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”भारत और वियतनाम के संबंध ‘बिन बादल आकाश’ जैसे’’

”भारत और वियतनाम के संबंध  ‘बिन बादल आकाश’ जैसे’’

”आसिआन देशों के सदस्यों का गणतंत्र दिवस पर भारत आना आसिआन और भारत के सम्बंध में एक उड़ान भरने जैसा है। इस वर्ष भारत और आसिआन के सम्बंध के 25 वर्ष, शिखर स्तर भागीदारी के 15 वर्ष तथा सामरिक भागीदारी के 5 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसके उपलक्ष्य में होने वाले समारोह में ये देश भाग लेंगे। यह समारोह भारत की ताकत को न केवल एशिया बल्कि पूरे विश्व के समक्ष रखेगी। यह समारोह भारत के इतिहास में सबसे बड़ा समारोह होगा,’’ ऐसा कहना है भारत में वियतनाम के राजदूत  एच तोन सीनतान का रवि मिश्रा के साथ साक्षात्कार के दौरान। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-

आप भारत और वियतनाम के संबन्ध को किस प्रकार से देखते हैं?

भारत और वियतनाम का संबन्ध हजारों वर्ष पुराना है। इतिहास में यह देखने को मिलता है कि सबसे पहले ओडिशा सहित भारत के अन्य तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग व्यापार के उद्देश्य से वियतनाम पंहुचे और वियतनाम के मध्य भाग में बस गये। इन लोगों ने वहां अपना हिंदू साम्राज्य भी स्थापित किया। यही कारण है कि हमें आज भी वियतनाम के मध्य भाग में इस साम्राज्य से संबन्धित अवशेष देखने को मिलते हैं। बाद में बौद्ध धर्म का दक्षिण से पूर्व एशिया तक विस्तार हुआ। यह पूरे वियतनाम में फैला। आज वियतनाम पूर्ण रूप से एक बौद्ध देश है, जिसकी शुरूआत भारत से ही हुई हैं। भारत और वियतनाम के संबन्ध केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं है। बल्कि दोनों देशों की स्वतंत्रता के  लिए भी यहां के लोगों ने एक दूसरे का भरपूर सहयोग किया। हो ची मीन और जवाहर लाल नेहरू के संबन्ध तो दोनों देशों की स्वतंत्रता से भी काफी पहले से थे। भारत ने फ्रेंच उपनिवेशवाद और अमेरिका से हुए वियतनाम के संघर्ष में भी भरपूर साथ दिया। हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी वियतनाम का दौरा किया। वर्ष 2017 में तो भारत और वियतनाम के कुटनैतिक सम्बंध के भी 45 वर्ष पूरे हुए, जिसे पूरे जोर-शोर से मनाया गया। अत: हम यह कह सकते हैं कि भारत और वियतनाम के सम्बंध ‘बिन बादल आकाश’ जैसे हैं।

भारत और वियतनाम के बीच सामरिक संम्बन्ध काफी मजबूत हैं। आप इसके संदर्भ में कुछ बताना चाहेंगे?

भारत और वियतनाम के सम्बंध काफी व्यापक हैं, जो सभी क्षेत्रों में हैं। इस सम्बंध के पांच महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जिसमें राजनीतिक और राजनैयिक, व्यापार, विज्ञान और प्रधौगिकी, सांस्कृतिक और शिक्षा तथा सबसे महत्वपूर्ण रक्षा का क्षेत्र हैं। मेरा मानना है कि भविष्य में दोनों देशों के सम्बंध और सभी क्षेत्रों में और भी मजबूत होंगे।

दोनो देशों के बीच रक्षा क्षेत्र किस प्रकार से महत्वपूर्ण हैं और भारत वियतनाम को किस प्रकार से सहयोग करता है?

नि:संदेह रक्षा क्षेत्र दोनों देशों के सामरिक संबन्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। भारत के सहयोग से हमारे सैन्य बल अपने कौशल में सुधार लाते हैं। हमारे थल, जल और वायु सेना के अधिकारी भारत में आकर प्रशिक्षण लेते हैं। भारत वियतनाम को सैन्य सुरक्षा से सम्बंधित सामग्री उपल्बध कराता है, जो किसी तीसरे देश के विरूद्ध नहीं हैं।

क्या वियतनाम के लिए चीन एक चुनौती हैं?

चीन हमारा सबसे बड़ा पड़ोसी है। चीन के साथ हमारा सम्बंध हमेशा से अच्छा रहा है। केवल चीन से ही नहीं, बल्कि हमारा सम्बंध सभी देशों से अच्छा है। इसलिए हमने कभी भी चीन को एक चुनौती की तरह नहीं लिया है। आतंकवाद, पर्यावरण में बदलाव और  समुद्री डकैती जैसे कई क्षेत्र हैं, जो बिना सभी देशों के साथ आये हल नहीं हो सकता।

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यदि चीन के साथ सबकुछ सही है तो फिर दक्षिण चीन सागर में किस प्रकार का विवाद हैं?

हां, दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ प्रादेशिक द्वीप से सम्बंधित मामलों में विवाद हैं। लेकिन वियतनाम हमेशा इस प्रकार के मामलों को शांति ढंग, राजनैयिक और कुटनीतिक माध्यम से हल करने को बढ़ावा देता रहा है। चीन ने  दक्षिण चीन सागर  में नाईन डैस लाईन खींच रखी हैं, जिसके अंतर्गत इस क्षेत्र में आने वाले सभी देशों की आर्थिक क्षेत्र में बाधाएं आ रही हैं। वियतनाम इसका विरोध करता है। इस क्षेत्र से भारत के 50 प्रतिशत व्यापार होते हैं। अत: यह भारत के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। हम नेविगेशन की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं और वियतनाम इस मामले को सभी देशों के आपसी सहयोग से बिना किसी विवाद के हल करने के पक्ष में है।

गणतंत्र दिवस के दिन सभी 10 आसिआन देशों के सदस्य भारत के दौरे पर रहे हैं। क्या इसको भारत और आसिआन के बीच एक नई ऊंचाई को दर्शाता है।

बिल्कुल, आसिआन देशों के सदस्यों का गणतंत्र दिवस पर भारत आना आसिआन और भारत के सम्बंध में एक उड़ान भरने जैसा है। इस वर्ष भारत और आसिआन के सम्बंध के 25 वर्ष, शिखर स्तर भागीदारी के 15 वर्ष तथा सामरिक भागीदारी के 5 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसके उपलक्ष्य में होने वाले समारोह में ये देश भाग लेंगे। यह समारोह भारत की ताकत को न केवल एशिया बल्कि पूरे विश्व के समक्ष रखेगी। यह समारोह भारत के इतिहास में सबसे बड़ा समारोह होगा।

भारत की वर्तमान सरकार ने ‘लुक ईस्ट’ की नीति को ‘एक्ट ईस्ट’ में बदल दिया है, आप इसे किस प्रकार से देखते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी ने शासन में आने के पश्चात ‘लुक ईस्ट’ की नीति को ‘एक्ट ईस्ट’ में बदला यह उनका पूर्व और दक्षिण एशिया के संदर्भ में एक अच्छी सोच को दर्शाता है। इससे इस क्षेत्र में भारत का प्रभाव और भी बढ़ेगा। यह न केवल सामरिक रूप से सहायक है, बल्कि व्यवसायिक की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि भारत अपनी पकड़ को और भी मजबूत कर सकती है। इस क्षेत्र में व्यवसाय के लिए भारत के बड़े आसार हंै। भारत इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भारत का वियतनाम में किन क्षेत्रों में व्यापार और निवेश हैं?

बिजली,फार्मा, टेक्सटाईल, ईलेक्ट्रीक, कृषि, कोल और स्टील सहित अन्य क्षेत्रों में भारत ने वियतनाम में निवेश किया है। भारत वियतनाम के 10 बड़े निवेशकों में है। पिछले पूरे वर्ष में भारत का वियतनाम में कुल 7 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, जो अब तक का सर्वाधिक है।

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