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संघर्ष का अचूक हथियार ‘किस ऑफ लव’

संघर्ष का अचूक हथियार ‘किस ऑफ लव’

By अम्बा चरण वशिष्ठ

आज तो मजा ही आ गया। जीवन में ऐसा सुनहरी मौका मिला जो बिरले भाग्यवानों को ही मिल पाता है। उनमें आज मैं और मेरा एक दोस्त भी शामिल हो गये। मैं आज अपने एक दोस्त के घर मिलने गया। उसने कहा – चल, कहीं बाहर चाय पीते हैं। ज्यों ही हम बाहर निकले तो कुछ लड़के-लड़कियां, पुरूष-महिलायें ‘किस ऑफ लव जिंदाबाद’ और ‘मोरल पुलिसिंग मुर्दाबाद’ के नारे लगाते आगे बढ़ रहे थे। जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि कुछ गुंडा तत्वों द्वारा ‘मोरल पुलिसिंग’ किये जाने के विरोध में वह एक संस्था के सामने एक-दूसरे को चूम कर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। मैंने पूछा कि क्या हम दोनों भी इस में शामिल हो सकते हैं? उसने बड़े प्यार से कहा – क्यों नहीं, आपका हार्दिक स्वागत है। फिर मैंने उसे बताया कि हमारे साथ तो कोई लड़की या महिला है नहीं। उसने हमारी समस्या दूर कर दी। कहा – कोई फर्क नहीं पड़ता, हमारे साथ जो हैं।

मैंने उस समूह में कुछ लड़कियों व महिलाओं पर नजर दौड़ाई जो बड़े जोर-जोर से नारे लगा रहीं थीं। उन्हें देखकर तो हमारे मुंह में भी पानी आ गया। हमने एक-दूसरे को कहा – बेटा, ऐसा सुनहरा मौका पता नहीं तुम्हारे जीवन में फिर कभी हाथ आयेगा भी या नहीं। बस फिर क्या था, हम भी जोर-जोर से नारे लगाने लगे। जब गन्तव्य स्थान पर पहुंचे और हमें विरोध प्रदर्शन का आदेश मिला, तो हमने भी अपनी मर्जी की युवतियों को गले लगाया और चूमना शुरू कर दिया। एक को छोड़ा तो दूसरी को दबोच लिया। कुछ साथी साथ-साथ नारे भी लगाये जा रहे थे। उनके नारों ने हमें एक-दूसरे को चूमने के लिये और भी उत्साहित कर दिया। हमने जी भर कर चूमा-चाटी की। सब आनंदित थे।

नैतिकता की जिस ठेकेदार संस्था के समक्ष हम प्रदर्शन कर रहे थे वह तो इतने भीरू निकले कि उन्होंने अपनी किवाड़ ही बंद कर ली। पुलिस को अपनी ढाल बना लिया। हमारा सामना करना तो दूर, हमें तो देख पाने की वे हिम्मत भी न जुटा पाये। कुछ तो अपने कमरों में छिप गये जैसे कि उन्होंने अपनी हार मान ली है। इस दृश्य से तो हमें ऐसा लगा जैसे कि उन्हें अपने कर्मों पर शर्म आ रही हो। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये हम और भी प्रेरित हुये। हम और भी तत्परता व तन्मयता से एक दूसरे को चूमते रहे।

पुलिस भी मजा लेती रही। वह हंसते रहे, मुस्कराते रहे। ऐसा लगता था कि वह अपनी किस्मत को कोस रहे थे – काश, हमने भी वर्दी न पहन रखी होती तो हम भी इस प्रदर्शन में अपना पूरा सहयोग व योगदान देते।

अंतत: एक पुलिस अफसर आ धमका, मनहूस। लगता था कि वह हमारे सौभाग्य पर जल रहा लगता था। उसने अपने पुलिसकर्मियों को कहा कि तुम क्यों तमाशा देख रहे हो। इन लोगों को भगाओ। उधर हम भी तो थक चुके थे। इस प्रदर्शन को आगे बढ़ाना भी मुश्किल लग रहा था। हमने अपने आप ही अपने जोड़ों को छोड़ दिया और ऐसी ही विरोध प्रदर्शन में और भी जोर-शोर से शामिल होने के वादा देकर विदा हुये।

पर मेरा दोस्त भी कम डरपोक न निकला। बोला – बेटा, मजा तो लूट लिया, अब जूतों के लिये तैयार हो जा। इन नासपिटे फोटोग्राफरों और चैनल वालों ने सब के फोटो खींच लिये हैं। जब इन महिलाओं-लड़कियों के पति-पिता और भाई देखेंगे तो हमें जूते मार-मार कर गंजा कर देंगे।

मुझे उसकी नासमझी पर हंसी आ गई। मैंने कहा – मूर्ख, तुझे पता नहीं कि वह सब सभ्रांत व सुशिक्षित परिवारों से हैं जो हमारी तरह तंग-दिल व दकियानूस नहीं हैं। वह उदार व प्रगतिशील हैं। फिर, तुझ मूर्ख को तो यह भी पता नहीं कि हमारे कानून के अनुसार कोई भी व्यस्क पुरूष व महिला अपनी मर्जी से ऐसा करने के लिये स्वतंत्र है। इसके लिए कोई अपराध नहीं बनता। मेरे दोस्त ने जोर से अपना माथा पीटा और कहा – यार तू तो बड़ा समझदार हो गया लगता है।

मैंने भी इतराते हुये कहा – बेटा, हमारे साथ रहोगे तो ऐसे ही मुफ्त में जन्नत के मजे यहीं पर लूटोगे।

मैंने एक चीज और नोट की। यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह सकारात्मक, शान्तिपूर्ण, सभ्य व शालीन था। न कोई गाली-गलौच हुआ, न अंडे-टमाटर व पत्थर फेंके गये और न ही हुड़दंग मचा। न लाठी चली, न गोली। मैं तो समझता हूं कि यह एक अच्छी पहल है। हम नौजवानों ने देश को एक नया रास्ता दिखाया है, एक नया संदेश दिया है कि कैसे एक सच्चा-सुच्चा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा सकता है और अपनी मांगें भी मनवाई जा सकती हैं।

मैं तो समझता हूं कि अब हमारे राजनीतिक दलों को भी इस उत्कृष्ट उदाहरण से सीख लेनी चाहिये। उन्हें भी इसी रास्ते पर चलना चाहिये और अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिये बंद, धरने व अन्य हिंसक प्रदर्शन का रास्ता छोड़ जनतंत्र में ‘किस ऑफ लव’ विरोध प्रदर्शनों को अपना हथियार बनाना चाहिये। इससे हमारी संस्कृति को भी बल मिलेगा। जनता में भाईचारे व प्रेमभाव का संचार होगा। सरकार को भी चाहिये कि वह ‘किस ऑफ लव’ विरोध प्रदर्शनों को छोड़ सभी प्रकार के अन्य विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दे। इसी में देश, शासन व जनता का भला है।

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