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संस्कार और समृद्धि का दीया

संस्कार और समृद्धि का दीया

By उपाली अपराजिता रथ

दीपावली के महान अवसर पर हम आज त्योहारों की व्याख्या करते हैं। हम सबको ये मालूम है कि असल में त्योहारों का हमारे जीवन में क्या महत्व होता है। दीपावली एक ऐसा त्योहार है जो पूरे भारत में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। हर आदमी उससे बहुत अच्छे से मनाने की कोशिश करता है। यह एक ऐसा त्योहार है जो लोगों के अन्दर ना सिर्फ प्यार बनाये रखता है, बल्कि आपस में भाईचारे को भी बढ़ावा देता है। असल में देखा जाए तो हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए कितना सोच रखा। हमारी परंपरा और हमारी संस्कृति को देख के यह हम जरूर जान सकते हैं कि वह लोग कितने दूरदर्शी हुआ करते थे।

दीया जलाना हिन्दू धर्म से संपूर्ण रूप से जुड़ी है। दीया का विशेष महत्व में हमारे हिन्दू धर्म में। दीया जलाने से बाहर का अंधकार मिटने के साथ-साथ वह हमारे अंदर के अहंकार रूपी अंधकार को मिटाने में भी अपना प्रभाव दिखाता है। दिपावली का दीया जलाकर हम अपने अंदर के अहंकार को भी जलाने का प्रयास करते है। बहुत दिनों से छुपा हुआ क्रोध या अहंकार को मिटाकर हम आपस में मिलजुल कर एक दूसरे को बधाई देते हैं। आधुनिक समाज में तो त्योहारों का बहुत महत्व होता है, क्योंकि हम सब अपनी निजी जिंदगी में इतना व्यस्त रहते हैं कि हम अपनों से बहुत दूर चले जाते हैं। मिलकर त्योहार मनाने से हमें ऐसा महसूस होता है कि हम यह दुनिया में अकेले नहीं हैं। हमारे साथ सुख-दुख बांटने के लिए भी हमारे दोस्त हमारे अपने कोई है। उत्तर भारत में दीपावली को लक्ष्मी पूजा माना जाता है। पश्चिम में काली पूजा और उड़ीसा में पित्तरों का श्राद्ध भी मनाया जाता है। लेकिन पूजा के उपरांत दीया जलाना और पटाखे फोडऩा हर प्रांत में होता है। हमारी परंपरा को शत-शत नमन करना चाहिए। इस त्योहार का हमारे जीवन में इतना ही महत्व नहीं है, क्योंकि यह हमारी जीवनशैली को ज्यादा प्रभावित करता है। हमारे सामने जो कुछ घटता है वो हमें दिखता है, लेकिन उसे महसूस नहीं कर पाते। इस त्योहार के जरिये यह साबित हो जाता है जब-जब हम त्योहार मनाते हंै हर तरह से हम खुश भी रहते हैं। लक्ष्मी पूजा करके भी घर में समृद्धि का आमंत्रण करते हैं। हम साधारण मनुष्य ये जान नहीं पाते है कि इस खुशी परोक्ष रूप से हमारा विकास भी करता है। खुशी और विकास एक सिक्के के दो पहलू हैं। हमारा खुश रहना भी हमारे विकास के मार्ग को प्रशस्त करता है। हम अगर एक दिन त्योहार मनाते हैं और खुश रहते हैं और समृद्धि का आशा भी करते हैं। त्योहार में हम अपने आपको इतना खुश रखें कि हमारा विकास और समृद्धि हमको छोड़कर ना जा पाए। लेकिन वो सब करने के लिए अपनी जीवनशैली का अभ्यास करना पड़ेगा। अभ्यास द्वारा मुश्किल से मुश्किल चीजों का सरल समाधान हो जाता है। इस दीपावली में हम सबका ये जरूरी लक्ष्य होना चाहिए, जैसे दीपावली में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हम खुश रहते हैं। इसी तरह पूरे साल का हर दिन, हर क्षण को दीपावली की तरह मनायें। खुशी का एक स्रोत प्रवाहित करें, जिसका असर ना सिर्फ हमारे जीवन में हो वरन हमारे संपर्क में आने वाले हर इंसान के जीवन में खुशी और समृद्धि आए।

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