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सोच मजबूत हो तो शरीर भी साथ देता है

सोच मजबूत हो तो शरीर भी साथ देता है

जिस प्रकार विकलांगता एक प्राचीन समस्या है उसी प्रकार यह तथ्य भी अत्यंत प्राचीन है कि अनेक विकलांग लोगों ने अपनी विकलांगता को परास्त करके समाज को अपने असाधारण व्यक्तित्व और अदभुत कृतित्व से प्रभावित किया। प्रचीन ग्रंथों वेदों, बाइबिल, कुरान आदि में विकलांगों की समस्याओं और उनकी सामाजिक दशा का वर्णन है, साथ ही दीर्घतमा, अष्टाव्रक जैसे ऋषियों का भी वर्णन है।

कमजोर तन मजबूत मन

लेखक             : विनोद कुमार मिश्रा

प्रकाशक         : किताबघर प्रकाशन

मूल्य              : १२० रु.

पृष्ठ                : ८०

इन विकलांग विभूतियों के व्यक्तित्व और कृतित्व का अध्ययन करते समय अनेक रोचक तथ्य मेरे सामने आए। इन तथ्यों को जब क्रमबद्ध किया गया तो अनेक नए परिणाम सामने आए जो विकलांगों के लिए ही नहीं वरन आम जनता के लिए भी अत्यंत प्रेरक साबित हुए। ये परिणाम लेखों के रूप से कई राष्ट्रीय दैनिकों और पत्रिकाओं में पुस्तक प्रकाशित होने से पहले ही प्रकाशित होते रहे। अब इन लेखों का संग्रह पुस्तक रूप से आपके सामने प्रस्तुत है जो यह दर्शाती है कि इन कमजोर तन वाले

लोगों में एक मजबूत मन भी था। यह मन ही उनकी सफलता का कारण था। यदि आम विकलांग व्यक्ति भी अपने मन को दृढ़ कर ले तो वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है, यही इस पुस्तक का उद्देश्य है।

            उदय इंडिया ब्यूरो

 

 

 

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