ब्रेकिंग न्यूज़ 

शांतिदूत आचार्य डॉ. लोकेश मुनि: विश्व-नवरचना के महान प्रयोक्ता

शांतिदूत आचार्य डॉ. लोकेश मुनि: विश्व-नवरचना के महान प्रयोक्ता

भारत के अध्यात्म क्षितिज पर जैन धर्म, दर्शन एवं संस्कृति का विशेष प्रभाव है। लेकिन इस प्रभाव को विश्व क्षितिज पर पहुंचाने का अनूठा कार्य कुछेक मुनियों एवं आचार्यों ने किया है। समूची दुनिया में भारत की अहिंसा को विशेष महत्व मिला है, क्योंकि दुनिया अशांत है, हिंसा एवं आतंकवाद से त्रस्त है, आदमी कहीं भी सुरक्षित नहीं है। समाज की धरती पर मनुष्य ने जब-जब विषमता के बीज बोये, तब-तब हिंसा, आतंक और घृणा के विषफलों ने मानवता की कमनीय काया को विद्रूप बनाया, विकृत किया और निष्प्राण किया है। मनुष्यता को इस महाविनाश से उभारने के लिए, उसे अहिंसा, प्रेम और सहअस्तित्व का प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय संत परम्परा में संतों, ऋषियों, मनीषियों ने उल्लेखनीय उपक्रम किये हैं। इसी संत परम्परा में आचार्य डॉ. लोकेशमुनिजी का एक विशिष्ट स्थान है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन दर्शन की भूमिका पर जीने वाले इस संत चेतना ने संपूर्ण मानवजाति के कल्याण और जीवन-निर्माण में स्वयं को समर्पित कर समय, शक्ति, श्रम और सोच को एक सार्थक पहचान दी है। वे शांतिदूत हैं, प्रखर प्रवक्ता हैं, समाज सुधारक हैं, विचारक हैं, मनीषी हैं और धर्म के प्रवर्तक हैं। आपके निबंध कर्तृत्व ने राष्ट्रीय एकता, सद्भावना एवं परोपकार की दिशा में संपूर्ण राष्ट्र को सही दिशाबोध दिया है। वे पुरूषार्थ की महागाथा हैं, कीर्तिमानों का कीर्तिमान हैं।

जैनधर्म के श्रेष्ठ सिद्धांतों और भगवान महावीर के धार्मिक निर्देशों को अपना आधार बनाकर तथा आधुनिक युग की अपेक्षाओं के अनुरूप अपने श्रेष्ठ मंत्र ‘सभी धर्म स्थलों को प्रयोगशाला और सभी प्रयोगशालाओं को धर्मस्थल बनाना होगा’ का आविष्कार कर, विश्व के अहिंसात्मक रूपांतरण, सहअस्तित्व, विश्वधर्म का विकास, सर्वधर्म समभाव एवं परस्पर सामजंस्य, ब्रह्मांड और पृथ्वी मंडल की सुरक्षा, प्रदूषणमुक्त पर्यावरण और दूषणमुक्त जीवनशैली की रचना, शिक्षा में शांतिमूल्यों की स्थापना की प्रतिबद्धता के साथ आगत तथा सामयिक समस्याओं के समाधान में धर्माचार्यों की पहल को आवश्यक बताते हुए, आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने एक प्रखर शांतिदूत संत के रूप में व्यापक संघर्ष किया है और कर रहे हैं। प्रखर चिंतक, लेखक, कवि एवं समाज सुधारक आचार्य डॉ. लोकेश मुनि पिछले 35 वर्षों में अहिंसा, शांति एवं सद्भावना की स्थापना, राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं। अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भारत में बीस हजार किलोमीटर की पदयात्रा एवं विश्व के अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं। इन्हीं महान मूल्यों को साकार करने के लिए इन्होंने ‘अहिंसा विश्व भारती’ संस्था की स्थापना कर अपना कार्य क्षेत्र विश्वव्यापी बनाया। उन्होंने समाज में कन्या-भू्रण हत्या, नशाखोरी, पर्यावरण प्रदूषण आदि सामाजिक बुराइयों के विरोध में आंदोलन शुरू किया।

आचार्य डॉ. लोकेश मुनि का जन्म 17 अप्रैल 1961 को राजस्थान के पचपदरा शहर में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद जैन, बौद्ध, वैदिक दर्शन के साथ अनेक भारतीय एवं विदेशी दर्शनशास्त्र का गहन अध्ययन किया। आपको प्राकृत, हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती आदि अनेक भाषाओं का ज्ञान है। आपने एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें गद्य एवं पद्य दोनों ही विद्याओं में लिखी है। अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की मौलिक विशेषता है, सर्वधर्म सद्भाव उसका मूलमंत्र है। आचार्य लोकेश ने उसके संरक्षण व संवर्धन के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने साम्प्रदायिक हिंसा एवं तनाव के विभिन्न अवसरों पर समाज व देश में शांति की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है जैसे मुज्जफरनगर व कैराना (उत्तर प्रदेश), बारडोली (गुजरात), सिख समुदाय व डेरा सच्चा सौदा (पंजाब) में। आचार्य लोकेश का कहना है कि सभी धर्म हमें जोडऩा सिखाते हैं तोडऩा नहीं, धर्म के क्षेत्र में घृणा, नफरत, भय व हिंसा का कोई स्थान नहीं हो सकता। धर्म मानव कल्याण, सद्भावना व विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सर्वधर्म सद्भाव विकास के लिए आवश्यक है। सांप्रदायिक तनाव आर्थिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

विश्व जनमानस में युद्ध, हिंसा व आतंकवाद जैसा प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहा है, किन्तु हिंसा व आतंकवाद किसी समस्या का समाधान नहीं है। हिंसा प्रतिहिंसा को जन्म देती है। हिंसा व आतंकवाद को खत्म करने के लिए उसके मूल कारणों को खोजना होगा। यह सर्वव्यापी सत्य है कि युद्ध पहले मस्तिष्क में पैदा होता है बाद में मैदान में लड़ा जाता है। आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने गहन अध्ययन व प्रयोगों के बाद पीस एजुकेशन कार्यक्रम तैयार किया है। पीस एजुकेशन के प्रायोगिक प्रयोगों से मानव मन में व्याप्त पाशविक वृत्तियां तिरोहित होती हैं तथा मानवीय व दैविक वृत्तियां जागृत होती है। यह कार्यक्रम अहिंसा का प्रशिक्षण देता है। पीस एजुकेशन कार्यक्रम को देश एवं दुनिया की शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के प्रयास करने होंगे।

जलवायु परिवर्तन व ग्लोबल वार्मिंग एक अहम अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है। वर्तमान में ग्लेशियर पिघल रहे हैं, वन संपदा घट रही है, ओजोन का छेद वृहद होता जा रहा है, यही स्थिति रही तो धरती पर मानव का जीवन दूभर हो जाएगा। आचार्य लोकेश का कहना है कि पर्यावरण में असंतुलन के लिए मनुष्य की लोभ की चेतना जिम्मेदार है। अत्यधिक भौतिकता प्रधान जीवनशैली के कारण पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है। पदार्थ सीमित हैं और इच्छाएं असीम हैं। सीमित पदार्थ आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं परन्तु असीम इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर सकते। बाह्य प्रदूषण की तरह वैचारिक प्रदूषण उससे भी अधिक खतरनाक हैं। ध्यान, योग, व संयम आधारित जीवनशैली के द्वारा हम बाह्य व आंतरिक प्रदूषण से मुक्त रहकर स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

आचार्य लोकेश ने अति प्राचीन जैन धर्म को विश्व के कोने-कोने में फैलाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किये हैं। आचार्य लोकेश ने महावीर जयंती पर राष्ट्रपति भवन, श्री वीरचंद राघवजी गांधी की 149वीं जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री निवास पर कार्यक्रम का आयोजन किया व संयुक्त राष्ट्र संघ व अमेरिकी सिनेट व असेंबली जैसे प्रतिष्ठित मंचों से भगवान महावीर व जैनधर्म के सिद्धांतों को प्रस्तुत करने का गौरव प्राप्त किया है।

सन् 2010 में भारत सरकार ने आचार्य डॉ. लोकेश मुनि को राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया। विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी ने आचार्य डॉ. लोकेश मुनि को पुरस्कार प्रदान किया। संयुक्त राष्ट्रसंघ के सूचना केंद्र में आचार्य डॉ. लोकेश मुनि को विश्व शांति और सांप्रदायिक सद्भावना क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए सन् 2014 में यूनिवर्सल पीस फेडरेशन की ओर से ‘अम्बेसडर ऑफ पीस’ सम्मान से अलंकृत किया गया। आचार्य डॉ. लोकेश मुनि द्वारा समाज में अहिंसा, शांति एवं नैतिक मूल्यों के सर्वधर्म में योगदान के लिए सन् 2006 में माननीया श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने गुलजारी नंदा फाउंडेशन के ‘नैतिक सम्मान’ से आचार्य लोकेश को सम्मानित किया। कैलिफोर्निया मिल्पितास के मेयर होजे अस्ताविश ने अहिंसा, शांति और सद्भावना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आपको ‘के टू मिल्पितास’ से सम्मानित किया।

आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ध्यान, योग और पीस एजुकेशन के विशेषज्ञ हैं। गहरे अध्ययन एवं परीक्षण के बाद आपने ‘पीस एजुकेशन’ पाठ्यक्रम तैयार किया है जो प्राचीन ध्यान-योग और आधुनिक विज्ञान का सम्मिश्रण है। यह मनुष्य के अंदर निहित पाशविक प्रवृत्ति को समाप्त कर मानवीय एवं दैविक प्रवृत्ति को जगाती है। आचार्य लोकेश ने संयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व धर्म संसद सहित विभिन्न राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेकर भारतीय संस्कृति एवं जैनधर्म का गौरव बढ़ाया है।

नया भारत निर्मित करते हुए सबकी नजरे आचार्य डॉ. लोकेश मुनि जैसे आत्मचेत्ता, जाग्रत प्रज्ञा के धनी एवं शांतिदूत संतपुरूष पर लगी है क्योंकि वे व्यक्ति नहीं आत्मदर्शन और चैतन्य जागरण के महायात्री हैं। उनका संपूर्ण जीवन प्रेरक है, महिमामयी है, एक रोशनी है, एक प्रताप है, एक प्रकाश है और एक चमत्कार है। उनका होना और मिलना जगत की एक अद्वितीय घटना है। वैसे फूल रोज-रोज नहीं खिलते, सदियां बीत जाती है तब कहीं कोई लोकेश मुनिजी जैसे पारदर्शी, पीयूषपायी महाज्ञानी गुरू प्रकट होते हैं। जो अनंत-अनंत लोगों की अंतचक्षु का उद्घाटन कर अनंत सत्य का साक्षात्कार कराते हैं।

अहिंसा के बारे में उनके वचनों और आलेखों ने दुनिया को शांति की राह दिखाई है। वे ओजस्वी वक्ता हैं। जब वे बोलते हैं तो हजारों नर-नारियों की भीड़ उन्हें मंत्र-मुग्ध होकर सुनती है। अपने प्रवचनों में वे धर्म के गूढ़ तत्वों की ही चर्चा नहीं करते, बल्कि उन्हें इतना बोधगम्य बना देते हैं कि उनकी बात सहज ही सामान्य-से-सामान्य व्यक्ति के गले उतर जाती है। अहिंसा के महान प्रवक्ता आचार्य डॉ. लोकेश मुनि सांप्रदायिक सद्भावना, धार्मिक सहिष्णुता एवं नैतिक मूल्यों के उत्थान का दुरूह कार्य कर रहे हैं। इस तरह वे स्वस्थ वातावरण निर्मित कर मानवीय एकता को मजबूती दे रहे हैं। शांति, अहिंसा व मैत्री की धारा प्रवाहित कर रहे हैं। इंसान को इंसान बना रहे हैं। जिस दिन महान भारत का नागरिक पहले इंसान होगा, भारतीय होगा और बाद में हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, बौद्ध, जैन आदि होगा। जिस दिन पंडित व पादरी, मुनि और मौलवी, गरू और ग्रंथी एक मंच पर बैठकर मनुष्य को अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देंगे वह दिन ही भारतीयता की प्रतिष्ठा का दिन होगा और इसी प्रयास में मुनिवर संलग्न है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.