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मैडिसन बना मोदीसीन!

मैडिसन बना मोदीसीन!

मैं कुछ वर्ष पहले ताइवान गया था, तब मैं न मुख्यमंत्री था और न ही प्रधानमंत्री। एक इंटरप्रेटर मेरे साथ था। कुछ दिन साथ रहने के बाद परिचय हो गया था। एक दिन वो मुझे कहता है कि आपको अगर बुरा न लगे तो मैं आपको एक सवाल पूछना चाहता हूं। मैंने कहा मुझे बुरा नहीं लगेगा, पूछिए क्या पूछना चाहते हैं। उसने बोला, आपको बुरा नहीं लगेगा न! मैंने कहा नहीं लगेगा, पूछिए क्या पूछना चाहते हैं। फिर भी वो झिझक रहा था। फिर उसने कहा कि मैंने सुना है कि भारत में तो काला जादू होता है, ब्लैक मैजिक होता है। सांप-सपेरों का देश है। लोग सांप का ही खेल करते रहते हैं, यही है क्या? मैंने कहा नहीं! हमारे देश का अब बहुत डिवैल्यूएशन हो गया है। मैंने कहा हमारे पूर्वज तो सांप के साथ खेलते थे, लेकिन हम माउस के साथ खेलते हैं। हमारे नौजवान माउस को घुमाते हैं और सारी दुनिया को डुलाते हैं।

30 साल के बाद भारत में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी है। ये चुनावी नतीजे, हिन्दुस्तान के किसी पोलिटिकल पंडित के गले नहीं उतरे। ओपिनियन मेकर्स भी ओपिनियन बनाने में असफल रहे। भारत के गांव, गरीब, अनपढ़ लोगों ने ओपिनियन मेकर का ओपिनियन बना दिया। गरीब से गरीब व्यक्ति की भी लोकतंत्र में कितनी निष्ठा है, लोकतंत्र में उसकी कितनी अहमियत है, इसका उदाहरण, ये भारत के चुनाव ने बताया है। लेकिन चुनाव जीतना, वो सिर्फ पद ग्रहण नहीं होता। चुनाव जीतना, वो किसी कुर्सी पर विराजने का कार्यक्रम नहीं होता। चुनाव जीतना, एक जिम्मेदारी होती है।

जब से मैंने इस कार्य का दायित्व संभाला है, 15 मिनट भी वैकेशन नहीं लिया है। हम एक भी वैकेशन नहीं लेंगे और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपने मुझे जो दायित्व दिया है, देशवासियों ने जो दायित्व दिया है, हम ऐसा कभी कुछ भी नहीं करेंगे, जिनके कारण आपको नीचे देखने की नौबत आए। हमारे देश में उमंग और उत्साह का माहौल है। देश के लोग बदलाव चाहते हैं। देश बदलाव चाहता है। विश्व जिस प्रकार से आर्थिक गतिविधियों से आगे बढ़ रहा है, भारत का गरीब से गरीब व्यक्ति भी कहने लगा है, कब तक ऐसे जीएंगे। मेरे सारे देशवासियों, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, भारत की आर्थिक स्थिति को बदलने में, भारत के सामाजिक जीवन में सामथ्र्य देने में, भारत के व्यक्तिगत जीवन में क्वालिटी ऑफ लाईफ के लिए आपने जिस सरकार को चुना है, वह कोई कमी नहीं रखेगी।

मेरे प्यारे देशवासियों, सारा विश्व इस बात से कंन्वींस है कि 21वीं सदी एशिया की सदी हैं। अमेरिका के भी गणमान्य राजनेताओं ने पब्लिकली ये कहा है कि 21वीं सदी, कोई कहता है एशिया की सदी है, कोई कहता है हिंदुस्तान की सदी है। ऐसे ही नहीं कहा जाता है। भारत के पास वो सामथ्र्य है, वो संभावनाएं है और अब संयोग भी है। इसलिए आप कल्पना कीजिए, आज हिंदुस्तान दुनिया का सबसे नौजवान देश है। दुनिया की सबसे पुरातन संस्कृति वाला देश है और दुनिया का सबसे नौजवान देश भी। एक ऐसा अद्भुत मिलन है, ऐसा अद्भुत संयोग पैदा हुआ है, आज भारत में कि आबादी का 65 प्रतिशत आज 35 साल की उम्र से नीचे है। 35 से कम आयु के 65 प्रतिशत जिस देश के पास नौजवान हों, जिसके पास ऐसी सामथ्र्यवान भुजाएं हों, जिसकी अंगुलियों में कंप्यूटर के माध्यम से दुनिया से जुडऩे की ताकत पड़ी हो, जिस देश का नौजवान अपने सामथ्र्य से अपना भविष्य बनाने के लिए कृतसंकल्प हो, उस देश को पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है।

निराशा की बात नहीं है साथियों। मैं बहुत विश्वास के साथ कहता हूं कि ये देश बहुत तेज गति से आगे बढऩे वाला है। इन नौजवानों के सामथ्र्य से आगे बढऩे वाला है। भारत के पास तीन ऐसी चीजें हैं आज जो दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। लेकिन हमारा दायित्व बनता है कि हमारी इन तीन शक्तियों को हम पहचानें। हमारी इन तीन शक्तियों को विश्व के सामने प्रस्तुत करें। हमारी इन तीन शक्तियों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर मोबलाईज करें और तीव्र गति से आगे बढ़े।

सवा सौ करोड़ देशवासियों का आर्शीवाद ईश्वर का ही आर्शीवाद होता है। जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होता है। जनता जनार्दन वो भगवान का रूप होता है और जब जनता जनार्दन का आर्शीवाद होता है तो वह स्वयं परमात्मा का आर्शीवाद होता है।

तीन चीजें, जिसके लिए भारत गर्व कर सकता है और जिसके आधार पर भारत आगे बढ़ सकता है। एक डेमोक्रेसी, लोकतंत्र। ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है, सबसे बड़ी पूंजी है। मैं देख रहा था, मई के भयंकर महीने का चुनाव अभियान। बदन पर कपड़े ना हो, ऐसा गरीब व्यक्ति भी जनसभाओं में सुनने के लिए पहुंचता था। एक आशा के साथ पहुंचता था। यही लोकतंत्र है। जिस लोकतंत्र के माध्यम से आशा आकाक्षाओं को पूरा करता है। भारत में लोकतंत्र सिर्फ व्यवस्था नहीं है। भारत में लोकतंत्र आस्था है। आस्था है, विश्वास है।

दूसरी ताकत है डेमोग्राफिक डिविजन। जिस देश के पास 35 से कम उम्र के 65 प्रतिशत नौजवान हों, इससे बड़ा इस देश को और क्या चाहिए! इससे बड़ी सम्पदा और क्या हो सकती है! और तीसरी बात, डिमांड। पूरा विश्व भारत की तरफ नजर टिकाए हुए है। क्यों! क्योंकि उसे मालूम है सवा सौ करोड़ का देश है, बहुत बड़ा बाजार है। ये तीनों चीजें किसी एक देश के पास हो, ऐसा आज दुनिया में कहीं नहीं है। इसी सामथ्र्य के आधार पर, इसी शक्ति के भरोसे भारत नई ऊंचाईयों को पार करेगा, ये मेरा विश्वास है।

अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। सारी दुनिया के लोग अमेरिका में आकर बसे हैं और भारत के लोग सारी दुनिया में जाकर बसे हैं। दुनिया का कोई कोना नहीं होगा जहां आपको भारतीय न मिलें। अमेरिका का कोई शहर ऐसा नहीं है जहां दुनिया का कोई नागरिक न मिले। कितनी मिली-जुली बातें हैं! और इसलिए भाईयों-बहनों! इसलिए मेरा मानना है कि सरकार जनता के साथ मिलकर काम करती है। सरकार ज्यादा से ज्यादा अपनी स्कीम लागू कर सकती है। रोड बना लेगी, अस्पताल बना लेगी, स्कूल बना लेगी। उसकी बजट की सीमाएं होती हैं। विकास तब होता है जब जन-भागीदारी होती है। दुर्भाग्य से अब तक हमारे देश में सरकारों ने डेवलपमेंट का ठेका लिया था। हमने डेवलपमेंट की जिम्मेदारी, मिल-जुल कर सवा सौ करोड़ देशवासियों और सरकार मिल करके करेंगे, ये रास्ता हमने अपनाया है।

25-10-2014

हमारे देश में एक और दिक्कत है.. और अगर देश को प्रगति करनी है तो सरकार का दायित्व बनता है – गुड गवर्नेंस। आप लोग भी.. आपकी क्या शिकायत होती होगी – यही न कि साहब, एयरपोर्ट पर उतरे थे.. ऐसा हुआ; वीसा लेने गए थे.. पता नहीं। भले ही मैं हजारों मील दूर रहता हूं आपसे, लेकिन आपके दर्द को भी भलीभांति जानता हूं। आपकी पीड़ा को मैं भलीभांति जानता हूं और इसलिए भाईयो-बहनों, हमारी ये कोशिश है कि हम विकास को एक जन-आंदोलन बनाएं और मैं विकास को जन-आंदोलन बनाने की बात भी इसीलिए कहता हूं!

हम लोग आजादी के इतिहास से भलीभांति परिचित हैं। अंग्रेज लोग हमारे देश में शासन करते थे। उसके पहले कई लोगों ने हमारे देश पर शासन किया। करीब हजार 12 सौ साल तक हम गुलाम रहे। लेकिन, अगर इतिहास देखेंगे तो हर समय कोई न कोई ऐसा महापुरूष मिला है, जिसने देश के लिए बलिदान दिया है। आप सिख परम्परा के सभी गुरूओं के नाम लो, एक के बाद एक! देश के लिए कितना बलिदान! भगत सिंह तक उस परम्परा को देखिए। आज भी सीमा पर हमारे सरदार देश के लिए जीने-मरने को तैयार बैठे हैं।

25-10-2014

हर युग में… हर युग में महापुरूषों ने देश के लिए बलिदान दिए हैं। वो बलिदान देते थे, फांसी पर चढ़ जाते थे, विदेशियों की गोलियों का शिकार हो जाते थे। फिर कोई नया पैदा होता था, फिर वो कुछ करता था, फिर वो खत्म होता था, फिर कोई तीसरा पैदा होता था। मरने वालों की संख्या कम नहीं थी, लेकिन वो अकेला आता था देश के लिए जी-जान से लड़ जाता था, शहीद हो जाता था। पांच-पचास अपने यार-दोस्तों की टोली ले करके लड़ पड़ता था।

लेकिन महात्मा गांधी जी ने क्या किया! महात्मा गांधी जी ने आजादी को जन-आंदोलन बना दिया। कोई खादी पहनता है, तो आजादी के लिए पहनता है, कोई किसी बच्चे को पढ़ाता है तो आजादी के लिए पढ़ाता है, कोई किसी भूखे को खाना खिलाता है तो आज़ादी के लिए खिलाता है, कोई सफाई करता है, झाडू लगाता है तो आजादी के लिए। उन्होंने हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार, ये दिशा दी, ये सामथ्र्य दिया और हर हिन्दुस्तानी को लगने लगा कि मैं भी आजादी की लड़ाई लड़ रहा हूं। ये महात्मा गांधी का सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन था।

25-10-2014

आजादी की जंग में पूरे हिन्दुस्तान को, हर नागरिक को अपने काम के माध्यम से ही.. ये मैं देश के लिए करता हूं ये भाव जगा करके आजादी के आंदोलन को एक नई ताकत दी थी। भाईयों-बहनों! जिस प्रकार से आजादी का आंदोलन एक जनआंदोलन था, वैसे ही विकास… ये जनआंदोलन बनना जरूरी है। हिन्दुस्तान के सवा सौ करोड़ देशवासियों को लगना चाहिए कि मैं बच्चों को अच्छी तरह शिक्षा देता हूं, मैं भले ही शिक्षक हूं, मैं देश की सेवा कर रहा हूं, मैं प्रधानमंत्री से भी अच्छा काम कर रहा हूं। एक सफाई करने वाला सफाई कर्मचारी होगा, वो अच्छी सफाई करता है। क्यों, क्योंकि मेरे देश के शान के लिए काम करता हूं। यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए। यह देश सेवा होगी। एक डॉक्टर भी गरीब परिवार के मरीज की सेवा करेगा और सेवाभाव से करेगा। गरीब की जिंदगी भी मूल्यवान होती है और वह डॉक्टर भी राष्ट्रभक्ति के लिए काम करता है।

मेरी कोशिश यह है कि विकास एक जनआंदोलन बने। सवा सौ करोड़ देशवासी विकास के जनआंदोलन का हिस्सा बनें। मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिसके कारण मेरे देश को नुकसान हो, ये भाव मुझे जगाना है। और मुझे विश्वास है कि फिर एक बार वो दिन आएगा। फिर एक बार माहौल बना है। हर कोने में हिन्दुस्तानी को लगता है कि अब देश को आगे ले जाना है। इसी सवा सौ करोड़ देशवासियों की इच्छाशक्ति, यही मेरा संबल है, यही मेरी ताकत है। इसी पर मेरा भरोसा है, जिसके कारण 21वीं सदी का नेतृत्व हिंदुस्तान के करने की पूरी संभावना है।

25-10-2014

हमारे नौजवान, आने वाले दिनों में, आप लोग जो पढ़ते होंगे, उनको पता होगा, 2020 के आते-आते दुनिया में बड़ी मात्रा में वर्कफोर्स की जरूरत पडऩे वाली है। इनके यहां सब बूढ़े-बूढ़े लोग होंगे। दुनिया के पास काम करने वाले लोग नहीं होंगे। हम पूरी दुनिया को वर्कफोर्स सप्लाई कर पाएंगे। आज पूरे विश्व में नर्सिंग क्षेत्र में बड़ी मांग है। अगर भारत से हम नर्सिंग की ट्रेनिंग देकर दुनिया में भेजें तो उनके लिए यह बहुत बड़ा उपकार है। आज विश्व को टीचर्स की मांग है। मैथ और साइंस के टीचर नहीं मिलते। क्या भारत ये टीचर एक्सपोर्ट नहीं कर सकता? जिस देश के पास नौजवान हों, वह नौजवानों की क्षमता बढ़ा करके, विश्व में जिस प्रकार के मैन-पावर की जरूरत है, भारत अपनी युवा शक्ति के माध्यम से दुनिया में छा जाने की ताकत रखता है। दुनिया में जगह बनाने की ताकत रखता है।

भारत के नौजवानों के टैलेंट का दुनिया को लोहा मानना पड़ेगा मेरे भाइयों-बहनों। आप लोगों ने यहां आकर क्या कमाल नहीं किया है? आखिरकर जो अनाज खाकर के आप आए हैं, जो पानी पीकर के आप आए हैं, वही तो अनाज-पानी हम भी तो खा रहे हैं। अगर आप कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं कर सकते? हम भी कर सकते हैं। टैलेंट देखिए इस देश की।

25-10-2014

आपको अहमदाबाद में अगर एक किलोमीटर ऑटो रिक्शा में जाना है तो करीब 10 रुपये खर्च होते हैं। एक किलोमीटर अगर ऑटो रिक्शा में जाना है तो 10 रुपए खर्च होते हैं। भारत के टैलेंट का कमाल देखिए कि 650 मिलियन किलोमीटर, 65 करोड़ किलोमीटर मार्स की यात्रा की हमने और सारा इंडिजिनियस, छोटे-छोटे कारखानों में पुर्जें बने थे, उसको इकट्ठा करके मार्स का प्रयोग किया गया। अहमदाबाद में 1 किलोमीटर ऑटो रिक्शा में जाना है तो 10 रुपये लगते हैं, हमें मार्स पर पहुंचने में सिर्फ 7 रुपये लगे एक किलोमीटर पर। सात रुपये में 1 किलोमीटर, यह हमारी टैलेंट नहीं है तो क्या है। यह हमारे नौजवानों का सामथर्य नहीं है तो क्या है? इतना ही नहीं, दुनिया में हिंदुस्तान पहला देश है जो पहले ही प्रयास में मार्स पर पहुंचने में सफल हुआ है।

अमेरिका और भारत सिर्फ नीचे ही बात कर रहे हैं, ऐसा नहीं है। मार्स पर भी बात कर रहे हैं। 22 तारीख को मैं अमेरिका पहुंचा। 24 को हम पहुंच गए। इतना ही नहीं, हॉलीवुड की फिल्म बनाने का जितना बजट होता है, उससे कम बजट में हम मार्स पर पहुंच गए।

25-10-2014

जिसके पास ये टैलेंट हो, जिस देश के पास ये सामथ्र्य हो, वह देश कई नई ऊंचाइयों को पार कर सकता है और उसको पार करने के लिए हमने एक बीड़ा उठाया है, स्किल डेवलपमेंट के रूप में। हमारे नौजवानों में, उसके हाथ में हुनर हो, काम करने का अवसर हो, तो एक आधुनिक हिंदुस्तान खड़ा करने की उसकी ताकत होती है। इसलिए स्किल डेवलपमेंट पर हमने बल दिया है। नई सरकार बनने के बाद स्किल डेवलपमेंट के लिए अलग मिनिस्ट्री बना दी गई है। हम इसमें दुनिया के देशों के अनुभव को भी शेयर करने वाले हैं। हम उनको निमंत्रण देने वाले हैं, आइए, स्किल डेवलपमेंट में हमारे साथ जुडिय़े। हम इस प्रकार का स्किल डेवलपमेंट करना चाहते हैं, जिसमें हमारे दो इरादे हैं। एक वो स्किल डेवलपमेंट जो लोग तैयार होकर जॉब क्रिएटर बनें। दूसरा वो जिनकी जॉब क्रिएटर बनने की संभावना नहीं है, पर जॉब पाने के लिए वो पहली पसंद हो जाए, उस प्रकार का वो नौजवान तैयार हो।

25-10-2014

हमारे यहां कुछ वर्षों पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था। नेशनलाईजेशन हुआ था बैंकों का। इस इरादे से हुआ था कि गरीब से गरीब व्यक्ति को, भारत की जो मुख्यधारा है आर्थिक, बैंकिंग क्षेत्र, फाईनांसियल क्षेत्र, उसका उन्हें सदभाग्य मिला और बहुत बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन गया था। जो लोग 70 के इतिहास के कालखंड को जानते होंगे, उनको मालूम होगा। देखिए हुआ क्या, इतनी सारे बैंक होने के बाद भी भारत में 50 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं, जिन बेचारों को बैंक में खाता ही नहीं है और उसके कारण वह साहूकार से ब्याज पर पैसे लेते हैं। गरीब आदमी को साहूकार कैसे लूटता है, आपको मालूम है।

क्या सरकारी खजाना गरीबों की भलाई के लिए नहीं उपयोग होना चाहिए? क्या सरकारी खजाना सिर्फ अमीरों के लिए होना चाहिए? इसलिए हमने आते ही प्रधानमंत्री जनधन योजना को लॉन्च किया। सिर्फ दो सप्ताह के भीतर भीतर 4 करोड़ परिवारों के खाते खोलने में ये बैंक वाले घर-घर गए थे। आपने कभी सोचा है कि बैंक वाला आपके घर आए। पोस्ट वाला तो आता है बेचारा, बैंक वाला कभी नहीं आता है। स्थिति बदली जा सकती है, लोगों को मोटिवेट किया जा सकता है और परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

25-10-2014

हमारे यहां पहली जो सरकारें थी वे इस बात का गर्व करती थीं कि हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया, हमने फलाना कानून बनाया, हमने ढिकाना कानून बनाया। आपने पूरे चुनाव के अभियान में देखा होगा, यही बातें चलती थीं। हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया। मैंने काम दूसरा शुरू किया है। मैंने, जितने पुराने कानून हैं, बेकार कानून हैं, सबको खत्म करने का काम शुरू किया है। इतने आउट डेटेड कानून! ऐसा कानूनों का जाल! कोई भी व्यक्ति बेचारा एक बार अंदर गया तो बाहर नहीं निकल सकता। मैंने एक्सपर्ट लोगों की कमेटी बनाई है, उनको कहा है – निकालो! अगर हर दिन एक कानून मैं खत्म कर सकता हू्ं तो मुझे सबसे ज्यादा आनंद होगा।अगर गुड गवर्नेंस की बात मैं बात करता हूं तो गवर्ननेंस इजी हो, इफेक्टिव हो। गवर्ननेंस जन-सामान्य की आशाओं, आकांक्षाओं की पूर्ति लिए होना चाहिए, उस पर हम बल दे रहे हैं।

आपने अखबारों में पढ़ा होगा। अखबारों में छपता था कि आजकल दिल्ली में सरकारी अफसर समय पर दफ्तर पहुंचते हैं। अब मुझे बताइये भईया कि ये कोई न्यूज है क्या! लेकिन हमारे देश में ये खबर थी सरकारी अफसर समय पर दफ्तर जाते हैं। ये समाचार मुझे इतनी पीड़ा देते थे कि क्या समय पर जाना जिम्मेदारी नहीं है? ये कोई खबर होती है क्या! लेकिन हालात ऐसे बने हुए थे।

इन दिनों मैंने एक अभियान चलाया है – सफाई का अभियान। मैं जानता हूं आपको, सबको ये प्रिय होगा। लोगों को लगेगा कि प्रधानमंत्री को तो कितने बड़े-बड़े काम करने चाहिए। ये काम कोई प्रधानमंत्री के करने के काम हैं! भाईयों मैं नहीं जानता कि करने वाले काम हैं या नहीं, लेकिन मैंने तय किया है कि टॉयलेट बनाने का काम मैं करुंगा।

25-10-2014

कभी-कभी लोग मुझसे पूछते हैं – मोदी जी बड़ा विजन बताओ ना! बड़ा विजन! मैंने उनको कहा देखिए, मैं चाय बेचते-बेचते यहां आया हूं। मैं बहुत ही छोटा इंसान हूं। मैं बहुत ही सामान्य इंसान हूं। मेरा बचपन भी ऐसा ही बीता है और छोटा हूं इसलिए मेरा मन भी छोटे-छोटे काम करने में लगता है। छोटे-छोटे लोगों के लिए काम करने में मेरा मन लगता है। लेकिन छोटा हूं इसलिए छोटे-छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करने का इरादा रखता हूं।

अब देखिए हमारे देश में, गंगा… आप मुझे बताइए आप में से ही कोई ऐसा होगा जिसके मन की यह इच्छा नहीं होगी कि अपने मां-बाप को कभी न कभी तो गंगा स्नान के लिए ले जाए। हर एक के मन की यह इच्छा रही होगी। लेकिन जब पढ़ता है कि गंगा इतनी मैली हो गई है, मन बहुत व्यथित हो जाता था।

आप मुझे बताइए भैया, हमारी गंगा शुद्ध होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? गंगा साफ होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? सफाई में सारे देशवासियों को मदद करनी चाहिए कि नहीं करनी चाहिए? आप लोगों के भी गंगा सफाई में मेरी मदद करनी है कि नहीं करनी है? पक्का करोगे?

भाइयों-बहनों, हजारों करोड़ रुपए अब तक खर्च हो चुके हैं। मैंने जब ये बात उठाई तो लोग कहते हैं मोदी जी आप अपने आप को मार रहे हो। ऐसी चीजों को क्यों हाथ लगाते हो? अगर सरल चीजों को हाथ लगाना होता तो लोग मुझे प्रधानमंत्री नहीं बनाते। मुश्किल कार्यों को तो हाथ लगाने के लिए ही तो मुझे बनाया है। मेरी सवा सौ करोड़ देशवासियों की गंगा के प्रति जो आस्था है, उस आस्था में मेरी भी आस्था है। और, गंगा की सफाई, ये आस्था से जुड़ा हुआ विषय तक सीमित नहीं है।

आज दुनिया में क्लाईमेट को लेकर जितनी चिंता होती है, पर्यावरण को लेकर के जितनी चिंता होती है, उस दृष्टि से भी गंगा की सफाई आवश्यक है। इतना ही नहीं, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल ये सब गंगा पर आश्रित हैं। भारत की करीब-करीब 40 प्रतिशत जनसंख्या की आर्थिक गतिविधि ये गंगा मैया पर निर्भर है। अगर वह गंगा फिर से प्राणवान बनती है, सामथ्र्यवान बनती है, तो मेरे सारे 40 प्रतिशत जनसंख्या वहां का किसान होगा, वहां का कारीगर होगा, उनकी जिदंगी में बदलाव आएगा और इसलिए यह एक बहुत बड़ा इकोनॉमिक एजेंडा भी है ये।

150 वर्ष हो रहे हैं महात्मा गांधी को। 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती आ रही है। महात्मा गांधी ने हमें आजादी दी, हमने महात्मा गांधी को क्या दिया? मुझे बताइए, ये सवाल हमें, हर हिंदुस्तानी को पूछना चाहिए कि नहीं पूछना चाहिए। जिस गांधी ने हमें आजादी दी, उस गांधी को हमने क्या दिया? कभी गांधी मिल जाएंगे, जब पूछेंगे तो जवाब कुछ दे पाएंगे क्या? और इसलिए 2019 में जब महात्मा गांधी के 150 वर्ष पूरे हों, तब पूरा भारत ये संकल्प करे कि हम महात्मा गांधी को जो सबसे प्रिय चीजें थी, वह दें।

एक उनको प्रिय था हिंदुस्तान की आजादी और दूसरा उनको प्रिय था सफाई। गांधी जी स्वच्छता में कभी कंप्रोमाईज नहीं करते थे। बड़े अडिग रहते थे। गांधीजी ने हमें आजादी दिलाई थी। भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया था। क्या भारत मां को गंदगी से मुक्त करना, यह हमारी जिम्मेवारी है या नहीं है? क्या हम 2019 में जब गांधीजी की 150 वीं जयंती आए, तब महात्मा गांधी के चरणों में स्वच्छ-साफ हिंदुस्तान उनके चरणों में दे सकते हैं कि नहीं दे सकते हैं? जिस महापुरुष ने हमें आजादी दी, उस महापुरुष को हम ये दे सकते हैं कि नहीं दे सकते हैं? देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए? ये जिम्मेदारी उठानी चाहिए कि नहीं उठानी चाहिए? अगर एक बार सवा सौ करोड़ देशवासी तय कर लें कि मैं गंदगी नहीं करुंगा, तो दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो हिंदुस्तान को गंदा कर सकती है।

सन 2022 में हमारी आजादी के 75 साल होंगे। हमारे यहां जब 75 साल होते हैं जीवन में, बड़ा महत्व होता है। भारत की परंपरा में 75 साल बड़े महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आजादी के 75 साल कैसे मनाएं जाएं। अभी से तैयारी क्यों न करें? हमारे मन में एक सपना है और आप सबके आशीर्वाद से वह सपना पूरा होगा। मेरे मन में सपना है कि 2022 में, जब भारत के 75 साल हो तब तक हमारे देश में कोई परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो। ये ऐसी छोटी-छोटी बातें मैं आपसे बता रहा हूं, लेकिन यही छोटी-छोटी बातें हैं, जो भारत का भाग्य बदलने वाली हैं और भाग्य बदलने के काम में हम सब मिल कर के जुड़े हैं।

2015, अगला वर्ष, बड़ा महत्वपूर्ण वर्ष है। आप सब प्रवासी भारतीय हैं, क्योंकि आप भारत से यहां आए हैं। आपकी तरह एक एम के गांधी भी थे, मोहनदास करमचंद गांधी। ये भी प्रवासी भारतीय थे। महात्मा गांधी जनवरी 1915 में भारत वापस आए थे। जनवरी 2015 गांधी के भारत आने के 100 साल हो रहे हैं। 8-9 जनवरी, हिंदुस्तान में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। आप में से कई लोग उसमें आते हैं। इस बार प्रवासी भारतीय दिवस अहमदाबाद में होने वाला है। महात्मा गांधी के भारत आने को शताब्दी हो रही है। महात्मा गांधी, विदेश गए, बैरिस्टर बने, सुख-वैभव की पूरी संभावनाएं थीं, लेकिन उन्होंने देश के लिए जीना पसंद किया।

मैं आपसे अनुरोध करता हूं, उन सबसे प्रेरणा लेकर आइए। हम भी अपने वतन का, अपनी मातृभूमि का, जिस धरती पर जन्म लिया, उसका कर्ज चुकाने के लिए अपनी तरफ से कोई न कोई प्रयास करें। अपने हिसाब से कोई न कोई कोशिश करें।

कुछ बातें मुझे कहनी हैं आप लोगों से। प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ बातें मेरे मन में आई हैं, उसको ध्यान में रखते हुए कुछ बातें मैं कहना चाहता हूं। एक तो पीआईओ कार्ड होल्डर जो हैं, उनकी वीजा की कुछ समस्याएं हैं। हमने निर्णय लिया है, पीआईओ कार्ड होल्डर को आजीवन वीजा दिया जाएगा। खुश?

उससे भी आगे, जो लंबे समय तक हिंदुस्तान में रहते हैं, उनको पुलिस थाने जाना पड़ता है। अब उनको पुलिस थाने जाना नहीं पड़ेगा। उसी प्रकार से मुझे बताया गया कि पीआईओ और ओसीआई स्कीमों के प्रावधानों में फर्क होने के कारण भारतीय मूल के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर स्पाउज के भारतीय मूल के न होने पर, कठिनाई और बढ़ जाती है। किसी ने यहां शादी कर ली तो बेचारा मुसीबत में फंस जाता है। मेरे साथियों मैं आपको खुशखबरी देता हूं कि कुछ ही महीनों में हम पीआईओ और ओसीआई स्कीम को मिलाकर के एक बना देते हैं। एक नई स्कीम। जो कठिनाइयां हैं उनको दूर करके एक नई स्कीम आने वाले कुछ ही महीनों में, उसको हम तैयार कर देंगे।

तीसरी बात है… अभी इंतजार कीजिए, मैं बोल रहा हूं। अमेरिका में हमारे दूतावास और कंसुलेट, भारत में पर्यटन की इच्छा से आने वाले यूएस नेशनल्स के लिए हम लॉन्ग टर्म वीजा प्रदान करेंगे। चौथी बात, बिना किसी कठिनाई के अमेरिकी टूरिस्ट भारत की यात्रा कर सके, इसके लिए हमने ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराईजेशन’ तथा ‘वीजा ऑन अराइवल’ की सुविधा को बहुत ही निकट भविष्य में लागू कर देंगे।

इन चीजों को सुनिश्चित करने के लिए सेवाओं की स्पीड भी बढ़े। यहां भारतीयों की संख्या भी बहुत है। अब धन की इतनी मात्रा है कि हर छोटे-मोटे काम में लोग आते जाते रहते हैं। और जो आउटसोर्सिंग सर्विस है, वह कम पड़ जाती है, और इसलिए हमने कहा है कि जो आउट सोर्सिंग सर्विसेज हैं, उसका दायरा बढ़ाया जाएगा ताकि आपका ज्यादा समय न जाए, ज्यादा कठिनाइयां न हों और सरलता से आपको वीजा प्राप्त हो। यह साफ-साफ हमने कहा है। और मुझे विश्वास है कि आपकी जो कठिनाइयां मेरे ध्यान में आई थीं, मैंने यहां से आने से पहले ही इस विषय में विस्तार से निर्णय करके इन चीजों को पूरा किया है।

आप इतनी बड़ी संख्या में आए, नवरात्रि के पवित्र त्योहार पर आए इसके लिए आभारी हूं मैं। मैं भी बोलता ही चला जा रहा हूं। घड़ी की ओर नहीं देख रहा हूं।

मैं हृदय से आप सबका बहुत आभारी हूं। आपने मुझे बहुत प्यार दिया है। पिछले 15 साल से देख रहा हूं, शायद इतना प्यार हिन्दुस्तान के किसी राजनेता को नहीं मिला। मैं आपका बहुत आभारी हूं। मैं, मैं ये कर्ज चुकाउंगा। ये कर्ज चुकाउंगा। आपके सपनों का भारत बना करके कर्ज चुकाउंगा।

हम मिल करके, हम सब मिल कर के भारत मां की सेवा करें। हमसे जो हो सके, हमारे देशवासियों के लिए करें। अपने वतन के लिए करें। जिस धरती पर जन्म लिया, जिस स्कूल में हमने शिक्षा पाई, इसके लिए जो हो सकता है, करें। इसी एक अपेक्षा के साथ फिर एक बार हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद।

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

बहुत बहुत धन्यवाद।

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