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ब्रह्माकुमारी शिवानी: आध्यात्मिक ज्ञान की भागीरथी

ब्रह्माकुमारी शिवानी:  आध्यात्मिक ज्ञान की भागीरथी

संसार में सैकड़ों धार्मिक संस्थान, परम्पराएं, विचारधाराएं प्रचलित हैं। लेकिन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय विश्व का एकमात्र ऐसा संस्थान और धर्म है जिसकी संचालिकाएं, प्रशासिकाएं, आचार्या-प्राचार्या प्राय: बहनें-माताएं ही हैं। संसार में सबसे शांतिप्रिय संस्थान होने के कारण ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ द्वारा इसे अनेकों बार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांतिदूत पदक से नवाजा गया है। इसमें महिलाओं को प्राथमिकता देने का कारण है कि हमारी भारतीय आदि सनातन संस्कृति में देवियों की ही प्रधानता थी। देखा भी जाता है कि सद्गुण बहनों में ज्यादा होते हैं पर कलयुग में इन्हें छोटे दायरों में बांध दिया गया। इस सृष्टि रंगमंच की महिलाएं ही विधात्री ही नहीं, सुषमा भी हैं। धर्म के क्षेत्र में भी महिलाओं ने विशिष्ट योगदान दिया है और उसके लिए ब्रह्माकुमारीज का योगदान अविस्मरणीय है। उनके एक चमकता, दमकता नाम है-ब्रह्माकुमारीज शिवानी का, वे विश्वव्यापी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी परम्परा एवं धार्मिक मान्यता की एक विभूति हैं।

ब्रह्माकुमारी शिवानी का जन्म 19 मार्च 1972 को पुणे शहर में हुआ। उन्होंने 1994 में पुणे विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक विजेता के रूप में अपनी इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूरी की और फिर भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे के एक प्राध्यापक के रूप में दो साल तक काम किया। एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने माता-पिता के बचपन में ब्रह्माकुमारी में जाने की बात कही, लेकिन बाद में उनकी शादी विशाल वर्मा के साथ हो गयी। लेकिन 23 साल की उम्र में वह

स्वयं ब्रह्मकुमारी कार्यशालाओं में जाने के लिए फिर से जुट गई और 1995 से ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सक्रिय सदस्य एवं आध्यात्मिक गुरु हैं। वह सार्वजनिक सेमिनारों और टेलीविजन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रेरक पाठ्यक्रम संचालित करती है। सन् 2008 के बाद से वह भारत में और भारतीय दर्शकों के बीच टेलीविजन शृंखला ‘अवेकिंग विद ब्रह्माकुमारी’ में अग्रणी भूमिका निभाई है, जो संस्कार, आस्था आदि चैनलों पर नियमित प्रसारित होता रहा है। इससे जुड़कर वे आध्यात्मिक प्रवचन देती हैं जो लोगों को अध्यात्म से जुड़कर मानव कल्याण के लिए प्रेरित करता है। इनके प्रवचनों को लोगों ने बहुत पसंद किया है। न सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में उनको विभिन्न संस्थाओं द्वारा आध्यात्मिक प्रवचन के लिए बुलाया जाता है। इसके अलावा हिन्दी और अंग्रेजी  में विभिन्न चैनलों पर प्रसारित प्रमुख धारावाहिक हैं- राजयोग मेडिटेशन, डिप्रेशन, विज्डम ऑफदादी जानकी, इनर ब्यूटी, लाइफ स्किल्स। इन सभी धारावाहिकों में वे ब्रह्माकुमारीज की धार्मिक मान्यताओं, सिद्धांतों एवं ज्ञान को जन-जन तक पहुंचा रही हैं।

ब्रह्माकुमारीज विश्व भर में फैला हुआ एक ऐसा आध्यात्मिक संस्थान है जो व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व नवनिर्माण के लिए समर्पित है। सन् 1937 में दादा लेखराज ने इसकी स्थापना की। इसके बाद ब्रह्माकुमारीज का इस समय विश्व के 137 देशों में 8500 से अधिक शाखाओं के रूप में विस्तार हो चुका है। इन शाखाओं में लाखों विद्यार्थी प्रतिदिन नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। हालांकि उनकी वास्तविक प्रतिबद्धता व्यक्ति को अपने दृष्टिकोण में भौतिक से आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करने को प्रेरित करना है। इससे शान्ति की गहरी सामूहिक चेतना और व्यक्तिगत गरिमा के निर्माण करने में हरेक आत्मा को मदद मिलती है। इन कार्यों में शिवानी का योगदान अनूठा है।

ब्रह्माकुमारीज का अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय भारत के राजस्थान प्रांत के माउण्ट आबू में स्थित है जो ब्रह्माकुमारीज महिलाओं द्वारा चलाई जाने वाली विश्व में सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है। इस संस्था के संस्थापक प्रजापिता दादा लेखराज ब्रह्मा बाबा ने माताओं और बहनों को शुरू से ही आगे रखने का फैसला लिया और इसी के कारण विश्व की अन्य सभी आध्यात्मिक और धार्मिक संस्थानों के बीच में ब्रह्माकुमारीज अपना अलग अस्तित्व बनाये हुए है। पिछले 80 वर्षों से इनके नेतृत्व ने लगातार हिम्मत, क्षमा करने की क्षमता और एकता के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को साबित किया है। ब्रह्माकुमारी शिवानी बताती है कि हालांकि सभी शीर्ष व्यवस्थापकीय पदों पर महिलायें नेतृत्व करती हैं लेकिन शीर्ष की महिलायें हमेशा अपने निर्णय भाईयों के साथ मिलजुल कर लेती हैं। यह सहभागिता और आम सहमति के साथ नेतृत्व का एक आदर्श है जो सम्मान, समानता और नम्रता पर आधारित है। यह एक कुशल और सामंजस्यपूर्ण अधिकारों के उपयोग का उदाहरण है।

ब्रह्माकुमारी शिवानी केवल पद की दृष्टि से ही सैकड़ों ब्रह्माकुमारी को लांघ कर आगे नहीं आयी है अपितु वे चतुर्मुखी विकास तथा सफलता के हर पायदान पर अग्रिम पंक्ति पर ही खड़ी दिखाई दी। इसका कारण उनका प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा स्थापित सिद्धांतों और मान्यताओं पर दृढ़ आस्थाशील, समर्पितण् एवं संकल्पशील होना हैं। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज की एक ऐसी असाधारण उपलब्धि हैं जहां तक पहुंचना हर किसी के लिए संभव नहीं है। वे सौम्यता, शुचिता, सहिष्णुता, सृजनशीलता, श्रद्धा, समर्पण, स्फुरणा और सकारात्मक सोच की एक मिशाल हैं।

ब्रह्माकुमारी शिवानी ने भी अनुद्विग्न रहते हुए अपने सम्यक नियोजित सतत पुरुषार्थ द्वारा सफलता की महती मंजिलें तय की हैं। यह निश्चित है कि अपनी शक्ति का प्रस्फोट करने वाला, चेतना के पंखों से अनंत आकाश की यात्रा कर लेता है। सफलता के नए क्षितिजों का स्पर्श कर लेता है। उनके जीवन को, व्यक्तित्व, कर्तृत्व और नेतृत्व को किसी भी कोण से, किसी भी क्षण देखें वह एक प्रकाशगृह (लाइट हाउस) जैसा प्रतीत होता है। उससे निकलने वाली प्रखर रोशनी सघन तिमिर को चीर कर दूर-दूर तक पहुंच रही है और अनेकों को नई दृष्टि, नई दिशा प्रदान करती हुई ज्योतिर्मय भविष्य का निर्माण कर रही है।

ब्रह्माकुमारी शिवानी का व्यक्तित्व एक दीप्तिमान व्यक्तित्व है। वे ग्रहणशील हैं, जहां भी कुछ उत्कृष्ट नजर आता है, उसे ग्रहण कर लेती हैं और स्वयं को समृद्ध बनाती जाती हैं। कहा है, आंखें खुली हो तो पूरा जीवन ही विद्यालय है- जिसमें सीखने की तड़प है, वह प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक घटना से सीख लेता है। जिसमें यह कला है, उसके लिए कुछ भी पाना या सीखना असंभव नहीं है। इमर्सन ने कहा था- ”हर शख्स, जिससे मैं मिलता हूं, किसी न किसी बात में मुझसे बढ़कर है, वहीं मैं उससे सीखता हूं।

लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु, यह सनातन धर्मं के प्रमुख मन्त्रों में से एक है, जिसका अर्थ होता है, इस संसार के सभी प्राणी प्रसन्न और शांतिपूर्ण रहें।’ इस मंत्र की भावना को ही ब्रह्माकुमारी शिवानी ने अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। उनकी इच्छा है कि उनके सभी शिष्य एवं धर्मप्रेमी भाई-बहिनें इस विश्व में प्रेम और शांति के प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दें। वे कहती हैं ‘गरीबों तथा पीडि़तों के लिए सच्ची करुणा ही ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति है।’

छोटी-छोटी बातों में भी विराट संदेश छुपे हुए होते हैं, जो उन्हें उघाडऩा जानता है, वह ज्ञान को उपलब्ध होता है, जीवन में सजग बन कर चलने से प्रत्येक अनुभव प्रज्ञा बन जाता है। जो अचेत बने रहते हैं, वे द्वार पर आए आलोक को भी वापस लौटा देते हैं। ब्रह्माकुमारी शिवानी की प्रज्ञामयी, ज्योतिर्मयी चेतना ही उनके व्यक्तित्व की असाधारणता है। उन्होंने दादा लेखराज के जीवन से सब कुछ सीखा। दादी प्रकाशवती एवं दादी जानकी से अगाध ज्ञान प्राप्त किया। उनके आध्यात्मिक अनुभवों से अपनी आध्यात्मिक शक्तियों को जगाया। उत्तरोत्तर सब दिशाओं में विकास करते हुए अपने व्यक्तित्व को प्रभावी बनाया है।

ब्रह्माकुमारी शिवानी की अनेक उपलब्ध्यिां हैं उन्हें विमेन ऑफ द डिकेड एचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उनके अनेक पुस्तकें जन-जन के द्वारा पढ़ी जा रही है, जिनके आलोक में नयी मानवता का अभ्युदय हो रहा है।

 

ललित गर्ग

 

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