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पूर्ण लोकतंत्र के लिए अभी चलना आवश्यक

पूर्ण लोकतंत्र के लिए अभी चलना आवश्यक

हमारा देश विश्व में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणराज्य है। क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां व जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा हमारा देश विश्व में सफल लोकतंत्र का सबसे बड़ा उदाहरण भी है। भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया व पद्धति ने विश्व समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में 814.5 बिलियन पंजीकृत मतदाताओं के लिए इतिहास में दर्ज  सबसे बड़ा चुनाव आयोजन किया गया। इस 814.5 बिलियन पंजीकृत मतदाताओं के लिए 919452 पोलिंग स्टेशनों की स्थापना की गई जिनमें 1878303 ईवीएम का प्रयोग किया गया। इस प्रकार एक विश्व रिकॉर्ड बनाकर भारत बन गया दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र प्रक्रिया का अद्वितीय उदाहरण। लेकिन 2017 के ‘डेमोक्रेसी इंडेक्स’ में भारत को मिले अंक अभी भी भारत के लोकतंत्र को समझदार होने व बनने की बात कह रहे हैं।

वर्ष 2017 के ‘डेमाक्रेसी इंडेक्स’ में सम्मिलित 167 देशों में से भारत ने 10 में से 7.23 अंक प्राप्त कर 42 वां स्थान प्राप्त किया जो हमें समृद्ध व समझदार लोकतंत्र बनने की और बढऩे को कहता हैं। इससे पूर्व भारत 32 वें स्थान पर था और उसने 7.81 अंक प्राप्त किये थे। (ईआईयू) के अनुसार ईकोनोमिस्ट इंटेलिजेंट यूनिक वर्णित 4 प्रकार के शासन व्यवस्था में भारत अभी भी दोषपूर्ण लोकतंत्र में गिना जाता है जो चिंता का विषय है। ईकोनोमिस्ट इंटेलिजेंट यूनिक (ईआईयू) ने ‘डेमोक्रेसी इंडेक्स’ के लिए 0-10 पैमाने पर 167 देशों का आंकलन किया और समझदारी भरे लोकतंत्र के लिए विश्व समुदाय के देशों को अंक प्रदान कर उन्हे रेटिंग दी।

सफल व सुफलतम लोकतंत्र के लिए (ईआईयू) ने 05 मानदंड बनाये- (1) चुनावी प्रक्रिया में बहुलवाद (चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हो) (2) सरकारों की जांच व संतुलन (सरकार का कामकाज का तरीका) (3) नागरिकों का राजनीति में सहभागिता (राजनीतिक जन भागीदारी) (4) नागरिक समर्पित सरकार (राजनीतिक संस्कृति सामथ्र्य) (5) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आनंद (नागरिक स्वतंत्रता) इन पांच मानदण्डों के आधार पर 10 में से दिये गये अंकों में 8 या इससे अधिक अंक पाने वाले देशों को पूर्ण लोकतंत्र का दर्जा दिया जिनमें से (1) नार्वे 9.87 (2) आइसलैंड 9.58 (3) स्वीडन 9.39 (4) न्यूजीलैंड 9.26 (5) डेनमार्क 9.22 अंक के साथ भारत ने 42 वां स्थान 7.23 अंक प्राप्त कर हासिल किया। इस प्रकार ‘डेमोक्रेसी इंडेक्स’ में भारत को दोषपूर्ण लोकतंत्र में माना गया। विश्व को सत्ता के 4 प्रकार में (1) पूर्ण लोकतंत्र (2) दोषपूर्ण लोकतंत्र (3) संकर शासन (4) सत्तावादी शासन में बांटकर (ईआईयू) ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र लेकिन दोषपूर्ण लोकतंत्र यह भी चिंता का विषय है। हर एक मतदाता बिना भय, बिना लोभ, बिना लालच, बिना डर, बिना प्रलोभन के अपने विवेक का इस्तेमाल कर शत प्रतिशत मतदान कर दे, इससे बड़ी न तो कोई शिक्षा हो सकती है और न ही कोई समृद्ध सुफल लोकतंत्र। अत: हम भारत वासियो को उक्त पंक्तियों को अमली जामा पहनाने के लिए मतदाता शिक्षा की एक शिक्षाशास्त्रीय, शिक्षा मनौवैज्ञानिक सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनानी होगी। हमें 12 वर्ष एवं इससे अधिक आयु वर्ग से लेकर वृद्धो तक को एक सार्थक सम्यक मतदाता शिक्षा से जोडऩा होगा। मतदाता शिक्षा को विद्यालयी शिक्षा के साथ समन्वित कर विवेक पूर्ण मतदाता समग्र महादान की अवधारणा को मूर्त रुप देना होगा।

सौभाग्य से भारत निर्वाचन आयोग ने जिला स्तर पर मतदाता शिक्षा के क्रम में जिला मतदाता शिक्षा कमेटी का गठन कर मतदाता शिक्षा के दिशा निर्देष दिये हैं। लेकिन केवल चुनाव काल में मात्र निर्देश आदेश को पालन भर कर लेने से विवेकपूर्ण मतदान समग्र मतदान की बात नहीं बनेगी। इस हेतु हमें वर्ष पर्यन्त मतदाता शिक्षा की आवश्यक रीतियां- नीतियां बनानी होगी। विद्यालयी, महाविद्यालयी एवं विश्वविद्यालयी पाठचर्चा, पाठ्यक्रम व पाठ्यसामग्री में मतदाता शिक्षा की सामग्री का विविध पूर्ण स्वस्थ समन्वयन करना होगा। लोकतंत्र वास्तव में एक विचार का नाम है। समग्र बदलाव व विश्व रूपान्तरण सिर्फ शिक्षा से ही संभव है। मतदाता शिक्षा को एक आंदोलन बनाना होगा। जिला मतदाता शिक्षा कमेटी को वर्ष भर मतदाता शिक्षा के संबध में योजना क्रियान्विति पर्यवेक्षण मूल्यांकन आदि की प्रक्रिया करनी होगी। ताकि पूर्ण लोकतंत्र के लिए वर्णित 05 मानदंडो पर भारत देश शीर्ष पर खड़ा होकर सच्चे लोकतंत्र, सामर्थ लोकतंत्र, समावेशी लोकतंत्र का आनंद ले सकें। देश के नागरिक श्रेष्ठ जीवन जी सकें।

 

रामविलास जांगिड़

 

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