहारिकता समाज के लिये महत्वपूर्ण

संसार संबंधों पर टिका है, जो हम मनुष्यों को आपस में बांधकर एक खुशहाल संसार बनाने में सहायक होता है। प्रत्येक मनुष्य मानव संबंधों में अपने स्वयं में बड़ा होता है। यह दुखद बात है कि हममें से अधिक लोग अपनी इस दौलत को छुपा कर रखते हैं, इसे कंजूसी से खर्च करते हैं और हमें इस बात का एहसास तक नहीं होता कि यह हमारा दौलत कितना मूल्यवान है। लोगों के साथ संबंधों को बेहतर बनानें के लिए आपको इस संबंधरूपी दौलत को बांटना होगा। यह एक ऐसा दौलत है जो कभी खत्म नहीं होता और इसे खोने का कोई डर भी नहीं होता।

अपने इस लोक व्यवहार को ताकतवर बनाने में हम सभी को कुछ विषयों को ध्यान में रखना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर देखें तो अपने आपसी संबंधों को मजबूत बनाने के लिए हम सभी को दूसरे लोगों को महत्वपूर्ण मानना चाहिए। किसी भी व्यक्ति से संबंध बनानें से पहले हमें लोगों पर गौर करना चाहिए, कहीं ऐसा तो नहीं कि हम जिस व्यक्ति से संबंध बनाना चाहते हैं वह हमारे व्यवहार के लिये उपयुक्त है भी या नहीं। यदि आप दूसरों पर छाप छोडऩा चाहते हैं तो सबसे प्रभावी तरीका उन्हें यह जता देना है कि आप उनसे प्रभावित है। समाज में आप किसी भी व्यक्ति का शीघ्रता से विरोध न करें, क्योंकि हमारा विरोध हमारा वर्चस्व बनानें के लिये माना जाता है और यह समाज में व्यवहार बनाने की कला के लिये महत्वपूर्ण नहीं है।

लोक व्यवहार की कला

लेखक                    : लेस गिबलिन

प्रकाशक   : मंजुल पब्लिशिंग हाउस

मूल्य                      : 95 रु.

पृष्ठ                        : 69

सफल लोगों में एक चीज आम होती है। वे शब्दों का प्रयोग करने में निपुण होते हैं। आमदनी और शाब्दिक योग्यता इतनी करीबी तौर पर जुड़ी होती हैं कि अगर आप अपनी शब्द शक्ति बढ़ा लेते हैं, तो आप यह विश्वास कर सकते हैं कि आपकी आमदनी भी बढ़ जाएगी। खुशी भी काफी हद तक आपके अपने विचारों, इच्छाओं, आशाओं या निराशाओं पर निर्भर करती है। वार्तालाप में निपुण बनने की कला में यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है कि बोलने के लिए बहुत सारी चतुराई भरी बाते सोची जाए या ऐसे वीरतापूर्ण अनुभव हो, जिनका आप बखान कर सकें, इसमें तो दूसरों के साथ खुलना और उनसे बातचीत करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यदि आप दूसरों को बोलने के लिये  प्रेरित कर सकते हैं, तो आप अच्छे वार्ताकार होने की प्रतिष्ठा हासिल कर लेंगे।

एक अच्छे वार्ताकार होने के लिये दूसरों की रूचि जगाने के लिये प्रश्न पूछें। इस तरह के प्रश्न पुछकर बातचीत को सामने वाले की रूचियों की ओर मोड़ते रहे। जब हम किसी बहस में उलझ जाते हैं, तो हममें से ज्यादातर लोग यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि हम पूरी तरह से सही हैं और बाकी लोग गलत हैं। राजी करने में निपुण लोग हमेशा झुक जाते हैं और सहमति का कोई बिंदु खोज लेते हैं। यदि सामने वाले के पक्ष में कोई बिंदुओं पर उसकी बात मान लेते हैं, तो इस बात की अधिक संभावना है कि वह बड़े बिंदु पर आपकी बात मान लेगा।

यह ‘लोक व्यवहार की कला’ नामक पुस्तक लेस गिबलिन द्वारा लिखी गई है, जिन्होंने समाज में व्यवहार बनाने की कला को इस लेखन के माध्यम से लोगों के समक्ष रखा है। यह लेखन पाठकों के लिये महत्वपूर्ण है, जिसे हर आयु के लोग पढऩा पसन्द करेंगे।

 

रवि मिश्रा

 

 

 

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