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किसानों के हित में मोदी सरकार के फैसले

किसानों के हित में मोदी सरकार के फैसले

भारत में काफी लम्बे समय से कृषि क्षेत्र संकट में रहा हैं। किसानों के ऊपर लगातार ऋण बढ़ता रही है। लम्बे समय से कृषि में लागत ज्यादा और आय कम रहा है। जिससे किसानों को उनका लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है। यहां तक की इस क्षेत्र में नौकरी का उत्सर्जन लगभग न के बराबर रहा है। अपनी जीविका चलाने के लिए लोग कृषि क्षेत्र से बाहर आना चाहते हैं। जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान लगातार गिरने के कारण इस क्षेत्र में नौकरी के आसार कम थे। इसलिए शहर में भी लोगों के लिए रोजगार मिलने के आसार कम थे। सरकार की अनदेखी के कारण कृषि उत्पाद में आने वाली वास्तविक लागत को कम दिखाने से किसानों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो वह इन सारी समस्याओं से पहले ही अवगत थे। सरकार की मंशा बिल्कुल साफ थी। भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को उनके उत्पादों की कुल लागत का डेढ़ गुना न्यूनत्तम समर्थन मुल्य देने का वादा किया। दुर्भाग्य से इस घोषणा के कृयान्वयन में देरी हुई। हालांकि अंतत: सरकार ने किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी देने का निर्णय ले ही लिया। अब एमएसपी के तहत किसानों को अन्न उत्पादन में लगने वाले उनके श्रम, खाद्य, किराये पर ली गई भूमि, बीज और सिंचाई सहित अन्य कार्यों में लगने वाली कुल लागत सरकार द्वारा मिल जायेगी। हांलाकि कृषि लागत को जोडऩे में अभी भी कई सारी समस्याएं हैं। फिर भी सरकार किसानों को लगभग सभी फसलों पर आने वाली कुल लागत से 50 से 90 प्रतिशत अधिक समर्थन मूल्य दे रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस समर्थन मूल्य के कारण किसानों को थोड़ा बल मिलेगा और वे ऋण के कुचक्र से बाहर निकलेंगे।

भारी वर्षा, साइक्लोन व तूफान के कारण किसानों की फसल प्राय: नष्ट हो जाती हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी किसानों को उनकी नष्ट हुई फसल के मूल्यों को देने के लिए आश्वस्त किया। इसलिए सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम दूसरा मुख्य कारण है, जिससे किसानों को ऋण से छुटकारा मिलेगा।

कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी का लाना भी इस सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक रही है। उदाहरण के तौर पर सरकार ने किसानों की कृषि भूमि को परखने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड प्रयोग में लाई, जिसके माध्यम से किसान अपनी जमीन की स्थिती को जान पायेंगे। इस कार्ड के माध्यम से किसानों को यह साधारणपूर्वक पता चल जायेगा कि उसे उसकी भूमि में किस प्रकार का बीज और कितनी खाद्य की आवश्यकता होगी। अभी तक सरकार की इस योजना के तहत कुल 7.8 करोड़ कार्ड बनाये गये हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।

हमें कृषि के लिए विवेकपूर्ण निर्यात-आयात नीति की भी आवश्यकता है। भारत आज, अभावग्रस्त कृषि उत्पादन वाला देश नहीं है। हम उत्पादन सरप्लस में हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत अब कृषि उत्पादों का निर्यात कर रहा है और इस निर्यात से 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर कमा रहा है। हम अपने निर्यात को और आगे बढ़ा सकते हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए हम उपग्रहों तथा नई तकनीक की मदद ले सकते हैं। जीपीएस डाटा के आधार पर हम विभिन्न फसलों की बुआई के बारे में अग्रिम योजना बना सकते हैं और यहां तक ​​कि अपेक्षित कमियों के मामले में आयात की योजना भी बना सकते हैं।

कृषि क्षेत्र जो काफी दिनों से क्रेडिट की कमी से गुजर रहा था, उसे इस सरकार की तरफ से प्रत्येक क्रमिक वर्षो 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में क्रमश:  9,15,509.92 करोड़ , 10,65,755.67 करोड़ और 11,68,502.84 करोड़  रूपये का क्रेडिट मिला। इस क्रेडिट का मतलब कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ाना था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि औसतन के वल 1.1 हेक्टेयर भूमि तक सीमित होने के कारण कृषि क्षेत्र में भीड़भाड़ है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए रास्ते तलाशने की आवश्यकता है। हमें समझना चाहिए कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में अधिक संख्या में लोगों का पलायन संभव नहीं है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और गैर-कृषि गतिविधियों में रोजगार की संभावना है, जिसमें विकेन्द्रीकृत खाद्य प्रसंस्करण, बांस उत्पाद, मुर्गीपालन, पशुपालन (डेयरी सहित), मशरूम की खेती, फूलों की खेती, बागवानी, मछली पकडऩे और कई अन्य रोजगार शामिल हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत के पास विशेष वनस्पतियों, जीवों, जैव विविधता जैसी प्राकृतिक संपदा उपलब्ध है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में शायद कहीं उपलब्ध।

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जिस प्रकार की प्राकृतिक संपदा भारत में उपलब्ध है, हमारी सरकारें उसका प्रयोग करने में बिल्कुल असफल रही हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कभी-कभी हमारें किसानों को उनके वस्तुओं का उचित भाव न मिलने के कारण सड़कों पर आना पड़ता है। इसके निवारण हेतु हमें पैदावार की मार्केटिंग और उसे सुरक्षित रखने पर ध्यान देना होगा।  हांलाकि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस दिशा में कदम अवश्य उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक नेशनल मार्केटिंग और एमएसपी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदमों में से एक हैं। सभी पैदावार को एमएसपी देने का सरकार द्वारा लिया गया निर्णय किसानों को अवश्य ही फायदा पहुंचायेगा।

पिछले बजट 2018-19  में, पशुपालन और मत्स्य पालन में लगे लोगों को किसान क्रेडिट कार्ड की पेशकश करने का प्रावधान किया गया था। यहां तक ​​कि भूमिहीन लोगों को कृषि ऋ ण देने का मार्ग प्रशस्त किया गया था, जिसे व्यापक रूप से सराहा गया था। पिछली सरकार के जाने के बाद मोदी सरकार की नीतियां, योजनाएं और ईमानदारी से किए गए प्रयास ध्यान देने योग्य रहे हैं। कृषि, गैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देना, किसानों की स्थितियों में सुधार करना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने जैसे सरकार के प्रयास किसानों की आय एवं उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने और उन्हें ऋ ण से बचाने में एक लंबा रास्ता तय कर सकता है।

मैं यहां बताना चाहूंगा कि इन सभी कार्यों के अतिरिक्त इस सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में गरीब महिलाओं के लिए एलपीजी तथा आयुष्मान भारत के तहत गरीबों को मुफ्त इलाज के लिए पांच लाख का बीमा दिया है। फिर भी सरकार का कार्य यही पर खत्म नहीं हो जाता। यह बस केवल एक छोटी सी शुरूआत है। हमें यहां यह नहीं भूलना चाहिये की शहरी और ग्रामीण भारत की आय में 12.3 गुना का अंतर है। जहां ग्रामीण भारत में रहने वालों की कुल वार्षिक आय 23,000 रूपये है तो वहीं शहर में रहने वालों की वार्षिक आय 2,90,000 रूपये है। इसलिए सरकार का काम अभी यही पर खत्म नहीं होता।

कुछ लोग हैं जो मानते हैं कि कृषि को कोई सब्सिडी नहीं मिलनी चाहिए और इसे बाजार के काम पर छोड़ देना चाहिए। मैं उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि दुनिया में कहीं भी, कृषि को बिना सरकारी समर्थन और सब्सिडी के चलाया नहीं जाता है। किसानों को समर्थन की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि बाजार सही नहीं हैं और हम अपने किसानों को बाजारों की दया पर नहीं छोड़ सकते हैं। इसके अलावा हमें  135 करोड़ लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा की सख्त आवश्यकता है और हमें यह समझना चाहिए कि एक बार हमारी खाद्य सुरक्षा में गड़बड़ी हो जाने के बाद, कोई भी देश इतनी बड़ी आबादी को भोजन नहीं दे सकता है।

 

डॉ. अश्विनी महाजन

 

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