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भारत के गुप्त रहस्य

भारत के गुप्त रहस्य

पुस्तक ‘सीक्रेट इंडिया’ अंग्रेजी भाषा में पाल ब्रन्टन के द्वारा लिखी गयी थी। इसी पुस्तक का हिंदी में अनुवाद किया है लेखक ‘आशुतोष गर्ग’ ने और शीर्षक दिया है ‘गुप्त भारत की खोज’। पाल ब्रन्टन ने सीक्रेट इंडिया शीर्षक रखने का कारण बताते हुए लिखा है कि मैंने यह शीर्षक इसलिए दिया है क्योंकि यह हमें ऐसे भारत के विषय में बताती है,जिसने स्वंय को हजारों वर्षों से जिज्ञासु नजरों से छिपाए रखा है, और जिसने खुद को इतना विशिष्ट बना लिया कि आज इसके केवल कुछ अवशेष बाकी हैं और वे भी बहुत तेजी से लुप्त हो रहे हैं। योगियों ने जिस तरह अपने ज्ञान को गूढ़ बनाकर रखा, वह हमें आज के लोकतांत्रिक दिनों में स्वार्थ प्रतीत हो सकता है, परंतु वह प्रत्यक्ष इतिहास में से उनके धीरे-धीरे लुप्त होने के कारण को जानने में सहायता करता है। भारत में हजारों अंग्रेज रहते हैं और हर साल सैकड़ों लोग भारत-भ्रमण पर आते हैं। तथापि इनमें से कोई उस तथ्य को नहीं जानता जो एक दिन संसार के लिए भारत से जहाज में लाए जाने वाले बहुमूल्य मोतियों एवं महंगे रत्नों से भी अधिक उपयोगी सिद्ध होगा। इसके बाद भी,बहुत कम लोगों ने लीक से हटकर योगियों को खोजने का प्रयास किया है, और एक भी अंग्रेज, किसी सुनसान गुफा अथवा शिष्यों से भरे कमरे में, एक सांवले रंग के अद्र्ध-नग्न मनुष्य के सामने नतमस्तक होने को तैयार नहीं होता। वर्ण-व्यवस्था द्वारा थोपी गई यह बाधा इतनी विचित्र है कि यदि एक कुलीन एवं बुद्धिमान व्यक्ति को भी अचानक उसके अंग्रेजी आवास से निकालकर किसी गुफा में भेज दिया जाए,तो उसे भी एक योगी की न तो संगति पसंद आएगी और न ही उसकी बातें समझ में आएंगी।

गुप्त भारत की खोज

लेखक                    : पॉल ब्रन्टन

अनुवाद                 : आशुतोष गर्ग

प्रकाशक                : मंजुल पब्लिशंग हाउस

मूल्य                      : २९५ रु.

पृष्ठ                        : ३१६

‘गुप्त भारत की खोज’ पुस्तक गुरू की तलाश पर आधारित एक असाधारण कृति है। लेखक ने पुस्तक को कुल 17 अध्यायों में विभक्त किया है, जिसमें प्रमुख हैं-खोज से पहले की भूमिका,मिस्त्र का जादूगर, मसीहा से भेंट, अड्यार नदी का संन्यासी, मृत्युंजय योग, मौनी बाबा, दक्षिण भारत के आध्यात्मिक गुरू, जादूगरों और साधुओं के बीच, बनारस का करामती संन्यासी, जंगल के एक आश्रम में। इस पुस्तक के एक अध्याय ‘अड्यार नदी का संन्यासी’ में लेखक ने बताया है कि अड्यार नदी मद्रास से होकर बहती है और इसी नदी से शहर की दक्षिणी सीमा बनती है। उसके बाद यह कोरोमंडल के उंचे-नीचे तट से होती हुई समुद्र में मिल जाती है। मैं एक सुबह, इसी मनोहरी नदी के किनारे अपने एक ब्राहा्रण परिचित व्यक्ति के साथ टहल रहा हूं। उसे यह ज्ञात हो गया कि मेरी रूचि किस दिशा में है। वह कुछ देर बाद अचानक मेरा हाथ पकड़ लेता है। वह कहता है, क्या तुम उस युवक को देख सकते हो, जो हमारी ओर आ रहा है? लोग इसे योगी मानते हैं। तुम्हारी इसमें रूचि हो सकती है, परंतु दु:ख की बात है कि वह हमसे कभी बात नहीं करता।

यह पुस्तक वैसे पाठकों के लिए उपयोगी है, जिन्हें भारत के गूढ़ रहस्यों के बारे में जानने-समझने की ललक हो और जिसे  सच्चे आध्यात्मिक गुरू की तलाश हो। पुस्तक ‘गुप्त भारत की खोज’ अंग्रेजी पुस्तक ‘सीक्रेट इंडिया’ का ही हिंदी में अनुवाद है। अंग्रेजी पुस्तक के लेखक ‘पॉल ब्रन्टन’ के पुस्तक का आशुतोष गर्ग ने बहुत ही सुंदर ढंग़ से हिंदी में अनुवाद किया है। कुल मिलाकर पाठकों के लिए यह पुस्तक ज्ञानवद्र्धक है।

 

आशुतोष कुमार

 

 

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