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मोदी सरकार की दूसरी पारी नई ऊंचाईयों की ओर भारत

मोदी सरकार की दूसरी पारी  नई ऊंचाईयों की ओर भारत

30 मई 2019 को नरेन्द्र मोदी ने अपने द्वितीय कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ-साथ 57 अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 24 कैबिनेट मंत्रालय, 24 राज्य मंत्रालय, और 9 स्वतंत्र प्रभार संभालेंगे। गौरतलब है की  जैसे चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं उससे ये सरकार पिछली अन्य सभी सरकारों से बदली-बदली सी नजर आती है।

वरीयता को प्राथमिकता

इस सरकार में अनुभव और वरीयता को प्राथमिकता दी गयी है। एक ओर जहां पिछली कैबिनेट से कई मंत्री वापस इस नयी कैबिनेट में आये, वहीं कई पूर्व मंत्रियों को जगह नहीं मिली। राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, डीवी सदानंद गौड़ा, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद और पीयूष गोयल जैसे अनुभवी चेहरे दुबारा मंत्रिमंडल में शामिल हुए, वहीं पूर्व कैबिनेट में से 13 मंत्रियों को जगह नहीं मिली। सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जैसे वरिष्ठ नेताओं ने स्वास्थ्य कारणों से इस बार कोई पद नहीं लिया। इसके अलावा महेश शर्मा, सुरेश प्रभु, राज्यवर्धन सिंह राठौर, मेनका गांधी, उमा भारती, जयंत सिन्हा, और रामकृपाल यादव आदि मुख्य नाम हैं, जिन्हें इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।

अच्छे कार्य को तरजीह

मोदी मंत्रिमंडल 2.0 में अच्छे काम करने वाले मंत्रियों को तरजीह दी गयी। निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और नितिन गडकरी जैसे चेहरे जिन्होंने अपने मंत्रालय में बहुत ही बेहतरीन काम किया है, उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिली।


 

राजनाथ सिंह का नया अवतार


 

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सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह ने शनिवार जून 1 को अधिकारिक तौर पर रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। राजनाथ सिंह ने कार्यभार संभालने के शीघ्र बाद थल सेना, नौसेना एवं वायुसेना प्रमुखों को अपने अपने बलों की चुनौतियों और संपूर्ण कामकाज पर अलग-अलग प्रस्तुतियां तैयार करने को कहा है।

मंत्रालय की दूसरी शाखाओं को भी प्रस्तुतियां तैयार करने को कहा गया है, जिनकी जल्द ही एक बैठक में समीक्षा की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार सिंह ने यहां रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी. एस. धनोआ और नव-नियुक्त नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह के साथ बैठक कर सुरक्षा परिदृश्य की जानकारी भी ली।

रक्षा मंत्री के तौर पर सिंह की सबसे अहम चुनौती सेना के तीनों अंगों के काफी समय से लंबित पड़े आधुनिकीकरण को तेज करने और उनकी युद्ध तैयारियों में संपूर्ण सामंजस्य सुनिश्चित करने की होगी। उनके समक्ष एक और चुनौती चीन से लगी सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम करने तथा वहां चीन की किसी संभावित शत्रुता से निपटने के लिए जरूरी सैन्य बुनियादी ढांचा विकसित करने की होगी। राजनाथ सिंह से देश के रक्षा प्रतिष्ठानों को उम्मीद है कि राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज मंत्री के मिलने से तीनों सेवाओं के एक प्रमुख जैसे ढांचागत सुधार पर भी काम आगे बढ़ सकेगा।

राजनाथ सिंह के कार्यभार संभालने के बाद से ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह सीमा पार से आतंकवाद से निपटने की दृढ़ संकल्प वाली नीति को जारी रखेंगे। पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर भारत के एयर स्ट्राइक करने के महज तीन महीने बाद रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने आए सिंह के लिए जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ पर रोक लगाना एक और अहम क्षेत्र होगा।

वहीं बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और भू-राजनीतिक परिदृश्य के चलते बतौर रक्षा मंत्री सिंह को थल सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा। आज के दौर में जब सशस्त्र बल हाईब्रिड वॉरफेयर से निपटने के लिए खुद को साजो सामान से सुसज्जित करने पर जोर दे रहे हैं, ऐसे में सिंह को यह अहम मांग जल्द ही पूरी करनी होगी। हाईब्रिड वारफेयर एक ऐसी रणनीति है, जिसमें परंपरागत सैन्य बल को तैनात किया जाता है और इसे साइबर युद्ध तरकीबों से सहयोग प्रदान किया जाता है।

वहीं सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है और सिंह को महत्वकांक्षी रणनीतिक साझेदारी मॉडल के क्रियान्वयन सहित कई बड़े सुधारों की पहल करनी होगी। नये मॉडल के तहत चयनित भारतीय निजी कंपनियों को विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ भारत में पनडुब्बी और लड़ाकू विमान जैसे साजो-सामान बनाने के काम में लगाया जाएगा।

   उदय इंडिया ब्यूरो      


 

पेशेवराना तरीका

बीजेपी एक पार्टी की तरह बहुत ही अलग ढंग से कार्य करती है, इसका नमूना चुनाव के पहले ही दिख गया था। सुषमा स्वराज ने चुनाव के पहले ही चुनाव लडऩे से इनकार किया था, अरुण जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से कोई पद लेने से लिखित रूप में इनकार किया। एक ऐसे समय में, जब दूसरी पार्टियों में लोग पद और प्रतिष्ठा के लिए पागल हैं वहां इस सरकार में ऐसे चेहरे अपनी मर्जी से पद ठुकरा रहे हैं।

दूसरी और सबसे आश्चर्यजनक बात, इस मंत्रिमंडल में एस जयशंकर जैसे चेहरे का शामिल होना था। एक राजनयिक/डिप्लोमैट को मंत्रिमंडल में सीधे कैबिनेट मंत्रालय देना, इस सरकार के पेशेवराना रवैये को दर्शाता है।

5मैन  ऑफ द मैच: अमित शाह

30 मई को हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा अध्यक्ष अमित अनिलचंद्र शाह कैबिनेट के नए चेहरे और नए सितारे के तौर पर उभरे। अमित शाह का मंत्रिमंडल में शामिल होना कोई हैरत की बात नहीं है।  पिछले कुछ समय से जिस तरह के समीकरण देखने को मिल रहे थे उससे कयास लगाया जाने लगा था कि अमित शाह को इस बार के मंत्रिमंडल में नंबर-2 की जगह मिल सकती है।

शाह 1980 के दशक में मोदी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी के रूप में सामने आए थे।  नरेंद्र मोदी और शाह दोनों ने गुजरात से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।  गुजरात से शुरू हुआ ये कारवां दिल्ली की सत्ता तक पहुंच गया। यह अमित शाह की मेहनत का ही नतीजा रहा कि बीजेपी तेजी से ताकतवर होती चली गई। शाह को कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलें पहले से ही तेज हो गई थीं।  हाल की कुछ घटनाओं ने इस ओर इशारा करना शुरू कर दिया था कि इस बार शाह की भूमिका कुछ अलग होगी।

एक अन्य संकेत वास्तव में इतिहास का एक सबक है। जब 2002 में शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की वापसी के लिए जमीन तैयार की, तो उन्हें 10 विभागों के साथ पुरस्कृत किया गया।  इन विभागों में घर, कानून और न्याय, जेल, सीमा सुरक्षा और आवास शामिल थे। इस जीत ने साफ कर दिया था कि उनकी जगह कैबिनेट में पहले से पक्की हो चुकी है।

इसके अलावा, शाह पर मोदी का भरोसा निर्विवाद है।  2014 में पार्टी की भारी जीत के बाद भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मोदी ने कहा था, ‘अमित शाह मैन ऑफ द मैच हैं।  अगर शाह को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तो देश को उनके अपार कौशल के बारे में पता नहीं चलता। मैं शाह को लंबे समय से व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। वह अपनी नई जिम्मेदारी में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है।’


 

अमित शाह ने संभाला गृहमंत्री का पदभार


 

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष अमित शाह ने मई 31 को देश के 30वें गृहमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया. शाह ऐसे समय गृहमंत्री बने हैं जब देश आतंकवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद चुनौतियों का सामना कर रहा है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राजनाथ सिंह देश के गृहमंत्री थे। उन्हें इस बार रक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। इस हाई-प्रोफाइल मंत्रालय के नेतृत्व में परिवर्तन संभवत कठिन निर्णय लेने और आतंक, उग्रवाद और अलगाववाद से कड़ाई से निपटने के तहत लिया गया है।

हालांकि पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षाबलों को खुली छूट दी थी, जिस वजह से बड़ी संख्या में आतंकवादी भी मारे गए। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि शाह उनसे भी ज्यादा कड़ा रूख अपनाएंगे।

पूर्वोत्तर भारत आंतरिक सुरक्षा के हिसाब से भारत की सरकारों के लिए अक्सर चुनौतीपूर्ण रहा है। इस इलाके में उग्रवादी संगठन हाल के वर्षों में पहले के मुकाबले थोड़ा कम सक्रिय हैं लेकिन उनकी जड़ें वहां अभी भी मौजूद हैं।

राजनाथ सिंह के कार्यकाल के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों, खासतौर पर असम में अवैध आप्रवासियों का मुद्दा गृह मंत्रालय की प्राथमिकता में शामिल रहा है। इससे जुड़ी चुनौतियां अमित शाह को राजनाथ सिंह से विरासत में मिल रही हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने अवैध आप्रवासियों को बाहर निकालने के लिए बड़ा दम भरा था, लेकिन तब वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और चुनाव के माहौल के हिसाब से बोल रहे थे।

पूर्वोत्तर की राजनीति और अवैध आप्रवासियों से जुड़े घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार पीएम तिवारी कहते हैं, ”लोकसभा चुनावों में बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह पूर्वोत्तर इलाके और खासकर असम में अपनी तमाम रैलियों में दो बातें जरूर दोहराते थे। पहली यह कि बीजेपी केंद्र में लौटने के बाद नागरिकता (संशोधन) विधेयक लागू करेगी और दूसरी यह कि नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस यानी एनआरसी के जरिए तमाम अवैध आप्रवासियों की पहचान कर उनको देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। लेकिन एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष के तौर पर यह सब कहना शाह के लिए जितना आसान था, अब देश के गृहमंत्री के तौर पर अपनी कही बातों पर अमल करना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।’’

            उदय इंडिया ब्यूरो      


अबकी बार युवा है सरकार

मोदी 2.0 इस बार एक और कारण  से विशेष है। नरेंद्र मोदी की बतौर प्रधानमंत्री दूसरी पारी में गठित नई कैबिनेट में अमेठी से सांसद 43 वर्षीय स्मृति ईरानी सबसे युवा मंत्री हैं। वहीं, एनडीए के घटक दल लोजपा के 73 वर्षीय रामविलास पासवान सबसे बुजुर्ग नेता हैं। मोदी की नई कैबिनेट की औसत आयु 59.36 है। पिछली मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की औसत आयु 62 साल थी। यानी नई सरकार अपेक्षाकृत 2 साल युवा है। सिर्फ स्मृति ही नहीं अनुराग सिंह ठाकुर (44), मनसुख मांडविया और संजीव कुमार बालयान (46), तो किरण रिजिजू 47 साल के हैं। इस युवा कैबिनेट के दो नए सदस्य रामेश्वर तेली और देबश्री चौधरी भी 48 साल की ही हैं।  अगर उम्रदराज मंत्रियों की बात करें तो एलजेपी के रामविलास पासवान के बाद नंबर थावर चंद गहलोत और संतोष कुमार गंगवार का आता है। दोनों ही 71 साल के हैं।

क्या हैं कारण?

इस युवा मंत्रिमंडल के गठन के पीछे बड़ी वजह मोदी के पहले मंत्रिमंडल के सदस्यों का इस बार नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होना है। गौरतलब है कि 66 साल के अरुण जेटली और 67 साल की सुषमा स्वराज ने स्वास्थ्य कारणों से मंत्री पद लेने से इंकार कर दिया। इनके अलावा शिवसेना नेता अनंत गीते (68), हरियाणा से वरिष्ठ नेता चौधरी बिरेंद्र सिंह (73), छह बार से लोकसभा में चुन कर आ रहे राधामोहन सिंह (70) के अलावा भूतपूर्व अल्फोंस कन्नानथानम (65) इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं है।  इस कारण टीम मोदी 2.0 की औसत उम्र लगभग दो साल कम हो गई।

वाजपेयी सरकार के सिर्फ 4 मंत्री

नई केंद्र सरकार के जिन 24 कैबिनेट मंत्रियों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले दिनों शपथ दिलाई है, उनमें से केवल चार मंत्री ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)-1 में शामिल थे। इससे मोदी सरकार पर अटल-आडवाणी की छाप में कमी का संकेत मिलता है।

राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी और प्रहलाद पटेल मोदी 2.0 में शामिल होने वाले ऐसे मंत्री हैं, जो वाजपेयी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री थे। अरुण जेटली ने स्वास्थ्य कारणों से मंत्रिमंडल से बाहर रहने का फैसला किया और सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया गया।

राजग-1 के कई मंत्री -उमा भारती, मेनका गांधी, जुआल ओरम और विजय गोयल, जो 2014 में टीम मोदी में शामिल थे, उन्हें इसबार मंत्री नहीं बनाया गया है। यह एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देता है।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृहमंत्री रहे राजनाथ सिंह को मोदी 2.0 में रक्षामंत्री बनाया गया है। वह वाजपेयी के नेतृत्व में 1999 में परिवहन मंत्री बने थे और बाद में कृषि व खाद्य प्रसंस्करण मंत्री बने थे। उन्होंने इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) की शुरुआत की थी।

मौजूदा मोदी सरकार में एकमात्र मुस्लिम चेहरा मुख्तार अब्बास नकवी वाजपेयी की सरकार में सूचना व प्रसारण मंत्री थे।

नकवी को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य राज्यमंत्री बनाया गया था। 2019 में उन्हें फिर से मोदी सरकार में शामिल किया गया और उनका अल्पसंख्यक मंत्रालय बरकरार है। शत्रुघ्न सिन्हा को पटना साहिब सीट से हराने वाले रविशंकर प्रसाद ने न केवल कानून-न्याय और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय बरकरार रखा, बल्कि उन्हें संचार मंत्रालय का भी प्रभार सौंपा गया है।

वाजपेयी के सरकार में भी, उन्होंने सूचना व प्रसारण मंत्री के अलावा कानून एवं न्याय मंत्रालय का कार्यभार संभाला था।

मोदी सरकार में शामिल किए गए अन्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने भी अटल-आडवाणी सरकार में काम किया था। 15 वर्षो के अंतराल के बाद, उन्हें मोदी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया। वह नए संस्कृति और पर्यटन मंत्री हैं। पटेल वाजपेयी सरकार में कोयला राज्यमंत्री थे।

मोदी सरकार 2.0 में कई नए चेहरे तो कई पुराने चेहरे शामिल किये गए हैं, जिससे यह साफ झलकता है की यह सरकार अनुभव और युवा जोश को साथ मिला कर देश को प्रगति पथ पर ले जाने को ढृढ़संकल्प है।

 

नीलाभ कृष्ण

 

 

 

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