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पश्चिम बंगाल में भाजपा बनाएगी बहुमत की सरकार : सिद्धार्थनाथ सिंह

पश्चिम बंगाल में भाजपा बनाएगी बहुमत की सरकार : सिद्धार्थनाथ सिंह

क्रांतिकारियों की भूमि रही पश्चिम बंगाल आतंकवादी गतिविधियों का केन्द्र बनती जा रही है।अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च स्थान देने वाली भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन तैयार करने में मजबूती के साथ जुटी है। 2016 में होने वाले विधानसभा चुनाव और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन एवं सारधा चिटफंडघोटाले में संलिप्तता का आरोप झेल रही ममता बनर्जी की सरकार के खिलाफ भाजपा द्वारा किए जा रहे शंखनाद पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी सिद्धार्थनाथ सिंह से उदय इंडिया के वरिष्ठ संवाददाता सुधीर गहलोत ने विस्तृत चर्चा की।प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :

किस तरह का बदलाव लाना चाहती है भाजपा पश्चिम बंगाल में?
मैं वो बदलाव देखना चाहता हूं, जो बदलाव 2011 में बंगाल की जनता चाहती थी। वही परिवर्तन लाना है हमें। उस समय जो उन्हें परिवत्र्तन चाहिए था, वह था सुशासन का। मगर जो कुशासन था उसका आईना नहीं चाहिए था। जो कुशासन था वह वामपंथियों का था और जो आइना बना, वह हैं ममता बनर्जी। तो इसलिए जो सही परिवत्र्तन है, जो बंगाल की जनता चाहती है, वही हम भाजपा के लोग भी चाहते हैं। हम सुशासन चाहते हैं, जिसके अंदर इंसानियत के साथ-साथ न्याय और विकास का मौका मिले बंगाल के लोगों को।

राज्य के प्रभारी होने के नाते बहुमत हासिल करने के लिए किस तरह की रणनीति अपना रहे हैं आप?
सबसे पहले हम संगठनात्मक रणनीति अपना रहे हैं। हम संगठन को प्रदेश में मजबूत कर रहे हैं। उसका दृश्य भी हमने पूरे देश को दिखाया, जब हमने एक ऐतिहासिक रैली उसी जगह से की, जहां से ममता बनर्जी किया करती थीं और उसी जगह पर 30 नवंबर को अमित शाह जी की रैली हुई। हमने वहां पर सिर्फ ऐतिहासिक रैली ही नहीं की, बल्कि वहां पर ममता बनर्जी से दुगनी संख्या में लोगों को लेकर आए और इतिहास रचा। वहां पर संगठन की एक मजबूती दिखी।  दूसरा होता है, मुद्दों को सही तरह से उछालना, मुद्दों को सही तरह से पब्लिक में ले जाना। वहां पर भारतीय जनता पार्टी सारधा चिटफंड, जो भ्रष्टाचार का एक चेहरा बना हुआ है, को  लेकर जनता के बीच गई। उसी तरह से हमलोगों ने आतंकवादियों की जो गतिविधियां बंगाल में चल रही है उन्हें उछाला। तो इस प्रकार के जो मुद्दे हैं, उन्हें लेकर हम जनता के बीच जा रहे हैं। तीसरी बात जो है, वह होती है चुनाव से पहले एक बेहतर उम्मीदवार देना। हालांकि उसमें अभी समय है, लेकिन उसके लिए हम तैयारी कर रहे हैं।

बर्धमान विस्फोट में भाजपा के वरिष्ठ नेता ममता बनर्जी पर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन मामला सिर्फ बयानबाजी तक ही क्यों सिमट जाता है?
ममता बनर्जी के आतंकवादियों के साथ संबंध और केन्द्र सरकार को क्या करना चाहिए, इसके लिए दो चीजें समझने की जरूरत है। ये भारतीय जनता पार्टी का इन्विेस्टिगेशन नहीं है। क्या कहना है, क्या करना है यह केन्द्र सरकार का मामला है। इसमें केन्द्र सरकार जांच कर रही है। जांच के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपनी रैली में ममता बनर्जी पर सीधे-सीधे आरोप लगाया था…
मीडिया के अंदर जिस प्रकार की रिपोर्टें आ रही हैं, चाहे वह वह देश के अंदर हो या बांग्लादेश की हों, उसमें साफ-साफ कहा जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता लोग, कहीं न कहीं सारधा चिटफंड का जो पैसा है को उन्होंने बांग्लादेश के जमात (जेएमबी) के माध्यम से इस्लामिक बैंक के अंदर डाला है और वो पैसा जमात की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बांग्लादेशी जमात की जो गतिविधियां हैं वह देश के अंदर, बंगाल के अंदर हो रही हैं। स्वभाविक है कि यह एक जगह नहीं है, पूरे बंगाल में फैला हुआ है। अमित शाहजी की रैली के तुरंत बाद अल कायदा की किताबें बांटी जाती हैं तो इसका मतलब है कि जमात के जो लोग हैं वो कोलकाता तक घुस गए हैं। इसलिए कहीं न कहीं इसमें राज्य सरकार की लापरवाही है और लापरवाही है तो उसे स्वीकार करें, लेकिन ममताजी इसे स्वीकार नहीं कर रही हैं। इसके बदले वे उन्हें पनाह दे रही हैं। इसका मतलब ममताजी उनको समर्थन दे रही हैं। अगर आप समर्थन दे रही हैं तो कहीं न कहीं आपका और आपकी सरकार का उसमें हाथ है। इसके बिना इतनी बड़ी गतिविधि  नहीं हो सकती। इसे छुपाने के लिए ममताजी केन्द्र सरकार को दोष दे रही हैं। संघ को दोष दे रही हैं। इस प्रकार की भाषा बोली जा रही है तो कहीं न कहीं यह साफ हो रहा है कि ममता बनर्जी जिहादियों की भाषा बोल रही हैं, उनको बचाने के लिए बात कर रही हैं, न कि राष्ट्र की सुरक्षा की बात कर रही हैं।

बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भाजपा के मूल एजेंडे में रहा है।असम में प्रधानमंत्री भी चिंता जता चुके हैं। आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें मतदान प्रक्रिया से अलग रखने की कोई योजना है?
देखिए, यह प्रक्रिया लंबी है। इसके ऊपर काम हो रहा है। हमलोगों को इस पर बहुत विस्तार से बोलने की आवश्यकता नहीं है। इस पर खुफिया विभाग और केन्द्र सरकार काम कर रही है। इसमें कानून में भी कुछ बदलाव आएगा। इसके अंतर्गत कुछ जमीनें भी हैं, जिन्हें एन्क्लेव कहा जा रहा है, उनका भी आदान-प्रदान होगा। प्रक्रिया के तहत बहुत सारी चीजों पर काम चल रहा है। जहां तक सिद्धांत की बात है बांग्लादेश से आने वाले घुसपैठियों को लेकर तो उस पर हम कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि अवैध रूप से आने वाले घुसपैठिए देश के उपर साइलेंट आक्रमण है। इसलिए जो बात सुप्रीम कोर्ट कह रहा है, उस पर हम गलत कैसे हो सकते हैं। लेकिन, बांग्लादेश से जो शरणार्थी आते हैं उनको पनाह देना है, वह हम देंगे। हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि बांग्लादेश से आने वाले साढ़े पांच हजार शरणार्थियों को अपने यहां रहने की जगह दी और नौकरियां भी दी हैं। तो भारतीय जनता का जो कमिटमेंट है चुनाव का वह पूरा भी हो रहा है।

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सीमावर्ती क्षेत्रों में मदरसों की बढ़ती संख्या पर खुफिया विभाग केन्द्र सरकार को एक रिपोर्ट दे चुका है। ममता बनर्जी उन्हें सरकारी सहायता देती हैं। इस पर आपकी क्या नीति है?
ममता सरकार द्वारा तनख्वाह देना गलत तो है ही। इसके खिलाफ न्यायालय में भी गए थे। संविधान भी इसकी इजाजत नहीं देता। दूसरी चीज कि जहां तक कि मदरसों की बात है तो इसमें भारतीय जनता पार्टी को कोई आपत्ति नहीं है। मोदीजी ने कहा है कि मदरसों के अंदर लोग पढ़ें, धर्म के बारे में पढें़, लेकिन साथ ही साथ उनके हाथ में एक-एक कम्यूटर भी हो। आधुनिक शिक्षा भी वहां से दी जानी चाहिए। हम चाहेंगे कि बंगाल के भी जो मुसलमान हैं, जो भारतीय मुसलमान हैं, उनको जोड़ा जाए, वे मुख्यधारा में आएं, लेकिन मदरसों के नाम पर वहां आतंकी गतिविधियां चलें या लैबोरेटरी बने, जैसा कि बर्धमान ब्लास्ट के बाद सामने खुलकर आया है, तो उनके खिलाफ जो कार्रवाई होनी चाहिए वो जरूर होगी, क्योंकि वे मदरसे नहीं हैं वो आतंक की प्रयोगशाला हैं।

राज्य के एक चौथाई की जनसंख्या वाले मुस्लिम मतदाताओं को जोडऩे के लिए भाजपा के पास क्या फॉर्मूला है?
यह गलत सोच है लोगों की कि बंगाल का या कह लें कि जो भारतीय बंगाली मुसलमान हैं वो किसी गलत गतिविधियों के साथ खड़ा है। वे भी उतने ही राष्ट्रभक्त हैं जितना कि कोई अन्य भारतीय है। इसलिए उन्हें इस श्रेणी में डालना हमलोगों को बंद कर देना चाहिए। उन्हें भी वही चाहिए जो अन्य गरीब भारतीयों को चाहिए। उन्हें भी शिक्षा की आवश्यकता है, उन्हें भी नौकरियां चाहिए, उनको भी अपने बच्चों के लिए अच्छे विद्यालय चाहिए। जो काम सरकारी स्तर पर किया जाना चाहिए, वह अभी तक किया नहीं गया है। इसलिए इस तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए। और जो भारतीय मुसलमान हैं वे राज्य में अब अन्य लोगों की तरह बदलाव चाहते हैं, इसलिए विकल्प के रूप में भाजपा की ओर देख रहे हैं और उससे जुड़ भी रहे हैं।

पिछले लोकसभा चुनावों की अपेक्षा इस बार के लोकसभा चुनावों में राज्य में भाजपा की वोट प्रतिशत में वृद्धि को किस रूप में आप देखते हैं?
बंगाल भी भारत का अंग है। जो पूरा भारत चाहता है, वो बंगाल भी चाहता है। पूरा भारत मोदीजी को चाहता है, बंगाल भी वही चाहता है। पूरा भारत विकास चाहता है, वही बंगाल भी चाहता है। इसमें कोई अंतर नहीं है। इसके लिए देश भर में कोई आईकॉन है तो वह हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जो पार्टी विकास कर सकती है, सुशासन ला सकती है वह है भारतीय जनता पार्टी। इसलिए आप जो देख रहे हैं पांच से सतरह हुआ, सतरह से वो चौंतीस हो जाएगा, चालीस हो जाएगा और 2016 आते-आते पूर्ण बहुमत से हम अपनी सरकार बंगाल में बना लेंगे।

1991 में भी राज्य में भाजपा के वोट प्रतिशत में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।लेकिन राज्य के विधानसभा में अपनी पहुंच बनाने में भाजपा को लंबा समय लगा, ऐसा क्यों?
जब परिवत्र्तन और क्रांति आती है तो बहुत तेज आती है। आज मतदाता बहुत समझदार है। उनको कम आंकना नहीं चाहिए। देश के अंदर क्रांति का एक ही नाम है, वह नाम है मोदी। मोदीजी के साथ जुड़ा हुआ जो क्रांति है वह है विकास। इसके अलावा तो कुछ है नहीं। हरियाणा का उदाहरण सामने है। वहां भी हमने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है। विकास के नाम पर बंगाल में कुछ हो ही नहीं रहा है। पहले लेफ्ट ने, अब ममता बनर्जी विकास से लोगों को कोसों दूर रखे हुए हैं। कांग्रेस वहां से पहले ही लुप्त हो चुकी है और आज जनता मोदीजी के साथ खड़ी है।

आपका मतलब है बंगाल क्रांति की ओर है…
ऐसा है कि बंगाल क्रांतिकारियों की भूमि रही है और साथ ही साथ भारतीय जनता पार्टी और जनसंघ, हमलोगों की जो प्रेरणास्रोत रहे हैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उनकी भी जन्मभूमि रही है। भारतीय जनता पार्टी और मेरा स्वयं का यह कमिटमेंट है कि 2016 में अपनी सरकार बनाकर उनको श्रद्धांजली देंगे।

लेकिन ममता बनर्जी का आरोप लगाती रही हैं कि भाजपा जहां जाती है वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़कर ध्रवीकरण की कोशिश करती है…
ममता जी चाह रही हैं कि वहां पर सांप्रदायिकता फैले, लेकिन बंगाल में ऐसा होगा नहीं। इसलिए वे तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं। वहां पर जो लड़ाई है, वह है राष्ट्रीय सुरक्षा की। जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं तो एक राष्ट्रभक्त दिल्ली में बैठा है और उसका नाम है नरेन्द्र मोदी।

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