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”सॉफ्टवेयर से आप एक बार गाना गा सकते हैं गायक नहीं बन सकते’’ –सोनू निगम

”सॉफ्टवेयर से आप एक बार गाना गा सकते हैं गायक नहीं बन सकते’’ –सोनू निगम

जब भी आप विरोध की आवाज बुलंद करते हैं, आपकी आवाज दबा दी जाती है। ऐसा सिर्फ किसी कमजोर के साथ नहीं होता, बल्कि विरोध का सुर उठाने पर खामियाजा ताकतवर और प्रसिद्ध  लोगों को भी उठाना पड़ता है। संगीत के मामले में ऐसी ही आवाज उठाई थी गायक सोनू निगम ने, जिन्हें न केवल फिल्म इंडस्ट्री से लंबा विरोध झेलना पड़ा, बल्कि इंसानियत का पाठ पढ़ाने वाले सलमान खान ने तो उनके गाए गीत को अपनी आवाज तक में डब कर डाला। सोनू निगम ने अपने ऐसे ही कई खट्टे-मीठे अनुभव बांटे पूजा महरोत्रा से। पेश है बातचीत के कुछ अंश…..

पिछले दिनों खबर थी कि फिल्म इंडस्ट्री कॉपीराइट के मामले में आपके  विरुद्ध खड़ी हो गई है? आपके गाए गीत भी दूसरों की आवाज मे सामने आए। क्या ये सच है?
जी, ये बात सौ फीसदी सच है। मैंने कॉपीराइट के मामले में आवाज उठाई तो बिना मेरी बात और कॉपीराइट के मामले को पूरी तरह से समझे, पूरी इंडस्ट्री न सिर्फ मेरे केवल खिलाफ हो गई, बल्कि मेरे गाए गीतों को दूसरे गायकों से भी गवाया भी गया। कई गीत मेरे डब हो चुके थे, जिनकी मुझे फीस भी नहीं दी गई।

क्या है ये कॉपीराइट का मामला?
किसी भी लिफ्ट में, रेस्टोरेन्ट में या शॉपिंग मॉल में जब हमारा या किसी भी गायक का गीत बजाया जाएगा तो उसका कुछ पैसा उस कंपनी के खाते में जाएगा जिसने वह गीत रेकॉर्ड किया है। वह गायक के जेब में पैसा नहीं जाता है। नियम यही है और अधिकार भी। फिल्म इंडस्ट्री मे कॉपीराइट की बात कई वर्षों से हो रही है, लेकिन कोई आवाज नहीं उठा रहा है था। मैंने उठाया उसका नतीजा ये हुआ कि मेरे गाए गीतों को, जिसकी फीस भी मुझे नहीं दी गई, उसे दूसरे गायकों से दुबारा गवाया गया। आपको सलमान का गाया गीत ‘हैंगओवर’ याद होगा। काफी पॉपुलर हुआ था वह गीत। उस गीत को दरअसल मैंने गाया था श्रेया के साथ।

वैसे अब सलमान खान भी अब गायक हो गए हैं। गायकों की गायकी पर कितना खतरा मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है?
देखिए खतरा तो उन्हें होगा जिन्हें तुरंत-फुरत सफलता मिली है। हमने यहां जूतियां ही नहीं, गला भी घिसा है। मैदान में हम घंटों गा सकते हैं। घबराते वो हैं जो एक गाना गाने के बाद हफ्ते लगते हैं। श्रोता अच्छे-बुरे का अंतर खूब समझते हैं। आप उन्हें बेवकूफ नहीं बना सकते हैं। अब जब सलमान गायक बन गए हैं तो आप समझ सकते हैं कि तकनीक किसी को भी गायक बना सकती है। अब पहले वाला जमाना नहीं है कि सारे संगीतकार गायक-गायिका साथ होते थे तब गाना रेकॉर्ड होता था। अब समय बादल चुका है। अब म्यूजिक कभी रेकॉर्ड हुआ, गायक अलग गाता है, गायिका अलग गाती है, फिर उसे मिक्स कर दिया जाता है। ऐसे सॉफ्टवेयर हैं बाजार में कि आप किसी भी अंदाज में गाएं, उसे सुरीला बना दिया जाता है। और, इन दिनों तो पूरी इंडस्ट्री गायक बन रही है क्या सलमान और क्या शाहरुख।

पहले और आज के संगीत में, गायकी में और लिरिक्स मे बहुत अंतर है। आपको किस दौर के गाने ज्यादा पसंद हैं?

दिल से बोलूं तो मुझे भी आर.डी. बर्मन, शंकर जयकिशन, मदन मोहन के ही गीत पसंद हैं। उस समय और आज के समय में बुनियादी फर्क है। पहले गीत बनाया जाता था, आज गीत मिक्स किया जाता है। पहले के गीत को आप कहीं भी, कभी भी, किसी के साथ भी गा सकते थे, लेकिन आज के गीत ऐसे वाहियात बन रहे हैं कि आप कहीं भी, किसी के साथ और कभी भी नहीं गा सकते हैं।

13-12-2014

आज के गीतों के बोल भी गंदे हो चुके हैं, कैसे रुकेगा ये दौर?
इसका जोरदार ढंग से विरोध करके आप और आम जनता ही इसे रोक सकते है । हम क्या करते हैं कि कोई चीज कितनी गंदी है,  उसे देखने जाते हैं और उसे देख-देख कर हम उसे हिट बना देते हैं। क्यूं देखें जब वो खराब है। उसका विरोध कीजिए। विदेशों मे भी गंदी चीजें बनती हैं, उसे यूट्यूब पर अपलोड कर उसका इतना विरोध किया जाता है कि कलाकार वैसा कोई गाना दुबारा बनाने कि कोशिश नहीं करता और हमारे यहा उसकी तारीफ की जाती है, उसे सौ करोड़ के क्लब मे शामिल कर दिया जाता है। गलत को गलत कहिए और विरोध में देखना, सुनना बंद कीजिए।

आपका लाइव बैंड ‘क्लोज टू माइ हार्ट’ के विषय में बताएं। क्या म्यूजिशियन के दिन वापस आ रहे हैं?
हम अपनी पुरानी कला को भूलते जा रहे हैं। पहले ऐसे ही लाइव कार्यक्रम हुआ करते थे। अब लाइव परफॉर्मेंस में कभी-कभी गायक सिर्फ लब लपलपाते हैं, गाते भी नहीं हैं। चूंकि उन्हें रियाज की आदत नहीं होती, वो एक गाने के बाद हांफने लग जाते हैं। ऐसे में आप सोच सकती हैं कि 30 म्यूजिशियन के साथ तालमेल बैठाना कितना चैलेंजिंग होगा, लेकिन मजा भी चैलेंज में ही आता है। पहले जमाने में किसी एक की गलती पर पूरा गाना फिर से रिकॉर्ड होता था। जब आप एक साथ कई कलाकारों के साथ स्टेज पर होंगे तो समझ सकते हैं कि लाइव कन्सर्ट में श्रोताओं को और हमें भी कितना मजा आएगा।

आज कई टेलीविजन चैनल हर दिन गायकों की तलाश मे जुटे रहते हैं। नए लोगों को प्लेटफॉर्म मिल रहा है। आपके जमाने से ये कितना अलग है?
टेलीविजन चैनलों ने देश को बड़े-बड़े गायक दिए हैं। कुनाल गुंजावाला, श्रेया घोषाल और सुनिधि चौहान को तो अब किसी तरह की पहचान की जरूरत ही नहीं है। इन चैनलों की वजह से अब कोई भी सिंगर हैंड टू माउथ की स्थिति में नहीं है, बल्कि अच्छा कमा-खा रहे हैं।

इन दिनों पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है। इस अभियान के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
जी, स्वच्छ रहना तो बहुत अच्छी बात है। जैसा कि हमें बचपन से ही बताया जाता है कि खाना खाने से पहले हाथ धोएं। सोने से पहले हाथ-पैर अवश्य धोएं। लेकिन, इस अभियान में अधिकांश नेता और सेलेब्रिटी ढोंग कर रहे हैं और साफ जगह पर कूड़ा गिराकर झाड़ू लगा रहे हैं। इसकी बजाए स्लम मे जाएं वहां सचमुच गंदगी है, वहां सफाई करें।

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