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”हिमगिरी पर बहती रहेगी विकास की धारा’’

”हिमगिरी पर बहती रहेगी विकास की धारा’’

हिमाचल प्रदेश जैसे सांस्कृतिक और प्राकृतिक रूप से अत्यंत सम्पन्न मगर आर्थिक तौर पर पिछड़े हुए पहाड़ी राज्य की बागडोर संभालने वाले भाजपा सरकार के युवा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की छवि एक ईमानदार, सादगी पसंद एवं कर्मठ राजनेता की है। छात्र जीवन से ही उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से घनिष्ठ संबंध रहा है। वे लम्बे समय तक विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता भी रहे। वे लगातार पांचवीं बार विधायक बने हैं। राजनीति में शुचिता के हिमायती और सत्ता को समाज के अंतिम व्यक्ति के समग्र विकास एक साधन मानने वाले इस युवा मुख्यमंत्री का दीनदयाल उपाध्याय चिंतन में गहरा विश्वास है। वे चाहते हैं कि किसान, बागवान, मजदूर, दबे-कुचले वर्गों, विकलांगजनों, बेघर-बेसहारा बुजुर्गों व माताओं बहनों, अनाथ बच्चों और अन्य निर्धन लोगों के लिए न सिर्फ सरकारी नीतियों में सुधार हो बल्कि धरातल के स्तर पर उन्हें संबल मिले। प्रारंभ से ही कमजोर वर्गों के लिए काम करने का उद्देश्य लेकर चल रहे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपनी सरकार को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने का वायदा करते हैं। मंडी जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में निर्धन परिवार में जन्मे जयराम ठाकुर के पिता मिस्त्री थे। उन्होंने गरीबी और अभाव को करीब से देखा ही नहीं बल्कि जिया है। अब वह हिमाचल को एक उन्नत राज्य बनाने का सपना देखते हैं। प्रस्तुत हैं शिमला में प्रो. अजय श्रीवास्तव से उनकी बातचीत के प्रमुख अंश:

मुख्यमंत्री बनने पर उदय इंडिया परिवार की ओर से बहुत बहुत बधाई। एक निर्धन परिवार में जन्म लेने के बाद से आज तक का सफर कैसा लग रहा है?

मेरी यह यात्रा अनेक कठिनाईयों और संघर्षों से भरी रही। पिताजी लकड़ी का काम करने वाले मिस्त्री थे और परिवार आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर था। लेकिन संस्कारों और मूल्यों की दृष्टि से हम बहुत सम्पन्न थे। मेरे माता-पिता और बड़े भाईयों ने सच्चाई, ईमानदारी और कड़ी मेहनत की मौखिक शिक्षा नहीं दी बल्कि उस पर अमल करके दिखाया। इसका मुझ पर प्रभाव पडऩा स्वाभाविक था। फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आने पर मेरा दृष्टिकोण और व्यापक हुआ। इन संगठनों से मुझे समाज के दूसरे लोगों, विशेषकर दुर्बल वर्गों के लिए काम करने की प्रेरणा मिली। मैं दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन से काफी प्रभावित रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के आशीर्वाद से मुझे अब बड़े स्तर पर कार्य करने का अवसर मिला है तो मैं सत्ता को समाज-परिवर्तन के एक साधन के रूप में उपयोग करूंगा।

आपके लिए मुख्यमंत्री पद कांटों भरे मुकुट से कम नहीं है। सरकार का खजाना खाली है। राज्य पर 46500 करोड़ रुपए का कर्ज है, विकास के लिए धन ही नहीं है।

यह सच है। विगत पांच वर्ष के कांग्रेस शासन में राज्य की आर्थिक स्थिति को बिलकुल चौपट कर दिया। आय के साधन बढ़ाने, फिजूल खर्ची रोकने और उपलब्ध सीमित संसाधनों के औचित्य पूर्ण उपयोग की ओर ध्यान देने की बजाय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह स्वयं को कानून की गिरफ्त से बचाने में ही व्यस्त रहे। उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप दर्ज हैं और न्यायालय में कार्यवाही चल रही है। एक भ्रष्ट और दिशाहीन सरकार ने राज्य को कंगाल कर दिया। आज हर हिमाचलवासी के सिर पर 66 हजार रुपए का कर्ज है।

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इस आर्थिक दुर्दशा से राज्य को उबारने के लिए आप क्या कदम उठाएंगे?

हमारी सरकार का पहला प्रयास तो यही रहेगा कि हम कर्ज को और न बढऩे दें। इसके लिए फिजूलखर्ची पर अंकुश लगेगा। हम कांग्रेस सरकार के अंतिम छह महीनों की सभी घोषणाओं पर पुनर्विचार करेंगे जो सिर्फ विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की गईं थीं। बिना बजट आवंटित किए वोट के लालच में झूठे वादे करना राजनीतिक अपराध है जो कांग्रेस सरकार ने खुलकर किया।  केंद्र-प्रायोजित योजनाओं पर हम विशेष ध्यान देंगे जिससे विकास कार्यों को बढ़ावा मिले। पिछली सरकार को केंद्र की मोदी सरकार ने हजारों करोड़ की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की मगर वह उसका उपयोग नहीं कर पाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हमें बहुत आशाएं हैं। केंद्र की उदार आर्थिक सहायता से हिमाचल को राहत मिलेगी।

सरकार की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाएंगे?

पर्यटन और पनबिजली योजनाओं की ओर हमारा विशेष ध्यान होगा। पंजाब और हरियाणा के साथ लगते हिमाचल के क्षेत्रों में उद्योगों की स्थिति में सुधार एवं नए उद्योगों के लिए निवेश आमंत्रित करने के प्रयास भी होंगे। हिमाचल में कृषि एवं बागवानी पर आधारित उद्योगों का भविष्य भी उज्ज्वल है। इसलिए यह भी हमारी सरकार की प्राथमिकता में रहेगा।

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हिमाचल में पर्यटन एवं औद्योगिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण का सीधा संबंध है। पारिस्थितिकीय संतुलन पर भी ध्यान देंगे?

एक बात बिल्कुल स्पष्ट है। हमारी सरकार पर्यावरण संरक्षण को उच्च प्राथमिकता देगी। इसे ध्यान में रखकर ही सभी योजनाओं का क्रियान्वयन होगा। हिमालय क्षेत्र में यदि पर्यावरण खतरे में पड़ेगा तो इसका प्रभाव पूरी मानवता पर होगा। अंधाधुंध विकास की जगह संतुलित विकास हमारी नीति रहेगी। हम धार्मिक, इको एवं एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देंगे। बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से हम सड़क एवं हवाई मार्ग का विकास करेंगे और अन्य सुविधाएं जुटाएंगे। इसमें निजी क्षेत्र की भी मदद ली जाएगी।

मनाली से लाहौल घाटी के बीच बन रही रोहतांग सुरंग को आप किस दृष्टि से देखते हैं? क्या इससे सीमावर्ती जनजातीय जिले लाहौल-स्पीती में विकास के द्वार भी खुलेंगे?

देखिए, यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की दूरदृष्टि का परिणाम है कि आज रोहतांग सुरंग बन कर तैयार है। इसका महत्व तिब्बत से सटे लाहौल-स्पीती जिले में पर्यटन एवं अन्य विकास तक ही सीमित नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। तिब्बत में काबिज चीन के अलावा पाकिस्तान से हमारी सीमाओं को होने वाले खतरे को देखते हुए यह सुरंग हर मौसम में हमारी सेनाओं और रसद की आवाजाही सुनिश्चित करेगी। अभी छह महीने से अधिक समय तक रोहतांग दर्रा बर्फ के कारण बंद होने पर सैन्य बलों के लिए जम्मू-कश्मीर से होकर जाने वाला रास्ता ही एकमात्र विकल्प होता है। रोहतांग सुरंग पर्यटन एवं क्षेत्र के विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लद्दाख क्षेत्र में जाने वाले पर्यटकों के लिए सुरंग मार्ग से रोहतांग दर्रा पार करना रोमांचक और सरल होगा। इससे लाहौल घाटी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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हिमाचल में हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्योग के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं। क्या इस क्षेत्र में सरकार ध्यान देगी?

अवश्य। अभी तक इस दिशा में कोई बड़ी पहल नहीं हुई है। हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उद्योग युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर सकते हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। हम इसकी संभावनाओं का पता लगाएंगे और उसके आधार पर काम करेंगे। अभी इस क्षेत्र में मार्केटिंग की समस्या भी है।

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदेश में जैविक कृषि एवं गऊ संरक्षण को जोड़ कर एक नई चेतना लाने का प्रयास किया है। आपकी सरकार उनके काम को आगे बढ़ाएगी?

आचार्य देवव्रत जी ने एक नहीं, कई मामलों में राज्य को नई दिशा दी है। जैविक खेती पर उनके अनुभव आश्चर्यजनक हैं। हम उनके मार्गदर्शन में इस ओर विशेष प्रयास करेंगे। यह समय की जरूरत है। हिमाचल जैसी भौगोलिक स्थिति वाला राज्य सिक्किम हमारे लिए एक अच्छी मिसाल है। उसे ‘ऑर्गेनिक राज्य’ घोषित किया गया है। मैं स्वयं सिक्किम जाकर इस बारे अधिक जानकारी प्राप्त करूंगा।

विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने राज्य में भ्रष्टाचार, ड्रग-माफिया और खनन माफिया को खत्म करने का वादा भी किया था!

यह हमारी प्राथमिकता में है। मैं राज्य की जनता को भ्रष्टाचार मुक्त, साफ-सुथरा प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध हूं। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश को नशे की अंधी सुरंग में धकेलने की कोशिश की गई। बड़ी संख्या में युवा नशे का शिकार बने। इसी तरह अवैध एवं अवैज्ञानिक खनन ने राज्य को बहुत नुकसान पहुंचाया। अब इस ओर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेवारी तय की जाएगी।

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राज्य में लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है। राज्य मानवाधिकार आयोग भी अस्तित्व में नहीं है जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग के पीडि़तों को न्याय पाने में कठिनाई होती है।

ये मुद्दे मेरे ध्यान में हैं। जल्द ही सरकार उचित कदम उठाएगी। यह सरकार सभी वर्गों और विशेषकर दुर्बल वर्ग के लोगों की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देगी।

एक समय हिमाचल में अपराध का ग्राफ काफी नीचे था। अब कानून व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है।

सत्ता में आते ही हमने कई कदम उठाए हैं। जिलों के पुलिस प्रमुखों समेत पुलिस में व्यापक फेरबदल किया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक को बदल कर एक अत्यंत काबिल, कर्मठ एवं ईमानदार अधिकारी सीताराम मरड़ी को इस पद पर लगाया गया है। बेटियों की सुरक्षा के लिए ‘गुडिय़ा हेल्पलाइन’ और वन सुरक्षा हेतु ‘होशियार हेल्पलाइन’ शुरू की जा रही है। हम जनता का विश्वास बहाल करने के लिए और प्रयास भी करेंगे।

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आपकी सरकार की प्राथमिकता के अन्य क्षेत्र कौन से होंगे?

शिक्षा में संस्थानों के संख्या बढ़ाने की बजाए हम गुणवत्ता पर जोर देंगे। शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं एवं शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे। इसी तरह सभी स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा। केन्द्र-प्रायोजित योजनाओं पर शीघ्र आवश्यक कारवाई की जाएगी। इनके अलावा ई- गवर्नेंस भी मेरी प्राथमिकता में है।

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