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एक क्रांतिकारी की गाथा

एक क्रांतिकारी की गाथा

By उदय इंडिया ब्यूरो

क्रांति और समाजवाद का जो सपना बीसवीं सदी की शुरुआत में रुसी क्रांति (1917) और चीनी क्रांति (1949) में साकार हुआ और जिसने विश्व-भर में मुक्तिकामी शक्तियों को अभूतपूर्व प्रेरणा दी, वह बीसवीं सदी के अंतिम दशकों में सोवियत पतन और चीन में बाजारवाद के प्रसार के कारण जबरदस्त धक्के का शिकार हो गया और संघर्ष की शक्तियों में भी हताशा के लक्षण प्रकट होने लगे। अमेरिकी प्रभुत्व में विश्व-पूंजीवाद ने आक्रामक बढ़त लेनी शुरू की और जन विकासशील देशों ने समाजवाद के साथ थोड़ा बहुत सामंजस्य बैठा रखा था, उन्होंने भी कल्याणकारी राज्य का चोला उतार फेंका और विश्व बैंक और आई. एम. एफ. के निर्देशों के अनुसार बहुराष्ट्रीय निगमों और कॉरपोरेट पूंजी के लिए फाटक खोल दिए। इस समूचे दौर में अमेरिका के नाक के ठीक नीचे विश्व पूंजीवाद को चुनौती देता खड़ा रहा फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में समाजवादी क्यूबा। फिदेल कास्त्रो, क्यूबाई क्रांति का महानायक, जिसने अमेरिका के ग्यारह राष्ट्रपतियों की धौंस-पट्टी, सैनिक हस्तक्षेप, घुसपैठ, षडयंत्र, आर्थिक नाकेबंदी का मुकाबला किया। कास्त्रो ने लैटिन अमेरिका मुक्ति-संग्राम के नायक सिमोन बोलिवर और जोस मार्टी के शौर्य-गाथा को अपने लम्बे और शानदार अभियानों के द्वारा विजयगाथा में बदल दिया और एक जनवरी 1959 को सदियों पुरानी गुलामी की जंजीरों को तोड़कर क्यूबा को स्वतंत्र सर्वभौमिक राष्ट्र का दर्जा दिलाया।

फिदेल और क्यूबा की क्रांति को समझने के प्रयास की सीढिय़ां पुस्तक में लेखक  ने कुछ इस तरह तय की हैं। सबसे पहले लैटिन-अमेरिकी और क्यूबा की क्रांतिकारी विरासत को उसके महानायकों के मुक्ति संघर्षों के माध्यम से समझने का प्रयास। फिदेल के जन्म के समय क्यूबा के राजनितिक-सामाजिक स्तिथियां। फिदेल का बचपन और व्यक्तित्व निर्माण के बीज मूल्य। फिदेल की क्रांति की पाठशाला – हवाना विश्वविद्यालय और अंतर्राष्ट्रीयता के प्रारंभिक अभियान – केयो कन्फिट्स और बोगोटाजो। क्रांति की पहली चिंगारी – बतिस्ताशाही के खिलाफ मोंकडॅ बैरक पर हमला, हमले की असफलता, बतिस्ता तानाशाही का दमन अभियान, फिदेल पर मुकदमा और क्रांति का पहला मैनिफेस्टो ‘हिस्ट्री विल एब्सॉल्व मी’।

क्रांति की तैयारी के लिए मेक्सिको प्रवास और ग्रानमा अभियान। सिएरा पहाडिय़ों पर संघर्ष, 26 जुलाई आंदोलन, बतिस्ता सेना का अंतिम हमला और पराजय, क्रांतिकारी सेना का विजय-अभियान, बतिस्ता का पलायन, फिदेल का हवाना-क्रांति की निर्णायक विजय। नए क्यूबा के निर्माण में क्रांतिकारी अभियान का प्रारम्भ, कृषि सुधार और राष्ट्रीयकरण, अमेरिकी प्रतिक्रिया और आर्थिक नाकेबंदी, डर्टीवार, बे ऑफ पिग्स की लड़ाई, मिसाइल संकट, शांतिकाल का विशेषकल। क्रांति की वैचारिकी, रंगभेद, महिला प्रश्न, धर्म और नैतिकता, त्रुटियों का परिमार्जन, विचारों का संघर्ष। चे की अनमोल शहादत और अंत फिदेल-एक जिंदा क्रांति, एक सच्चा इंसान।

किसी भी दृष्टि से यह प्रयास फिदेल के संपूर्ण व्यक्तित्व और कृतित्वा को पस्तुत करने का दावा नहीं करता। यह काम किसी एक पुस्तक के लिए मुमकिन भी नहीं है। फिदेल के क्रांतिकारी संघर्षों ने आधी सदी से ज्यादा लम्बे कालखण्ड में ग्यारह राष्ट्रपतियों – आइजनहावर, केनेडी, जॉनसन, निक्सन, फोर्ड, कार्टर, रीगन, बुश सीनियर, बुश जूनियर और ओबामा का सामना किया है। यह प्रयास उस अद्भुत कालखण्ड की प्रतिनिधि घटनाओं के माध्यम से फिदेल के व्यक्तित्व और कृतित्व समझने का है। यह घटनाओं को निर्विकार-निरपेक्ष बौद्धिक नजरिये से नहीं, बल्कि एक स्थिति-सापेक्ष संवेदनशील इंसान के रूप में निरेखने-परखने का प्रयास है। यह प्रयास किसी रचना, साहित्य अथवा इतिहास की हैसियत में होने का दावा बिलकुल नहीं करता और है भी नहीं। यह एक बेहतर, न्यायपूर्ण, समतामूलक दुनिया के लिए आज के अन्याय, अनीति और असमानता को फिदेल द्वारा दी जा रही चुनौती को एक आम श्रमशील व्यक्ति द्वारा समझने का विनम्र प्रयास भर है।

13-12-2014

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