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जयपुर डॉयलॉग इतिहास की उपेक्षा, अपनी संस्कृति का अपमान

जयपुर डॉयलॉग  इतिहास की उपेक्षा, अपनी संस्कृति का अपमान

भगवत गीता के एक प्रसंग में श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन से कहा कि योग का ज्ञान मैने सूर्य को दिया, तब अर्जुन का प्रश्न था-सूर्य तो इतना प्राचीन है तब आपने ज्ञान कैसे दिया? कृष्ण का उत्तर था-मेरे हजारो जन्म हुए है, तुम्हारे भी हजारो जन्म हुए है। मुझे उन जन्मो का स्मरण है तुम भूल गये हो। इसलिए यह बात कह रहे हो। हम सभी के हजारों जन्म होते है। कर्म फल से यह जीवन और भाग्य मिला है।

अपनी बहुचर्चित पुस्तक ”विस्मरण शक्ति’’ के संदर्भ में प्रख्यात कृति ”महासमर’’ के लेखक प्रो. नरेन्द्र कोहली ने जयपुर में 18 से 20 नवम्बर तक ”भारत की एकता एवं विभाजन के तत्व’’ विषय पर आयोजित चिंतन कार्यक्रम में शिक्षा एवं इतिहास सत्र में यह विचार व्यक्त किए। जयपुर डायलाग्स फोरम के तत्वावधान में आयोजित इस चर्चा में विभिन्न वर्गो के करीब दो दर्जन बुद्विजीवियों, पत्रकारों, शिक्षाविदो, राजनेता एवं विषय विशेषज्ञों ने भागीदारी की।

इस वैचारिक महाकुंभ की यह विशिष्टता रही कि विभिन्न सत्रों में वक्ताओं के सम्बोधन के दौरान श्रोताओं के लिखित प्रश्न मंच तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इनमे युवाओं की अधिक भागीदारी रही। प्रश्नों के उत्तर में कई बार वक्ताओं के सम्बोधन से कही अधिक तत्सम्बन्धी विषय का और अधिक खुलासा हुआ। तीसरे दिन आखिरी सत्र में भारत में एकता और विभाजन के तत्व विषय पर लगभग तीन दर्जन सवाल पूछे गये। सांसद डॉ. सुब्रहमण्यम स्वामी, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार, पत्रकार राघवन जगन्नाथन के अलावा बलूचिस्तानी एक्टिविस्ट तारक फतेह ने स्काईप पर कनाडा से इस सत्र को सम्बोधित किया।

नरेन्द्र कोहली ने रोचक अंदाज में अपनी बात कही। उनका कहना था कि हर बच्चा पिछले जन्मों के साये के साथ स्कूल जाता है लेकिन वहां उसकी मौलिकता समाप्त कर रटने की पद्धति से शिक्षा दी जाती है। उसकी प्रकृति के खिलाफ बाहर से डाला जाता है। इसी संदर्भ में कोहली ने सी.बी.एस.ई. के पाठ्यक्रम समिति की बैठक में एक पुस्तक लागू कराये जाने के प्रयास का उल्लेख किया। इस पुस्तक के पहले अध्याय की पंक्ति थी- इक्विटी स्टार्ट विद क्रिश्चियैनटी कोहली ने कहा कि हम तो अद्वैत की बात करते है। बैठक आयोजकों का कहना था कि ऊपर से इस पुस्तक को लागू करने का दबाव है लेकिन कोहली के तर्कसम्मत विरोध के चलते विवादास्पद पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल नही हो पायी। ”पढ़े फारसी बेचे तेल’’ कहावत का उल्लेख करते हुए कोहली ने कहा कि हर भाषा का शब्द देने वाली संस्कृत हमसे छीन कर फारसी थोपी गई। गुरूकुल बंद करने से भाषा का वांगमय छिन गया। भाषा संस्कृति का वहन करती है। अंग्रेजी के प्रभुत्व से बच्चे भारतीय ज्ञान सम्पदा एवं संस्कारमय शिक्षा से वंचित होते गये और उनकी मौलिकता की अनदेखी हुई। इसीलिए वह मां बाप को संस्कार देने वाली पुस्तके लिखते है ताकि बच्चों को सही राह मिले।

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इतिहास की उपेक्षा का उल्लेख करते हुए शिक्षाविद मोहन दास पई का कहना था कि भारत के विभिन्न भौगोलिक अंचलो में सभ्यता-संस्कृति के विभिन्न रंगो के बावजूद इनमे अद्भुत समन्वय रहा है और इससे दुनिया मे हमारी विशिष्ट पहचान बनी है। हमारे गौरवपूर्ण इतिहास को लेकर भ्रम फैलाया गया जिसमे शिक्षा प्रणाली को माध्यम बनाया गया। यह तथ्य है कि हमेशा विजेता ही इतिहास लिखते है, पराजित नहीं। परन्तु स्वतंत्रता के बाद नेहरूजी ने पश्चिमी दृष्टिकोण की राह ली तथा वामपंथियों ने इसमे योगदान दिया। इतिहास को अपने तरीके से समझाया गया तथा विचारधारा विशेष को लेकर उच्च शिक्षण संस्थायें स्थापित की गई। जे.एन.यू. इसका उदाहरण है जहां राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। भारतीय विद्याभवन द्वारा प्रकाशित ग्यारह पुस्तको के प्रचार प्रसार तथा मीडिया के विभिन्न माध्यमो से हमे अपने सही पहचान के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।

सुरक्षा सम्बन्धी सत्र में कश्मीरी एक्टिविस्ट सुशील पंडित ने घाटी के अंदरूनी हालात का लोमहर्षक वर्णन किया। उनका मानना था कि हम आज भी अपनी भूमि पर रक्षात्मक युद्ध लड़ रहे है। आजादी के बाद से हमारी सेना के हाथ बांध दिए गये और कश्मीरी मसला यू.एन.ओ. में लटका दिया। नतीजतन पड़ोसी देश से चार युद्धों की तुलना में हमारे अधिक सैनिक आतंकवाद का शिकार हुए है। पाक के लिए यह अघोषित युद्ध फ ायदे का सौदा है। कश्मीर के मसले पर हम साफ -साफ दो टूक बात करने से कतराते है। हम पाकिस्तान से अपने रिश्ते बिगाडऩा नहीं चाहते इसलिए अभी तक संसद ने पाक को आतंकवादी देश घोषित नही किया। फि र दुनिया क्यों हमारा साथ दे। हमारी कमजोरी के तीन प्रमुख बिन्दु है-डेमोग्राफी (जनसंख्यकी) स्ट्रक्चरल सिस्टम और सूचना तंत्र। हम शहर गांवो में जनसंख्या का अनुपात ढूंढते है। घाटी मे कश्मीरी पंडित दूर दराज तक बसे हुए थे। आतंकवादी जेहाद के चलते करीब साढे तीन लाख आबादी वाले 70 हजार परिवार पिछले 28 सालों से घाटी से पलायन कर चुके है। पिछले 600 सालो मे घाटी से हमारा सातवां पलायन है। पलायन करने वाली दूसरी पीढ़ी अपनी पहचान खोती जा रही है। हम अपनी भाषा साहित्य संस्कृति जीवन शैली से कटते जा रहे है। 70 फीसदी शादियां समुदाय से बाहर हो रही है। सरकारी रवैये के चलते अब घाटी में लौटने की सार्मथ्य भी नहीं है। इसी नजरिये के चलते केवल घाटी ही नही अपितु देशभर में 60 से 65 जिलो मे देशभक्त जनता सुरक्षित और निरापद स्थलों पर पलायन के लिए मजबूर हो गई है। छलनी की तरह हमारी सामरिक व अन्य महत्वपूर्ण सूचनाये लीक हो जाती है। इस हालात का मुकाबला करने के लिए हमारा ढांचा ठीक नही है। इसलिए आंतरिक सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ सबसे बडा सवाल है कि इन चुनौतियों को आप किस नजरिये से देखते है और देश का मानस क्या है। जे.एन.यू. डोकलाम इत्यादि घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए सुशील पंडित ने कहा कि हमारा लोकतंत्र ऐसे अवसर देने में काबिल है। हम जातिवाद, भाषावाद, आरक्षण दंगो आदि में उलझकर सही मुद्दे सामने नही लाना चाहते और अपनी भीतरी चुनौतियों एवं शत्रुओं की उपेक्षा करके खतरा बढ़ा रहे है और इसका सामना करने की तैयारी भी नही है।

ले.-जनरल अता हसनेन ने भारत चीन सीमा पर डोकलाम विवाद के संदर्भ में कहा कि वहां किसी की जीत नही हुई है बल्कि चीन ने अपनी दूरगामी सोच के चलते अपने को विड्रा किया है। याद रहे कि चीन ने अपनी उन्नीसवीं कांग्रेस में यह निर्धारित किया कि 2050 में चीन ऐसी शक्ति के रूप में उभरेगा कि दुनिया देखेगी। अपने इस विजन के तहत हमे फसने के लिए उसने यह कदम उठाया है। भारत का फोकस गलत जगह पर है। भारत की तवज्जों हिमालयन फंरटियर पर होनी चाहिए। हिन्दी चीनी भाई भाई के माहौल के बीच तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नान्डिस ने 1997 में चीन को असली दुश्मन बताया था। भारत से व्यापारिक रिश्तो के बावजूद चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर अपने मसूबे पूरे करने मे जुटा है। चीन अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने में लगा हुआ है। भारत मे मुसलमानों के हालात के संदर्भ में उन्होने कहा कि गलत धारणाओं से उनमे भ्रांतिया घर करती जा रही है। सेना मे मुसलमान नही होने की भ्रंति के चलते उन्हे यह नहीं पता कि उनके समुदाय का एक शख्स ले.जनरल के पद पर आसीन हुआ। उन्होने साफ कहा कि मुस्लिम समुदाय भारत में महफू ज है।

सुरक्षा मामलो के विशेषज्ञ सुशांत सरीन का कहना था कि सरकार को पता है कि क्या करना है लेकिन इच्छाशक्ति का अभाव है। जिन समस्याओं का समाधान करना चाहिए उन पर फोकस नहीं है। देश में सोलह प्रधानमंत्री हो चुके है लेकिन मूल समस्यायें जस की तस है। शिक्षा प्रणाली में नई सोच उभरनी चाहिए ऐसा नहीं हो पाता। छात्रों की लिखने समझने की क्षमता खत्म हो रही है। हम न तो इतिहास से सबक ले पा रहे है और न सही इतिहास लेखन कर पा रहे है। हमारी प्रशासनिक मशीनरी में अधिक सुधार की जरूरत है। सुरक्षा विशेषज्ञ युसुफ उंझावाला ने हथियारों की खरीद के संदर्भ में कहा कि हम तकनीकी पर खर्च नहीं करते।

डॉ. सुब्रहण्यम स्वामी ने कहा कि अंग्रेजों ने 1947 में जाते समय जबरदस्ती देश का विभाजन किया। तब यह कहा गया कि विविधता वाला भारत बिखर जायेगा। लेकिन देश में एकता के मुद्दे कही ज्यादा और प्रभावी है जबकि विघटनकारी ताकते कमजोर है। हम बाहरी एवं आंतरिक संकट में सहज रूप से एकजुट हो जाते है। इसके उलट यह कहावत प्रचलित थी कि ब्रिटिश साम्राज्य में कभी सूर्य अस्त नही होता। आज वही सर्वश्रेष्ठ ताकत प्रभावहीन हो गई है और अक्सर वहां बादल छाये रहने से सूर्योदय ही नही होता। सोवियत संघ 16 देशो में बट गया। अन्य कई देश भी बिखर गये और कई समस्याओं से जूझ रहे है। भारत में अशिक्षा, गरीबी के नाम पर लोकतंत्र के खात्मे का प्रचार किया जाता है लेकिन आपातकाल के बाद हुए चुनाव में नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि दक्षिण भारत में जहां उत्तर की अपेक्षा अधिक पढ़े लिखे लोग है उन्होने कांग्रेस एवं इंदिरा गांधी का साथ दिया। वही अनपढ़ तथा बेरोजगारी आदि से त्रस्त उत्तर भारत के लोगों ने कांग्रेस का सफाया कर दिया। उन्होने कहा कि हमारी शिक्षा अंग्रेजो की देन है जिससे अनेक गलतफैमियां उत्पन्न हुई है। इन्हे साफ करने में वक्त लगेगा। इसके लिए सही इतिहास की पुस्तके तैयार करनेी होगी। सभी भारतीयों का डी एन ए भी एक है। यदि मुसलमान भी यह मान ले कि हमारे पूर्वज भी हिन्दू थे तो हमारी एकता और मजबूत होगी।

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डॉ. स्वामी ने कहा कि भारत से प्राचीन इतिहास किसका है। भारत प्राचीन नाम है और एक गणराज्य का नाम है। महाभारत के समय लगभग 1300 राजा कुरूक्षेत्र में युद्व के लिए आये थे। करीब एक हजार कौरवो के पक्ष में और शेष पांडवो के साथ थे। त्रावणकोर का राजा तटस्थ रहा लेकिन उसने दोनो पक्षों के लिए भोजन की व्यवस्था की। इसी तरह रामायण काल में राम अयोध्या से दक्षिण में किश्किंधा आये। दक्षिण में कभी रावणलीला होती थी सही तथ्य बताने पर रामलीला होने लगी। लंकापति रावण का जन्म नोयडा के निकट एक गांव में हुआ था। सांस्कृतिक दृष्टि से हम एक है। हमारी अस्मिता हिन्दू है। भौतिक विकास तथा आध्यात्मिक समन्वय के साथ हमे देश की एकता को मजबूत करना होगा। केरल में हत्या राजनीति का उल्लेख करते हुए डॉ.स्वामी ने कहा कि इसके पीछे विचारधारा का टकराव है। वामपंथी दल भी हिन्दू समुदाय में काम करते है। भाजपा तथा आर.एस.एस. का काम बढऩे से सी.पी. एम. के जनाधार बटने से संघर्ष के हालात बनते है। लोकतांत्रिक तरीके से वामपंथ को हराने के लिए राष्ट्रवादी ताकतों को संकल्पबद्ध होकर अपनी शक्ति में इजाफा करना होगा।

अपने 68वे जन्म दिवस पर कनाडा से अपने सम्बोधन में तारक फतेह ने कहा कि हमारी तवारीख सालों पुरानी है और सभ्यता की पैदाईश भारत से हुई है। उन्होने कहा कि देश विभाजन के समय हिन्दूस्तान के बाजू कटे थे लेकिन 1971 में पाक से युद्व में हम जीती हुई बाजी हार गये तथा युद्धबंदियों को छोड़कर अपने लिए सिरदर्द ले लिया। ब्लूचिस्तान आज भी भारत से मदद की आकांक्षा पाले हुए है। ब्रिटिश हुकूमत ने पाकिस्तानी रूप नासूर हम पर थोपा इसे तोडऩे पर ही जंग खत्म होगी।

इसी सत्र को आयुर्वेद योग एवं ज्योतिष शास्त्र के विद्वान डेविड फ्रावले इस्लामिक विद्वान पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान आई.ए.एस. संजय दीक्षित ने भी सम्बोधित किया। आउट लुक के सम्पादक आलोक मेहता, प्रिंट मीडिया के प्रधान सम्पादक शेखर गुप्ता, टीपू सुल्तान के लेखक संदीप बालकृष्ण एडवोकेट राघव अवस्थी सुशील पंडित ने राष्ट्रीयता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विस्तार से रेखांकित किया। जयपुर डायलाग्स फोरम के अध्यक्ष सुनील कोठारी के अनुसार इस अवसर पर संजय दीक्षित की पुस्तक कृष्ण गोपेश्वरा तथा शांतनु गुप्ता की पुस्तक दी मॉक हूं बिकेम सी एम का लोकार्पण किया।

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

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