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बदलती सोच अपसंस्कृति का उन्माद

बदलती सोच अपसंस्कृति का उन्माद

By प्रेमपाल सिंह वाल्यान

बीसवीं सदी के अन्त तक जो औरतें अपने पति का नाम लेने में भी संकोच करती थीं तथा गैर मर्द की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखती थीं, वे अब इतनी प्रोग्रेसिव हो चुकी हैं कि अब डंके की चोट पर अन्य पुरुषों से शारीरिक संबंध बनाती हैं तथा अपने पति की नामर्दगी को सार्वजनिक करने से भी नहीं हिचकिचातीं हैं।

समय के साथ-साथ मानव जीवन के नैतिक मूल्य व सिद्धान्त बदलते रहते हैं। सेक्स के बारे में भी प्राचीन काल से ही विभिन्न धारणाएं प्रचलित रही हैं। वर्तमान समय में भी सेक्स के प्रति अपनी- अपनी सोच है। जहां कुछ बुद्धिजीवी पैसे के लिए किये गए सेक्स में तथा प्यार में किये गये सेक्स में कोई अन्तर नहीं मानते, वहीं कुछ बुद्धिजीवी इन दोनों में जमीन आसमान का अन्तर मानते हैं।

आधुनिक समाज की खासियत यही नहीं है कि उसने सेक्स को कुछ पलों का मनोरंजन बना दिया है, बल्कि वह इस विषय पर विस्तार से तथा घंटों बात करता है। उसने इस विषय पर विस्तार से लिखा है, इससे संबंधित भिन्न-भिन्न प्रकार के फोटो छापे हैं, इस बारे में फिल्में बनाई हैं। इसके विभिन्न आयामों को लेकर कई तरह के सर्वे किये गये हैं तथा इसके सभी गुप्त रहस्यों को खोलने की पूरी कोशिश की गई है।

जहां एक तरफ सभी पशु-पक्षी प्राकृतिक नियमों का पालन करते हैं, वहीं मनुष्य जाति किसी प्राकृतिक नियम का पालन नहीं करती। अभी कुछ समय पहले तक मासिक धर्म के दौरान सेक्स को वर्जित माना जाता था, लेकिन आधुनिक चिकित्साशास्त्री इसे वर्जित नहीं मानते। यहां तक कि मनुष्य सेक्स के लिए अपनी जान की परवाह भी नहीं करता। यही कारण है कि बलात्कारों में दिन दूनी, रात चौगुनी वृद्धि हो रही है तथा दो साल की बच्ची से लेकर 80 साल की वृद्धा तक इसकी शिकार हो रही हैं।

बदलती सोच
प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल तक सेक्स को बेहद व्यक्तिगत व पवित्र माना जाता था, परन्तु अब यह खबरों व मनोरंजन का मुख्य विषय बन गया है। भारत के परम्परागत देह व्यापार करने वाले समूह किसी युवती को इस पेशे में पहली बार उतारते थे तो उसकी नथ उतराई की एक रस्म पूरी करते थे। यह रस्म ढोल बजाकर या विज्ञापन देकर नहीं होती थी, बल्कि बहुत ही गोपनीय तरीके से होती थी। कुछ गिने-चुने रंगीन मिजाज के धन्ना सेठों को ही इसकी जानकारी होती थी। जो सर्वाधिक धन देता था, वही व्यक्ति युवती के कुंवारेपन को यानि वर्जिनिटी को समाप्त करता था। लेकिन, कुछ समय पूर्व इटली की एक 20 वर्षीय जानी-मानी मॉडल राफैला फीको ने अपने कुंवारेपन को नीलाम करने के लिए विभिन्न माध्यमों से बाकायदा विज्ञापन दिया तथा उसने अपने कुंवारेपन की कीमत 1.5 मिलियन डॉलर यानी 6.5 करोड़ रूपये लगाई थी। उसने एक इन्टरव्यू में कहा कि ‘अगर मेरा खरीददार बदसूरत भी होगा तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि अगर वह मुझे पंसद नहीं आया तो मैं उसे जल्दी ही छोड़ दूंगी। वह मेरे लिए एक वाइन के पैग की तरह होगा, जिसे एक बार पीने के बाद हमेशा के लिए भूल जाऊंगी।’ यही नहीं उसके अन्य पारिवारिक सदस्यों ने भी उसकी हौसला अफजाई की थी तथा फीको के सम्बन्ध में बढ़ा-चढ़ा कर बातें कीं तथा उसके कुंवारेपन की कसमें खाईं थीं।

इसी तरह अमेरीका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन डिएगो शहर की 22 वर्षीया छात्रा नताली डायजन ने इंटरनेट पर अपना कौमार्य गंवाने का ऑफर देकर सनसनी फैला दी। उसके साथ पहली रात बिताने की कीमत 78 लाख रुपये लगाई गई। नताली ने कॉलेज फीस भरने के नाम पर कौमार्य की नीलीमी की थी। हाल ही में एक अन्य घटना में ब्रिटिश फिल्म निर्माता ने छात्रों के सामने एक दिलचस्त पेशकश रखी। निर्माता ने कहा है कि जो छात्र उनके कैमरे के सामने कौमार्य खोएगा वे उसे 7 लाख रुपये अदा करेंगे। उसने कहा कि कौमार्य खंडित होने के क्षणों को मैं अपने वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) में शामिल करना चाहता हूं। नीलामी से आने वाली कुल रकम का 90 प्रतिशत हिस्सा उन जोड़ों को दे दिया जाएगा, जिन्हें इन अमूल्य क्षणों को कैमरे में शूट करने के लिए चूना जाएगा।

कौमार्य नीलामी पर टैक्स
रोमानिया की एक 18 वर्षीय छात्रा पर्सिया ने कंम्प्यूटर स्टडीज की पढ़ाई पूरी करने के लिए इटली के एक व्यापारी से अपनी कौमार्य भंग करने के बदले लगभग साढ़े छ: लाख रुपये लिये, लेकिन कौमार्य बेचने के बदले में मिली धनराशी का 50 प्रतिशत हिस्सा उसे टैक्स के रूप में भरना होगा।

गौरतलब है कि पर्सिया जर्मनी में पढ़ती है जहां वेश्यावृत्ति एक कानूनी धंधा है। वहां इस धंधे से कमाई गई धनराशि में से 50 प्रतिशत धनराशी टैक्स के रूप मे देनी पड़ती है। जर्मनी के टैक्स अधिकारी इस बात का पता कर रहे हैं कि पर्सिया का वीजा स्टेटस क्या है। अगर उसके पास स्टूडेंट्स वीजा है तो वह जर्मनी में 90 दिनों तक काम कर सकती है, जिसमें वेश्यावृत्ति भी शामिल है। हालांकि पर्सिया ने काफी कम समय में यह रकम कमाई है, इसलिए उसे इन्कम टैक्स के अलावा वैट भी अदा करना पड़ सकता है।

बढ़ता खुलापन
प्राचीन काल से ही महिलाओं को यौन आनन्द प्राप्त करने के रास्ते में अनेकों वर्जनाएं खड़ी कीं गईं, लेकिन आधुनिक काल की स्त्रियां इन वर्जनाओं को तोड़कर एक नए अंदाज में मुखर हो रही हैं। अब वे पेट की भूख के साथ-साथ शारीरिक भूख यानि कामेच्छा की पूर्ति की मांग भी करने लगी हैं। अगर इसमें कोई बाधा उत्पन्न होती है तो सात जन्म तक साथ निभाने का वचन और पति-पत्नी के रिश्तों की मर्यादा की डोर को एक झटके में तोड़ देती हैं।

बीसवीं सदी के अन्त तक जो औरतें अपने पति का नाम लेने में भी संकोच करती थीं तथा गैर मर्द की ओर आंख उठाकर भी नहीं देखती थीं, वे अब इतनी प्रोग्रेसिव हो चुकी हैं कि अब डंके की चोट पर अन्य पुरुषों से शारीरिक संबंध बनाती हैं तथा अपने पति की नामर्दगी को सार्वजनिक करने से भी नहीं हिचकिचातीं हैं।

ऐसा नहीं है कि जवान औरतें ही ऐसा कदम उठा रहीं हैं, अपने दाम्पत्य जीवन की सिलवर जुबली मना चुकी औरतें भी इस मामले में काफी मुखर हो रही हैं। वर्ष 2009 के अन्त तक भारत की अदालतों में तलाक के जो मामले प्रस्तुत हुए हैं उनमें से 17.6 प्रतिशत मामले ऐसे दम्पत्तियों के हैं जो साथ-साथ 25 साल गुजार चुके हैं।

अलीगढ़ जिले की महिला सेल प्रभारी अंजू तेवतिया बताती हैं कि पिछले चार माह में पति-पत्नी के बीच अनबन के 350 से भी अधिक मामले सामने आये हैं, इनमें से 40 मामले अवैध यौन संबंधों के हैं, जबकि 45 मामले ऐसे हैं जिनमें पत्नियों ने पति पर यौन सुख की पूर्ति न कर पाने का आरोप लगाते हुए किसी और के साथ रहने का अनुरोध किया है। तेवतिया कहती हैं, ”कुछ साल पहले तक इस तरह की शिकायतें नहीं मिलती थीं। महिलाओं का यह रूप धीरे-धीरे सामने आ रहा है, जो काफी गंभीर मामला है।’’22-11-2014

खुलते रहस्य
हाल के एक शोध से पता चला है कि बुद्धिमान महिलाएं न केवल भौतिक सुख पाने में सफल रहती हैं, बल्कि उनका यौन जीवन भी अन्य महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा सुखी रहता है। इस विषय पर लंदन के किंग्स कॉलेज में बाकायदा शोधकार्य जारी है। शोधकर्ता प्रो. टिम स्पेक्टर का कहना है कि इंटेलिजेंट महिलाओं की बेडरूम लाईफ ज्यादा मजेदार होती है, क्योंकि जो महिलाएं इमोशनल इंटेलिजेंस यानी भावनात्मक बुद्धिलब्धता वाली होती हैं, उनमें खुद को व्यक्त करने और दूसरों के इमोशंस को समझने की दक्षता ज्यादा होती है। इसलिए ये महिलाएं अक्सर चरम सुख प्राप्त कर लेती हैं।

प्रो. टिम का कहना है कि महिलाओं को ‘टची’ और ‘फीली’ बनाकर उनकी सेक्स लाइफ  में जादू भरा जा सकता है। प्रो. टिम ने 18 से लेकर 83 साल आयु वर्ग की 2,000 जुड़वां महिलाओं से उनकी सेक्स लाईफ के बारे में बात की। उनको चरम सुख पर पहुंचने के ‘कभी नहीं’ से लेकर ‘हमेशा’ के सात स्केल दिए गए। साथ ही उनसे एक प्रश्नावली भी भरवाई गई जो उनकी भावनात्मक बुद्धिमत्ता के अलावा स्वयं को व्यक्त करने की क्षमता, सहानुभूति और ‘तृप्ति’ से जुड

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