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मोदी सरकार 2.0 की चुनौतियां

मोदी सरकार 2.0 की चुनौतियां

और अधिक बहुमत से दोबारा सत्ता में आई मोदी सरकार ने नए बारत के निर्माण के लिए पहसे हजार दिनों में काम का खाका तैयार किया है। उसे सली जामा पहनाने के लिए गतिशील और उत्साही मंत्रियों की टीम तैयार की है। हजार दिनों के कार्यक्रम के पीछे की सोच यह है कि तीन साल बाद 2022 में आजादी के 75 साल पूरे हो।

भारतीय जनता पार्टी की कमान संभाल रहे अमित शाह अब देश के नए गृहमंत्री होंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें गृह मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अमित शाह जहां  हो वहां एक्सन न हो यह भला कैसे संभव है। अमित शाह को जब गृहमंत्रालय दिया गया था तब मीडिया ने कहा था कि यह मंत्रालय उनके लिए चुनौती होगा। क्योंकि वहां उनकी टॉप प्रायोरिटी होगा जम्मू-कश्मीर, जो आजादी के बाद से ही हर गृहमंत्री की परीक्षा लेता है। पर्यवेक्षक यह कह रहे थे कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाना, वहां अनुच्छेद 370, धारा 35 को खत्म करना उनकी प्राथमिकता होगा।

शाह गुजरात में नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार गृह मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल चुके है। पीएम मोदी ने अमित शाह को इस बार सरकार चलाने वाली टीम में शामिल किया है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राजनाथ सिंह गृह मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके है।

शाह को 2014 में भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था, तभी से वो न केवल प्रधानमंत्री के रणनीतिकार बल्कि पार्टी के भी सबसे बड़े रणनीतिकार के रूप में देखे जाते हैं, अब जब शाह देश की और बड़ी जिम्मेदारी लेने जा रहे हैं। अमित शाह और पीएम मोदी की जोड़ी करीब ढ़ाई दशक पुरानी है।

शाह की अध्यक्षता में पिछले पांच सालों में भारतीय जनता पार्टी ने कई कीर्तिमान स्थापित किए, कई चुनाव जीते। उनके नेतृत्व में 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटें जीतकर इतिहास बना दिया है। वो अमित शाह ही हैं जिनके लिए कभी महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी हार रही है उसे भी एक अमित शाह जैसे नेता की जरूरत है। उन्होंने 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृह मंत्रालय का भी जिम्मा संभाला। वह एक बार फिर पार्टी और सरकार में नया कार्यभार संभालने जा रहे हैं।

भाजपा की कद्दावर नेता निर्मला सीतारमण को मोदी सरकार में वित्त मंत्रालय दिया गया है। इसी के साथ वह देश की दूसरी महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। गुरुवार को शपथ लेने  के बाद शुक्रवार को उन्हें वित्त मंत्रालय की कमान सौंपी गई। वित्त मंत्रालय के साथ निर्मला को कॉरपोरेट मामलों का मंत्री भी बनाया गया है। इससे पहले देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1970 से 1971 तक एक साल के लिए देश की वित्त मंत्री थीं। निर्मला को पिछली सरकार में रक्षा मंत्री और उससे पहले कॉरपोरेट कार्य का मंत्री बनाया गया था। साल 2006 में वह भाजपा का हिस्सा बनीं और तभी से पार्टी से जुड़ी हुई हैं।


 

एस. जयशंकर – विदेश नीति का माहिर


 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने वाले मंत्रिमंडल में अगर किसी ने चौंकाया, तो वह थे पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर। जाहिर है टीम मोदी 2.0 में जयशंकर को शामिल किए जाने के कहीं गहरे निहितार्थ हैं। मोदी दक्षिण एशिया में भारत का दबदबा बनाने के लिए एस जयशंकर का इस्तेमाल करेंगे। बतौर विदेश सचिव एस जयशंकर ने कई मौकों पर भारत को कूटनीतिक विजय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शानदार रहा है अब तक का कैरियर

अगर एस जयशंकर के कार्यकाल की बात करें तो वह जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव रहे। इससे पहले वह सिंगापुर में उच्चायुक्त, चीन और अमेरिका में भारतीय राजदूत जैसे पदों पर रह चुके है। उन्होंने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका में भारतीय राजदूत के रूप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें विदेश सचिव के प्रतिष्ठित पद पर पहुंचाया। यह अलग बात है कि विदेश सचिव पद पर नियुक्ति के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी की गई थी।

मोदी से पहली मुलाकात में बन गए गहरे संबंध

जयशंकर और मोदी की पहली मुलाकात ही दोनों के बीच गहरे संबंध की वायस बनी थी। बतौर गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी चीन यात्रा पर गए थे। उस वक्त एस जयशंकर चीन में भारतीय राजदूत थे। बताते हैं कि मोदी की चीन यात्रा को सफल बनाने में एस जयशंकर ने खासी भूमिका निभाई थी। चीन ने गुजरात में अच्छा-खासा निवेश किया। इनमें भी सबसे महत्वपूर्ण था टीबियन इलेक्ट्रिक उपकरण के साथ एक समझौता।

कई भाषाओं के हैं कुशल जानकार

दिल्ली विश्वविद्यालय में सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक जयशंकर ने राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल और पीएचडी की डिग्री ली है। वह 1977 के भारतीय विदेश सेवा बैच से हैं और उनकी पहली बड़ी जिम्मेदारी मॉस्को के भारतीय दूतावास में तीसरा सचिव और पहला सचिव के रूप में रही। रूसी भाषा के जानकार जयशंकर को जापानी और हंगेरियन भाषाओं की भी अच्छी समझ है।

भारत की पहली परमाणु नीति में था पिता का योगदान

जयशंकर के पिता के. सुब्रह्मण्यम को देश की पहली परमाणु आयुधशाला बनाने और परमाणु अस्त्रों के पहले उपयोग न करने की नीति को तैयार करने का श्रेय दिया जाता है। इस लिहाज से कह सकते हैं कि जयशंकर को कूटनीति एवं सामरिक महत्व की रणनीति बनाने की योग्यता खून में ही मिली है। यही वजह है कि जयशंकर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई कूटनीतिक विवादों को सफलतापूर्वक सुलझाया है। जयशंकर को चीन में भारत का सबसे मजबूत हाथ माना जाता है। वह वहां देश के सबसे लंबे समय तक राजदूत रहे हैं।

डोकलाम विवाद सुलझाने का मिला श्रेय

इसके अलावा जयशंकर को विदेश सचिव के रूप में भारत और चीन के बीच पिछले साल डोकलाम में प्रस्ताव पर बातचीत करने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है। विदेश सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, जयशंकर ने कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता में बाहरी मामलों की एक समिति को बताया कि भारत और चीन के बीच सीमा का मुद्दा ‘दुनिया का सबसे बड़ा रियल एस्टेट विवाद’ है और समिति को कैसे भी इसमें बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

(साभार: www.newsstate.com)

 


पिछली सरकार में रहीं रक्षा मंत्री

निर्मला को वित्त मंत्रालय सौंपने के पीछे एक बड़ी वजह है। उन्होंने अपनी स्नातक और मास्टर की पढ़ाई अर्थशास्त्र में की है। मास्टर्स की डिग्री जेएनयू से ली है। जेएनयू से ही उन्होंने एम फिल की पढ़ाई की। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्री थीं। तब भी निर्मला दूसरी ऐसी महिला रहीं, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली थी। पिछली सरकार में रक्षा मंत्री के तौर पर निर्मला ने अच्छा काम किया था। इस बार उन्हें वित्त मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया इस मंत्रिमंडल गठन में सबसे चौकानेवाला नाम था पूर्व विदेश सचिव डॉ. एस जयशंकर का, जिन्हें विदेश मंत्री बनाया गया है। अभी तक ये मंत्रालय सुषमा स्वराज के हाथ में था। उन्होंने खराब स्वास्थ्य की वजह से चुनाव नहीं लड़ा। विदेश मंत्रालय में जयशंकर को  शामिल करने के पीछे सोच मंत्रिमंडल में विशेषज्ञों की कमी को दूर करने की कोशिश की है। और साथ ही बदले सामरिक माहौल में जब ईरान संकट गहरा रहा है और ट्रंप प्रशासन का चीन से व्यापार युद्ध शुरू हो चुका है ये नियुक्ति बहुत अहम है। इसके साथ ही जयशंकर एक गैर राजनीतिक शख्सियत है जिनको अब राज्य सभा के रास्ते संसद में लाया जायेगा। और मोदी की विदेश नीति का व्यापक ध्यान रखने में वे उनके सक्षम हाथ होंगे।

पीएम नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में शामिल हुईं स्मृति ईरानी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और टेक्सटाइल मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। वे इससे पहले भी टेक्सटाइल मंत्रालय देख चुकी हैं। 30 मई को राष्ट्रपति भवन में हुए शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के बाद स्मृति ईरानी के लिए सबसे ज्यादा तालियां बजाई गईं। क्योंकि स्मृति कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को उनकी परंपरागत सीट अमेठी से हराकर सदन में पहुंची हैं। इस चुनाव में सबकी नजरें स्मृति की हार-जीत पर टिकी थीं लेकिन वह लगातार अमेठी जाकर जनता का विश्वास जीतने में कामयाब हुईं।अमेठी का दिल तो स्मृति ने जीत लिया है अब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कार्यभार संभालकर वह देश की महिलाओं के लिए क्या कुछ करती हैं यह देखने वाली बात होगी।

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नई सरकार में अब एक नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनावी अभियान के दौरान वादा किया था कि अलग से एक ऐसा मंत्रालय बनाया जाएगा जो सिर्फ पानी से जुड़ी हर समस्या का निपटारा करेगा। दुनिया भर में पानी को लेकर मचे हाहाकार के बीच नए बने इस मंत्रालय के सामने कई चुनौतियां हैं जिससे इसे पार जाना होगा। इस मंत्रालय की जिम्मेदारी गजेन्द्र सिंह शेखावत को दी गई है। भारत में पानी एक बड़ी समस्या है। बिहार जैसे राज्य से सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी जानकारी आ रही हैं कि वहां ग्राउंड वॉटर लेवल यानी जमीन के भीतर मौजूद पानी का स्तर काफी नीचे गया है। वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में भी पानी की समस्या लगातार बनी रहती है।

वहीं, देश का ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं है जो पानी की समस्या से नहीं जूझ रहा हो। ऐसे में देखने वाली बात होगी की जल शक्ति मंत्रालय का जिम्मा पाने वाले गजेन्द्र सिंह शेखावत कैसे इन समस्याओं से पार पाते हैं। 51 साल के शेखावत राजस्थान के जोधपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद है। इसके पहले वो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री थे।

मोदी सरकार में दूसरे कार्यकाल में भारतीय विदेश सेवा, आईएएस से दो सेवानिवृत्त अधिकारी और भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस से तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया है। पिछली मोदी सरकार में भारतीय पुलिस सेवा आईपीएस अधिकारी सत्यपाल सिंह को इस मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।

1977 बैच के आईएफएस अधिकारी एस जयशंकर पूर्व विदेश सचिव रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने दूसरे कार्यकाल में महत्वपूर्ण विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है। जयशंकर को पूर्ण कैबिनेट रैंक दी गई है। वहीं एक अन्य पूर्व राजनयिक हरदीप सिंह पुरी को इस सरकार में शामिल किया गया है। उनके पास शहरी विकास नवीकरण के साथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। पुरी 1974 बैच के आईएफएस अधिकारी रहे हैं। पहले भी वह आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल चुके हैं। मोदी ने अमृतसर से चुनाव हारने के बावजूद उन्हें फिर से शामिल किया है।

अपने दम पर राजनीति और कारोबार में सफलता के मुकाम हासिल करने वाले नितिन गडकरी (62) पूर्वी महाराष्ट्र के नागपुर से आते हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) से अपनी राजनीति के कॅरियर की शुरुआत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में गडकरी ने काफी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई और सड़क परिवहन, जहाजरानी व अन्य मंत्रालयों में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी। उनको दोबारा मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।


 

निर्मला सीतारमण की चुनौतियां


 

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मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वाणिज्य एवं उद्योग और फिर रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण को अब वित्त मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। तमिलनाडु के एक साधारण परिवार में 18 अगस्त 1959 को जन्मीं सीतरमण ने मंत्री के रूप में अपने काम से सबको प्रभावित किया है, लेकिन वित्त मंत्री के रूप में अब उनकी असली परीक्षा होगी। उन्हें ऐसे समय में यह जिम्मेदारी मिली है, जब अर्थव्यवस्था के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। आइए एक नजर डालते हैं कि निर्मला को किन बड़ी मुश्किलों का सामना करना है…

अर्थव्यवस्था में सुस्ती

देश की आर्थिक विकास दर पांच तिमाहियों के निचले स्तर 6.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है और अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि ग्रामीण खपत मांग में गिरावट और तेल की कीमतों में धीमी वृद्धि से हालत और बदतर हो सकती है। ऐसे में सीतारमण के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास रफ्तार को 7 फीसदी या इससे अधिक पर बनाए रखने की होगी।

तेल से खाद्य पदार्थों तक पर महंगाई की आंच

मोदी सरकार को 2014 से 2019 तक महंगाई के मोर्चे पर दिक्कत नहीं हुई। ईंधन और खाद्य पदार्थों के दाम कम रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि इनके दाम बढऩे लगे हैं। पश्चिमी एशिया के तेजी से बदलते हालातों की वजह से तेल के दामों में आग लग सकती है तो हाल ही में जारी आंकड़े दिखाते हैं कि लंबे समय तक नरमी के बाद खाद्य पदार्थों के होलसेल दाम में वृद्धि हो रही है।

रोजगार का संकट

नई वित्त मंत्री को रोजगार के मोर्चे पर भी कड़ी मेहनत करनी होगी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रोजगार एक बड़ा मुद्दा रहा। रोजगार के मुद्दे ने 2014 नरेंद्र मोदी को सत्ता दिलाई, लेकिन रोजगार संकट को लेकर विपक्ष लगातार उनपर हमलावर रहा। अब संभावित आर्थिक मंदी से रोजगार के नए अवसर पैदा करने में चुनौती और बढ़ जाएगी।

मैन्युफैक्चरिंग में कमी

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी कमजोरी बनी हुई है। औद्योगिक उत्पादन मार्च में 21 महीने के निचले स्तर (-) 0.1 पर आ गया। जानकारों का कहना है कि भारत को चीन की तरह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर विशेष जोर देने की जरूरत है।

डिमांड में सुस्ती

अगली सरकार के लिए एक और बड़ी चुनौती डिमांड में कमी की वजह से आने वाली आर्थिक सुस्ती होगी। एफएमसीजी से पैसेंजर वीइकल तक कंज्यूमर डिमांड में कमी से इकॉनमी को जोर का झटका लगा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के आखिरी तीन महीनों में एफएमसीजी सेक्टर की वृद्धि दर 16 फीसदी थी और इस साल के पहले तीन महीनों में गिरकर 13.6 फीसदी रह गई है। ग्रामीण इलाकों में जरूरी वस्तुओं की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

पब्लिक असेट से नकदी

नए वित्त मंत्री को रेल ट्रैक, सड़कों, बंदरगाहों और पावर यूनिट्स से फंड जुटाने के बारे में विचार करना होगा। नई सरकार के खजाने में इजाफा करने के लिए नए स्पेक्ट्रम की भी नीलामी हो सकती है।

किसानों का सशक्तीकरण

किसानों की आय को बढ़ाना मोदी सरकार के मैनिफेस्टो में था। सरकार को किसान के लिए बाजार तैयार करने की जरूरत है जिससे वह अपने उत्पाद को आसानी से बेच सके। इसके अलावा कई अन्य योजनाओं की भी जरूरत पड़ेगी।

उदय इंडिया ब्यूरो


 

मुंबई में पैदा हुए राज्यसभा सदस्य

पीयूष गोयल (55) सुप्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता दिवंगत वेदप्रकाश गोयल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। वह लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे। पीयूष गोयल ने बतौर निवेश बैंकर अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में गोयल ने महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। पहले वह राज्यमंत्री

के रूप में कोयला, ऊर्जा और नई व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में रहे और बाद में उन्होंने बतौर कैबिनेट मंत्री रेलवे और कुछ समय के लिए वित्त व कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय का कार्यभार संभाला। गोयल मोदी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं। उन्होंने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए मंत्रिमंडल में बतौर केंद्रीय मंत्री शपथ ली। वे रेलवे मंत्री होंगे।

मोदी मंत्रिमंडल में शपथ लेते समय मोदी, शाह और ईरानी के अलावा अगर किसी व्यक्ति ने ताली बटोरी तो वो थे एक दुबले पतले सफेद बाल और दाड़ी वाले व्यक्ति ने। प्रताप चंद्र सारंगी, 64 साल के हैं और बालासोर लोकसभा सीट से जीत कर आए हैं। जीत भी ऐसी की खर्च सबसे कम। वो भी तब जब उनके प्रतिद्वंदी धन्ना सेठ थे। उनके सादे जीवन की वजह से लोग उन्हें ओडिशा का मोदी बताते हैं। फकीरी वाली तबीयत रखने वाले सारंगी की यही अदा न केवल उनके मतदाताओं को भा गई बल्कि मोदी को भी और उन्हें दिल्ली आने का न्यौता मिल गया। वे 2004 और 2009 में ओडिशा में विधायक रह चुके हैं। वे उडयिा और संस्कृत बोलते हैं,  सारंगी  साधु बनना चाहते थे। आज वे बच्चों को पढ़ाते, गायों की सेवा करते और सादा जीवन जीते हैं। साइकिल पर चलने वाले इस फकीर पर लोगों को विश्वास है कि ज़रूरत के समय वे उनके काम आएंगे। अब यही विश्वास मोदी ने उन पर दिखाया है। और दिल्ली में  मंत्री पद सौंपा है।

भारतीय जनता पार्टी के एक कुशल  प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद की मोदी सरकार में वापसी हुई है। प्रसाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके डिप्टी एल. के. आडवाणी और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र साथी रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 के चुनावों में सत्ता में लौटने के बाद उन्हें अपने मंत्रिमंडल में बनाए रखा है।वे कानून और वित्त, संचार और सूचना पेरौद्योगिकी मंत्री होंगे। 1990 के दशक के मध्य में सर्वोच्च न्यायालय के वकील से नेता बने रविशंकर प्रसाद ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले में मुकदमे दायर किए। रविशंकर प्रसाद और दो अन्य लोग ही थे जिन्होंने जनहित याचिका दायर कर इस घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच की मांग की। उन्होंने राज्यसभा के चार कार्यकाल के बाद पहली बार पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले, अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा को बड़े अंतर से हराकर जीत हासिल की। रविशंकर प्रसाद पटना विश्वविद्यालय के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय थे। उनके पिता ठाकुर प्रसाद जनसंघ के नेता थे, जिन्होंने इसे राज्य में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

नरेंद्र मोदी सरकार में रमेश निशंक पोखरियाल, मानव संसाधन मंत्रालय संभालेंगे। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में मानव संसाधन मंत्रालय का कार्यभार पहले स्मृति ईरानी को और बाद में प्रकाश जावड़ेकर को दिया गया। नए शिक्षा मंत्री के लिए मंत्रालय का कमान संभालते ही सबसे बड़ी चुनौती नई शिक्षा नीति लाना है क्योंकि आने वाले 100 दिनों में शिक्षा नीति सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं, नए शिक्षा मंत्री पोखरियाल को इन चुनौतियां भी सामना करना पड़ेगा। ये कुछ मूलभूत चुनौतियां हैं। इसके अलावा भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में कई अन्य बातें हैं जिनसे भारत के नए शिक्षा मंत्री को भिडऩा होगा। निशंक कवि, लेखक हैं जिनके नाम चालीस किताबें दर्ज हैं।

देश की नई सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश का रुतबा बढ़ गया। केंद्र में मोदी सरकार के शपथ के साथ दूसरे नंबर पर राजनाथ ने सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। वह पिछली सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री रह चुके हैं। अब उन्हें रक्षामंत्री का दायित्व दिया गया है। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय की अगुवाई में उत्तर प्रदेश की 64 सीटों पर भाजपा और सहयोगी दलों की शानदार जीत का तोहफा दिया था। उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल कर दिया गया। मई 2014 में वह 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए और मंत्री भी बने। कुछ दिन बाद शाह ने उन्हें भाजपा प्रदेश का अध्यक्ष बनाया। उन्होंने अपने कार्यकाल में भाजपा को मुश्किल की घड़ी से उबारा और पार्टी को शानदार जीत दिलाई।

रालोद प्रमुख अजीत सिंह को मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से अजित सिंह को हराकर जीत दर्ज करने वाले संजीव बालियान भी एक बार फिर मोदी कैबिनेट में जगह पाने में कामयाब हुए हैं। बालियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े किसान नेता के तौर पर जाने जाते हैं। संजीव बालियान ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। 2014 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने। 2014 से 2017 तक मोदी सरकार में कई मंत्रालयों में राज्यमंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा मुख्तार अब्बास नकवी, साध्वी निरंजन ज्योति, पूर्व जनरल वी. के. सिंह, संतोष गंगवार को मंत्रिमंडल में जगह पाने में कामयाब रहे।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए मंत्रिमंडल में जिन मंत्रियों ने  पद और गोपनीयता की शपथ ली उनमें छह महिलाएं शामिल हैं। निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी और हरसिमरत कौर बादल ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं, साध्वी निरंजन ज्योति, रेणुका सिंह और देबाश्री चौधरी ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

कार्यक्रम में 58 मंत्रियों ने शपथ ली जिसमें नए चेहरे शामिल हुए। मोदी मंत्रिमंडल में अनुभव और नई सोच के साथ साथ, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का ध्यान रखा गया है। बंगाल, ओडीशा, तेलंगाना जैसे राज्यों में भविष्य तलाशती पार्टी ने यहां से जीते सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह देकर एक राजनीतिक संदेश भेजा है।

शपथ लेने वालों में, 24 सांसदों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में, 9 ने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, 24 राज्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के नेताओं के साथ शिवसेना, अकाली दल के नेताओं ने भी शपथ ली। जदयू और अपना दल के नेताओं को इस समारोह में शपथ नहीं दिलवाई गई। मंत्रिमंडल में एक पद दिए जाने से नाराज़ जदयू ने कहा कि हम सरकार में शामिल नहीं होंगे, लेकिन एनडीए में शामिल रहेंगे।

इसमें राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सदानंद गौड़ा, निर्मला सीतारमण, राम विलास पासवान, नरेंद्र सिंह तोमर, हरसिमरत कौर बादल, थावरचंद गहलोत, स्मृति ईरानी, हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, मुखतार अब्बास नकवी ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। यह सभी नेता पिछली सरकार में भी मंत्री थे।

इस सरकार के कैबिनेट में अमित शाह, एस जयशंकर, रमेश पोखरियाल निशंक, अर्जुन मुंडा, प्रह्लाद जोशी, महेंद्र नाथ पांडेय, अरविंद सावंत, गिरिराज सिंह, गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी बतौर कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली।

इसमें संतोष कुमार गंगवार, राव इंद्रजीत सिंह, श्रीपद नायक, डॉ जितेंद्र सिंह, किरण रिजिजू, प्रहलाद पटेल, आर के सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मांडविया ने राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की शपथ ली।

इसके अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते, अश्विनी कुमार चौबे, अर्जुन राम मेघवाल, जनरल वीके सिंह, कृष्णपाल, रावसाहब दानवे, जी कृष्णा रेड्डी, पुरुषोत्तम रुपाला, रामदास अठावले, साध्वी निरंजन ज्योति, बाबुल सुप्रीयों, संजीव कुमार बालियान, संजय धोत्रे, अनुराग ठाकुर, सुरेश आंगड़ी, नित्यादनंद राय, रतन लाल कटारिया, वी मुरलीधरन, रेणुका सिंह, सोम प्रकाश ,रामेश्वर तेली, प्रतापचंद्र सारंगी, कैलाश चौधरी और देबाश्री चौधरी ने राज्यमंत्री की शपथ ली है। शिवसेना के अरविंद सावंत को भारी उद्योग मंत्रालय दिया गया है तो हरसिमरत कौर को खाद्य प्रसंस्करण।

कुल मिलाकर मोदी के नए मंत्रिमंडल में सभी राज्यों, जातियों और समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व है। उसमें चुनावी रण के धरंधर भी है और जमीनी कार्यकर्ता भी। अपने अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी है और अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता भी। यह उसे लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने हौसला भी देंगे और विश्वास भी। मोदी मंत्रिमंडल की खासियत है कि ज्यादातर मंत्रियों को वही मंत्रालय दिए गए हैं जो उनके पास पहले से थे। जिनका उन्हें अनुभव था। यही है काम की मोदी शैली।

 

सतीश पेडणेकर

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