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देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां बाल मजदूर नहीं हैं: कैलाश सत्यार्थी

देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां बाल मजदूर नहीं हैं: कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बंधुआ मजदूरों के मसीहा हैं। 9 अक्तूबर तक उनके नाम को देश ही नहीं, उनके अड़ोसी पड़ोसी तक भी नहीं जानते थे। जैसे ही खबरिया चैनलों पर नोबेल पुरस्कार विजेता के रूप में उनका नाम प्रसारित होना शुरू हुआ वे अचानक शांति का एक चेहरा बन गए। सत्यार्थी का कहना है कि वे बाल अधिकारों के लगातार काम और संघर्ष करते रहेंगे। जिस प्रकार से उन्हें चुना गया है इससे आज बाल अधिकारों की बातें होगीं और तेजी से अब बदलाव आएगा। कैलाश सत्यार्थी से पूजा ोत्रा की बातचीत।

आपको विश्व का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार (शांति) मिला है। कैसा महसूस हो रहा है।
बहुत खुश हूं और यह पुरस्कार भारत में बाल दासता को खत्म करने के लिए और प्रयास करने को प्रेरित करेगा। यह पुरस्कार भारत की जनता को समर्पित है। बच्चों के शोषण के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इस आधुनिक युग में मुश्किलों का सामना कर रहे लाखों-करोड़ों बच्चों के दुख को समझने के लिए मैं नोबेल समिति का शक्रगुजार हूं। यह मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है।

आपने 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। क्या कुछ बातचीत हुईं उनसे?
प्रधानमंत्री जी से मुलाकात हुई, वे बहुत उत्साहित थे। कई मुद्दों पर बातचीत हुई उनसे। उन्होंने स्वच्छता अभियान को भी इस अभियान से जोड़कर चलाने को कहा है। जिस प्रकार से देश को बाल श्रम मुक्त बनाना है उसी प्रकार से देश को स्वच्छ भी बनाना हमारा लक्ष्य है। स्वच्छ भारत को बनाने में हम मिलजुलकर काम करेंगे। ऐसी प्रतिबद्धता जाहिर उन्होंने की है। भारत का भविष्य बचपन केंद्रीय आदर्श गांव की है। मेरी पत्नी गुजरात से जुड़ी है। इसलिए गुजरात पर भी बातचीत हुई।

जिस प्रकार से मलाला के साथ आपको यह पुरस्कार मिला है, आप इसको कैसे देखते हैं?
बहुत ही अच्छी लड़की है मलाला। मलाला के परिवार को भी मैं जानता हूं। अभी कुछ दिन पहले नीदरलैंड में मुलाकात हुई थी। मलाला का फोन ही पहले आया था। मैं फोन करने वाला ही था, लेकिन पहले उसने ही कर दिया।

बाल शोषण पर कार्य करने के निण् आप कैसे प्रेरित हुए?
स्वयं प्रेरणा से यह सब हुआ है। मैं बचपन से ही ऐसे अधिकारों पर काम करता रहा था। मुझे लगा कि इसके लिए संस्था बनाना होगा। फिर चल पड़ा मैं और बनता गया कारवां। समान विचार वालों को एक मंच पर लाना हमारा लक्ष्य था, उसे हमने पूरा किया।

आपको कई तरह के संघर्ष भी करने पड़े होंगे…
यह एक लंबी लड़ाई है। हम पर कई हमले हुए। मेरे दो साथियों को जान से हाथ धोना पड़ा। मैं उनको नहीं भूला सकता। जब मैंने यह कार्य शुरु किया था तो बंधुआ मजदूरी कोई मुद्दा नहीं था। लेकिन आज मुद्दा है।

आप देश के विभिन्न भागों में जाते हैं। बड़े सहज भाव से लोगों से मिलते हैं। देश के सभी जगहों पर आज बाल मजदूर हैं। कैसे भाव आते हैं उन्हें इस रूप में देखकर?
यह बहुत दुखद है कि बंधुआ मजदूर की स्थिति को देखकर। हम इस काम से छुटकारा दिलाने के लिए देश के विभिन्न भागों में जाते रहते हैं। बचपन बचाओ आंदोलन देश में ही नहीं 144 देश में बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक अभियान चला रहा है। अब तो विश्व स्तर पर यह लड़ाई और भी तेज हो गई है।

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बाल मजदूरी में कई तरह की समस्या आती हंै। ऐसे में आपको किस तरह की कानूनी परेशानियां होती हैं?
दुनिया के किसी भी देश में बाल श्रम को लेकर कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो रहा था। कह सकते हैं कि अभी भी नहीं हो रहा है। ऐसे में चुनौतियां काफी थीं हमें इस पर और तेजी से काम करना था और हमने किया। आज बाल अधिकारों के विरुद्ध संघर्ष को वैश्विक मान्यता मिल चुकी है।

आगे की क्या योजनाएं हैं?
मैं तो अदना सा कार्यकर्ता हूं। मैं अपना काम करता रहूंगा। हां अब और जिम्मेदारी बढ़ गई है। पूरे उत्साह के साथ और काम होगा।

पुरस्कार समिति ने कहा है कि आप महात्मा गांधी के कामों को आगे बढ़ा रहे हैं। क्या कहेंगे आप?
इसपर मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन मैंने हमेशा से उनसे प्रेरणा लेकर ही काम किया है और आगे भी उनकी प्रेरणा से ही काम करता रहूंगा।

महात्मा गांधी भी दासता मुक्त भारत चाहते थे। आप इसे कैसे आगे ले जाएंगे?
महात्मा गांधी अद्भूत थे। मेरे जन्म से पहले उनकी मृत्यु हो चुकी थी। जिस प्रकार से उन्होंने दासता मुक्त की संकल्पना की थी उसी को आगे बढ़ाने का तुच्छ प्रयास है हमारा। अगर मुझ से पहले नोबेल प्राइज उनको मिलता तो मैं और धन्य हो जाता। लेकिन आज हमारी जिम्मेवारी बढ़ गई है और मैं पूरी प्रतिबद्धता के साथ इसे पूरा करूंगा। मैं बाल श्रम निषेध को जनान्दोलन में बदलना चाहता हूं। इसको लेकर मैं काम करूंगा।

अभी तक कितने बच्चों को छुड़ा चुके हैं आप?
हम अस्सी हजार बच्चों को छुड़ा चुके हैं और यह सिलसिला जारी है। देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां बाल मजदूर नहीं हैं। अभी देश में पांच से छह करोड़ बच्चे बाल मजदूर हैं। ग्राउंड रियल्टी से आज रुबरू होने की आवश्यकता है। देश में हम लगातार काम कर रहे हैं। दिल्ली और जयपुर में दो बालाश्रम बना हुआ है। दिल्ली वाले आश्रम में अभी सौ बच्चे हैं, जबकि जयपुर में पचास-साठ बच्चे हैं। आज राजनीतिक रूप से मजबूत होकर बाल श्रम पर काम करने की आवश्यकता है। तभी इस समस्या का समाधान निकल पाएगा।

क्या आप किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित हैं?
नहीं, मैं किसी राजनीतिक दल पर केंद्रित होकर काम नहीं करता। जनान्दोलन बना कर काम करना ही उद्देश्य है, जिसमें सबका सहयोग चाहिए। लोगों का सहयोग मिल भी रहा है।Работа с информационными статьями и обзорами продающего сайтаhp color laserjet cp6015xh

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