ब्रेकिंग न्यूज़ 

पश्चिम बंगाल विस्फोट पांव पसारता आतंकवाद

पश्चिम बंगाल विस्फोट  पांव पसारता आतंकवाद

By बर्दवान से संजय सिन्हा

नेस्तनाबूद होने की बजाए भारत में आंतकवाद की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे बम धमाके इस बात के पुख्ता सबूत हैं। कल तक जेहादियों की पनाहगाह बना पश्चिम बंगाल अब आंतकियों के निशाने पर है। बर्दवान बम विस्फोट मामले के बाद कई राज सामने आ रहे हैं।

बर्दवान जिले के खड़दह में दो अक्टूबर को एक मकान के उपरी हिस्से में जबर्दस्त विस्फोट हुआ, जिसमें दो की मौत हुई और एक बुरी तरह घायल हो गया। दरअसल खड़दह निवासी तृणमूल कांग्रेस नेता हाजी हसन चौधरी ने अपने मकान के उपरी हिस्से को किराए पर दे रखा था, जिसमें फेरीवाला शकील अहमद, शोभन मंडल, हसन साहब सहित दो महिलाएं – रोजरा बीवी उर्फ  रूमी और अमीना बीवी रहते थे। दो अक्टूबर 2014 को दोपहर तकरीबन सवा बारह बजे हाजी हसन चौधरी के मकान के उपरी हिस्से में जोरदार विस्फोट हुआ। धमाके इतने तेज थे कि पूरा इलाका दहल उठा। लोग अपने-अपने घरों से बहार निकल आए। हसन चौधरी ने अपने मकान में ही तृणमूल कांग्रेस का दफ्तर भी खोल रखा था, इसलिए वहां हर समय लोगों का आना-जाना लगा रहता था। धमाके के समय भी नीचे काफी संख्या में लोग मौजूद थे।

धमाके की खबर पाकर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो घर के अंदर का नजारा काफी खौफनाक था। अंदर शकील और शोभन की लाशें पड़ी थीं। दोनों लाशें बुरी तरह झुलस चुकी थीं, जबकि हसन घायल हालत में तड़प रहा था। घायल हसन को फौरन इलाज के लिए अस्पताल भेजवाया गया।

पुलिस को शकील अहमद के घर से 55 ताजा बम, जिलेटिन स्टीक, सॉकिट बम, हैण्ड ग्रेनेड, रिमोट कंट्रोल डिवाइस, आतंकवादी संगठन अल कायदा एवं तालिबानी विडियो, टेप, ट्रेनिंग टेप, तालिबानी गानों के कैसेट, केमिस्ट्री की किताबें, पासपोर्ट, एक ही व्यक्ति के कई नाम के वोटर कार्ड, माइक्रोचिप सहित फारसी एवं बंग्ला भाषा में लिखे हुए अल-जेहाद एवं मुजाहिदीन के लिफलेट्स मिले। इन सामानों की बरामदगी ने पुलिस के कान खड़े कर दिए। एक छोटे से इलाके में आतंकवादी संगठन के लोग शरण लिए हुए थे। निश्चित तौर पर इनकी मंशा देश को दहलाने की थी, लेकिन इससे पहले ही विस्फोट हो गया और एक बड़े राज से परदा उठ गया।

मारे गए दोनों शख्स के संबंध इंडियन मुजाहिदीन से थे और ये लोग किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे। घायल हसन और दोनों महिलाओं से पूछताछ करने के बाद कई तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। घायल हसन उर्फ अब्दुल वीरभूम जिले के डेउचा इलाके का रहने वाला है। डेउचा हाईस्कूल से दसवीं पास हसन की शादी मुर्शिदाबाद की अलीमा बीवी से लगभग तीन साल पहले हुई थी। हसन के भाई मोहम्मद मलहीन के मुताबिक, उसका भाई शादी के बाद से ही अपने परिवार से दूर है। बीच-बीच में वह अपने गांव आता रहता था।

मारे गए आतंकी शकील अहमद का संबंध बांग्लादेश से था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शकील वर्ष 2007 में बांग्लादेश से भारत आया और पश्चिम बंगाल को अपना ठिकाना बनाया। बर्दवान में उसने रफीकुल नामक शख्स से दोस्ती की और उसी की बहन रूमी से शादी कर ली। और तो और, शादी के बाद शकील ने रूमी को भी एक मदरसे में ट्रेनिंग दिलाई और उसे भी आंतकी गतिविधियों में अपने साथ शामिल कर लिया।

बर्दवान जिले के एसपी एस. एच. एम. मिर्जा ने बताया कि शकील अहमद बड़ी चालाकी से चोरी-छिपे अपने मिशन को अंजाम देने में लगा था। विस्फोट के बाद पुलिस को उसकी कारगुजारियों की जानकारी मिली। फिलहाल नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) इस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके तार और किन-किन लोगों से जुड़े हुए हैं। शकील, हसन और शोभन के साथ आंतकी गतिविधियों में शामिल दोनों महिलाएं भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

एनआईए टीम के प्रमुख संजय सिंह ने बताया कि लोकसभा चुनाव से पहले ही लगभग एक दर्जन आतंकवादी बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसे और पश्चिम बंगाल को अपना ठिकाना बनाया। शुक्र है कि विस्फोट के बाद इनका भंडाफोड़ हो गया वर्ना इनकी मंशा तबाही मचाने की थी। उन्होंने बताया कि मारे गए लोगों के संबंध खूंखार आंतकी संगठन से था और अभी भी संगठन से जुड़े लोग अपनी बदनीयति के साथ विभिन्न इलाकों में छिपे हुए हैं।

वाम मोर्चे के चेयरमैन विमान बसु ने आरोप लगाया है कि तृणमुल कांग्रेस सरकार आंतकियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने दावा किया है कि जिस टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) नेता के मकान में विस्फोट हुआ है, वे भी आंतकियों से मिले हुए हैं। यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि सत्ताधारी टीएमसी का देश विरोधी ताकतों से गठजोड़ है।

उधर तृणमूल कांग्रेस नेता मुकुल राय ने विमान बसु के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की छवि एवं गरिमा को धूमिल करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वाम मोर्चा और भाजपा का हाथ भी हो सकता है।

22-11-2014

इस घटना को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भाजपा ने भी राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को राष्ट्र-विरोधियों और जेहादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह में बदल दिया है। भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यहां तक कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता हाजी हसन चौधरी के मकान में हुए विस्फोट के मामले में सूबतों को नष्ट किया गया, ताकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी तक ये चीजें न पहुंच पाएं। जो भी हो, इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि बंगाल तेजी से मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों की गिरफ्त में आता जा रहा है और यहां से बैठकर आंतकी संगठनों के लोग पूरे देश में तबाही मचाने की कोशिश कर रहे हैं।S

बांग्लादेश के रास्ते आते हैं आंतकी
देश में कोई भी आंतकी वारदात हुआ हो और उसका तार कोलकाता से न जुड़ा हो, ऐसा कभी नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कट्टरपंथी ताकतें हमेशा फलती-फूलती रहीं और यह आंतकवादियों की शरणस्थली बना रहा। मुंबई में 12 मार्च 1993 को हुए सिल-सिलेवार बम विस्फोटों के चार दिन बाद 16 मार्च को कोलकाता पुलिस मुख्यालय से सटे मकान 267, बीबी गांगुली स्ट्रीट में भी जबर्दस्त विस्फोट हुआ था, लेकिन इस पर किसी ने गंभीर पहल नहीं की, लिहाजा आंतकियों के हौसले बढ़ते गए। आंतकवादी सरगना फरहान मलिक के इशारे पर उसके गुर्गों ने कोलकाता स्थित अमेरिकन सेंटर पर एक बड़ा आंतकवादी हमला किया।

अब तक जितने आतंकी पकड़े गए, सभी के संबंध कहीं-न-कहीं से किसी-न-किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होने की भी पुष्टि हुई। आंतकी संगठनों से जुड़े लोग पश्चिम बंगाल को ही अपना ठिकाना क्यों बनाते हैं, इस पर प्रदेश के बुद्धिजीवियों का कहना है कि इसके पीछे राजनैतिक संरक्षण सबसे बड़ी वजह है। 26/11 की घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पश्चिमी सीमा पर निगरानी कड़ी कर दी थी। बांग्लादेश सरकार ने भी अपने देश में कट्टरपंथी ताकतों से सख्ती से निपटना शुरू किया तो आंतकियों ने भागकर पश्चिम बंगाल में पनाह ली। सबसे बड़ी बात है कि यहां बड़ी आसानी से इन्हें राजनैतिक संरक्षण के साथ-साथ भारत की नागरिकता भी मिल जाती है। गौरतलब है कि शकील अहमद के वोटरकार्ड और पैनकार्ड भी एक माकपा नेता की अनुश्ंसा पर बने थे। अधिकारिक आंकड़ें बताते हैं कि 2013 में 2,815 लोगों ने बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ की।

‘दंपती मॉड्यूल’ बना रहे हैं आंतकी
देश के कई हिस्सों में हुए बम धमाकों में कभी ‘दरभंगा मॉड्यूल’ तो कभी ‘आजमगढ़ मॉड्यूल’ सामने आया, लेकिन बर्दवान विस्फोट की घटना में यह पता चला कि आंतकी अब ‘दंपती मॉड्यूल’ अपना रहे हैं। सरगनाओं के इशारे पर संगठन के लोग किसी महिला से शादी करते हैं और फिर दोनों मिलकर टे्रनिंग लेते हंै। इसके बाद पति-पत्नी दोनों आंतकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन जाते हैं। दंपतियों को किराए पर कहीं भी मकान आसानी से मिल जाते हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ‘दंपती मॉड्यूल’ हर मामले में आंतकियों के लिए सुरक्षित है। महिलाओं के लिए किसी के भी दिल में एक ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ होता है। इसलिए आंतकवादी संगठन के लोग इसका फायदा उठाते हैं, साथ ही मिशन को आगे बढ़ाने में सहूलियत भी होती है।

отзывы полигонполигон ооо

Leave a Reply

Your email address will not be published.