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बहने लगी है विकास की बयार

बहने लगी है विकास की बयार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने निवेश और नये उद्योगों के लिये सहुलियतों के दरवाजे खोल दिये हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रदेश के लिये व्यवसायिक घरानों के लिये रैड कॉर्पेट खोलना भी कहा जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस कदम से प्रदेश में वर्षों से लगभग बंद पड़े व्यवसायिक निवेश को एक गति मिलना तय है साथ ही सरकार के इस कदम से राज्य के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा नौकरी मिलेगी और व्यावसायिक क्षेत्र का विकास होना तय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक नीति की उद्योग जगत में हर तरफ सराहना हो रही है। इतना ही नहीं इसी महीनें 21-22 फरवरी को लखनऊ में निवेशकों का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है जो कि उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वर्ष 2022 तक प्रदेश में 5 लाख करो रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा है। 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश के बाद प्रदेश में 20 लाख रोजगार उत्पन्न होंगे। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इसके लिए पूरा प्लेटफॉर्म तैयार कर दिया है। निवेश के लिए आवश्यक शर्तों में सड़क, बिजली, पानी की बेहतर व्यवस्था और कानून व्यवस्था दुरूस्त होनी चाहिए जिसके लिए सरकार ने बेहतर कार्य किया है। भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश के लिए सरकार ने समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है। यही नहीं ई-टेंडरिंग और अन्य विभिन्न प्रकार से सुधार के प्रयास किए हैं।

निवेशक शिखर सम्मेलन में अमेरिका, कोरिया और जापान समेत एक दर्जन से ज्यादा देशों को न्यौता भेजा गया है। राज्य सरकार 1 जनवरी से एकल खिड़की प्रणाली के तहत विभिन्न शासकीय मंजूरियां देने की तैयारी भी कर रही है। 21-22 फरवरी को लखनऊ में निवेशकों का शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिये रोड शो आयोजित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए 13 नीतियों को चिह्नित किया गया है। इनमें औद्योगिक विकास नीति भी शामिल है, जिसके तहत प्रदेश में उद्यमियों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं के समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

अमेरिका की 2 दर्जन से ज्यादा कंपनियों ने प्रदेश में निवेश के लिए दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश की निवेश नीति रेड टेप से रेड कॉरपेट तक आ गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के लिए जल्दी ही एक नयी नीति लाएगी।

उत्तर प्रदेश में घरेलू निवेश को नये आयाम देने के लिये को बढ़ावा देने के लिये उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रधान सचिव नवनीत सहगल ने आज यहां यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि यह ग्रामोद्योग के लिए देश में अलग किस्म की नीति होगी। उन्होंने कहा की यह नीति सफल रही तो उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य होगा जिसकी ग्रामीण उद्योगों के लिए अपनी अलग नीति होगी।

श्री सहगल ने कहा कि प्रस्तावित नीति को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाना है। इस नीति के तहत किसी भी ग्राम उद्योग को छोटे स्तर पर उत्पादन करने और रोजगार पैदा करने वाली इकाई के रूप में चिन्हित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नयी नीति का मसौदा तैयार करते वक्त ग्रामीण उद्योग को स्पष्ट तरीके से परिभाषित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित नीति में किसी भी ग्रामीण उद्योग में निवेश की सीमा 25 लाख रूपए तय की गयी है। इसमें सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय मदद का भी प्रावधान है।

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पिछली सरकारों की गलतियों की वजह से पिछले तीन  चार वर्षों से ठप्प पड़े प्रदेश के औद्योगिक माहौल को फिर बनाने के लिए राज्य सरकार ने अवस्थापना औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र में निवेश का माहौल तैयार किया जा रहा है। उसमें उद्यमिता विकास के लिए नीतियों का सरलीकरण ई-गवर्नेन्स को बढ़ावा, अवस्थापना सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण नये पूंजी निवेश को प्रोत्साहन, एमएसएमई के विकास के साथ ही औद्योगिक सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा गया है। इसमें पंजीकरण शुल्क में छूट के साथ ही ब्याज मुक्त ऋण की भी व्यवस्था की गयी है। नई औद्योगिक नीति से निवेश  हुआ है। पूर्वांचल एवं बुंदेलखण्ड में स्थापित होने वाली तथा विस्तारीकरण करने वाली इकाईयों को भूमि के क्रय करने, पट्टे पर लेने अथवा भूमि के अधिग्रहण की दिशा में स्टाम्प शुल्क में शत प्रतिशत छूट उपलब्ध होने की व्यवस्था है। केन्द्र सरकार द्वारा विशेष औद्योगिक परिक्षेत्रों (एसईजेड) को सुविधाएं प्रदान करने के साथ ही राज्य सरकार नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग इन्वेस्टमेंट जोन की स्थापना का प्रस्ताव भी नई औद्योगिक नीति मेंं शामिल है। डेडीकेटेड फ्रंट कॉरिडोर परियोजना तथा दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना प्रदेश के कई जिला से होकर गुजरेगी। ऐसे जिलों में लॉजिस्टिक हब का विकास कराया जाएगा। गौरतलब है कि देश में उद्यम प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले यूपी का हाल बेहाल है। एक-एक करके बड़े-बड़े उद्योग बन्द हो गये या यहां से उखड़ कर पड़ोसी प्रदेशों में लग गये। नये उद्योग लगाने के लिये पिकप की परिकल्पना भ्रष्टाचार और लूट खसौट की भेंट चढ़ गयी जिसके कारण सरकारी कोशिशों परवान चढ़ती नहीं दिखायी दे रही हैं औद्योगीकरण पर जोर देने के बावजूद सन् 2001-02 से 2005-06 तक सूबे में 2160 पंजीकृत कारखाने या तो बंद हुए या फिर बीमार घोषित होने के कारण ठप्प हो गए। औद्योगीकरण घोर क्षेत्रीय असमानताएं है। दो तिहाई कारखानों में हो रहे कुल पूंजी निवेश का चैथाई से ज्यादा हिस्सा सिर्फ गौतमबुद्ध नगर जिले में जा रहा है। कानपुर शहर में लगभग 5,000 से अधिक ऐसी लघु कम्पनियां हैं, जो लघु उत्पादों के कार्यों में लगी हुई हैं। जिनके लिये केंद्र सरकार ने ऋण देने की योजना बनाई है, लेकिन इन छोटे उद्योगों को ऋण के अभाव में बड़े साहूकारों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है। जिसका फायदा उठाकर बड़े साहूकार इनसे अधिक से अधिक ब्याज वसूल रहे हैं। स्वरोजगार के अन्तर्गत युवाओं द्वारा लगाये गये लघु उद्योग बड़ी संख्या में बीमार हो गये है। ऋण ग्रस्त युवाओं के सामने अन्धेरा ही अन्धेरा है। उनके पुर्नवास के लिये वर्ष 2000 से पूर्व के सभी स्वरोजगार अन्तर्गत ऋण ग्रस्त लघु उद्योग इकाईयों की कर्ज माफी की योजना लानी होगी, क्योंकि चीनी सामानों के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।  कानपुर शहर मेंं मिश्रित आकार के तकरीबन 5457 एसएसआई हैं, जिसमें से 830 धातु उत्पादों, 819 चमड़ा उत्पादों, 443 खाद्य उत्पादों, 416 रबड़ व प्लास्टिक, 396 मशीनी कलपुर्जें, 387 होजरी एवं परिधान, 337 रसायन, 318 कागज उत्पादों, 346 सूती वस्त्र के निर्माण में लगे हुए हंै, जो खासकर गर्वमेंट इंडस्ट्रियल एस्टेट (कल्पी रोड एंड फजलगंज), इंडस्ट्रियल एस्टेट, को-आपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट (दादा नगर), पनकी इंडस्ट्रियल एरिया और जजमऊ इंडस्ट्रियल एरिया में माजूद हैं। विदेशी निर्यात में बड़ा योगदान वाले लघु उद्योगों को धन की कमी के कारण अपने ही देश के साहूकार व्यापारियों का खूून चूसने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रदेश से दिन प्रतिदिन उद्योगों के पलायन के पीछे बिजली की पर्याप्त आपूर्ति न होना, लूट-डकैती की बढ़ती वारदातें, सरकारी महकमों में फाइल सरकाने के बदले चलने वाली सेवा मंत्री से संतरी तक अनुमति और छापों में चढऩे वाला चढ़ावा, इन सब ने हालात यहां तक पैदा कर दिए कि कोई भी उद्योगपति यूपी में नई औद्योगिक इकाई लगाने से बिदकने लगा। आलम यहां तक आ पहुंचा है कि देश में बीमार राज्य के रूप में पहचान बना चुके बिहार ने भी हमें पीछे छोड़ दिया है और उत्तर प्रदेश सबसे फिसड्डी है। औद्योगिक माहौल किस कदर उत्तर प्रदेश में बीते सालों में बिगड़ा है।

इसकी तरदीक करती है सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी की गयी रिपोर्ट मेें स्पष्ट कहा गया है कि उद्योगों के मामले में यूपी लगातार पिछड़ रहा है। औद्योगिक विकास के सपनों को साकार करने के लिए कवायद में जुट गयी योगी सरकार एमओयू साईन करके प्रदेश में औद्योगिक विकास की गंगा बहाने के लिए सपने देख रही है, उन सपनों को जमीन पर उतारने के लिए रास्ते में भले ही अनेक कंटक नजर आ रहे हैं। लेकिन उनका मानना है कि विकास की बयार आकर ही रहेगी। आईटी हब का आकार भले ही छोटा हो गया हो लेकिन उम्मीदों का आकाश अभी  भी बहुत बड़ा है और औद्योगिक विकास के सब्जबाग आज भी हरे हंै।

शहजाद अख्तर

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