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उग्रवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे

उग्रवाद को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे

माओवादी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में राज्य पुलिस एवं केन्द्रीय अद्र्धसैनिक बलों द्वारा इस समस्या से प्रभावी ढंग से निबटने के लिए लगातार अभियान चलाये जा रहे हैं। सी.पी.आई. (माओवादी) कैडर के दस्तों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी के आधार पर, सी.आर.पी.एफ. ने 16 नवम्बर, 2014 से एक वृहद अभियान छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के चिंता गुफा क्षेत्र में कई चरणों में चलाया।

इस अभियान में सी.आर.पी.एफ. के 2253 एवं राज्य पुलिस के 224 सहित कुल 2477 सुरक्षाकर्मियों ने भाग लिया। इस अभियान के प्रथम एवं द्वितीय चरण में 17 नवंबर और 21 नवंबर 2014 को कई बार सुरक्षाबलों एवं माओंवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर, जिनमें खुफिया सूचनाएं एवं मीडिया के स्रोत सम्मिलित हैं, दिनांक 21.11.2014 को 12 माओवादियों के मारे जाने की सूचनाएं हैं,  लेकिन इनकी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। इन चरणों में कुछ सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे, जिनका उपचार कराया गया।

20-12-2014

इस ऑपरेशन का तीसरा चरण दिनांक 27.11.2014 को शुरू हुआ था। इस घने जंगली क्षेत्र की कॉम्बिंग के पश्चात जब सी.आर.पी.एफ. की 223 बटालियन एवं कोबरा की 206 बटालियन के सुरक्षाकर्मी अपने कैम्प को वापस लौट रहे थे;  माओवादियों ने कसलपार गांव के निकट उन पर घात लगाकर हमला कर दिया। यह घटना 01.12.2014 को दिन में लगभग 10.30 बजे हुई। सुरक्षा बलों ने जबावी हमला किया और पूरी बहादुरी के साथ माओवादियों पर जबावी कार्रवाई की। यह मुठभेड़ लगभग तीन घंटे चली। इसमें 223 बटालियन के 14 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए एवं अन्य 14 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। जैसे ही यह मुठभेड़ शुरू हुई, सी.आर.पी.एफ. की निकटस्थ अन्य टुकडिय़ां भी घटना स्थल पर मदद के लिए पहुंच गईं।

घायल सुरक्षाकर्मियों को चिंता गुफा बेस कैम्प में ले आया गया और इसके उपरान्त उपचार के लिए जगदलपुर एवं रायपुर भेज दिया गया। इस हमले में माओवादी मृतक जवानों के शस्त्र एवं गोला-बारूद ले जाने में सफल हो गए।

दिनांक 02.12.2014 को दो एम.आई.-17 हैलीकॉप्टरों के द्वारा शहीद एवं घायल सुरक्षाकर्मियों को चिंता गुफा से जगदलपुर एवं रायपुर लाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही मैं (राजनाथ सिंह) कल प्रात: वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रायपुर गया और स्थिति की समीक्षा की। सी.आर.पी.एफ. के महानिदेशक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र में कैम्प कर रहे हैं।

20-12-2014

मैं पुन: इस बात को दोहराना चाहता हूं कि सरकार माओवादी उग्रवाद से पूरी दृढ़ता से निबटने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार द्वारा बहुआयामी रणनीति क्रियान्वित की जा रही है। इसमें सुरक्षा संबंधी उपाय, विकास से संबंधित उपाय एवं आदिवासी एवं अन्य कमजोर वर्ग के लोगों को उनका अधिकार दिलाने से संबंधित कदम शामिल हैं। सरकार की नीति के परिणामस्वरूप माओवादियों के हौसले कमजोर हुए हैं। उनके कैडर के द्वारा आत्मसमर्पण करने की संख्या में इस वर्ष काफी वृद्धि हुई है। 2011 से माओवादी हिंसा की घटना में निरंतर गिरावट आ रही है, जो इस वर्ष भी जारी है। हमारा दृढ़ निश्चय है कि हम अपने सुरक्षाबलों को सभी संभव साधन मुहैया करायेंगे और तब तक इस अभियान को जारी रखेंगे, जब तक कि इस समस्या का पूरी तरह से उन्मूलन न हो जाये। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि राज्य सरकारें जब भी शांति व्यवस्था कायम करने, उग्रवाद के संकट, प्राकृतिक आपदा आदि से निबटने के लिए केन्द्रीय सुरक्षाबलों की मांग करती हैं, तो सामान्यत: गृहमंत्रालय विचार करके बल उपलब्ध कराता है। केन्द्रीय सुरक्षाबल और  राज्य पुलिस, राज्य सरकार के  निर्देशन पर समन्वय बनाकर काम करती हैं। हम राज्य सरकारों की क्षमता में वृद्धि करने के लिए भी सभी संभव उपाय कर रहे हैं।

दिनांक 01.12.2014 की इस घटना में शहीद हुए सभी सुरक्षाकर्मियों को मैं अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं।

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