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राजनीति रजनी-स्टाइल

राजनीति रजनी-स्टाइल

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत के नई राजनीतिक दल बनाने के निर्णय ने तमिलनाडु की द्रविडिय़न पार्टियों की नींद उड़ा दी है। यह सत्य है कि अभी पार्टी का नाम, चेहरा और विचारधारा सामने नहीं आयी है। तमिलनाडु पर पिछले पांच दशक से केवल दो द्रविडिय़न पार्टियों का ही शासन रहा है। वर्तमान की परिस्थिति में यदि राज्य के विषय में कम ही बोला जाय तो अच्छा होगा। राज्य के विकास के लिए कार्य करने की बजाए, राज्य के सभी चुने हुए नेता किसी भी प्रकार से अपना कार्यकाल पूरा करने में व्यस्त हैं। राज्य का परिवहन विभाग धीमा पड़ चुका है। यही हाल राज्य के औद्योगिक विकास का भी है। राज्य के विकास के लिए कोई भविष्य की नीति नहीं है। अब लोगों के लिए एक निश्चित बदलाव चाहिए। अत: रजनीकांत को भी यह समझना पड़ेगा कि अब लोग फिल्मी डायलॉग में नहीं बहने वाले हैं। प्रशंसा की राजनीति एमजी रामचन्द्रन के साथ ही खत्म हो गई, जिसका वर्तमान से कोई लेना-देना नहीं हैं। जब तक रजनी मजबूत राजनीतिक सोच के साथ नहीं आते, तब तक वे लोगों में गंभीरता से नहीं लिये जायेंगे।

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में फिल्मी सितारों का राजनीति में प्रवेश कोई नई बात नहीं है। एनटीआर, एमजीआर और जयललिता इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। हालांकि लोगों की उनके प्रति सहानुभूति होने के कारण वे अपनी राजनीति चमकाने में सफल रहे। चाहे कुछ भी हो, लेकिन इन लोगों ने आम लोगों की भलाई के लिए कई कदम उठाये। रजनीकांत की जीवन-शैली को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उन्हें लोगों के बीच विश्वास कायम करने के लिए अभी लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। उन्हें जमीनी स्तर पर कार्य करना पड़ेगा। यदि रजनीकांत राजनीति में सफल होना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा और नरेन्द्र मोदी का सहारा लेना पड़ेगा। तमिलनाडु में भाजपा पहले से ही अपने संगठन को मजबूत करने में लगी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरलीधर राव जो तमिलनाडु के प्रभारी हैं, भाजपा को मजबूती देने में पूरी तरह से लगे हैं। करूणानीधि की शिकस्त और जयललिता के निधन के पश्चात से भाजपा के लिए राज्य में पकड़ बनाने का एक सुनहरा मौका है। ऐसा कोई भी मान सकता है कि बिना भाजपा से हाथ मिलाये रजनीकांत राजनीति में सफल नहीं हो सकते। फिर भी राज्य में जिस प्रकार का परिदृश्य है, उसके अनुसार रजनीकांत के लिए तमिलनाडु में पैठ बनाने का सुनहरा मौका है।

आंध्र प्रदेश की राजनीति में जिस प्रकार से एनटी रामाराव ने प्रवेश किया था उसी प्रकार रजनीकांत के पास भी भ्रष्टाचार से लिप्त राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका है। रजनीकांत को उनकी दूसरों के प्रति भलाई, मैत्रीय और आध्यात्मिक स्वभाव लोगों के बीच ले जाने में सहायक होगा। फिर भी उन्हें समाज से उन लोगों को चुनना होगा, जो भ्रष्टाचार में लिप्त न हो और लोगों के बीच उनकी पकड़ हो। उन्हें अपने प्रचार के दौरान लोगों के जीवन से जुड़ी बातों को उठाना होगा। उनके पास कमल हासन से अधिक सुनहरा मौका है, जिन्होंने अभी समाज को तोडऩे वाली बातों को बढ़ावा दिया। लेकिन अब रजनीकांत ने राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय ले लिया है। फिल्म में तो रजनी को उनके काम के लिए काफी प्रशंसा मिली लेकिन उनके लिए राजनीति में राह अभी आसान नहीं हैं। किसी भी क्षेत्र में जाने के लिए कम से कम अनुभव की आवश्यकता होती है। रजनीकांत के पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है। हो सकता है कि उन्होंने राज्य कि समस्याओं को करीब से देखा होगा, फिर भी ऐसे निर्णय के लिए थोड़ा अनुभव अवश्य होना चाहिए। फिल्म अभिनय और राजनीति में काफी अंतर होता है। हो सकता है उन्होंने अपनी सिनेमा की दुनिया में अपने प्रशंसकों से उतना विरोध न देखा हो लेकिन राजनीति की दुनिया में उन्हें किसी एक गलत शब्द या कार्य के लिए विरोध का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी, यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि वह भ्रष्टाचार से दूर रहते हैं, तो उन्हें लोगों का समर्थन अवश्य मिलेगा। अन्यथा यह भी उनके लिए एक फिल्मी पर्दे की तरह ही हो जाएगा। तमिलनाडु की जनता पहले ही कई राजनीतिक जोकरों को देख चुकी हैं। अत: यह आशा की जाती है कि वह तमिलनाडु के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

 

 

 

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