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बंगाल में प्रदर्शनकारियों का तांडव

बंगाल में प्रदर्शनकारियों का तांडव

पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का तांडव बरकरार है। हर दिन कहीं न कहीं से हिंसक प्रदर्शन की खबरें आ रहीं हैं। बंगाल के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गईं। बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों नदिया, उत्तर 24 परगना और हावड़ा जिलों से हिंसा की घटनाएं हुईं। उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों के अमदंगा और कल्याणी इलाके में प्रदर्शनकारियों ने कई रास्तों को जाम कर दिया और सड़कों पर आगजनी की। इस बीच प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाहों और फर्जी खबरों पर रोक लगाने के लिए मालदा, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तरी 24 परगना में और दक्षिणी 24 परगना के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं की अपील के बाद भी राज्य में हिंसा की घटनाएं थम नहीं रही हैं। देगंगा इलाके में दुकानों में तोड़-फोड़ करने के साथ ही टायर जलाए गए। नदिया में, प्रदर्शनकारियों ने कल्याणी एक्सप्रेस हाइवे को जाम कर दिया और कुछ ने संशोधित कानून की प्रतियां जलाईं। इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों की खबर हावड़ा जिले के दोमजुर इलाके, बर्धमान और बीरभूम के कुछ हिस्सों से मिली हैं, जहां प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस की बड़ी टुकडिय़ों को मौके पर भेजा गया। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा, ‘बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कुछ सांप्रदायकि शक्तियां हिंसक प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में प्रशासन ने राज्य के 5 जिलों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया।’ उधर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शांति की अपील की है और प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि संशोधित कानून राज्य में लागू नहीं होगा। चटर्जी ने कहा, ‘हम हर किसी से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे। हम आपको आश्वासन दे सकते हैं कि कानून राज्य में लागू नहीं किया जाएगा।’ जबकि बीजेपी के प्रदेश महासचिव सायंतन बसु ने सत्तारूढ़ पार्टी पर राज्य में खराब होती कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में करने के लिए बहुत कम प्रयास करने का आरोप लगाया। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं जहां प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशनों को आग लगाने के साथ ही सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। आपको बता दूं कि संशोधित कानून से समूचे पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में आक्रोश है। स्थानीय लोगों को डर है कि यह अवैध आव्रजन की समस्या को और बढ़ा देगा। संशोधित कानून के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताडऩा झेलने वाले और 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले गैरमुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

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हावड़ा जिले में उम्मीद जतायी जा रही थी कि प्रदर्शनकारी हिंसक प्रदर्शन नहीं करेंगे, लेकिन  प्रदर्शनकारियों ने बांकड़ा सहित अन्य इलाकों को पूरी तरह से अशांत कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने टायर जला कर पथावरोध किया, पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती से पेश आती  नजर आयी। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर निशाना साधते हुए जम कर पत्थरबाजी की। इस पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। खुद डीसी (सदर) अजीत सिंह यादव ने मोर्चा संभाला। प्रदर्शनकारियों को खदेडऩे के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े गये। बांकड़ा, जालान कॉम्प्लेक्स, आलमपुर, कैरी रोड, हावड़ा-आमता रोड पर पथावरोध किये गये, लेकिन बांकड़ा व आलमपुर में प्रदर्शनकारियों ने उत्पात मचाया। काफी संख्या में प्रदर्शनकारी बांकड़ा बाजार के पास पहुंचे व पथावरोध शुरू कर दिये। मौके पर पुलिस पहुंची व सभी को वहां से खदेड़ दिया। यहां अवरोध खत्म होते ही छह नंबर राष्ट्रीय राजमार्ग के आलमपुर में अवरोध शुरू हो गया। पुलिस यहां भी पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी हाल में राजमार्ग अवरोध नहीं होना चाहिए। प्रदर्शकारियों ने पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए अवरोध पर डटे रहे। प्रदर्शन नहीं हटाये जाने पर पुलिस ने यहां भी सख्ती दिखायी व वहां से भी सभी को हटा दिया। करीब एक घंटे तक राजमार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने के बाद यातायात सेवा शुरू हुई। हालात सामान्य होते दिख रहे थे कि इसी समय शाम चार बजे बांकड़ा में फिर से हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुट गयी। खबर मिलते ही पुलिस, रैफ व काम्बैट फोर्स को उतारा गया। फिर से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया। सलप ब्रिज से नीचे खड़ी पुलिस पर पत्थर फेंके गये। बांकड़ा की सड़के पत्थरों से भर गया। पूरा बांकड़ा बाजार रणक्षेत्र में बदल गया। फिर डीसी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गये। सलप ब्रिज से पत्थर फेंक रहे कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। मालूम रहे कि पिछले दिनों भी डोमजूर के गरफा ब्रिज के पास प्रदर्शनकारियों ने बारी-बारी से 17 से अधिक बसों को आग के हवाले कर दिया था। चार घंटे तक कोना एक्सप्रेस वे पर पूरी तरह से यातायात ठप रहा था। स्थानीय लोगों ने नकाशीपाड़ा में 34 राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवरोध किया। लोगों ने टायर जलाकर काफी देर तक सड़क जाम किया। सूचना पाकर नकाशीपाड़ा थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अवरोध के कारण कई घंटों तक सड़क पर गाडिय़ों की कतार की वजह से जाम लगी थी। आपको बता दूं कि नदिया जिले  के चापड़ा में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने सड़कों पर टायर जलाकर नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क और रेल मार्ग बाधित रहीं। पूर्व मेदिनीपुर और मुर्शिदाबाद जिलों में सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने रास्ते बंद कर दिये, जिससे राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनों की वजह से कई ट्रेनें रद्द कर दी गयी। या विलंब से चलीं। रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने सियालदह-डायमंड हार्बर और सियालदह-नमखाना सेक्टर में पटरियों को जाम कर दिया गया.. मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं।  उलबेरिया पुलिस थाने के प्रभारी समेत कुछ पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के हमलों में घायल हो गये। उन्हें निकट के अस्पताल में भर्ती कराया गया। नदिया और बीरभूम जिलों में हिंसा, लूट-पाट और आगजनी की घटनाएं सामने आयी है.दक्षिण पूर्व रेलवे अंतर्गत तमलुक-हल्दिया शाखा में वासूल्यसूता हाटा स्टेशन व हावड़ा-आमता शाखा के आमता स्टेशन पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने रेल अवरोध किया। वासूल्यसुता हाटा स्टेशन पर अवरोध सुबह 6.10 बजे शुरू हुआ और 9.05 बजे खत्म। इस कारण अप हावड़ा-हल्दिया लोकल की यात्रा पासकुड़ा स्टेशन पर समाप्त कर की गयी, जबकि डाउन ट्रेन विलंब से हावड़ा पहुंची। वहीं, दूसरी ओर हावड़ा-आमता शाखा में आमता स्टेशन पर सुबह 7.05 बजे से अवरोध हुआ और 11.35 बजे खत्म हुआ। इस कारण अप व डाउन में पांच लोकल ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। झाडग़्राम में  एनआरसी व सीएए विरोध रैली में निकाली गयी। रैली का नेतृत्व तृणमूल नेता व विधायक चुड़ामनि महतो ने किया। रैली झाडग़्राम स्थित हिंदू मिशन मैदान से शुरू हुई और पांच माथा मोड़ इलाके में समाप्त हुई।  श्री महतो ने कहा कि बंगाल में किसी भी कीमत पर नागरिकता संशोधन कानून लागू होने नहीं दिया जायेगा।

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इन हिंसक घटनाओं के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान भी सामने आ रहे हैं। संशोधित नागरिकता कानून पर पश्चिम बंगाल में जारी हिंसा और आगजनी की घटनाओं को ‘छिटपुट घटनाएं’ बताते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने  कहा कि संसद में भाजपा के पास संख्या बल है तो इसका यह मतलब नहीं है कि वह राज्यों पर कानून लागू करने का दबाव बनायेगी। ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘उपद्रवियों की पहचान उनके पहनावे के आधार पर नहीं की जा सकती।’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने झारखंड में एक रैली में कहा था कि आग लगाने वालों का पता उनके कपड़ों से चल जाता है। तृणमूल सुप्रीमो ने दावा किया कि केंद्र ने राज्य में हिंसा की ‘एक-दो मामूली घटनाओं’ के बाद राज्य में रेल सेवाएं बंद कर दीं। संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में एक प्रदर्शन रैली में ममता ने कहा, ‘महज एक या दो छोटी घटनाएं होने पर केंद्र ने बंगाल में रेल सेवा बंद कर दी। रेलवे की संपत्ति की रक्षा करना रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों का काम है, फिर भी उन्हें हमने मदद दी। हमने (परेशानी खड़ी करने वाले) 600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हम रेलवे और केंद्र सरकार से सेवाएं बहाल करने का अनुरोध करते हैं।’ संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में राज्य भर में पिछले पांच दिनों से विरोध हो रहा है और आंदोलनकारी विभिन्न इलाकों में रेलगाडिय़ों, बसों, रेलवे स्टेशन के परिसरों में आग लगा रहे हैं। आंदोलन के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। ममता बनर्जी ने नागरिकता कानून के विरोध में यादवपुर बस स्टैंड से भवानीपुर स्थित जादूबाबू बाजार तक करीब 6.5 किमी तक रैली का नेतृत्व किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित कानून के खिलाफ हिंसा से प्रदर्शन का उद्देश्य खत्म हो जायेगा। उन्होंने कहा, ‘हिंसा और आगजनी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। दोषियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी। हिंसा से प्रदर्शन का उद्देश्य ही खत्म हो जायेगा।’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों का जो उत्पीडऩ किया गया हम उसकी निंदा करते हैं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।’ उन्होंने भाजपा पर देश में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और कहा कि संशोधित नागरिकता कानून संसद से जल्दबाजी में पारित करवाया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विपक्षी दलों को संशोधित नागरिकता कानून पर विचार-विमर्श करने का वक्त ही नहीं दिया, इसे जल्दबाजी में पारित करवाया।

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इसी मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी अपना मुंह खोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल में बंगालियों की चिंता नहीं है। वह बांग्लादेश के मुसलमानों की हितैशी हैं। असम में बंगालियों को डर दिखाया जा रहा है तो ममता बनर्जी और उनके लोग वहां क्यों नहीं जा रहे हैं? वास्तविकता यह है कि वह बंगालियों की नहीं, बल्कि बांग्लादेश के मुसलमानों के पक्ष में हैं। इसलिए यहां वह विरोध कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ममता देश के पक्ष में नहीं हैं। वह हमेशा देश के विरोध में रहती हैं। देशहित के खिलाफ पाकिस्तान के सुर  में बोलती हैं। दिलीप घोष का ये भी कहना है कि भारतीय कभी भी देश की राष्ट्रीय संपत्ति को नष्ट नहीं कर सकते हैं, लेकिन बंगाल में जिस तरह से रेलवे के करोड़ों की संपत्ति नष्ट की गयी और वोट बैंक की राजनीति के कारण राज्य सरकार की पुलिस मूकदर्शक बनी रही। यहां उग्रवादी व आतंकवादी खुलेआम घूम रहे हैं। भाजपा के आंदोलन को दमन करने के लिए पुलिस लाठियां बरसाती हैं, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ एक गिरफ्तारी तक नहीं। दिलीप का कहना है कि भाजपा के समर्थकों से आह्वान है कि वे भी एनआरसी और सीएए के पक्ष में रैली निकालें और इसके लिए पुलिस से अनुमति नहीं लेंगे, क्योंकि जो पुलिस देशद्रोहियों का समर्थन कर रही है, उस पुलिस से अनुमति की जरूरत नहीं है। भाजपा भी बंगाल में आंदोलन करेगी, उनकी क्षमता है, तो वे रोक कर दिखाये। धारा 370 को लेकर भी ममता बनर्जी बहुत गरजी थीं। जीएसटी का भी पहले विरोध की थीं। तीन तलाक पर विरोध की लेकिन क्या हुआ? वह कुछ रोक नहीं पायीं। चुपचाप मानना पड़ा। इसी तरह से यह कानून भी पूरे देश के लिए पास हुआ है। इसे भी वह नहीं रोक पायेंगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के पास होने से किसी देश के साथ संपर्क खराब नहीं हुआ है, बल्कि ममता बनर्जी को यह सोचना चाहिए था कि उनके नंदीग्राम और सिंगूर के बाद से ही बंगाल की छवि खराब होने के कारण यहां उद्योग लगने बंद हो गये। दिलीप का कहना है कि बंगाल में जिस तरह से अत्याचार हो रहा है। उसके खिलाफ और केंद्र सरकार को सीएए व एनआरसी के लिए धन्यवाद देेने के लिए बंगाल के हर जिले में भाजपा रैली निकालेगी।  भाजपा ने आंदोलन शुरू किया है। दक्षिण कोलकाता में रैली की गयी। बंगाल के सभी जिलों में भी इसी तरह से रैलियां होंगी। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि  बंगाल और देश की सुरक्षा के लिए जितने कानून लाने की जरूरत है, वो सब लाये जायेंगे। राज्यपाल के पास हम लोग गये थे। यहां की परिस्थिति को लेकर केंद्र सरकार को बताने के लिए अनुरोध किये हैं। बंगाल में हिंसा व भय के माहौल में सरकार व राज्य पुलिस पर विश्वास नहीं है। साम्प्रदायिक आक्रोश भड़काने के मामले में फिरहाद हकीम की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर के प्रसंग पर उनसे पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कौन मामला किया है, यह मुझे नहीं पता, लेकिन फिरहाद हकीम ही नहीं, बल्कि तृणमूल के कई नेता व उनके कुछ अल्पसंख्यक नेता ऐसा कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय संपत्ति नष्ट कर राष्ट्र विरोधी कार्य कर रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य में हिंसक प्रदर्शन थमता नहीं दिख रहा है।

 

कोलकाता से संजय सिन्हा

 

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