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विश्व का नेतृत्व करने को तैयार हिन्दू

विश्व का नेतृत्व करने को तैयार हिन्दू

By सुधीर गहलोत

कोलंबिया में जन्मी और वृंदावन में आकर संन्यास ले चुकी क्लाउडिया ने हिंदुत्व को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया। प्रकृति और जीव-जंतुओं से सानिध्य ही हिंदुत्व का वास्तविक चरित्र है। उन्होंने कहा – ”मैं विदेश में जन्मी हूं, लेकिन मेरा हृदय अब भारत माता के लिए धड़कता है। हमें विश्व के कल्याण के लिए हिंदू जीवन-पद्धति को अपनाना होगा। राधा और मीरा के निस्वार्थ प्रेम को अपनाकर समाज में बंधुत्व को बढ़ाना है।’’

भारत को विश्व गुरू और हिंदुत्व को मानवता के कल्याणार्थ विचारधारा बनाने के लिए न सिर्फ भारत के हिंदुओं में यह बेचैनी दिखी, बल्कि विश्व भर से आए हुए हिंदुओं ने इसके लिए हर तरह का सहयोग देने की बात कही। दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन (21 नवंबर-23 नवंबर) ‘वल्र्ड हिंदू कॉन्ग्रेस’ में विश्व के लगभग 40 से अधिक देशों के हिंदुओं ने भाग लिया, जिसमें छात्र से लेकर पेशेवर तक एवं गृहिणी से लेकर उद्योगपति तक शामिल थे।

13-12-2014

सम्मेलन का शुभारंभ तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत और विश्व हिंदू परिषद् के अशोक सिंघल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। भागवत ने कहा – ”विश्व को हमेशा ही हिंदू विचारों और संस्कृति की जरूरत रही है। इसलिए हिंदुओं को संगठित होकर विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार रहना चाहिए।’’  दलाई लामा ने कहा – ”मैं हमेशा कहता हूं कि हम तिब्बती भारत को गुरू का सम्मान देते हैं। हमें प्राप्त हुआ ज्ञान भारत से ही आया है। … मैं हमेशा से मानता हूं कि विश्व के 7 बिलियन लोग मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से एक समान हैं। चाहे वे राजा हों या रानी, भिखारी हो या धार्मिक नेता, हम सभी समान तरीके से जन्म लेते हैं।’’

हिंदू यूथ कॉन्फ्रेंस, हिंदू इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस, हिंदू पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस, हिंदू एजुकेशनल कॉन्फ्रेंंस, हिंदू ऑर्गनाईजेशनल कॉन्फ्रेंस, हिंदू वीमेन कॉन्फ्रेंस और हिंदू मीडिया कॉन्फ्रेंस में बंटे इस तीन दिवसीय सम्मेलन में हिंदुओं के उत्थान, उनकी सांस्कृतिक विरासत और एकता को बनाए रखने का आह्वान किया गया। युवाओं और महिलाओं को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। मीडिया को हिंदू विरोधी बताते हुए इसके लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाने की बात कही गई। भारत की प्राचीन आर्थिक नीतियों के महत्व को बताते हुए वर्तमान दौर में उसकी अहमियत को रेखांकित किया गया। कोलंबिया में जन्मी और वृंदावन में आकर संन्यास ले चुकी क्लाउडिया ने हिंदुत्व को जीवन का असली मार्ग बताया। उन्होंने कहा – ”मैं विदेश में जन्मी हूं, लेकिन मेरा हृदय अब भारत माता के लिए धड़कता है। हमें विश्व के कल्याण के लिए हिंदू जीवन-पद्धति को अपनाना होगा। राधा और मीरा के निस्वार्थ प्रेम को अपनाकर समाज में बंधुत्व को बढ़ाना है।’’

13-12-2014

एक तरफ हिंदुओं के बीच जाति की दीवार को गिराकर समाज को समरस बनाने की बात विश्व हिंदू परिषद के प्रवीणभाई तोगडिय़ा कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस्लामिक देशों में रहने वाले हिंदू अपनी दुर्दशा को लेकर मदद की गुहार लगा रहे थे। बांग्लादेश से आए एक पत्रकार ने विमर्श के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में कहा – ”वहां हिंदू अभिशप्त जीवन जीने को विवश हैं। सुरक्षा के लिहाज से वे अपना नाम तक इस्लामिक परंपरा के अनुसार रखने लगे हैं। वहां के अल्पसंख्यक सार्वजनिक रूप से खुद को हिंदू कहने से घबराते हैं।’’ यही स्थिति पाकिस्तान सहित उस हर देश की है, जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं। वियतनाम से आए एक पेशेवर ने परिचर्चा के दौरान कहा – ”वियतनाम में हमारी कुल जनसंख्या लगभग 80 हजार है। हम भारत के साथ जुड़कर हिंदुत्व के दर्शन को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारी अपनी भी कुछ समस्याएं हैं, जिस पर विश्व हिंदू परिषद को ध्यान देना चाहिए।’’  श्रीलंका से आए गणेशलिंगम ने कहा – ”श्रीलंका में हिंदुओं की स्थिति दयनीय है। गृहयुद्ध के दौरान हिंदुओं को जानबुझकर निशाना बनाकर उनका नरसंहार किया गया। सरकार हम पर ध्यान नहीं देती। भारत सरकार को श्रीलंका के हिंदुओं के बारे में भी सोचना चाहिए।’’

13-12-2014

इस दौरान विभिन्न परिचर्चाओं में लव जिहाद, आतंकवाद और इस्लामीकरण के खतरों पर बहस हुई। पूर्वोत्तर के एक छात्र ने कहा कि असम में बांग्लादेशी मुसलमानों के कारण वहां के मूल निवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। चोरी, डकैती, अपहरण, बलात्कार, लव जिहाद और आतंकवाद के कारण पूर्वोत्तर के लोग धीरे-धीरे पलायन कर कर रहे हैं और दिल्ली जैसे महानगरों में विस्थापित हो रहे हैं। अगर सरकार ने जल्दी उचित कदम नहीं उठाए तो असम सहित पूर्वोत्तर की हालत कश्मीर जैसी हो जाएगी। भारत के केरल, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में इस्लामिक चरमपंथियों के बढ़ते असर को रोकने के लिए हिंदुओं को जागृत होने और करने की बात कही गई। केरल की रहने वाली और संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व करने वाली शिल्पा नायर ने बताया – ”अगर सरकार ने जल्दी ही ठोस कदम नहीं उठाए तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं जब केरल इस्लामिक राज्य बन जाएगा और हिंदुओं को या तो मार दिया जाएगा या उन्हें कश्मीर की तरह उठाकर राज्य से बाहर फेंक दिया जाएगा। मल्लपुरम को ‘मुस्लिम जिला’ और ‘मिनी पाकिस्तान’ कहा जाता है। स्थिति बहुत चिंताजनक है।’’

13-12-2014

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भारत में इस्लामिक चरमपंथियों, मजहबी उन्मादियों और ईसाई मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मांतरण को रोकने के लिए संघ और विश्व हिंदू परिषद सहित उससे जुड़े संगठनों पर प्रकाश डालते हुए प्रवीण तोगडिय़ा ने कहा कि हम अपने उन भाईयों को वापस हिंदू धर्म में ला रहे हैं जिन्हें लालच और दबाव में धर्मांतरित किया गया है। केरल और पूर्वोत्तर सहित देश भर में मिशनरियों और लव जिहाद के खिलाफ लोगों को जागरूक करने पर बल दिया गया। लव जिहाद की समस्या को अंतर्राष्ट्रीय समस्या बताते हुए इंग्लैंड, अमेरिका, न्यूजीलैंड सहित विभिन्न देशों से आए हिंदुओं ने इसके खिलाफ मजबूती से खड़े होने की बात कही।

13-12-2014

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हिंदू मीडिया कॉन्फ्रेंस में हिंदुत्व की मानवातावादी विचारधारा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए तकनीक के महत्व को बताते हुए अमित खन्ना ने कहा कि तकनीक के कारण आज पूरी दुनिया सिमट गई है और इसमें इंटरनेट का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदू दर्शन की प्राचीन पुस्तकें जिस देश में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां इंटरनेट के जरिए ऑनलाईन पढ़ी या मंगाई जा सकती है। प्रो. नलपत ने हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का अनुकूलतम प्रयोग करने की बात कही। सुशील पंडित ने कहा कि इंटरनेट के युग में पैदा हुए युवा इस विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले प्रणेता के रूप में उभर रहे हैं।

13-12-2014

हिंदुत्व की विचारधारा को जन-जन में स्थापित करने और भारत को विश्व गुरू बनाने के लिए प्राथमिक स्तर पर स्कूलों में हिंदू धर्म की शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर कई अतिथियों ने जोर दिया। प्रसिद्ध पत्रकार, इतिहासकार और लेखक फ्रैंकोइस गातिय ने कहा कि भारत में पश्चिमी शिक्षा के जरिए हिंदुत्व को बदनाम करने की कोशिश की गई। सम्मेलन में आए हुए कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अब सरकार को शिक्षा-नीति में अमूल-चूल परिवत्र्तन करते हुए भारत के वास्तविक इतिहास को दर्शाने और उसे पढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। इससे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कोने-कोने में रह रहे करोड़ों हिंदुओं को भारत और हिंदुत्व के इतिहास की वास्तविक जानकारी मिलेगी। हिंदू एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस में छात्र-छात्राओं ने भी अपने-अपने अमूल्य विचार रखे।

13-12-2014

सम्मेलन में आए हुए प्रतिनिधियों ने हिंदू धर्म के अनुयायियों को हताश और निराश करने के लिए स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भारत की  सरकारों को दोषी बताया। सबसे अधिक समय तक सत्ता में रही कॉन्ग्रेस पर इसका दोष सबसे अधिक जाता है। खुद को राष्ट्रवादी कहने वाली भाजपा का केन्द्र में सत्ता प्राप्ति के बाद विश्व भर के हिंदुओं में खासा उत्साह है और इस सम्मेलन में यह स्पष्ट रूप से जाहिर हुआ। इस अवसर पर विभिन्न देशों में रह रहे हिंदुओं ने अपनी-अपनी समस्याओं को साझा कर भारत से मदद की अपील की। सम्मेलन में आए हुए लोगों के उत्साह और सुझावों के आधार पर इस सम्मेलन को आगे भी जारी रखने पर भी सहमति बनी और उम्मीद जताई गई कि अधिक से अधिक हिंदू इसमें भाग लेंगे।

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