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‘लाल दुर्ग’ में भाजपा की हुंकार

‘लाल दुर्ग’ में भाजपा की हुंकार

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केरल में चुनावी बिगुल फूंक दिया है। 15 दिनों तक चलने वाली जनरक्षा यात्रा का पहले दिन खुद अमित शाह ने नेतृत्व किया और खुद ही नौ किलोमीटर की पदयात्रा की। केरल में वामपंथी हिंसा के विरोध में ‘जनरक्षा यात्रा’ का आगाज करते हुए अमित शाह ने कहा कि लाल आतंक के खात्मे तक भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा। अमित शाह ने यात्रा की शुरूआत मुख्यमंत्री पी. विजयन के गृह क्षेत्र पेयनूर से कर मानो मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती देने की कोशिश की है। केरल में पेयनूर माकपा का सबसे मजबूत गढ माना जाता है और यही कारण है कि माकपा यहां भाजपा और संघ परिवार को रोकने के लिए सारा जोर लगा रही है। केरल में भाजपा और संघ परिवार के कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर राजनीतिक हत्याएं हो रही हैं और इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए अमित शाह ने अपने इस 15 दिनों के तूफानी दौरे की शुरूआत की। जनरक्षा यात्रा की शुरूआत में ही शाह ने इन हत्याओं के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा- ‘विजयन जी, जितना हिंसा का कीचड़ फैलाओगे, कमल उतना ही खिलकर सामने आएगा।’ वामपंथी हिंसा पर चुप्पी साधने के लिए इस दौरान शाह ने मानवाधिकारवादियों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे समय पर पता नहीं ये मानवाधिकारवादी संगठन कहां चले जाते हैं। लाल हिंसा पर चुप्पी साध जाते हैं, यह नाटक उन्हें छाडऩा होगा।

इसमें भाजपा का मुख्य उदेश्य है माकपा के गढ में अपने कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच वामपंथी हिंसा के खिलाफ उठ खड़ा होने की भरोसा पैदा करना है और इसी कारण से दूसरे राज्यों के भाजयुमो के कार्यकर्ताओं को भी बड़ी मात्रा में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इस यात्रा के दौरान हर दिन भाजपा शासित सभी राज्यों की मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेने वाले हैं। वामपंथी हिंसा के खिलाफ लड़ाई को भाजपा पूरे देश में फैलाने की तैयारी में है, इसी कड़ी में दिल्ली में यात्रा के दौरान प्रत्येक दिन माकपा कार्यालय के बाहर भाजपा कार्यकर्ता धरना देंगे और सभी राज्यों के राजधानी में भाजपा इस दौरान कम-से-कम दो दिनों तक पदयात्रा निकालेगी। भाजपा की सियासी महात्वाकांक्षा को देखते हुए केरल में इस यात्रा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा में शामिल एक सीनियर नेता ने तो 2019 के लोकसभा चुनाव में 8-10 सीटें जीतने की भविष्यवाणी भी कर दी है।

अमित शाह ने केरल में भाजपा की जनरक्षा यात्रा शुरू होने से पहले वामपंथी हिंसा में मारे गए अपने कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के सदस्यों से भी भेंट की। उनके परिवार वालों को यह भरोसा दिलाया कि भाजपा के 11 करोड़ कार्यकर्ता उनके साथ हैं। केरल में माकपा के सबसे मजबूत गढ में अपने हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से उत्साहित शाह ने इसे इस राज्य से वामपंथ की समाप्ति की शुरूआत की पहला कदम करार दिया। शाह ने आरोप लगाया कि केरल, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जहां माकपा ने लंबे समय तक शासन में रही है, वो हमेशा से ही हिंसा की राजनीति करती आ रही है। देश की जनता अब हिंसा की राजनीति में भरोसा नहीं करती। केरल आज भी राजनीतिक हिंसा से त्रस्त राज्य है। कार्यकर्ताओं को जोश भरते हुए शाह ने कहा कि भले ही यह पदयात्रा 15 दिनों के बाद समाप्त हो जाएगा, लेकिन वे वामपंथी सरकार को केरल से उखाड़ फेंकने तक शांत न बैठें।

मीडिया से बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले साल भर में हमारे 15 कार्यकर्ताओं को निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई है। माकपा हिंसा के सहारे ही राजनीति करती आ रही है, जबकि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। माकपा की केरल में राजनीतिक हिंसा की संलिप्तता का सबूत पेश करते हुए शाह ने कहा कि जब-जब केरल में वामपंथी की सरकार बनती है, तब-तब यहां भाजपा के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसक वारदातों में बढोतरी हो जाती है। वामपंथी सरकार को कोई भी बहाना इन आरोपों से बचा नहीं सकता है क्योंकि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना वहां की सरकार की जिम्मेदारी है।

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अमित शाह ने पेयनूर में पदयात्रा की शुरूआत करने से पहले वहां की प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर में पूजा-पाठ की।

भाजपा की 15 दिवसीय यात्रा के ठीक एक दिन पहले पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया गया। पुलिस का कहना है कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर यह हमला 2 अक्टूबर की रात्रि 9:30 में तब हुआ, जब वे ‘जनरक्षा यात्रा’ के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-66 के एक हिस्से की सजावट का काम कर रहे थे। इसके ठीक अगले दिन ही 3 अक्टूबर को भाजपा की जनरक्षा यात्रा की शुरूआत होने वाली थी। कासरगोड जिले के नीलेश्वरम कस्बे में हुए इस हमले के पीछे माकपा का हाथ माना जा रहा है। हमले में घायल तीनों कार्यकर्ताओं का इलाज नीलेश्वरम के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। भाजपा के कासरगोड इकाई के सचिव श्रीकांत ने यह आरोप लगाया कि माकपा के 25-30 कार्यकर्ताओं ने अचानक बिना किसी कारण के ही भाजपा के सदस्यों पर नीलेश्वरम बाजार में हमला कर दिया। इस हमले में काफी ज्यादा मात्रा में फ्लेक्स बोर्ड, टयूब लाइट, होर्डिग, बैनर और दो पहिया- चार पहिया वाहनों को भी नुकसान हुआ है। भाजपा सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि केरल में भाजपा के बढते प्रभाव से हताश होकर माकपा के कार्यकर्ता इस तरह के हिंसात्मक हमले कर रहे हैं। इनका कहना है कि भाजपा के इस जनरक्षा यात्रा में पन्द्रह हजार से भी ज्यादा कार्यकर्ता के शामिल होने का अनुमान है।

केरल में पिछले एक साल में माकपा कार्यकर्ताओं के हमलों में तीन सौ से भी ज्यादा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सदस्यों की निर्मम तरीके से हत्याएं हो चुकी है, जो कि अभी तक में एक राष्ट्रीय रिकार्ड है। भारतीय राजनीतिक इतिहास में हिंसात्मक राजनीति का ऐसा घिनौना रूप कहीं दूसरे पार्टियों या संगठनों में देखने को नहीं मिलता है जो कि केरला में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा पिछले 3 से 4 महीनों में केरला में देखने को मिली है। केरल में मार्च महीने में 3 विभीत्सक राजनीतिक हत्या कर दी गई तो वहीं दूसरी तरफ कन्नूर जिले के अंतर्गत आनेवाले मुख्यमंत्री पी विजयन के विधानसभा क्षेत्र धर्माडोम में जब माकपा के प्रदेश महासचिव कोडियरी बालाकृष्णन और कई महत्वपूर्ण व्यक्ति जब क्षेत्र का दौरा कर रहे थें तो उसी समय एक जोरदार बम विस्फोट हुआ था जिसमें सभी बाल-बाल बच गए थे। वही दूसरी तरफ दक्षिणी केरला के कोल्लम जिले में माकपा कार्यकर्ताओं के द्वारा किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल भाजपा के 3 कार्यकर्ताओं को हॉस्पिटल के आइ.सी.यू. में भर्ती कराया गया। इसके कुछ दिनों के बाद ही माकपा के असामाजिक तत्वों ने पलघट में मध्यरात्रि को भाजपा के कार्यकर्ता जनार्दन के घर आग लगा दिया जिसमें 35 वर्षीय एक महिला विमला विभीत्सक आग में जलकर मर गई वहीं इसमें 2 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसमें एक 11 वर्षीय लड़का अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

पिछले 15 महीनों में केरल में माकपा ने अपने सबसे चिर प्रतिस्पर्धी भाजपा और आरएसएस से जुड़े हुए लोगों पर हमला करना ही मानो अपना सबसे बड़ा राजनीतिक एजेंडा बना लिया हो। पिछले कई दशकों से केरल की विकास मानो थम सी गयी है और इस सब का मुख्य कारण है इस राज्य में सबसे ज्यादा सतासीन रही माकपा की विरोधियों के प्रति स्वस्थ प्रतिस्पर्धा न करके घटिया और संकीर्ण राजनीति पर उतर आना। और तो और केरल की राजधानी त्रिवंतपुरम में भी माकपा की घटिया राजनीति का घिनौना रूप देखने को तब मिलता है जब इस राज्य के राजधानी में दिनदहाड़े ही भाजपा के आम कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेताओं पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। और तो और भाजपा के राज्य मुख्यालय को भी निशाना बनाया जा चुका है। इस संकीर्ण राजनीतिक लड़ाई में यदि सबसे ज्यादा किसी को नुकसान हो रहा है तो वो है केरल की आम जनता का, जो कि बड़े ही उम्मीद के साथ अपना एक-एक बहुमूल्य वोट देकर यह उम्मीद करती है कि उनका भी ख्याल उनके वोटों के दम पर बनी हुई सरकार जरूर करेगी।

 

आशुतोष कुमार

 

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