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लोकसभा चुनाव की छाया में गहलोत मंत्रिमण्डल

लोकसभा चुनाव की छाया में गहलोत मंत्रिमण्डल

पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के चुनाव में बमुश्किल सत्ता की दहलीज पर पहुंची कांग्रेस अभी से लोकसभा के चुनावी मोड़ पर आ गई है। इसका तानाबाना टिकट वितरण से लेकर सरकार के मुखिया सहित मंत्रियों के चयन और विभागों के बंटवारे के साथ फोरी तौर पर उठाये गये प्रषासनिक कदमों के रूप में देखा जा सकता है। आसन्न लोकसभा चुनाव की प्रतिछाया में तीसरी बार राजस्थान में सत्ता की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिपरिषद की शपथ तथा मंत्रियों के विभागों की घोषणा दिल्ली में कड़ी मशक्कत के चलते पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की मोहर लगने पर संभव हो सकी।

कांग्रेस में राजनीतिक मंथन की उठापटक में श्रीमती सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी के बाद राहुल गांधी की हरी झंडी से चली सत्ता की रेलगाड़ी शासन सत्ता में अनुभव एवं युवा चेहरों के समिश्रण का फार्मूला अपनाते हुए यात्रियों को सवार कराया गया। चुनावी बयार के चलते मंत्रिपरिषद में जातीय समीकरण साधने के साथ उन क्षेत्रो को विषेष तरजीह दी गई जहां के मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के मुकाबले कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर उसे सत्ता के गलियारे तक पहुंचाने में मदद दी। यही नहीं, विभागों के बंटवारे में पुराने अनुभवी मंत्रियों की कार्यक्षमता एवं मंत्रीगणों के आपसी रिश्तों तथा स्वभाव इत्यादि के बारे में ध्यान रखा गया। मंत्रिपरिषद के गठन तथा विभागों के वितरण में चेक एण्ड बैलेंस की नीति का भी अनुसरण देखा जा सकता है। सत्ता के इस सफर में वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी का धुंआ भी उठने लगा है।

सत्ता की कमान संभाल रहे गहलोत के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में दूसरे शक्ति केन्द्र बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने निकट भविष्य में मंत्रिपरिषद के एक और विस्तार का संकेत देकर इस कुहासे के छंटने की कोशिश की है। वही गहलोत ने नौकरशाही एवं पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए अपनी प्रशासनिक पकड़ को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री सचिवालय (सी.एम.ओ) का तंत्र भी बदला गया है। सचिवालय के मुख्य भवन में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के लिए निर्धारित कक्ष शक्ति के द्वितीय केन्द्र के प्रतीक के रूप में समझे जा सकते हंै। लोकसभा चुनाव के लिए 26 दिसम्बर से मतदाता सूची पुनरीक्षण आरम्भ किये जाने से ऐन पहले 68 आई.ए. एस.के तबादलों की सूची जारी की गई। इसे मिलकर 33 जिलों में से 30 जिलों में जिला कलेक्टर बदले गये है। यद्यपि मंत्रिपरिषद के गठन में कांग्रेस की निर्वाचित ग्यारह महिला विधायकों में से मात्र एक महिला को प्रतिनिधित्व मिला है। लेकिन छ: जिलो में महिला कलेक्टरों को प्रशासन की कमान सौंपी गई है।

राजभवन के खुले प्रांगण में सोमवार 24 दिसम्बर को आयोजित गरिमामय समारोह में राज्यपाल कल्याणसिंह ने 23 मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें तेरह केबिनेट तथा राज्य स्तर के दस मंत्री शामिल है। मंत्रिपरिषद में राज्यमंत्री के रूप में एक मात्र महिला ममता भूपेश एवं अल्पसंख्यक चेहरे सालेह मोहम्मद सहित सभी मंत्रियों ने ईश्वर के नाम पर हिन्दी में शपथ ली। नियमानुसार दौ सौ सदस्यीय विधानसभा में पन्द्रह प्रतिशत अर्थात तीस सदस्य मंत्रिपरिषद में सम्मिलित किये जा सकते है। गहलोत एवं पायलट को मिलाकर मंत्रिपरिषद की संख्या 25 हो गई है। अब पांच मंत्रियों की नियुक्ति की गुंजाईश है। अलवर जिले के रामगढ़ निर्वाचन क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी के निधन के कारण 199 सदस्यो को चुना गया। लोकसभा चुनाव से पहले रामगढ़ का उपचुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा प्रतिपक्ष भाजपा के बीच प्रथम शक्ति परीक्षण होगा। निर्वाचन आयोग उपचुनाव की तिथि घोषित करेगा। पंचायत राज के प्रतिनिधियों के लिए उपचुनाव भी होना है।

पिछले दो कार्यकाल की तुलना में इस बार गहलोत सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का परिदृष्य बदला हुआ था। सुसज्जित मंच पर राज्यपाल की दाहिनी ओर मुख्यमंत्री गहलोत तथा बांयी ओर उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट विराजमान थे। इससे पूर्व चयनित मंत्रियों का प्रदेष कांग्रेस मुख्यालय में तिलक लगाकर स्वागत किया गया और सभी गहलोत एवं पायलट की अगुवाई में एक बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे। गहलोत तथा पायलट ने शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर एक साथ पहुंचकर सभी का अभिवादन किया। तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए गहलोत का शपथ ग्रहण समारोह इस बार राजभवन के स्थान पर रामनिवास बाग स्थित अल्बर्ट हॉल के सामने खुले मंच पर हुआ। इसमे भाग लेने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित विभिन्न दलो के नेता एयरपोर्ट से बस में सवार होकर समारोह स्थल पहुंचे थे। पहली बार गहलोत के साथ सचिन पायलट ने भी शपथ ली। संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप उन्होने मंत्री पद की शपथ ली। राजभवन सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री गहलोत ने मंच पर ही पायलट को उपमुख्यमंत्री पद का दर्जा देने सम्बन्धी पत्र राज्यपाल के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया। राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात कांग्रेस के प्रभारी अविनाश पांडे ने तत्सम्बन्धी घोषणा की। दोनों शपथग्रहण समारोह का संचालन राजभवन में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के डॉ.लोकेश चन्द्र शर्मा ने किया। शपथग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल जगन्नााथ पहाडिय़ा मौजूद रहे। लेकिन कांग्रेस के लगभग एक दर्जन वरिष्ठ विधायकों ने समारोह से दूरी बनाये रखी। इनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत, पूर्व मंत्री डॉ.सी.पी.जोशी, महेन्द्र जीत सिंह मालवीय, परसराम मोरदिया, हेेमाराम चौधरी, राजेन्द्र पारीक, भरत सिंह, डॉ. जितेन्द्र सिंह, बृजेन्द्र ओला, भंवरलाल शर्मा इत्यादि शामिल है। इन असंतुष्ट नेताओं के समर्थकों ने विभिन्न स्तरों पर विरोध जताने के प्रयासों में कोई कमी नहीं रखी है। विपक्ष की ओर से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौर तथा विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल भी शपथग्रहण समारोह में सम्मिलित हुए।

गहलोत ने अपने पहले कार्यकाल में शपथग्रहण समारोह में मंत्रियों के नाम अंग्रेजी वर्णमाला अक्षर के हिसाब से बोले थे। लेकिन इस बार मंत्रियों की वरिष्ठता का क्रम रखा गया तथा नये युवा चेहरों को भी आखरी क्रम में बुलाया। वर्ष 1998 में गहलोत के पहले कार्यकाल में दो उपमुख्यमंत्री बनाये गये थे। गहलोत ने तब सोशल इंजीनियरिंग के चलते जाट समुदाय की प्रमुख नेता कमला बेनीवाल और अनुसूचित जाति के बनवारी लाल बैरवा को उपमुख्यमंत्री का दर्जा दिया। राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री कमला बाद में गुजरात एवं त्रिपुरा की राज्यपाल भी रही। जयपुर जिले के शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे पुत्र आलोक बेनीवाल के पक्ष में 92 वर्षीय कमला जी ने चुनाव प्रचार किया। आलोक ने विधानसभा उपाध्यक्ष भाजपा के राव राजेन्द्र सिंह को पराजित किया। लेकिन तीसरी बार सत्ता की दौड़ में गहलोत ने पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप से उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को अपना सहसवार बनाकर कमान संभाली। संविधान मे उपमुख्यमंत्री पद का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस के टीकाराम पालीवाल तथा भाजपा के दिग्गज नेता तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत के साथ हरिशंकर भाभड़ा इस पद को सुशोभित कर चुके है। मंत्रिपरिषद में प्रथम चरण में शामिल 23 मंत्रियों में 17 नये चेहरे हैं। इनमे केबिनेट स्तर के सात और सभी दस राज्यमंत्री शामिल है। पहली बार विधायक बने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मिलाकर यह संख्या 18 हो जाती है। जातीय समीकरण देखे तो जाट एवं अनुसूचित जाति के चार-चार, वैश्य एवं जनजाति के तीन-तीन राजपूत, ब्राह्मण, ओ.बी.सी. दो तथा गुर्जर, मुस्लिम, विश्नोई समाज से एक-एक मंत्री शामिल है। जयपुर एवं भरतपुर जिले से तीन-तीन मंत्रियो को लिया गया है। भाजपा के दिग्गज नेताओं को पराजित करने वालो को भी प्राथमिकता मिली है। गहलोत एवं पायलट ने 17 दिसम्बर तथा मंत्रिपरिषद ने 24 दिसम्बर को शपथ ली। माथापच्ची के क्रम में बुधवार 26 दिसम्बर रात दो बजे मंत्रियों के विभागों की घोषणा हुई। गहलोत ने गृह, वित्त, कार्मिक, सामान्य प्रशासन सहित नौ विभाग अपने पास रखे है। घोषित विभागों के अलावा शेष रहे विभाग भी उनके पास रहेंगे। प्रथम शासनकाल में गहलोत ने अपने पास कोई विभाग नहीं रखा था। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को सार्वजनिक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास पंचायत राज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित पांच विभाग सौंपे गये है।

मंत्रिपरिषद के सबसे बुजुर्ग 75 वर्षीय शांति धारीवाल को इस बार भी स्वायत्त शासन, नगरीय विकास, आवासन विधि एवं संसदीय कार्य मामलात विभाग सौंपा गया है। पुराने चेहरो में बी.डी.कल्ला को ऊर्जा, भू-जल, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के साथ पुराना विभाग कला साहित्य, संस्कृति विभाग दिया गया है। इसी तरह मास्टर भंवर लाल मेघवाल को शिक्षा की अपेक्षा सामाजिक न्याय व अधिकारिता आपदा प्रबंधन, प्रमोद जैन भाया को सार्वजनिक निर्माण की जगह खान एवं गोपालन परसादी लाल मीणा को भी सहकारिता की अपेक्षा उद्योग एवं राजकीय उपक्रम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

गहलोत की पिछली सरकार में मुख्य सचेतक रहे डॉ.रघु शर्मा को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष, प्रताप सिंह खाचरियावास परिवहन एवं सैनिक कल्याण विभाग देखेंगे। उन्होने सिविल लाइंस निर्वाचन क्षेत्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ.अरूण चतुर्वेदी को हराया था। मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को पराजित करने वाले लालचंद कटारिया को कृषि पशुपालन और मत्स्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जयपुर जिले के कोटपूतली से दूसरी बार निर्वाचित राजेन्द्र सिंह यादव आयोजना, भाषा तथा स्टेट मोटर गैराज विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री होंगे।

भरतपुर जिले में इस बार भाजपा का खाता नहीं खुला। जिले से शामिल तीन मंत्रियों में पूर्व राज परिवार के विश्वेन्द्र सिंह पर्यटन एवं देवस्थान विभाग में केबिनेट मंत्री, रालोद के डॉ.सुभाष गर्ग को तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा विभाग में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा भजन लाल जाटव को गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा, मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया गया। डॉ.सुभाष गर्ग, चिकित्सा मंत्री डॉ0 रघु शर्मा के विभागो में सहयोगी रहेंगे। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा को पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह का सहयोगी बनाया गया है। भजन लाल जाटव, कृषि मंत्री कटारिया के सहयोगी रहेंगे। अन्य केबिनेट मंत्रियो में रमेश चन्द मीणा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, हरीश चौधरी राजस्व उपनिवेषन, कृषि सिंचित क्षेत्रीय विकास उदय लाल आंजना, सहकारिता एवं इंदिरा गांधी नहर परियोजना तथा सालेह मोहम्मद को अल्पसंख्यक, वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दस राज्यमंत्रियों में प्रत्येक को एक या दो विभागो का स्वतंत्र प्रभार देने के साथ अलग-अलग केबिनेट मंत्रियों के विभागो का सहयोगी मंत्री बनाया गया है। सबसे कम आयु के मंत्री अशोक चांदना युवा एवं खेल विभाग देखेंगे। एक मात्र महिला मंत्री ममता भूपेश महिला एवं बाल विकास विभाग, कोलायत से पहले खांटी नेता देवीसिंह भाटी, फिर उनकी पुत्रवधू को पटकनी देने वाले भंवर सिंह भाटी, उच्च शिक्षा विभाग सुखराम विश्नोई वन एवं पर्यावरण तथा टीकाराम जूली श्रम विभाग के मंत्री बनाये गये है। कांग्रेस के स्थापना दिवस के अगले दिन 29 दिसम्बर को मंत्रिपरिषद की विधिवत पहली बैठक में परम्परा के अनुसार कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र को मंजूरी देकर उसके क्रियान्वयन के लिए राज्य के मुख्य सचिव को सौंपा जाना है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की घोषणा के अनुसार मुख्यमंत्री गहलोत किसानों की कर्जमाफी का ऐलान कर चुके है। कर्जमाफी के तौर तरीकों तथा इसमें वित्तीय प्रावधान को लेकर भाजपा ने सरकार पर पलटवार किया है। वही राज्यपाल की मंजूरी के बाद पहला अध्यादेश जारी किया गया है जिसमे पूववर्ती सरकार के निर्णय को पलटते हुए सहकारी समितियों में विधायकों तथा सांसदो के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बने रहने का प्रावधान पुन: लागू कर दिया है। इसी तरह पंचायत राज के जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन में शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता हटाने पर भी विचार किया जा रहा है। बहरहाल गहलोत सरकार को राज्य की गंभीर अर्थव्यवस्था से जुड़ी चुनौतियो का सामना करते हुए अगले वित्तीय वर्ष के बजट की तैयारी के साथ लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरना है। इससे पहले विधानसभा का सत्र आहूत किया जाना है जिसमें नव निर्वाचित विधायको की शपथ तथा नये अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव और सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक एवं उपसचेतक की नियुक्ति की जानी है। करीब एक दर्जन वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी दूर करने की दिशा में विभिन्न बोर्डो निगम तथा आयोग में नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त करना है। कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश करते समय राज्यपाल को सौ सदस्यों की सूची सौंपी थी जिनमें कांग्रेस के 99 तथा सहयोगी दल रालोद के एक सदस्य का नाम था। चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के बागी उम्मीदवार भी पार्टी के समर्थन में है।

पिछले चुनाव में 163 सीटों पर कब्जा करने वाली भाजपा इस बार 73 सीटों पर सिमट गई है। पार्टी के दो बागी प्रत्याशी भी विजयी हुए है। पार्टी जिला स्तर पर चुनावी हार के कारणों की समीक्षा कर रही है। उधर प्रतिपक्ष के नेता के चयन को लेकर खींचतान बनी हुई है। लोकसभा चुनाव की तैयारियो के मद्देनजर पार्टी हाईकमान ने एक बार पुन: मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेडकर को राजस्थान का प्रभारी बनाया है।

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भाजपा के बागी नेता वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भारत वाहिनी पार्टी के बैनर पर 68 प्रत्याशियों को चुनाव में उतारा। तिवाड़ी सहित 67 प्रत्याशी जमानत नहीं बचा सके। केवल मात्र भरतपुर मे गिरधारी तिवाड़ी ने कड़ा मुकाबला किया। अन्य बागी नेता विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने राजपा का भाजपा में विलय करने के साथ राज्यसभा की सदस्यता हासिल कर ली। पूर्वी राजस्थान की लगभग डेढ़ दर्जन सीटों पर अधिकांश क्षेत्रो में मीणा की सलाह पर प्रत्याशियों को तरजीह दी गई लेकिन मीणा अपनी पत्नी विधायक गोलमा देवी को भी चुनाव नहीं जिता सके।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ खुली बगावत का झंडा उठाये विधायक हनुमान बेनीवाल ने चुनाव से ऐन पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का गठन करके 57 उम्मीदवार खड़े किये। स्वयं की जीत सहित पार्टी के तीन उम्मीदवार भी विजयी हुए। पार्टी के उम्मीदवारों को मिले वोटो की संख्या लगभग छ: दर्जन विभिन्न दलो के आठ सौ से अधिक प्रत्याशियों के मुकाबले कही अधिक थी। कुछ निर्वाचन क्षेत्रो में इन दलों के प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले। कांग्रेस ने भी गठबंधन में सहयोगी दलों को पांच सीटे दी जिनमें एकमात्र रालोद के डॉ.सुभाष गर्ग भरतपुर से विजयी रहे जिन्हे मंत्री बनाया गया है। एक सहयोगी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल के प्रत्याशी फतेहसिंह कुशलगढ़ में मात्र 2267 वोट प्राप्त कर सके जबकि वह इसी सीट से छ: बार विधायक रह चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की यह अवधारणा है कि कांग्रेस पार्टी में टिकट वितरण से लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों के चयन तथा विभागों के बंटवारे की प्रक्रिया में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को तरजीह देना उनके राजनीतिक रूतबे को बढ़ाने की नियोजित कसरत है। गुजरात चुनाव के नतीजों से राहुल गांधी की राष्ट्रीय छवि को उजला करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद में विलम्ब को लेकर मीडिया की खबरों पर तंज कसते हुए अशोक गहलोत ने दिल्ली में कहा कि भाजपा ने उत्तर प्रदश तथा महाराष्ट्र में क्रमश: सात और नौ दिन में मुख्यमंत्री का चयन किया। कांग्रेस ने तो महज तीन दिन लगाये। विभागों को बंटवारा भी सोच समझ से किया जाना चाहिए ताकि सही फैसलों में दिक्कत नहीं हो।

विभागो के बंटवारे को लेकर विश्लेषकों ने कतिपय विसंगतियों पर ध्यान दिलाया है। मसलन सिंचाई तथा इंदिरा गांधी नहर परियोजना की जिम्मेदारी अलग अलग दी गई है। पानी से जुड़े विभागो को एकीकृत करना अधिक मुनासिब रहता। इसी प्रकार श्रम विभाग के साथ जोड़े जाने वाले विभाग भी अलग किए गए है। पिछले 33 सालों में गहलोत सरकार मे पहली बार स्कूली शिक्षा स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री को सौंपी गई है। वर्ष 1985 से कांग्रेस तथा भाजपा शासन में यह विभाग केबिनेट मंत्री के पास रहा है। अलबत्ता पिछली वसुंधरा सरकार मे राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार वासुदेव देवनानी को यह विभाग दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि विपक्षी विधायक एवं सचेतक गोविन्द सिंह डोटासरा स्कूली शिक्षा केबिनेट मंत्री को देने की वकालत करते थे। अब इन्हें राज्यमंत्री के नाते यह विभाग मिला है।

विश्लेषकों को पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर हुई खंचतान फिर विभागों के बंटवारे को लेकर उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का गृह विभाग के बिना अन्य पांच विभाग लेकर राजी होना अटपटा लगा है। इसके बावजूद कांग्रेस राज में गहलोत तथा पायलट शक्ति के दो केन्द्र तो बने हुए है।

जयपुर से गुलाब बत्रा

 

 

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