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सेना: प्रहरी ही नहीं राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक

सेना: प्रहरी ही नहीं राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक

क्या आपने कभी इस प्रश्न पर गौर से विचार किया है कि किसी देश के सर्वांगींन विकास के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्या होता है? वैसे तो इसके कई उत्तर हो सकते हैं लेकिन इस सच्चाई से इनकार करना आसान नहीं होगा कि किसी राष्ट्र का तेजी से विकास तभी संभव हैं जब वह आन्तरिक और बाह्य दोनों रूप से सुरक्षित हो। जाहिर है कि इस महती जिम्मेदारी का निर्वहन किसी देश की सेना के द्वारा किया जाता है।

देश के लिए बलिदान होने वाले ये सेना हमारे लिए केवल हमारी रक्षा के प्रहरी नहीं है बल्कि इनमें देश का मान और शान प्रतिम्बित होता है। यदि आप भी देश की सेना के सेवा और समर्पण भाव से प्रेरित हैं और देश के लिए कुछ करने के जज्बे से अभिभूत हैं तो भारतीय सेना के विभिन्न अंगों में अपनी सेवा से न केवल अपना करियर का निर्माण कर सकते हैं बल्कि राष्ट्र की करोड़ों जनता के द्वारा सम्मान और प्यार के भागीदार बन सकते हैं।

मूल रूप से भारतीय सस्त्र सेना बल में निम्नांकित चार प्रोफेशनल सेवाओं को शामिल किया जाता है – भारतीय थलसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और भारतीय कोस्ट गार्ड। इसके अतिरिक्त विभिन्न पैरामिलिटरी संस्थाएं, इंटर-सर्विसेज इंस्टिट्यूशंस भी भारतीय सस्त्र सेना को सहायता करती हैं।

शुरुआत कहां से और कैसे करें

सेना में अपना करियर बनाने के इच्छुक कैंडिडेट के लिए यह जानना आवश्यक होता है कि वे आखिर शुरूआत कहां से और कैसे करें।

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मूल रूप से सेना के तीनों विंग्स आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में परमानेंट कमीशंड ऑफिसर्स (जो कि रिटायरमेंट तक अपनी सेवा में  बने रहते हैं) की नियुक्ति संघ लोकसेवा आयोग की निम्न दो आल इंडिया लेवल एंट्रेंस एग्जामिनेशंस के द्वारा की जाती है –

  1. नेशनल डिफेन्स अकादमी (एनडीए) परीक्षा

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी भारतीय सस्त्र बलों की संयुक्त सेवा अकादमी है जिसके अंतर्गत प्रतिरक्षा के तीनों सेवाओं थलसेना, वायुसेवा और नौसेना के लिए उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण के उपरांत सफल उम्मीदवारों को तीनों सर्विसेज अर्थात आर्मी, नेवी एयरफोर्स के लिए नियुक्ति की जाती है।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में परिणाम के आधार पर किया जाता है। लिखित परीक्षा में सफल उमीदवार का साक्षात्कार होता है, उसके बाद उम्मीदवारों को सामान्य योग्यता, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, शारीरिक व सामाजिक कौशल, चिकित्सा परीक्षण, टीम निर्माण कौशल और विस्तृत व्यक्तित्व परीक्षण के दौर से गुजरना होता है। अंत में योग्यता सूची (Merit List) के आधार पर उम्मीदवारों को ‘राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश मिलता है।

सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी उम्मीदवारों को सेवा के लिए अपॉइंटमेंट देने से पूर्व एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए तीनों सेवाओं से सम्बंधित अकादमियों में भेजती है, जैसे – थलसेना के उम्मीदवार को इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून, नौसेना को इंडियन नेवल अकादमी केरल और और वायुसेना उम्मीदवार को हैदराबाद भेजा जाता है।

राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अकादमी में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को अविवाहित और उनकी उम्र 16 1/2 से 19 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही उनकी शैक्षणिक योग्यता बारहवीं या इसके समकक्ष पास होना चाहिए। आर्मी में अपना करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवार किसी भी फैकल्टी में बारहवीं पास कर सकते हैं लेकिन जो उम्मीदवार नेवी और एयरफोर्स में अपने करियर बनाना चाहते हैं उन्हें अनिवार्य रूप से फिजिक्स और मैथमेटिक्स विषयों के साथ बारहवीं पास किया होना चाहिए।

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  1. कंबाइंड डिफेन्स सर्विसेज (सीडीएस) एग्जामिनेशन

यह परीक्षा भी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के द्वारा इंडियन मिलिट्री अकादमी, ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, इंडियन नेवल अकादमी और इंडियन एयर फोर्स अकादमी में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए किया जाता है। इस परीक्षा का आयोजन सेना के तीनों अंगों- थलसेना, वायुसेना और नौसेना के अधिकारी वर्ग के पदों पर नियुक्तियों के लिए होती है।

संघ लोकसेवा आयोग द्वारा लिखित परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाता है तथा साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के लिए इंडियन मिलट्री अकादमी देहरादून, नेवल अकादमी गोवा, एयरफोर्स अकादमी हैदराबाद और ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई भेजा जाता है। इसके अंतर्गत महिलाओं की भी ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में शॉर्ट-सर्विस कमीशन के रूप में नियुक्ति की जाती है।

इंडियन मिलिट्री अकादमी और ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में प्रवेश के लिए किसी भी मन्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री या समकक्ष पास होना चाहिए, जबकि नेवल और एयर फोर्स अकादमी में प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के रूप में फिजिक्स और मैथमेटिक्स के साथ ग्रेजुएशन या इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री अनिवार्य होती है।

संघ लोकसेवा आयोग की इन नियुक्तियों के अतिरिक्त सेना में कमीशंड ऑफिसर्स का अपॉइंटमेंट गैर-संघ लोकसेवा आयोग एंट्री के द्वारा भी की जाती है। आर्मी में परमानेंट और शोर्ट सर्विस कमीशंड ऑफिसर्स दोनों की नियुक्ति की जाती है। परमानेंट कमीशंड ऑफिसर्स की नियुक्ति इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून के द्वारा की जाती है जबकि शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर्स की नियुक्ति ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई के द्वारा किया जाता है।

जब किसी ऑफिसर के द्वारा परमानेंट कमीशन का चुनाव किया जाता है तो वह सेना में परमानेंट करियर का चुनाव कर लेता है जो कि रिटायरमेंट तक जाता है। शॉर्ट सर्विस कमीशन उन उम्मीदवारों के लिए हैं जो सेना में रहकर कुछ वर्षों के लिए ही देश की सेवा में योगदान देना चाहते हैं। यह पांच वर्षों के लिए होता है जिसके बाद उसे एक परमानेंट कमीशंड ऑफिसर के चुनाव का मौका दिया जाता है। इस स्थिति में वह शॉर्ट सर्विस कमीशन ऑफिसर परमानेंट कमीशन के लिए ऑप्ट करता है या फिर रिजाइन कर सकता है।

इंडियन एयर फोर्स में भी कमीशंड ऑफिसर्स की नियुक्ति मुख्य रूप से यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षाओं एनडीए और सीडीएस के द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त टेक्निकल ऑफिसर्स, वीमेन विंग, नेशनल कैडेट्स कोर स्पेशल एंट्री इत्यादि रिक्रूटमेंट भारतीय वायु सेना के डायरेक्टरेट के द्वारा किया जाता है।

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भारतीय वायुसेना में ऑफिसर्स की नियुक्ति निम्नांकित तीन सेग्मेंट्स के लिए किया जाता है-फ्लाइंग, टेक्निकल, ग्राउंड ड्यूटी। फ्लाइंग ब्रांच में फाइटर पायलट्स, ट्रांसपोर्ट पायलट्स और हेलीकाप्टर पायलट्स होते हैं जो युद्ध और शांति के समय पायलट्स के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निष्पादन करते हैं।

टेक्निकल ब्रांच के अंतर्गत तकनीशियन होते हैं जो एयरक्राफ्टस के मेंटेनेंस से जुड़े होते हैं, जबकि ग्राउंड ड्यूटी ऑफिसर मानव और अन्य संसाधनों के मॉनिटरिंग का कार्य करते हैं।

भारतीय नौसेना देश की सामुद्रिक क्षेत्र की रक्षा के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। यदि आप किसी जहाज पर अपने परिवार से दूर काफी लम्बे समय तक देश-दुनिया को एन्जॉय कर सकते हैं तो नौसेना आपके लिए एक फेवरिट प्रोफेशनल चॉइस हो सकता है। नेवी में करियर महज एक प्रोफेशनल चांस नहीं होता है। इसमें करियर के साथ जीवन जीने का अलग ढंग सीखा जाता है जो प्रोफेशनल ग्रोथ के लिए काफी अनिवार्य होता है।

इंडियन नेवी में एक उम्मीदवार मुख्य रूप से दो पोजीशंस- ऑफिसर या सेलर के रूप में ज्वाइन कर सकता है। इसमें ऑफिसर के रूप में ज्वाइन परमानेंट कमीशन या शॉर्ट सर्विस कमीशन के रूप में होता है। परमानेंट कमीशन के रूप में नियुक्ति यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के द्वारा आयोजित एनडीए और सीडीएस रिटेन टेस्ट्स और इंटरव्यू के द्वारा होता है। शॉर्ट सर्विस कमीशन के रूप में एंट्री नेशनल कैडेट कोर के स्पेशल एंट्री के द्वारा होता है। इसका टेन्योर 10 वर्ष का होता है जो 14 वर्ष तक एक्सटेंड किया जा सकता है।

इसमें मुख्य रूप से चार ब्रांच होते हैं – एग्जीक्यूटिव, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल और एजुकेशनल। एग्जीक्यूटिव ब्रांच के ऑफिसर्स जहाजों के परिचालन और उससे सम्बन्धित अन्य सेवाओं के कार्य को सम्पादित करते हैं, जबकि इंजीनियरिंग ब्रांच की जिम्मेदारी नेवी के मशीनरी के मेंटेनेंस से जुड़ा होता है।

शिप पर रेडियो, रडार, कंप्यूटर एवं अन्य सिस्टम के इलेक्ट्रिकल मैनेजमेंट से सम्बंधित कार्य की जिम्मेदारी इलेक्ट्रीशियन ब्रांच की होती है। एजुकेशन सेक्टर की जिम्मेदारी नौ सनिकों और ऑफिसर्स की ट्रेनिंग से जुड़ा होता है।

इंडियन कोस्ट गार्ड

इंडियन कोस्ट गार्ड की जिम्मेदारियां कठिन मिहनत, धैर्य और खतरों को स्वीकार करने से होता है। ये गार्ड्स देश और विदेश का भ्रमण करते हैं। इनका मुख्य कार्य मानव जीवन की रक्षा करने से लेकर खतरे में पड़े मछुवारों और समुद्री डाकुओं से रक्षा करना होता है।

श्रीप्रकाश शर्मा

(लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय में प्राचार्य हैं)

 

 

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