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विज्ञान, अध्यात्म और अम्मा

विज्ञान, अध्यात्म और अम्मा

भारत के दक्षिणी हिस्से से वैश्विक तौर पर एक आध्यात्मिक गुरु की पहचान रखने वाली माता अमृतानंदमयी, आध्यात्मिक गुरु से ज्यादा एक समाज सुधारक हैं जो ‘मानव की सेवा ही भगवान की सेवा है’ में विश्वास रखती हैं।  लोग उन्हें प्यार से अम्मा बुलाते है और वह भी एक मां की तरह ही लोगो के लिए अपने मन में अथाह प्रेम रखती है चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय से जुड़ा हो। अरब सागर के तट पर स्थित कोल्लम शहर में उनका आश्रम मन को मोह लेता है। जब मैं उनके आश्रम के भीतर गया तो मुझे ऐसा लगा की जैसे मैं किसी और ही दुनिया में पहुंच गया हूं। चारो तरफ हरियाली ही हरियाली और अनुशासित शिष्यों के समूह बरबस ही एक दूसरी दुनिया की अनुभूति करा रहे थे।

मैं बहुत ही भाग्यशाली रहा की उनके 64वें जन्मदिवस पर उनसे आशीर्वाद पाने का मौका मिला। उस समारोह की विहंगमता को वहां उमड़ी भीड़ से मापा नहीं जा सकता। वह समारोह सिर्फ अम्मा के जन्मदिवस मनाने के लिए नहीं था बल्कि वह समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने, सामाजिक उत्थान और समाज के आखिरी इंसान तक के चेहरे पर मुस्कान लाने की भावना को भी प्रदर्शित कर रहा था। और ऐसा था, तभी देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, तमाम वरिष्ठ केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, अन्य पार्टियों के दमदार नेता और अन्य सम्प्रदायों के धर्म गुरु इस समारोह में मौजूद थे। वहां मौजूद मीडिया दिखा रही थी कैसे आम जन उस पवित्र आत्मा का आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए लम्बी-लम्बी कतारों में सुबह से खड़े थे। यह अम्मा के लिए उनका प्यार ही तो है। और अम्मा भी एक मां की तरह ही अपने भक्तों को गले से लगाती है, चूमते हुए आशीर्वाद देती जाती है।

महिला होने के नाते वह औरतों के प्रति समाज में हो रहे अत्याचारों पर बहुत दुखी हो जाती हैं। वो कहती है ‘ईश्वर की सृष्टि में पुरुष-महिला एक समान ही दर्जा रखते हैं लेकिन सदियों से औरतों की हालत बद से बदतर होती गयी और अभी भी कोई बदलाव नहीं आ रहा है। औरत जो इस मानवजाति की जन्मदात्री है, उसे भी इस समाज में बराबरी का मौका मिलना ही चाहिए। ‘इस दर्शन का अनुसरण करते हुए अम्मा ऐसे कई कल्याणकारी कार्यक्रम चलाती हैं जिससे महिला सशक्तिकरण हो सके और समाज में उनका मान बढ़ सके। पिछले चार दशकों से भी ऊपर से चलाये जा रहे यह कार्यक्रम न सिर्फ भारत बल्कि विदेशो में भी एक नव क्रांति का संचार कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात अभिनेत्री शेरोन स्टोन का कहना है ‘अम्मा मेरी दोस्त और गुरु होने के साथ साथ हर्षोल्लासित करने वाली एक धीर-गंभीर महिला है, जिसने अपना जीवन दूसरो के नाम कर दिया है।’ भारत श्रेष्ठ इसलिए नहीं है की इसके पास इतनी जनसम्पदा है, वह श्रेष्ठ इसलिए है की यहां अम्मा जैसी  महान आत्मायें रहती है जो हमेशा अध्यात्म का अलख जगाये रहती हैं और पूरे विश्व को एक परिवार समझती हैं।

विज्ञान ने मानवीय जीवन और मूल्यों में काफी हद तक बदलाव लाये हैं लेकिन अम्मा का मानना है की अध्यात्म हमेशा मानव जीवन और मूल्यों को प्रकाशित करता रहेगा। वह मानती हैं की विज्ञान हमेशा बाहरी तत्वों पर ध्यान देता है जबकि अध्यात्म हमेशा अपने अंदर की ध्यान दिलाता है, अपने मन की शांति की बात करता है, अपनी आंतरिक खुशी की खोज की बात करता है। मीडिया को दिए गए अपने एक साक्षात्कार में वह कहती है’ ऐसा समय कभी नहीं आ सकता जब अध्यात्म और उसके प्रभाव का किसी के जीवन में कोई मोल नहीं रह जायेगा।’

अपने कार्यो से अम्मा हमेशा यह इंगित करती रहती हैं की अध्यात्म ही वह रास्ता है जो समाज के आखिरी तबके का उत्थान कर सकता है। अपने कामो से उन्होंने बताया है वह हमेशा निस्वार्थ भाव से काम करती है और हमेशा  सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं। उनकी मानवता के प्रति किये काम ही विश्व भर में भारत की संस्कृति, परंपरा और धर्म के भाव को पहचान दिलाती है।

खासकर केरल में अम्मा के किये अच्छे कर्म समाज के हर कोने में अपना प्रभाव दिखाते हैं, वहा भी जहां तक कोई सरकारी सहायता भी नहीं पहुंचती है। केरल में बहुत से ऐसे लोग जिन तक अभी विज्ञान की पहुंच नहीं हो पायी, वह अम्मा को भगवान का दूत मानते हैं। मुझे ऐसा लगता है की अम्मा की आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक उत्थान की भावना ही ऐसी चीज है जिसकी वजह से आज भी केरल में सनातन धर्म अपनी सांसे ले पा रहा है। नहीं तो पिछले दशक में जिस तेजी से वहां जिहादी तत्व पनपे है, अभी तक तो एक और पाकिस्तान का निर्माण हो चुका होता, भारत के अंदर ही। हमें आप पर गर्व है अम्मा

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

 

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