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गोयलजी की बल्ले-बल्ले

गोयलजी की बल्ले-बल्ले

20-12-2014

आजकल अपने बिजली मंत्री पीयूष गोयल के चेहरे पर खासी चमक देखी जा सकती है। गोयलजी जहां बिजली की चोरी रोकने का फॉर्मूला तलाशने में लगे हैं, वहीं बेटे ने भी हार्वर्ड विश्वविद्यालय में छक्का जड़ दिया है। ध्रुव पी. गोयल हार्वर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काऊंसिल के उपाध्यक्ष चुन लिए गए हैं। यह सफलता हासिल करने वाले वह पहले भारतीय हैं। इससे पहले ध्रुव 2013 में गुजरात में अपने काम-काज का लोहा मनवा चुके हैं। तब वह मुख्यमंत्री मोदी की खास पसंद बन गए थे। लिहाजा उन्हें यह सफलता मिलते ही प्रधानमंत्री मोदी ने फोन करके बधाई देने में देर नहीं लगाई। अब भला ऐसे में गोयलजी के चेहरे पर शिमला का टमाटरी रंग न चढ़े तो किसके चेहरे पर चढ़ेगा।

भागो! अनिल सिन्हा आया

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सीबीआई के नए निदेशक अनिल सिन्हा बन गए। सिन्हा की वैसे भी बड़ी क्लीन इमेज है। 1979 बैच के बिहार के जोरदार आईपीएस अधिकारी हैं। कहते हैं कि पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से तब जांच एजेंसी के स्पेशल डायरेक्टर अनिल सिन्हा की जरा भी नहीं बैठती थी। अपने जमाने में अनिल को नीचा दिखाने में सिन्हा कोई कसर नहीं छोड़ते थे। कहा तो यह भी जाता है कि सिन्हा का लालू से भी अच्छा संबंध रहा है। गलियारे में चर्चा है कि बिहार लॉबी भी अनिल सिन्हा के लिए जोर लगा रही थी। ऐसे में अनिल सिन्हा के सीबीआई प्रमुख का पद संभालते ही कईयों के चेहरे पर हवाइयां उडऩे लगी हैं।

बेचारे पासवान

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कभी राबड़ी ने जब रामविलास पासवान को बिलरा कहा था तो उन्हें इतना दर्द नहीं हुआ था जितना इन दिनों झेल रहे हैं। कोई बता रहा था कि वे रात को भी कम सो रहे हैं। उन्हें हर समय अब मीडिया का भूत सता रहा है। बताते हैं कि रामविलास पासवान के मीडिया प्रेम का भूत उतारने के लिए प्रधानमंत्री ने खरी-खरी सुना दी थी। तब से राम विलास पासवान मीडिया से जोरदार दूरी बनाए हुए हैं। जबकि रामविलास की आदत है कि बिना अखबार में अपनी खबर और फोटो देखे उन्हें चैन नहीं मिलता। मीडिया में कुछ पत्रकारों को इसमें महारत हासिल थी। मीडियाकर्मी उन्हें चिढ़ाने के लिए पासवान कैडर बुलाते थे, लेकिन अब पासवान की ऐसी दशा देखकर जहां पासवान कैडर कुछ समझ नहीं पा रहा है वहीं पासवान को भी कोई उपाय नहीं सूझ रहा है।

ना बाबा ना

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विदेश मंत्रालय एक दुविधा में फंसा है। उसे 40-45 दूत नियुक्त करने हैं। इन्हें विभिन्न देशों में नियुक्त किया जाना है, ताकि देश हित को साधा जा सके। लेकिन सुना है कि मोदीजी चाहते हैं कि इनमें कोई यूपीए सरकार का हिमायती न हो, बल्कि बेहतर तो यही होगा सभी नए और युवा हों। लेकिन, मंत्रालय की दुविधा है कि वरिष्ठों को नजरअंदाज करके कनिष्ठों को कैसे जिम्मेदारी दे। कहीं वरिष्ठ नाराज हो गए तो आगे काम बिगड़ न जाए। बताते हैं कि इस मामले में विदेश मंत्री भी कोई मदद नहीं कर पा रही हैं, जबकि प्रधानमंत्री जी को फरमान सुनाने के बाद केवल सफलता के नतीजे सुनने की आदत है।

सब ठीक हो जाएगा

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ज्योतिष से हाथ दिखवाने के बाद से ही मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बताते हैं कि उनकी फ्री-स्टाइल से जहां प्रधानमंत्री मोदी कुछ कुपित होने लगे हैं, वहीं पीएम को ज्योतिष व्यास के जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होना भी नागवार गुजरी। इधर ईरानी की एक कॉलर बोन में दर्द है। शाल से ढंककर संसद आ रही हैं। कुछ महिला सांसदों ने देखा तो पूछ बैठीं। अब बताइये भला ईरानी क्या कर सकती हैं। जैसे भी चोटिल होना था हो गई। कहना पड़ा कि जल्द ही सब कुठ ठीक हो जाएगा।

वाह रे केजरीवाल

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अपने आपको आम आदमी का नेता मानने वाले अरविन्द केजरीवाल आजकल गिने-चुने खास आदमियों के नेता बन गए हैं। पता चला है कि अभी-अभी नेताजी दुबई गए थे, वो भी बिजनेस क्लास में। दर्शकों को बात बड़ा अटपटा सा लगा। वैगन-आर में चलने वाले मुख्यमंत्री अब हाई-फ्लाईंग होने की कोशिश कर रहे हैं। बात तो स्वाभाविक है, क्योंकि दिल्ली के सारा आम आदमी अब धीरे-धीरे ‘आप’ से खिसकने लगे हैं,। यहां तक कि जितने ऑटोचालक उनके साथ जुड़े थे वे सब भी निराश होकर भाजपा के दरवाजे खटखटाने लगे हैं। ‘आम आदमी का चेहरा’ को पूरी तरह से मार्केटिंग करने के बाद जब वे नेता बने, तब जाकर उनको ‘नेतागिरी’ का स्वाद अच्छा लगने लगा है और आम आदमियों को पता चल गया कि केजरीवाल अब उनके नहीं रहे।

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