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एक शानदार सफर का अंत

एक शानदार सफर का अंत

शोक संतप्त परिवार से मुलाकात के बाद बप्पी ने कहा कि उन्होंने दिवंगत अभिनेत्री के साथ 11 सिल्वर जुबली फिल्मों में काम किया। अमिताभ ने  कहा-  श्रीदेवी अपने 5 दशकों के करियर में एक्टिंग के बूते सिल्वर स्क्रीन पर छाई रहीं। फिल्म इंडस्ट्री में 80 और 90 के दशक में उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जो पहले कोई एक्ट्रेस हासिल नहीं कर पाई। इसीलिए उन्हें पहली महिला सुपरस्टार कहा जाता है। श्रीदेवी को 2013 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। श्रीदेवी…. ये एक नाम नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला सुपरस्टार की पहचान है। वो एक्ट्रेस जिसे देखकर शायद कई लोगों को दिल पहली बार धड़का होगा, वो एक्ट्रेस जिसे पहला लेडी अमिताभ बच्चन कहा जाता था और फिर उनके नाम को किसी हीरो की जरूरत नहीं रही। उनके नाम के आगे सुपरस्टार लग गया. वो पहली ऐसी सुपरस्टार थीं जिन्हें हीरो की भी जरूरत नहीं रही।

आम लोगों के अलावा पाकिस्तान के  लोगों ने भी श्रीदेवी को याद किया है. माहिरा खान ने लिखा है कि वो खुशकिस्मत हैं कि उन्हें श्रीदेवी के समय में बड़े होने का मौका मिला। इमरान अब्बास ने लिखा है कि इस सुपरस्टार की मुस्कान को खोने का सदमा लगा है। इसके अलावा अहमद अली बट ने लिखा है कि उनका बचपन श्रीदेवी के प्रेम में पड़कर बीता। वो एक ही हैं।

ये वो लोग हैं जिन्होंने जमाने भर की रुसवाइयों के बावजूद श्रीदेवी को शिद्दत से चाहा, और अपनी उस चाहत को लेकर कभी शर्मिंदा नहीं हुए। अस्सी और नब्बे के दशक में जवान हो रही हिंदुस्तानी पीढ़ी दो खेमों में बंटी हुई थी – श्रीदेवी फैन क्लब और माधुरी दीक्षित फैन क्लब। जया प्रदा, जूही चावला, दिव्या भारती या मीनाक्षी शेषाद्री के नाम का तीसरा-चौथा-पांचवा कोई क्लब रहा भी होगा तो बेरसूख ही रहा होगा।

श्रीदेवी वह डोर भी थीं जिसने दक्षिण को उत्तर से जोड़ दिया था। ‘चांदनी’ जैसी बहू सिर्फ अपर-मिडिल क्लास पंजाबी परिवारों की ख्वाहिश ही नहीं रह गई थी बल्कि छोटे शहरों के मिडिल क्लास घरों में भी उस दौर में जन्मी लड़कियों का नाम धड़ल्ले से चांदनी रखा जाने लगा था।

श्रीदेवी कपूर जो कि श्रीदेवी के नाम से प्रख्यात हैं, भारतीय फिल्मों की मशहूर अदाकारा हैं। जिन्होंने हिंदी फिल्मों के अलावा तमिल, मलयालम, तेल्गु, कन्नड़ और में भी काम किया है। अपनी बहुमुखी प्रतिभा और हिन्दी फिल्मों की बेहतरीन अभिनेत्री मानी जाने वाली श्रीदेवी ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म सोलवां सावन से 1979 में की थी।  लेकिन उन्हें बॉलीवुड में पहचान फिल्म हिम्मतवाला से मिली।  इस फिल्म के बाद वह हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगी।

1971 में आई फिल्म ‘पूमपट्टा’ में नन्हीं श्रीदेवी के अभिनय ने सभी का मन मोह लिया था। इस फिल्म ने अभिनेत्री को केरला स्टेट फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट भी दिलाया। 1976 तक उन्होंने तमाम दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया।

इसके बाद तो श्रीदेवी ने बॉलीवुड में अपने नाम का लोहा मनवा दिया। श्रीदेवी ने अपने फिल्मी करियर में कई अनगिनत फिल्में की।  अपने करियर के दौरान उन्होंने कई दमदार रोल किए और कई मजबूत फीमेल किरदार को पर्दे पर बेहतरीन तरीके से पेश किया और मुख्यधारा के सिनेमा के अलावा उन्होंने कई आर्ट फिल्मों मे भी काम किया जिसे भारत में पैरलल सिनेमा कहा जाता है। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुका है। उनके करियर का ग्राफ कई बार नीचे भी गिरा लेकिन उन्होंने अपने को कई बार इससे उबारा और स्टेटस को बरकरार रखने के लिए उनकी क्षमता ने सभी का दिल जीता। 2013 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया।

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में श्रीदेवी ने उस दौर में अभिनेत्रियों को होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके जमाने में अभिनेत्रियों के लिए वैनिटी वैन जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती थी और कई बार तो अभिनेत्रियों को झाडिय़ों के पीछे छुपकर कॉसट्यूम बदलने पड़ते थे। इन दिनों अमिताभ बच्चन व शाहरुख खान से लेकर तमाम बड़े कलाकारों के पास अपनी वैनिटी वैन है। शूटिंग के दौरान लगभग हर कलाकार, निर्माता से वैनिटी वैन की मांग करता है। मगर श्रीदेवी पहली अदाकारा थीं, जिनके पास अपनी वैनिटी वैन थी

श्रीदेवी का मानना रहा है कि वह तो इत्तफाकन अभिनेत्री बनीं। चार वर्ष की आयु में सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाली श्रीदेवी को उस छोटी सी उम्र में ही इतने काम मिल गए थे कि उन्होंने पहली कक्षा से ही स्कूल जाना छोड़ दिया। हालांकि उनके पिता जो कि पेशे से एक वकील थे, उन्होंने श्रीदेवी की पढ़ाई पूरी कराने के लिए होम ट्यूटर की व्यवस्था की। यूं तो श्रीदेवी चार वर्ष की उम्र में एक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में नजर आई थीं तब उन्हें कला या अभिनय की कोई समझ नहीं थी। पर सही मायनों में उनका अभिनय करियर 13 वर्ष की उम्र में तमिल फिल्म ”मुंदूर मुदीच’’ से शुरू हुआ था। 13 वर्ष की उम्र में इस फिल्म में उनका किरदार व्यस्क लड़की का था। जबकि बॉलीवुड में इन्होंने 1975 में फिल्म ”जूली’’ में बाल कलाकार के रूप में काम करते हुए कदम रखा था।

अंतिम फिल्म ”जीरो’’ 1976 में तेरह वर्ष की उम्र में तमिल फिल्म ”मुंदूर मुदीच’’ से लेकर 7 जुलाई 2017 को प्रदर्शित हिंदी फिल्म ”मौम’’ तक श्रीदेवी ने 300 फिल्मों में अभिनय किया था। उनके करियर की अंतिम और 301 वीं फिल्म ”जीरो’’ होगी। आनंद एल राय निर्देशित इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ श्रीदेवी ने मेहमान कलाकार के रूप में अभिनय किया है, यह फिल्म 21 दिसंबर 2018 को प्रदर्शित होगी।

1976 से अब तक के अपने करियर में श्रीदेवी ने अपने दमदार अभिनय से फिल्मकारों, कलाकारों को ही नहीं, बल्कि अपने प्रशंसकों को इस कदर दीवाना बना रखा था कि हर कोई उनके साथ काम करने को लालायित रहता था। पुरूष प्रधान बॉलीवुड में श्रीदेवी एकमात्र ऐसी अदाकारा रही हैं, जिनके बल पर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धन कमाया करती थी।

श्रीदेवी हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया करती थीं। बॉलीवुड में नारी शक्ति का परचम लहराने वाली श्रीदेवी के लिए खास तौर पर किरदार लिखे जाते थें। यदि श्रीदेवी को अपना किरदार व फिल्म की कहानी न पसंद आए, तो वह उस फिल्म का ऑफर ठुकरा देती थीं। इतना ही नहीं श्रीदेवी हमेशा इस बात का ख्याल रखती थीं कि वह जिस फिल्म में अभिनय करें, उस फिल्म में उनका किरदार फिल्म के हीरो से कमतर न हो। इसी के चलते श्रीदेवी ने अमिताभ बच्चन के साथ भी कई फिल्में करने से इंकार कर दिया था, जबकि यह वह दौर था जब हर हीरोईन अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म का हिस्सा बनना अपना सौभाग्य समझती थी। कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन स्वयं श्रीदेवी के साथ काम करने को लालायित थें। इसी के चलते अमिताभ बच्चन ने श्रीदेवी के पास फूलों से भरा हुआ ट्रक भिजवाया था

अमिताभ बच्चन के साथ दोहरी भूमिका निभाने वाली एकमात्र अदाकारा

बहरहाल, बाद में श्रीदेवी ने अमिताभ बच्चन के साथ सबसे पहले फिल्म ‘इंकलाब’ की। उसके बाद ”खुदा गवाह’’ और ‘आखिरी रास्ता’ जैसी कुछ फिल्में की। मगर इन फिल्मों में श्रीदेवी के किरदार ही हावी रहें। इतना ही नहीं श्रीदेवी पहली अदाकारा थीं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ”खुदा गवाह’’ में दोहरी भूमिका निभायी थीं। अन्यथा अमिताभ बच्चन की किसी भी फिल्म में किसी हीरोईन को दोहरी भूमिका निभाने का अवसर कभी नहीं मिला। मजेदार बात यह थी कि फिल्म ‘खुदा गवाह’ में श्रीदेवी ने अफगानी अंदाज वाली हिंदी में संवाद अदायगी कर लोगों को आश्चर्य चकित किया था।

सिनेमा भाषा का मोहताज नहीं होता। इस बात को श्रीदेवी की फिल्मों से भी समझा जा सकता है। श्रीदेवी को तमिल व तेलुगु भाषा ही आती थी, मगर वह लंबे समय तक हिंदी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखाती रहीं। हिंदी फिल्मों में उनके संवाद नाज डब किया करती थीं। फिल्म ‘आखिरी रास्ता’ में श्रीदेवी के संवादों को अभिनेत्री रेखा ने डब किया था। पर श्री देवी ने हिंदी भाषा सीखना शुरू कर दिया था

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वर्ष 1983 में फिल्म सदमा में श्रीदेवी दक्षिण सिनेमा के अभिनेता कमल हासन संग नजर आई।  इस फिल्म में उनके अभिनय को देख आलोचक भी दंग रह गए। श्रीदेवी को फिल्म सदमा के लिए पहली बार फिल्मफेयर अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नामंकन मिला था।

साल 1986 में आई फिल्म नगीना, जिसमे श्रीदेवी ने एक इच्छाधारी नागिन की भूमिका अदा की थी। यह फिल्म उस साल की दूसरी सुपर-डुपर हिट फिल्म साबित हुई थी। उस दौरान श्रीदेवी की नगिना फिल्म सर्वश्रेष्ठ सांपो वाली फिल्मों में पहले स्थान पर थी। इसी फिल्म का गाना मै तेरी दुश्मन, दुश्मन तो मेरा एक आइकॉनिक गाना माना जाता है। इसी साल उनकी दो और फिल्में रिलीज हुई।  जिनमे सुभाष घई की मल्टी-स्टारर फिल्म कर्मा और फिरोज शाह की जांबाज शामिल थी। दोनों ही फिल्मों में श्रीदेवी की गजब के अभिनय को दर्शक भी भौचक्के रह गए थे।

साल 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया में श्री एक जर्नलिस्ट के किरदार में नजर आई।  जोकि एक उनका आइकॉनिक रोल माना जाता है। इस फिल्म में उनके अपोजिट अनिल कपूर नजर आये थे। फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना हवा-हवाई आज भी दर्शकों के जुबान पर रहता है। उस दौर में श्री देवी और अनिल कपूर का रेन डांस सांग काटे नहीं कटते आज भी बारिश के गानों में पहले नंबर पर है।

1989 में आई फिल्म चालबाज में श्रीदेवी दोहरी भूमिका में नजर आई थीं। जो कि 80 के दशक की आइकोनिक मूवीज में से एक है। इस फिल्म के लिए उन्हें आलोचकों से काफी प्रशंसा मिली थी। श्रीदेवी को फिल्म चालबाज के लिए उन्हें उनके पहले फिल्मफेयर सर्वश्रेठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

चालबाज के बाद श्रीदेवी यशराज फिल्मस की फिल्म चांदनी में अभिनेता ऋषि कपूर के साथ नजर आयीं थीं। इस फिल्म का गाना मेरे हाथों में नौ-नौं चूडिय़ां है आज भी वेडिंग सांग्स लिस्ट में सबसे उपर है। श्रीदेवी ने इस फिल्म के गाने चांदनी ओ मेरी चांदनी गाने में अपनी आवाज दी थी। इसके बाद साल 1991 में श्रीदेवी एक बार फिर यशराज की फिल्म लम्हे में दिखाई दी। फिल्म लम्हे के लिए श्रीदेवी को उनका दूसरा फिल्म फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।

श्रीदेवी का फिल्मी करियर उन दिनों उंचाइयों पर था, तभी उनके और उनके कोस्टर मिथुन चक्रवर्ती के अफेयर की खबरे मिडिया में उडऩे लगी। चर्चा तो ये भी थी की श्रीदेवी और मिथुन ने चुपचाप शादी भी कर ली है। हालांकि इन सबसे  मिथुन के गृहस्थ जीवन में जरूर भूचाल लाकर रख दिया था। जिसके बाद मिथुन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सबको अपने और श्रीदेवी के रिश्ते की सफाई दी।

श्री देवी की ऑफिशियली शादी निर्देशक बोनी कपूर 1996 में हुई। इनकी दो बेटियां भी हैं।  जाह्नवी और खुुशी कपूर। फिलहाल इनकी बड़ी बेटी पूरी तरह से बॉलीवुड में आने को तैयार है।

1996 में निर्देशक बोनी कपूर से शादी के बाद श्रीदेवी ने फिल्मी दुनिया से अपनी दूरी बना ली थी। लेकिन इस दौरान वह कई टीवी शोज में नजर आई। श्रीदेवी ने साल 2012 में  इंग्लिश विंग्लिश से रूपहले परदे पर अपनी वापसी की।

चेहरे पर बच्चों सी मासूमियत और आंखों में वैसी ही शरारत लेकर अभिनय करने वाली श्रीदेवी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उनके जाने के बाद दुनिया उनके निभाए तमाम किरदारों के जरिए उन्हें याद कर रही है। इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय उनके वे किरदार हैं जिनमें उन्होंने कॉमेडी की है। इसकी वजह शायद यह है कि गंभीर भूमिकाओं में गहराई से अभिनय करने वाले कई कलाकार मिल जाएंगे लेकिन कॉमिक रोल्स में ऐसा कर पाने के लिए आपको श्रीदेवी जैसी किसी अभिनेत्री की जरूरत होती है। मासूमियत और शरारत का जो मेल उनके चेहरे पर दिखता था वह उनके बाद अब शायद ही किसी और में देखने को मिले।

सतीश पेडणेकर

 

 

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