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निवेशकों का आकर्षण-केन्द्र राजस्थान

निवेशकों का आकर्षण-केन्द्र राजस्थान

मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि राजस्थान टेक्सटाइल सेक्टर में अग्रणी प्रदेश है। यहां निवेशकों के लिए उनके व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रचुर अवसर उपलब्ध हैं। कुशल मानव श्रम की उपलब्धता, निर्बाध बिजली आपूर्ति, टेक्सटाइल इकाइयों के लिए ‘स्पेशल इंसेन्टिव्स’ और बाजार तक आसान पहुंच जैसी आदर्श स्थितियों के कारण राजस्थान निवेशकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया है।

सीतापुरा इंडस्ट्रीयल एरिया में टेक्सटाइल फेयर ‘वस्त्र-2014’ का उद्घाटन करने के बाद आयोजित समारोह को राजे सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को एक ऐसे प्रमुख केन्द्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां देश और विदेश के व्यवसायियों में अपने उद्यम स्थापित करने की होड़ हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग और रंगों को लेकर जीवन्त सोच के कारण राजस्थान के इतिहास में एक विशिष्ट पहचान है। वस्त्र निर्माण में रंगों के अनूठे संयोजन, लीक से हटकर सोच और प्रयोगों के कारण आज राजस्थान टेक्सटाइल हब बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में उद्योग और व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त माहौल और सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। हमने श्रम कानूनों के क्षेत्र में सुधार की पहल की है। देश में ऐसे सुधारों को लागू करने वाला राजस्थान पहला प्रदेश है। इसके अलावा राज्य में औद्योगिक विवाद कानून, अप्रेन्टिसशिप ऐक्ट व कॉन्ट्रेक्ट लेबर ऐक्ट में संशोधन भी लागू किये हैं। इनसे कंपनियों और नियोजकों को श्रमिक कल्याण एवं युवाओं के लिये रोजगार के अवसर पैदा करते हुए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राजे ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में 15 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए हम युवाओं में कौशल विकास पर विशेष फोकस कर रहे हैं। प्रदेश में ‘एपेरल ट्रेनिंग एण्ड डिजाइन सेन्टर’ द्वारा शोध और प्रशिक्षण के माध्यम से वस्त्र निर्माण के क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट के लिए ‘स्मार्ट’ स्कीम चलाई जा रही है। राज्य में रेमण्ड कंपनी और राजस्थान आजीविका एवं कौशल विकास निगम ने युवाओं को वस्त्र निर्माण के क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट भी आरम्भ किया है। उन्होंने कहा कि श्रम आधारित टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की दृष्टि से ये दोनों महवपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा रंगाई, सिलाई और कटिंग का हुनर सीख कर स्वयं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘टेक्नीकल टेक्सटाइल’ को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश में ‘जियो सिंथेसिस’, ‘एग्रो टेक्सटाइल्स’, ‘स्पोट्र्स टेक्सटाइल्स, ‘मेडिकल टेक्सटाइल्स’, ‘एडवांस्ड पैकेजिंग’ जैसे क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं। सरकार ने नई निवेश प्रोत्साहन नीति-2014 (रिप्स-2014) में टेक्नीकल टेक्सटाइल को प्रमोट करने के लिए ब्याज में 7 प्रतिशत तक छूट, वेट पर 50 प्रतिशत तक छूट तथा केपिटल गुड्स में प्रवेश कर में 50 प्रतिशत छूट के प्रावधान हैं। इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी और विद्युत कर में भी छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हमने ‘रिप्स-2014’ में रिसाइकल्ड फाइबर जैसे प्रोडेक्ट को भी शामिल किया है।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि राजस्थान के सांगनेरी प्रिंट, लहरिया, बंधेज और जोधपुरी बंद गले का कोट जैसे उत्पाद टेक्सटाइल जगत में बेहद लोकप्रिय हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्टोनमार्ट की तरह यह टेक्सटाइल फेयर भी विश्व में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रीको के चेयरमैन सी.एस. राजन ने कहा कि दीपावली से पूर्व राज्य सरकार ने 5 प्रतिशत वेट की छूट देकर टेक्सटाइल उद्योग को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने कहा कि रीको द्वारा टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सेक्टरवाइज जोन विकसित किये जा रहे हैं। प्रमुख शासन सचिव उद्योग वीनू गुप्ता ने कहा कि वस्त्र-2014 में भारतीय वस्त्र उद्योग की रंगीन विविधताओं को मंच प्रदान किया गया है।

इस अवसर पर फिक्की के महासचिव डॉ. ए. दीदार सिंह, उप महासचिव श्री विनय माथुर, फिक्की राजस्थान स्टेट कौंसिल के चेयरमैन महाराज जयसिंह तथा देश-विदेश के डेलीगेट्स उपस्थित थे।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने वस्त्र-2014 में लगाई गई प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल एवं विभिन्न राज्यों के पैवेलियन पर जाकर वहां प्रदर्शित किये गये उत्पादों को देखा एवं उनके बारे में जानकारी ली। राजे ने राजस्थान पैवेलियन व कर्नाटक पैवेलियन का फीता काटकर उदघाटन किया। राजस्थान पैवेलियन में उन्होंने लहरिया, बंधेज, सांगानेरी प्रिंट, कोटा डोरिया, बगरू हैण्ड ब्लॉक, वूलन शॉल्स आदि उत्पादों को रूचि के साथ देखा। उन्होंने गुजरात एवं आंध्र प्रदेश के हैण्डलूम व हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों की स्टॉल्स सहित अन्य उत्पादकों की स्टॉल्स का भी अवलोकन किया।

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