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तमिल राजनीति में होगा नया स्टार वॉर!

तमिल राजनीति में होगा नया स्टार वॉर!

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत 67 साल की उम्र में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। बीते साल के आखिरी दिन चेन्नई के श्री राघवेंद्र कल्याण मंडपम में उन्होंने कहा, ‘मैं अब राजनीति में आ रहा हूं। यह आज की सबसे बड़ी जरूरत है।’ रजनीकांत के अनुसार अगले विधानसभा चुनावों में वे राज्य की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे और इस चुनाव से पहले ही अपनी नीतियों और वादों के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

रजनीकांत ने अपने इस फैसले के पीछे का कारण तमिलनाडु की राजनीति में आए संकट को बताया है। उन्होंने कहा, ‘राजनीति की दशा काफी खराब हो गई है। आज राजनीति के नाम पर नेता हमसे हमारा पैसा लूट रहे हैं और अब इस राजनीति को जड़ से बदलने की जरूरत है। सारे राज्य हमारा मजाक बना रहे हैं। अगर मैं राजनीति में नहीं आता हूंं तो यह लोगों के साथ धोखा होगा।’

फिल्मस्टार से राजनेता और राजनेता से मुख्यमंत्री बने एमजी रामचंद्रन और जयललिता की मृत्यु के बाद लोकप्रिय अभिनेता  विजयकांत की पार्टी के नाकाम होने के बाद लगा था कि अब तमिलनाडु में सुपरस्टारों की राजनीति खत्म हो गई मगर लगता है राज्य की राजनीति में सुपर स्टारों का एक और दौर शुरू होगा। इन दिनों दो सुपर स्टार राज्य की फिल्मस्टार उन्मुख राजनीति पर घात लगाए बैठे हैं और अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। एक तरफ रजनीकांत राजनीति में आने की घोषणा कर चुके हैं और दूसरी तरफ कमल हासन भी राजनीति में कूदना चाहते हैं। दोनों तमिल सिनेमा के दिग्गज और लोकप्रिय अभिनेता है उनका मुकाबला राजनीति को दिलचस्प और सनसनीखेज बनाएगा।

अन्नाद्रमुक प्रमुख और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद यह माना जा रहा था कि  तमिलनाडु की राजनीति में एक रिक्तता है। इसे द्रमुक के सर्वेसर्वा करुणानिधि की खराब सेहत और उम्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इनके बाद कोई और ऐसा चेहरा नहीं दिखता जिसकी पूरे राज में अपील हो। रजनीकांत को यह स्थिति एक अवसर की तरह दिख रही है।

राज्यों में और खास तौर पर दक्षिण के राज्यों में तो क्षेत्रियता का मुद्दा और भी अहम होता है। ऐसे में रजनीकांत के विरोधी उन पर यह कहकर हमला बोलेंगे कि वे तमिलनाडु के नहीं हैं। रजनीकांत मूल रूप से कर्नाटक के हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कुछ समय पहले यह बात कही भी थी। तमिल फिल्मों के जबरदस्त लोकप्रिय अभिनेता रजनीकांत की खासियत यह है कि उनका जन्म तो महाराष्ट्रीयन परिवार में हुआ और बेंगलुरू में वे बस ड्राइवर थे। वे विविध तरीके से सिगरेट सुलगा सकते थे और इसी अदा को भुनाने के लिए उन्हें अभिनय का अवसर मिला। चरित्र भूमिकाओं और खलनायक का पात्र अभिनीत करते-करते आवाम में उनकी लोकप्रियता ने उन्हें नायक बना दिया। उनके प्रति बढ़ते हुए जुनून ने सामाजिक सौद्देश्यता की राह पकड़ी और शहर-दर-शहर, कस्बा-दर-कस्बा रजनीकांत फैन क्लबों की स्थापना हो गई। रजनीकांत ने भी एक महकमा बनाया, जो जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता देने लगा। इस तरह एक फिल्म सितारा सामाजिक लहर में तब्दील हो गया। रजनीकांत के बारे में कहा जाता है कि लोकप्रिय अभिनेता जरूर है मगर वे कितने कुशल अभिनेता हैं- इसकी कभी परख ही नहीं हुई। अगर आमिर खान को हिन्दी सिनेमा का मिस्टर परफेक्टनिस्ट माना जाता है तो वहीं कमल हासन को दक्षिण भारत का परफेक्टनिस्ट कहा जाता है। जिस तरह आमिर खान अपनी फिल्मों में कई तरह के प्रयोग करते रहते हैं उसी तरह कमल हसन भी हमेशा कुछ ना कुछ नया करने की चाह रखते हैं। इसलिए लोग कमल हासन के दीवाने हैं। लेकिन जब बात जनता से जुड़ाव की होती ह्रै तो शायद ही कोई रजनीकांत को मात दे सकता है। जहां रजनीकांत को सिर्फ एक्शन फिल्मों का सुपरस्टार माना जाता है तो वहीं कमल हासन सभी तरह के रोल को बखूबी निभा सकते हैं वे हरफनमौला है। फिर वह चाहे कॉमेडी हो या एक्शन।

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कमल हसन और रजनीकांत दोनों ही साउथ सिनेमा के दो मील के पत्थर हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए कमल हसन हसन को दिए गए सम्मानों की सूची बहुत लंबी है। इन्हें चार राष्ट्रीय पुरस्कार, 10 दक्षिण भारतीय फिल्मफेयर अवॉर्ड, 2 फिल्मफेयर अवॉर्ड, तीन नंदी अवॉर्ड, नौ तमिलनाडु स्टेट नेशनल अवॉर्ड आदि प्रदान किए गए हैं। इन सब के अलावा कमल हसन को भारतीय सरकार द्वारा पद्मश्री भी दिया जा चुका है।

दोनों राजनीति में उतरना चाहते हैं इसलिए दोनों में अभी से  बयानों के जरिये नोंकझोंक शुरू हो गई है। फिल्म अभिनेता कमल हासन ने एक और फिल्म अभिनेता रजनीकांत के राजनीति में प्रवेश को लेकर यह कहकर विवादस्पद बयान दिया कि जहां कहीं कैमरा नजर आ जाए वहीं रजनीकांत आपको नजर आ जाएंगे।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले कमल हासन ने कहा था कि तमिलनाडु में सिस्टम फेल हो चुका है और सभी विभागों में भ्रष्टाचार फैल चुका है। कमल हासन की इस टिप्पणी को लेकर राज्य सरकार के मंत्रियों ने उनकी काफी आलोचना की है और दूसरी तरफ विपक्षी दल द्रमुक, कांग्रेस, एमडीएमके, वीसीके, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्कसवादी कम्युनिस्ट पार्टी और नाम तमिझर ने कमल हासन का पक्ष लिया और कहा है कि कमल हासन की आवाज जनता की आवाज है।

कमल हासन के बारे में स्पष्ट नहीं है कि वे किसी पार्टी में शामिल होगे या अपनी अलग पार्टी बनाएंगे। रजनीकांत में पहले भारतीय जनता पार्टी ने काफी दिलचस्पी दिखाई थी। दरअसल, भाजपा तमिलनाडु में अपनी मौजूदगी दर्ज करना चाहती है, और इस लक्ष्य को पाने के लिए वह रजनीकांत की लोकप्रियता पर सवारी करना चाहेगी। हालांकि हाल ही में इस आशय के संकेत दे दिया हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा कि रजनीकांत भाजपा में शरीक हो सकते हैं। मगर रजनीकांत ने अब अपनी अलग पार्टी बना ली।

कमल हासन, रजनीकांत की देखा-देखी राजनीति में कदम  रखने की फिराक में हैं। करूणानिधि, जयललिता और रामचंद्रन इसलिए सफल हो पाए क्योंकि उनके पीछे द्रविड़ आंदोलन का इतिहास था। अभी भी राज्य के राजनीति की मुख्यधारा को द्रविड़ पार्टियों ने घेरा हुआ है। द्रविड़ पार्टी ही सरकार में और विपक्ष दानों में हैं। रजनीकांत को पहले इस चक्रव्यूह को तोडऩा होगा जो आसान काम नहीं है। यह काम फिल्मी बाजीगरी से नहीं हो सकता। कुछ लोग यह आशंका भी जाहिर कर रहे हैं कि कहीं रजनीकांत की स्थिति भी चिरंजीवी जैसी न हो! चिरंजीवी भी बतौर कलाकार दक्षिण भारत में बेहद लोकप्रिय रहे हैं। 2008 में उन्होंने प्रजा राज्यम के नाम से पार्टी बनाई और 2009 के विधानसभा चुनावों में उतरे। उस चुनाव में आंध्र प्रदेश की कुल 295 विधानसभा सीटों में से चिरंजीवी की पार्टी जैसे-तैसे 18 सीटें जीत पाई। चिंरजीवी खुद दो सीटों से चुनाव लड़े थे। इनमें से वे तिरुपति से तो जीत गए लेकिन पल्लाकोलू में उनकी हार हुई। 2011 में चिरंजीवी को अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस उन्हें राज्यसभा ले आई और केंद्र में स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री बनाया। कांग्रेस ने उन्हें कैबिनेट मंत्री के पद के लायक भी नहीं समझा।

चिरंजीवी के इस हश्र से लोग यह कह रहे हैं कि अब दक्षिण भारत की राजनीति में पहले की तरह नहीं रही। अब लोग आंख मूंद कर सुपरस्टार पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में कुछ लोगों को यह आशंका है कि कहीं रजनीकांत का हश्र भी चिरंजीवी जैसा ही न हो।

राजनीति की एक सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें चाहे-अनचाहे कई तरह के तीन-तिकड़म करने पड़ते हैं और कई तरह के तीन-तिकड़म का शिकार भी होना पड़ता है। तमिलनाडु की राजनीति की ही बात करें तो यहां जयललिता और करुणानिधि का राजनीतिक द्वंद हर किसी ने देखा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ राजनीति से प्रेरित होकर जांचें कराईं। दोनों ने सत्ता में रहने पर सरकारी मशीनरी के सहारे एक-दूसरे को परेशान करने की लगातार कोशिशें कीं।

अब रजनीकांत को भी इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि उन पर भी राजनीति से प्रेरित हमले होंगे। जानकारों के मुताबिक अगर वे सत्ता में आ गए तो ठीक, लेकिन अगर वे नहीं आ पाए और अगर उनके विरोधी सत्ता में आ गए तो उनके खिलाफ भी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल वैसे ही हो सकता है जैसे जयललिता और करुणानिधि एक-दूसरे के खिलाफ करते थे।


 

एक विशेष नजर


 

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  • एक बार रजनीकांत ने एक छोटे से, कमजोर, कुपोषित बच्चे को ब्लड डोनेट किया…आज उस बच्चे को सब खली के नाम से जानते हैं
  • एक बार भगवान और रजनीकांत में लड़ाई हुई। नतीजा? आज भगवान ऊपर हैं..!
  • असलियत में रजनीकांत को फिल्म, मिशन इम्पॉसिबल के हीरो का किरादार निभाने के लिये साइन किया गया था, लेकिन उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि इस फिल्म का टाइटल उनके लिये बहुत अपमान जनक है।
  • रजनीकांत को बचपन में चिकेन पॉक्स नाम की बीमारी ने अपनी चपेट में लिया था। आज ये बीमारी दुनिया से गायब हो चुकी है।
  • एक बार रजनीकांत हेलीकॉप्टर द्वारा स्विट्जरलैण्ड से होकर गुजर रहे थे लेकिन उनका पर्स गिर गया फिर क्या हुआ- वह स्थान आज स्विस बैंक के नाम से जाना जाता है।
  • रजनीकांत जब प्याज काटते हैं, तो प्याज खुद रोने लगता है।
  • एक किसान ने अपने मक्के के खेत में कौवे उडऩे के लिए रजनीकांत की तस्वीर चिपका दी। नतीजा यह हुआ कि कौवे अगले ही दिन मक्की के वे दाने भी वापस ले आए, जो वे पिछले साल लेकर गए थे।
  • स्पाइडर मैन कभी भी भारत नहीं आ सकता, क्यों? क्योंकि रजनीकांत उसे बेगॉन के इस्तेमाल से मार डालेंगे।

ये सब जोक्स तमिल फिल्मों के अभिनेता रजनीकांत के बारे में हैं और अपनी फिल्मों में रजनीकांत के लिए कोई भी पराक्रम कोई की करिश्मा असंभव नहीं है। लोग वही तो देखने के लिए फिल्म पर टूट पड़ते हैं। आज भले ही वे तमिल सिनेमा को सुपरहीरो हो उनकी गजब की अदाओं के लिए उन्हें सारा हिन्दुस्तान जानता है। उनकी खासियत है उनका करिश्माई बाजीगरी लिए अभिनय। जिसका सारा तमिलनाडु गजब का दीवाना है। रजनीकांत को उनके दीवाने किस हद तक चाहते हैं इस का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब कुछ साल सुपर स्टार रजनीकांत बीमार पड़े थे तो लोगों ने खानपीना छोड़ दिया था। बस उनकी एक ही ख्वाहिश थी कि उनका यह चहेता सितारा बहुत जल्द ठीक होकर घर वापस आ जाये। एक सिंपल से बस कंडक्टर से अपनी जीविका की शुरूआत करने वाले रजनीकांत का काम आज भी बदस्तूर जारी है। लोग उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करते है। केवल तमिल सिनेमा ही नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा में भी रजनी की फिल्मों का बोलबाला रहा। उनका सिगरेट पीने का ढंग और दुश्मनों को पीटना आज भी किसी को रोमांचित कर जाता है रजनीकांत के राजनीति में आने से  उनके प्रशंसकों को उम्मीद है कि वे वैसा ही कुछ धांसू राजनीति में भी कर दिखाएंगे जैसा फिल्मों में करते हैं।

रजनीकान्त का असली नाम शिवाजीराव गायकवाड़ हैं। इनका जन्म 12 दिसम्बर 1950 को बंगलौर, मैसूर राज्य, वर्तमान में कर्नाटक में हुआ था। इनकी वर्तमान आयु 66 वर्ष हैं। वे एशिया के दुसरे व्यक्ति हैं जिन्होंने किसी फिल्म के लिए सबसे अधिक भुगतान किया। पहला स्थान चाइना के जेकी चान को प्राप्त हैं। इनके पिताजी का नाम शिवाजीराव और माता का नाम जिजाबाई था। रजनीकांत का मूल नाम शिवाजीराव गायकवाड है। इतिराज कॉलेज में पढनें वाली लड़की जिजाबाई के साथ उनका एक इंटरव्यू हुआ था। और इस प्रेम प्रंसग के बाद वर्ष 1981 में शिवाजीराव और जिजाबाई की आध्रा के तिरुपति बालाजी मन्दिर में उनकी शादी हो गईं।

जिजाबाई-रजनी के परिवार के दो और सदस्य हैं। जो उनकी सन्तान हैं इनके नाम क्रमश ऐश्वर्या आर धनुष हैं 7 वर्ष 2000 में रजनीकांत को फिल्मो में जीवत किरदार निभाने और सिनेमा में योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किये गये।

जनवरी, 1975 में सुपरस्टार रजनीकांत ने फिल्म कैरियर की शुरुआत की। मूंदरू मुदिचू, रोबोट, बाबा, बुलन्दी, क्रांतिकारी, इंसानियत के देवता जैसी चार सौ से अधिक फिल्मो में रजनी काम कर चुके हैं। अपनी एक्टिंग का कोई सानी नही हैं। चाहे डायलोग हो या स्टाइल..

रजनीकांत को फिल्म ‘नाल्लावानकु नाल्लावन’ के लिए ‘बेस्ट तमिल ऐक्टर’ का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड 1984 में मिला। इसके बाद उन्हें फिल्म जगत के कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया। भारतीय सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें साल 2000 में पद्धभूषण  दिया गया। मशहूर अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘फोर्ब्स’ ने 2010 में रजनीकांत का नाम सबसे असरदार भारतीयों की लिस्ट में शामिल किया। देखना यह है कि तमिल फिल्मों का सुपरस्टार रजनीकांत क्या तमिल राजनीति का सुपरस्टार बन पाता है। फिल्मों में तो वे कठिन से कठिन अभियानों में चुटकी बजाकर सफल हो जाते है। सवाल यह है कि क्या राजनीति के वास्तविक अभियान में भी सफल हो पाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो उनके प्रशंसक कहेंगे रजनीकांत शून्य से हिमालय पैदा कर सकते हैं।


रजनीकांत की इस घोषणा से जहां उनके फैंस में भारी खुशी है तो वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर ट्वीट कर रहे हैं और अपनी शुभकामनाएं शेयर कर रहे हैं। उनकी पार्टी तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेगी। रजनीकांत की घोषणा के बाद चेन्नई में उनके फैंस ने जश्न भी मनाया। रजनीकांत ने अपने भाषण में इस बात का जिक्र भी किया था कि मैं राजनीति में नया नहीं हूं, मेरी इंट्री ही जीत के बराबर है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने रजनीकांत को शुभकामनाएं देते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘मेरे प्यारे दोस्त, मेरे सहयोगी और एक विनम्र विचारशील इंसान, रजनीकांत, राजनीति में प्रवेश करने के अपने फैसले की घोषणा करते हैं। उनकी सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं!’ फिल्म स्टार कमल हसन के रजनी की राजनीतिक इंट्री पर कहा, ‘मैं अपने भाई रजनी को उनकी सामाजिक चेतना और उनकी राजनीतिक शुरुआत की बधाई देता हूं। आपका स्वागत है, स्वागत है।’ फिल्म एक्टर कबीर बेदी ने भी ट्विटर पर रजनीकांत को बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘महान रजनीकांत को बधाई, राजनीतिक व्यवस्था को साफ करने के लिए तमिलनाडु की सबसे बड़ी उम्मीद, सबसे बड़ी सफलता।’ रजनी के कार्यक्रम में मौजूद रजनीकांत की एक फैन नीता ने अपने सुपर स्टार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘रजनीकांत ने राजनीति में प्रवेश किया की जगह मैं यह कहना चाहती हूं कि राजनीति ने रजनीकांत में प्रवेश किया है।’

रजनीकांत के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे तमिलनाडु में भाजपा का मोहरा बन सकते हैं। पहले यह अफवाह चली कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। लेकिन भाजपा भी यही चाहती थी कि रजनीकांत अभी अपनी पार्टी बनाएं और भाजपा उनके साथ गठबंधन करे। पार्टी के एक नेता कहते हैं, ‘अगर वे भाजपा में तुरंत शामिल होते तो इससे हमें और उन्हें दोनों को नुकसान होता। अलग पार्टी बनाने से अन्नाद्रमुक और द्रमुक समेत राज्य की दूसरी पार्टियों के कई नेता उनके साथ जुड़ सकते हैं। लेकिन अगर वे भाजपा में आ जाते तो ऐसा नहीं हो पाता।’

रजनीकांत एक लोकप्रिय कलाकार हैं। उनकी लोकप्रियता का जादू न सिर्फ  तमिलनाडु में कायम है, बल्कि पूरे तमिल भाषी समाज में उनकी जबर्दस्त अपील है। रजनीकांत उन पहले हस्तियों में से एक थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के कदम का स्वागत किया था। साल 2014 के अपने चुनाव अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी उनसे मिलने उनके घर भी गए थे। रजनीकांत के प्रति भाजपा के प्रेम के पीछे दरअसल उनकी आध्यात्मिक रुचि एक बड़ी वजह है। वह क्रिया योग करते हैं और मेडिटेशन के लिए अक्सर हिमालय जाते हैं। इस सफर में पडऩे वाले हरिद्वार, बद्रीनाथ और केदारनाथ आदि पड़ावों पर वे विभिन्न साधु-संतों का आशीर्वाद भी लेते हैं। रजनीकांत की राजनीतिक आकांक्षा की झलक उनकी फिल्म बाबा में दिखती है, जिसमें वह ‘कुटिल और भ्रष्ट राजनीतिक वर्ग’ को ध्वस्त कर देते हैं, लेकिन खुद मुख्यमंत्री बनने से दूर रहते हैं।

रजनीकांत के अध्यात्म प्रेम पर राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु द्रविड़ आंदोलन का उद्गम स्थल है, जहां आध्यात्मिक राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हौआ खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं कि रजनीकांत तमिलनाडु में द्रविड़ आंदोलन को खत्म करने का इरादा रखने वाले लोगों के कहने पर पार्टी शुरू करने जा रहे हैं। स्टालिन ने कहा, मैं आपको बता देना चाहता हूं कि यह पेरियार अन्ना (द्रविड़ कजगम के संस्थापक ई वी रामसामी पेरियार) और कलईगनर (करुणानिधि) की भूमि है।

अतीत में भी ऐसे प्रयास असफल हो चुके हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या रजनीकांत ने द्रमुक का समर्थन मांगा है तो इस पर उन्होंने बताया कि इन सब चीजों का फैसला चुनाव के दौरान ही किया जा सकता है। पिछले साल 31 दिसंबर को राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा करते हुए रजनीकांत ने राजनीति में ईमानदारी और सुशासन की हिमायत करते हुए आध्यात्मिक राजनीति करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, सबकुछ बदलने की आवश्यकता है। लोकप्रिय संस्कृति के प्रतीक के रूप में आज  रजनीकांत की पहचान दुनियाभर के देशो में हैं। रजनीकांत अब राजनीति में भी कदम रख रहे हैं। उनके बोलने का तरीका और एक्टिंग का लहजा उन्हें आम से खास बनाता हैं। अक्सर बॉलीवुड में हो या साउथ फिल्मों में एक्टर फिल्मों के लिए तरस जातें हैं।  रजनीकांत का मामला ठीक इसके विपरीत हैं, फिल्मे खुद तरस जाती हैं उनकें लिए।

अब राज्य में नेतृत्व का खालीपन सा दिख रहा है। बहुत सारे लोग इसे राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी तरफ कमल हासन भी राजनीति में उतरने का इरादा रखते हैं। ऐसे भी तमिलनाडु की राजनीति में एक स्टार वॉर खत्म हो गया लेकिन दूसरा स्टार वॉर-रजनीकांत बनाम कमल हासन – शुरू होते देर नहीं लगेगी। दिल थामकर बैठिए मुकाबला तगड़ा होगा और दिलचस्प भी।

 

सतीश पेडणेकर

 

 

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