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मुश्किलों से लडऩे का जज्बा

मुश्किलों से लडऩे का जज्बा

19 मई 2014 को, जब सत्रह साल की रेशमा कुरैशी परीक्षा केंद्र जाने के लिए घर से निकली तो अचानक ही सब कुछ उसके साथ एक पल में घट गया। वे लोग उसकी ओर दौड़े। उन्होंने उसे पकड़ा। उसके बाल खींचे। उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया और कुछ ही पलों में रेशमा जीवित मुर्दे-सी जलने लगी। तेजाब ने पहले उसकी चमड़ी जलाई और फिर हड्डियों को गलने लगा। लेकिन बहादुर रेशमा जल्दी ही इस भयावह दु:ख और पीड़ा से उबर गई । रेशमा ने इस भयावह अत्याचार से कभी हार नहीं मानी। उसने कभी भी जीवन को पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने आगे की ओर ही देखने की सोची।

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रेशमा कुरैशी ने न्यूयॉर्क फैशन सप्ताह में हिस्सा लिया। ऐसा करने वाली वह तेजाब हमले से पीडि़त पहली लड़की बन गई और इस खबर ने दुनियाभर में तहलका मचा दिया। यह खबर ने रेशमा की बहादूरी को लोगों के सामने लायी। वह अब अंतराष्ट्रीय एसिड-विरोधी कार्यकर्ता, व्लॉगर, मॉडल तथा मेक लव नॉट स्कार्स संस्था का प्रमुख चेहरा हैं। रेशमा अपने जैसे एसिड हमले के पीडि़तों के सशक्तिकरण की दिशा में अथक कार्य करती हैं और लाखों लोगों के लिए उम्मीद का प्रकाश-स्तंभ बन चुकी हैं। प्रेरणादायक और जीवन को प्रबल बनाने वाली यह किताब मुंबई की छोटी-सी बस्ती से निकली इस युवती की कहानी है, जिसने अन्याय से भरी दुनिया में दुर्गम बाधाओं को पार किया और उसे बदलने की हिम्मत दिखाई। यह पुस्तक पाठकों में एक प्रेरणात्मक सोच को बढ़ावा देगी।

उदय इंडिया ब्यूरो

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