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ऐ जिन्दगी  गले लगा ले…

ऐ जिन्दगी  गले लगा ले…

चार साल की उम्र में पहली फिल्म और 54 साल की उम्र तक 200 से भी अधिक फिल्में। अगर श्रीदेवी करियर को आंकना हो तो कईयों के लिए यह काफी है। लेकिन श्रीदेवी यानी बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार की कहानी को इन चंद शब्दों या वाक्यों में समेटना श्रीदेवी ही नहीं, बॉलीवुड के लिए भी अन्याय होगा। ऐसा इसलिए कि श्रीदेवी ने फिल्मों में महिला किरदार को एक सपोर्टिव कलाकार से कहीं आगे लीड कैरेक्टर के तौर पर स्थापित किया। श्रीदेवी ने बॉलीवुड को सिखाया कि कैसे अभिनेत्री फिल्म में हीरो के सर्पोटिव कास्ट होने से कहीं ज्यादा है। बॉलीवुड में ऐसी बहुत कम अभिनेत्रियां हैं, जो अपने दम पर दर्शकों को सिनेमा हॉल तक खींचती हैं और श्रीदेवी उनमें से एक थीं। चाहे वह 1987 में आई फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ हो या 1983 की ‘सदमा’।

अपने समय में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी ने अपने रियल लाइफ देवर यानी अनिल कपूर के साथ एक्टिंग की। इस फिल्म में श्रीदेवी ने एक पत्रकार का किरदार निभाया है। फिल्म में श्रीदेवी ने यह साबित किया कि एक आम किरदार को मंझा हुआ एक्टर कैसे खास बना सकता है। इस फिल्म से पूरे बॉलीवुड ने श्रीदेवी की कॉमिक टाइमिंग का लोहा माना। फिल्म के एक्टर भले ही अनिल कपूर रहे हों और मोगैंबो यानी अमरीश पुरी सरीखा दिग्गज विलेनए फिर भी यह फिल्म श्रीदेवी के हवा। हवाई गाने की वजह से भी अलग मुकाम रखती है। इसी तरह दक्षिण भारतीय डायरेक्टर बालू महेंद्र के डायरेक्शन वाली फिल्म ‘सदमा’ श्रीदेवी के कॅरियर का बेंचमार्क मानी जाती है। यह फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो एक हादसे में दिमाग में गहरी चोट खा चुकी है। इस कारण उसका दिमाग उम्र के साथ विकसित नहीं हो पाता है। वह गायब हो जाती है और जिस्मफरोशी में फंस जाती है। उसे कमल हासन बचाता है। साउथ के सुपरस्टार कमल हासन के इस फिल्म में होने के बावजूद श्रीदेवी की ज्यादा तारीफ हुई। इसी तरह नगीना और ‘लम्हें’ जैसी फिल्मों से श्रीदेवी ने अपना एक अलग मुकाम हासिल किया।

हालांकि, श्रीदेवी के एक्टिंग करियर की बात करें तो महज चार साल की उम्र में उन्होंने तमिल फिल्म ‘थुनाइवन’ में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। पर पहली बार 8 साल की उम्र में उनका नाम मलयलाम फिल्म पूमबत्ता से चर्चा में आया। इस फिल्म के लिए उन्हें केरला स्टेट फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे वह तमिल या कहें कि दक्षिण भारतीय फिल्मों की दिग्गज अभिनेत्री की तरफ कदम बढ़ाने लगीं। उन्हें 1975 में बॉलीवुड फिल्म से ऑफर भी मिला, लेकिन वह किरदार काफी छोटा था और इस तरह बॉलीवुड में संघर्ष का उनका सिलसिला चलता रहा। लेकिन 16 साल की उम्र में उन्हें एक बड़ा ब्रेक मिला सोलवां सावन फिल्म में लीड रोल का। हालांकि फिल्म चली नहीं और इसके बाद उन्होंने फिर से साउथ का रुख कर लिया। ‘सोलहवा’ सावन के चार साल बाद वह दोबारा मायानगरी लौटी। इस बार फिल्म थी ‘सदमा’ और उनके साथ कमल हासन थे। यह फिल्म भी ज्यादा नहीं चली लेकिन श्रीदेवी ने अपनी एक्टिंग से इसे एक कल्ट क्लासिक फिल्म बना दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्म फेयर का अवॉर्ड भी मिला। पर उन्हें सफलता दिलाई जितेंद्र के साथ वाली 1983 की फिल्म ‘हिम्मतवाला’ ने। इसके बाद उन्होंने जितेन्द्र के साथ कई फिल्में कीं। 1984 की तोहफा फिल्म ने तो उस दौर में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इसके बाद ‘चालबाज’ में श्रीदेवी ने पहली बार डबल रोल किया और उन्होंने अलग तेवर से एक्टिंग कर अपने हर आलोचक को हैरान कर दिया। चालबाज के बाद श्रीदेवी यशराज कैंप की फैवरेट एक्ट्रेस बन गईं। इसी के बनर तले उन्होंने ‘चांदनी’ और ‘लम्हें’ कीं और फिल्म फेयर का खिताब भी जीता।

अफेयर्स की कहानी

हालांकि, रोमांस की इस क्वीन का फिल्मों का यह सफर इतना भी आसान नहीं रहा। इस बीच उनसे जुड़े कई अफेयर्स भी सामने आए और कई तरह की अफवाहें भी, जिसने उनके करियर को कहीं-न-कहीं प्रभावित भी किया। जितेंद्र के साथ ‘हिम्मतवाला’ से वह अचानक लाइमलाइट में आ चुकी थीं। कहा जाता है कि बॉलीवुड में आने से पहले से ही वह जितेंद्र की बहुत बड़ी फैन भी थीं और जब श्रीदेवी को इस फिल्म का ऑफर मिला तो यह उनके लिए गोल्डन चांस की तरह था। एक के बाद एक फिल्मों में काम करने से इनके रोमांस के किस्से भी बाहर आने लगे और जितेंद्र को लेकर श्रीदेवी ने जब स्टारडस्ट पत्रिका में अपनी चाहत का इजहार किया, तो जितेंद्र की पत्नी और उनके बीच तनाव बढ़ गया। हालांकि, बाद में दोनों के रिश्ते सामान्य हो गए। इसके श्रीदेवी का नाम मिथुन चक्रवर्ती से भी जुड़ा। 1984 में ‘जाग उठा इंसान’ के शूटिंग के दौरान श्रीदेवी और मिथुन चक्रवर्ती के बीच प्यार के किस्से सामने आए। मिथुन श्रीदेवी से शादी भी करना चाहते थे, लेकिन श्रीदेवी की शर्त थी कि पहले वह योगिता बाली से तलाक ले लें। मिथुन ने जब योगिता बाली पर तलाक का दबाव बनाया तो योगिता ने आत्महत्या करने की कोशिश की। बाद में मिथुन भी हार मान गए।

जब कई रिश्तों को कहा ‘ना’

श्रीदेवी के करियर का ग्राफ जिस तरह से ऊपर चढ़ता रहा, उस रफ्तार से उनके चाहने वालों की फेहरिस्त भी बढ़ती गई। इस बीच श्रीदेवी का नाम मशहूर टेनिस प्लेयर अशोक अमृतराज के साथ जुड़ा। अमृतराज का श्रीदेवी को लेकर क्रश को देखते हुए उनकी फैमिली ने श्रीदेवी की मां के पास उनका रिश्ता भेजा तो वह राजी हो गईं। हालांकि, कहा यह भी जाता है कि सगाई की तैयारियां शुरू होने के बाद अचानक श्रीदेवी ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया। इसके ‘बॉम्बे’ फेम अभिनेता अरविंद स्वामी की फैमिली ने भी श्रीदेवी को रिश्ता भेजा था, लेकिन उनकी उम्र काफी कम थी तो उन्होंने इससे भी मना कर दिया।

जब बोनी कपूर आए जिंदगी में

मिथुन और श्रीदेवी का रिश्ता टूटने के बाद दोनों के कॉमन फ्रेंड रहे बोनी कपूर श्रीदेवी की जिंदगी में आने लगे। सबसे पहले उन्होंने श्रीदेवी को अपनी फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का ऑफर दिया, लेकिन इस ऑफर को टालने के लिए श्रीदेवी ने पहले उन्हें चार दिनों तक इंतजार कराया फिर टालने के लिए 10 लाख रुपये की मांग कर दी। यह रकम उस समय काफी बड़ी मानी जाती थी, लेकिन बोनी कपूर श्रीदेवी के दीवाने हो चुके थे, तो उन्होंने इतनी बड़ी रकम के लिए भी हामी भर दी।

जब गिरा करियर का ग्राफ

साल 1992 की फिल्म ‘खुदा गवाह’ के बाद श्रीदेवी के करियर का ग्राफ नीचे की ओर जाने लगा था। तब नई हीरोइन और एक्टर के बीच उन्हें खुद को बदलना था। फिर भी उनकी फिल्में आती रहीं और फ्लॉप होती रहीं। इस दौर में उन्होंने अनिल कपूर के साथ कई फिल्में कीं, जिसमें अधिकांश फ्लॉप रहीं। फिल्मों के फ्लॉप सिलसिले को देखकर श्रीदेवी ने 1995 में कोई फिल्म नहीं की और 1996 में उन्होंने डायरेक्टर बोनी कपूर से शादी कर ली। इसके बाद कुछ समय तक वह फिल्मों से दूर रहीं। लेकिन 1997 में उन्होंने जुदाई से एक बार फिर खुद को साबित कर दिया।

जब बनीं ‘कमबैक मॉम’

श्रीदेवी ने 2012 में गौरी शिंदे की फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से फिल्मों की दुनिया में शानदार वापसी की। इस फिल्म के साथ वह फिर वही पुरानी श्रीदेवी दर्शकों के सामने थीं, जिसके अभिनय को देख अक्सर ही लोग हैरान हो जाते थे। 2017 में आई फिल्म मॉम में उनकी परफॉर्मेंस के बाद उन्हें कमबैक ‘मॉम’ कहा जाने लगा। लेकिन, यह उनकी आखिरी फिल्म (तकनीकी तौर पर, क्योंकि शाहरुख की फिल्म जीरों में भी वह नजर आने वाली हैं) साबित हुई।

श्रीदेवी ने अपने करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया, जिनमें लगभग 63 हिंदी, 62 तेलुगू, 58 तमिल और 21 मलयालम फिल्में हैं। कई भाषाओं में अपने एक्टिंग की छाप छोडऩे वालीं श्रीदेवी के जाने से न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि उनके चाहने वालों को सदमा तो लगा ही है।

 

चन्दन कुमार

 

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