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मातृत्व अब करियर में बाधक नहीं

मातृत्व अब करियर में बाधक नहीं

By पूजा मेहरोत्रा

पिछले दिनों न्यूयॉर्क की दो बड़ी कंपनियां, फेसबुक और एप्पल ने विवाहित कामकाजी महिलाओं के लिए ऐसा प्रलोभन दिया है जिसने यह साबित कर दिया है कि अब तक महिलाओं के कामकाज पर सवाल उठाया जाना और उन्हें कमतर आंकना महज एक दिखावा भर है। यह कंपनियां और इनका मैनेजमेंट बेहतर जानती हैं कि महिलाएं कामकाज से लेकर व्यवसाय को एक मुकाम तक ले जाने में पुरूषों की तुलना में कम नहीं हैं। महिलाओं के साथ हमेशा से ही करियर और परिवार के बीच किसी एक को जब भी चुनने का वक्त आता है तो महिलाएं न चाहते हुए भी परिवार को ही चुनती हैं, जिसकी वजह से वे अपने करियर में अपने सहयोगियों से बेहतर होते हुए भी पिछड़ जाती हैं। महिलाओं की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए कंपनियां दोयम दर्जे का व्यवहार भी करती रही हैं। लेकिन, फेसबुक और एप्पल जैसी कंपनियों ने महिलाओं के काम को बखूबी पहचाना है। फेसबुक और एप्पल ने महिलाओं को अधिक से अधिक सहुलियतें देने के साथ-साथ मां बनने की प्रक्रिया को अपने करियर में रोड़ा न बनने देने का प्रस्ताव देकर उन्हें ‘एग फ्रीज’ करने का एक विशेष पैकेज भी दे रही हैं। पिछले दिनों यह खबर जब आई तो पूरी कॉरपोरेट दुनिया में जैसे भूचाल ही आ गया। खबर के मुताबिक, कंपनियां महिला कर्मचारियों को अपने ‘अंडे’ फ्रीज करवाने के लिए सैलरी के अलावा भारी रकम दे रही हैं, ताकि वे उम्र निकल जाने के बाद भी मां बनने के सपने को साकार कर सकें।

फेसबुक और एप्पल जैसी कंपनियां अब तक अपने कर्मचारियों को मुफ्त लंच, ड्राईक्लीनिंग और काम की थकान को मिटाने के लिए मसाज जैसी सुविधाएं तो देती आ रहीं थीं, लेकिन जब कंपनी प्रशासन ने देखा कि एक उम्र के बाद महिलाएं मां बनने के सपने को साकार करने के लिए अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं और फिर कई वर्षों के अवकाश पर चली जाती हैं जिससे न केवल वे अपने करियर में बहुत पीछे हो जाती हैं, बल्कि कंपनियां भी अपना एक बेहतरीन एप्लाई खो देती हैं तो कंपनी प्रशासन ने महिला कर्मचारियों के लिए इस विशेष पैकेज की घोषणा की। ये कंपनियां अपने कर्मचारियों को इंफर्टिलिटी ट्रीटमेंट, स्पर्म डोनर्स और एग्स फ्रीज करने के लिए 20,000 डॉलर, करीब 12 लाख रुपए दे रही हैं। कंपनियों का मानना है कि ऐसा करने से महिलाएं अधिक से अधिक अपने करियर पर फोकस कर सकेंगी और समय बीत जाने के बाद, यानी 40 की उम्र के बाद भी आसानी से मां बन सकेंगी।

इन दोनों कंपनियों ने कॉरपोरेट वल्र्ड में महिलाओं के लिए इस विशेश पैकेज के विषय में सोचने को मजबूर कर दिया है। वैसे कॉरपोरेट वल्र्ड, स्वास्थ्य और मीडिया से जुड़ी कई महिलाएं निजी तौर पर इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं। फेसबुक ने अपनी महिला कर्मचारियों को भुगतान करना शुरू भी कर दिया है, जबकि एप्पल 2015 में महिला कर्मचारियों को भुगतान शुरू करेगी। वैसे फेसबुक नए अभिभावकों को बेबी कैश के तौर पर भी ढ़ाई लाख रुपए देती आ रही है, जबकि एप्पल 18 हफ्तों का सवेतन मातृत्व अवकाश देता आ रहा है।

क्या है एग फ्रीजिंग?

22-11-2014

डॉ चेतना जैन कहती हैं – ”एग फ्रीजिंग के लिए माहवारी के 21वें दिन से जीएनआरएच एनालॉग के साथ यह प्रक्रिया शुरू होती है और माहवारी आने तक जारी रहती है। उसके बाद महिला को गोनेडोट्रॉफीन हॉर्मोन की तेज खुराक दी जाती है, जो उसकी ओवरी को इस तरह सक्रिय कर देती है, ताकि वह ज्यादा संख्या में अंडाणु पैदा करे। मासिक चक्र के दूसरे दिन से लेकर 10-12 दिन तक रोज इंजेक्शन दिए जाते हैं। इसी के साथ अंडाणुओं के विकास को भी मॉनिटर किया जाता है। अंडाणु जब एक खास आकार को हासिल कर लेता है तो उसे पूर्ण परिपक्व अवस्था में लाने के लिए हयूमन क्रॉनिक गोनेडोट्राफीन का इंजेक्शन दिया जाता है। 30 घंटे के बाद महिला को बेहोश कर उसकी ओवरी से इन अंडाणु को निकाला जाता है। परिपक्वता के आधार पर अच्छे अंडाणुओं को छांटकर लिक्विड नाइट्रोजन में रख दिया जाता है, जो माइनस 196 सेंटीग्रेट (-320 फारेनहाइट) पर जमता है। आमतौर पर इसके बाद महिलाओं को सिर दर्द और भारीपन की शिकायत होती है और कुछ दिन बाद सब सामान्य हो जाता है।’’

22-11-2014
उम्र के एक विशेष पड़ाव पर 95 प्रतिशत महिलाएं करियर के बजाय परिवार को चुनती हैं। इसके कारण एक बेहतरीन कामकाजी महिला अपना करियर बीच में छोड़ देती है। समाजशास्त्री प्रोफेसर और स्टैनफोर्ड विश्वविघालय में क्लेमैन इंस्टीट्यूट फॉर जेंडर रिसर्च की निदेशक शैली कोरेल बताती हैं कि महिलाओं को अपने बायोलॉजिकल क्लॉक और क्लॉक वर्क में हमेशा ही सामंजस्य बैठाने में समस्या होती है और महिलाएं अपने करियर को ही त्याग देती हैं या फिर अपने दूसरे साथियों से पीछे रह जाती हैं, जबकि वह उनसे बेहतर कार्यकर्ता होती हैं। जिस वक्त महिलाएं अपने करियर के पीक की तरफ बढ़ रही होती हैं, उसी दौरान उन पर मां बनने का भी दबाव होता है, क्योंकि इसमें उम्र बढऩे से मां बनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कंपनियों द्वारा महिलाओं के लिए उठाया गया यह कदम अवश्य ही महिलाओं की एक बहुत बड़ी समस्या को सुलझाने में मदद करेगा।

वैसे एग फ्रीजिंग संस्कृति निजी तौर पर भारत में भी खूब पॉपुलर हो चुकी है, लेकिन यह अभी कॉरपोरेट वर्ग में उच्च पद पर बैठी महिलाओं तक ही सीमित है, क्योंकि एग फ्रीज करने के लिए हर वर्ष एक निश्चित राशि अदा करनी पड़ती है जो हर लड़की के बस की बात भी नहीं है। एग जितनी जल्दी और छोटी उम्र में फ्रीज कराया जाए वह उतना ही अच्छा होता है, क्योंकि उम्र बढऩे के साथ एग की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों में गिरावट होती जाती है। महानगरों में 25 से 30 वर्ष की लड़कियों में एग फ्रीज कराने में काफी रुचि है। वह मानने लगी हंै कि यही समय है जब आप अपना एग फ्रीज कराकर अपने मां बनने के सपने को कुछ और वर्ष तक टाला जा सकता है। कविता मार्केटिंग के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनकी उम्र 28 साल की हो चुकी है और अभी वह कुछ और समय अपने करियर को देना चाहती हैं, लेकिन अपनी जॉब से संतुष्ट न होने की वजह से भी वह परेशान हैं। वह कहती हैं – ”मैं अपने करियर के लिए और तीन-चार सालों तक मां नहीं बनना चाहती हूं। मुझे अभी शादी नहीं करनी है। इसलिए एग फ्रीज करवाकर कुछ साल और करियर को दे सकती हूं। यह मां बनने का एक सुरक्षित जरिया भी है और मां बनने की प्रक्रिया में कोई चिंता भी नहीं रहेगी।’’ कुछ ऐसा ही मनीषा भी मानती हैं। मनीषा वकील हैं। वो कहती हैं – ”आज बहुत प्रतियोगिता है और यही वक्त शादी, बच्चे और करियर का होता है। लड़के इसलिए सफल रहते हैं, क्योंकि उन्हें अपना करियर बीच में नहीं छोडऩा होता है और फिर वे हम पर अकड़ दिखाते हैं। लेकिन जब मेरी डॉक्टर दोस्त ने एग फ्रीज की सुविधा लेने की सलाह दी तो मैं बहुत खुश हो गई। मैंने तत्काल वह सारे कदम उठाए और अपना अंडा फ्रीज करवा दिया।’’

एग फ्रीजिंग के विषय में मैक्स हॉस्पिटल की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. तान्या बख्शी कहती हैं – ”एग फ्रीज के कई फायदे हैं। एग फ्रीज बांझपन झेल रही महिलाओं के लिए भी एक विकल्प पेश करता है। साथ ही बच्चे को जन्म देने की सही उम्र और सामाजिक-आर्थिक नजरिए से बच्चे पैदा करने की उम्र के बीच बढ़ते अंतर का मां बनने की प्रक्रिया में कोई फर्क नहीं पड़ता है।’’ दिल्ली के ही रॉकलैंड अस्पताल की गाइनोकॉलिजिस्ट डॉ. आशा शर्मा कहती हैं – ”पश्चिमी देशों की तुलना में अभी भारत में एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया शुरआती दौर में है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में हर वर्ष 20 से 25 फीसदी लड़कियां एग फ्रीज की सुविधा ले रहीं हैं। इसमें भी अकेली महिलाओं की संख्या ज्यादा है।’’ मीडिया में कार&

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