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श्रेष्ठ नीति और बलिष्ठ नेतृत्व देश को आगे ले जाएगा – प्रभात झा

श्रेष्ठ नीति और बलिष्ठ नेतृत्व देश को आगे ले जाएगा – प्रभात झा

वर्तमान राजनीतिक माहौल में गठबंधन की राजनीति पर भाजपा के रवैए को लेकर उदय इंडिया के समूह संपादक दीपक कुमार रथ की भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा के साथ बेबाक बातचीत के प्रमुख अंश:

पहले भाजपा ने हरियाणा में कुलदीप विश्रोई को छोड़ा, उसके बाद महाराष्ट्र में शिवसेना को छोड़ा। गठबंधन की राजनीति को लेकर भाजपा देश को क्या संदेश देना चाहती है?
हम जानते हैं कि गठबंधन धर्म का निर्वाह कैसे किया जाता है। अटलजी इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। लेकिन अगर कोई हमें यह जानते हुए भी दबाएगा कि दिल्ली में हमारी सरकार गठबंधन के तहत सत्ता में आई है, इसके बावजूद हम अकेले बहुमत में हैं, तो यह स्थिति ठीक नहीं है। पोलिटिकल बार्गेनिंग अगर होगी तो उससे बाहर निकलना पड़ेगा। पिछले 25 साल से हर चुनाव में शिवसेना 169 सीटों पर लड़ती थी और हम 119 सीटों पर लड़ते थे। तो क्या उन 169 सीटों पर भाजपा के कार्यकत्र्ता नहीं होते होंगे? उन पर क्या बीतती होगी? इसलिए कार्य का विस्तार करना है तो गठबंधन के धर्म को समझते हुए हमें आगे बढऩा तो पड़ेगा। हमने संबंध नहीं तोड़ा शिवसेना से। शिवसेना के बाल ठाकरे इसलिए बाला साहब थे कि उन्होंने कभी सत्ता की तरफ नहीं देखा। उनके मन में कभी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नहीं हुई। यहां मूल अंतर यही है। मुख्यमंत्री बनने के कारण ही गठबंधन टूटा। वे खुद कम बोले, लेकिन अपने समर्थकों से ज्यादा बोलवाए। यह अच्छी प्रथा नहीं है। शिवसेना वहां ताकतवर सिर्फ इसलिए रही, क्योंकि सेना प्रमुख सत्ता से बाहर रहे। बाकी रही हरियाणा की बात तो वहां हरियाणा जनहित का कोई अस्तित्व नहीं है। एक सीट भी नहीं मिली उसे। इसके बावजूद वे 48 सीटें मांग रहे थे। हमारा मानना है कि गठबंधन धर्म को जैसा हम समझते हैं, वैसा लोगों को समझना चाहिए।

लेकिन पहले भी गठबंधन में मुख्यमंत्री शिवसेना का ही रहा है…
उसमें बात यह थी कि जिसकी सीटें ज्यादा आएंगी वो जीतेगा। पिछली बार हमारी सीटें ज्यादा आईं तो गोपीनाथ मुंडे प्रतिपक्ष के नेता थे। बाला साहब ठाकरे ने कभी गठबंधन नहीं तोड़ा। उनसे ज्यादा पॉपुलर उद्धव ठाकरे नहीं हैं। उनसे ज्यादा मासेज में अपील नहीं है इनकी। बाला साहब के बाद शिवसेना में राजनीतिक समझ में कमी आई है।

लेकिन, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की तरह पॉपुलर नेता भाजपा के पास कौन है?
सिर्फ पॉपुलर नेता से हम चुनाव जीतते हैं क्या? कार्यकर्ता अगर नहीं होता तो मोदी जी की खाली पॉपुलरिटी काम आती क्या? नरेन्द्र मोदी पॉपुलर भी हैं और पार्टी के पास कार्यकत्र्ता भी है। हमने वहां नेता इसलिए नहीं चुना कि वहां गठबंधन था और गठबंधन में नेता नहीं चुना जाता है …

अब नेता कौन है वहां भाजपा का?
निश्चित तौर पर कोई न कोई नेता होगा वहां पर चुनाव के बाद। भारतीय जनता पार्टी की वहां शिवसेना से ज्यादा पॉपुलरिटी है। वहां शीघ्र ही नरेन्द्र मोदी जाएंगे और भाजपा की ऐतिहासिक जीत होगी।

अभी शिवसेना ने केन्द्र से अपना समर्थन वापस नहीं लिया है। इससे तो यही संदेश जाएगा कि चुनाव के बाद गठबंधन शिवसेना के साथ ही होगा…
नहीं अभी कुछ देर पहले पता चला है कि गीते शायद इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि गठबंधन तो रहना चाहिए था। गठबंधन टूटने का हम सबको दुख है। लेकिन, क्या देश में ऐसे लोकतंत्र चलेगा कि मैं और मेरे बाद मेरा बेटा? उन शिवसैनिकों पर क्या बितती होगी, जो रात दिन ठाकरे का नारा लगाते हैं, लेकिन उस ठाकरे परिवार के सिवाय कोई शिवसेना का प्रमुख बन ही नहीं सकता। मनोहर जोशी जी की क्या हालत कर दी उन्होंने? क्यों शिवसेना में से लोग छोड़-छोड़कर चले गए? राणे क्यों चले गए? भुजबल क्यों चले गए? ये सोचने वाली बात है। इसलिए हम मानते हैं कि गठबंधन धर्म को जितना हम समझते हैं, उससे भी ज्यादा उन्हें समझना चाहिए था।

अगर आप वंशवादी राजनीति की बात कर रहे हैं तो वो भाजपा में भी है…
नहीं, भाजपा में नहीं है। पंकज सिंह को टिकट नहीं मिला तो किसी ने नाराजगी व्यक्त नहीं की। अनुराग ठाकुर को मिनिस्ट्री में नहीं लिए तो कोई नाराज नहीं हुआ। साफ शब्दों में नरेन्द्र मोदी यह मैसेज दे रहे हैं और हमारी पार्टी द्वारा दी जा रही है कि अगर प्रत्यक्ष रिश्ते हैं, पिता-पुत्र हैं, पिता-पुत्री हैं तो थोड़ा सा बचना पड़ेगा।

लेकिन, सांसद तो हैं। रमण सिंह के बेटे हैं, वसुंधरा के बेटे हैं…
नहीं देखिए, ये पहले से हैं। रमण सिंह के बेटे अभी बने हैं। वो भी किसी उम्मीदवार के नहीं होने के कारण पार्टी की मजबूरी थी। पार्टी ने बहुत खुश होकर टिकट नहीं दिया उनको। दुष्यंत तो पिछले चार बार से सांसद हैं।

हरियाणा की बात करें तो वहां भी भाजपा का कोई ऐसा नेता नहीं है, जो हुड्डा के सामने खड़ा हो सके?
बिना पॉपुलर नेता के हम सात लोकसभा सीट जीते हैं।

वह जीत मोदी के नाम पर हुई …
फिर जाएंगे मोदीजी के नाम पर। पार्टी जिस पर उंगली रख देगी वही नेता हो जाएगा। मोदी जी पार्टी के संगठनमंत्री और प्रचारक थे। उस समय कोई नहीं जानता था कि वे भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाकर जैसे ही पार्टी ने उंगली रखी उन पर, वे देश के प्रधानमंत्री बन गए। तो पहले कौन होगा, बाद में कौन होगा, यह पार्टी तय करती है।

यानी, नरेन्द्र मोदी जिसे तय करेंगे, वही नेता बन जाएगा उस राज्य का?
नरेन्द्र मोदी जी और पार्टी तय करेगी। नरेन्द्र मोदी जी हमारे नेता हैं तो तय करेंगे ही।

मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में कोई तो नाम होगा भाजपा के पास? हुड्डा पूछ रहे हैं कि आपका मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा? क्या जवाब है आपके पास?
कांग्रेस का जाता हुआ मुख्यमंत्री कौन है, हुड्डा। जनता किसे नकारेगी, हुड्डा को। इसलिए आज जो वहां कि राजनीतिक परिस्थिति है, उसका आंकलन किए बिना किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया जा सकता। सरकार बनने पर मुख्यमंत्री तो बन ही जाएगा। इसलिए सरकार बनाना पहली आवश्यकता है, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करना आवश्यक नहीं है।

हरियाणा में आपका एजेंडा क्या रहेगा?
हुड्डा ने पिछले दस सालों में राज्य को चौपट किया, किसानों की जमीनों को खाया है। उन्होंने एक काम नहीं किया है। बजट में लूटाने की कोशिश की है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। आप देखिए कि किसानों की क्या हालत कर दी गई है। राजीव गांधी विश्वविद्यालय के नाम पर अर्जित जमीनों को दो-दो रूपए दिए जा रहे हैं। फरीदाबाद की क्या स्थिति है, गुडग़ांव की क्या स्थिति है यह जाहिर है। क्या ऐसे सरकार चलेगी? एक नहीं, अनेक ऐसी चीजें हैं, जिस पर हम कह सकते हैं। एनसीआर के इलाकों में भी उन्होंने स्थिति बदतर कर दी है। पर कैपिटा इन्कम घटा है। गांवों में बिजली की स्थिति ठीक नहीं है। पानी की स्थिति गांवों में अच्छी नहीं है।

आपकी सरकार को आए हुए भी चार महीने से ज्यादा हो गए। चुनावों के दौरान आने कहा था कि सरकार बनते ही रॉबर्ट वाड्रा पर कार्यवाई होगी?
राजस्थान सरकार में जांच चल रही है। राजस्थान सरकार ने जो चार लोगों की समिति बनाई थी, उन्होंने रिपोर्ट दे दी है।

हरियाणा में क्या करेंगे?
जांच कमिटी ने रिपोर्ट दिया है, अब देखिए क्या होता है।

महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ आपका क्या मुद्दा होगा?
दोनों जगह की स्थिति एक जैसी है। एक जगह दस साल से सरकार है तो दूसरी जगह पंद्रह साल से। दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी। वो हट गई। पृथ्वीराज चह्वाण जमीनी नेता है ही नहीं। वो तो एयरकंडीशन में आए थे, एयरकंडीशन में रहे और एयरकंडीशन से ही जाएंगे। इसलिए वहां पर भारतीय जनता पार्टी बहुत तेजी से सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है।

अगर जरूरत पड़ी तो क्या भाजपा एनसीपी की समर्थन लेगी?
नहीं, ये नीतिगत मामले तो हमें नहीं पता कि पार्टी किसका समर्थन लेगी। हमें इतना मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करने की ओर बढ़ रही है।

जयललिता की सजा पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
इतना ही कहूंगा कि कानून ने अपना काम किया है और कानून को अपना काम करना चाहिए। वो पहली बार जेल नहीं गईं हैं, इसके पहले भी जमीन के एक मामले में में वो जेल जा चुकी हैं। क्या सही है, क्या गलत है बात यह नहीं है। न्यायालय पर विश्वास है। सत्यमेव जयते के नीचे निर्णय लिए जाते हैं। पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दो-दो बार जेल जाना पड़ा है, कुर्सी पर रहते हुए। संपत्तियों का ब्यौरा जिस तरह से आया है, वह एक अलग ही कहानी है। इसलिए कोर्ट का निर्णय ही मानना चाहिए।

मामला पिछले 18 साल से चल रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के शपथ-ग्रहण में उन्हें बुलाया गया था।
क्या उन्हें मालूम था कि वो ऐसा करेंगी और कोर्ट ऐसा निर्णय देगा? निर्णय तो उसके बाद आया है।

लेकिन केस तो पिछले 18 सालों से चल रहा था…
हां, लेकिन निर्णय तो अब आया है ना। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें बुलाया था। दोषी साबित होने के बाद नहीं बुलाया है।

तमिलनाडु आपका क्या रूख रहेगा?
वहां हम अपनी पार्टी का विस्तार करेंगे। कोशिश करेंगे कि जहां हमारा हाथ नहीं है, वहां हमारा हाथ बढ़े।

पंजाब में अकाली भी अनपॉपुलर हो रहे हैं। तो क्या भाजपा अकाली दल के साथ भी वही करेगी, जो शिवसेना के साथ किया?
देखिए, हम फॉरकास्ट तो कर नहीं सकते कि कल क्या होगा। हमारा गठबंधन धर्म हम खराब नहीं करेंगे। लेकिन कोई भी गठबंधन हम इसलिए थोड़े-ही न करेंगे कि हमारा नुकसान हो। गठबंधन किया जाता है मजबूती के लिए और आगे बढऩे के लिए।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह का आरोप है कि उपमुख्यमंत्री ड्रग्स माफिया केस में फंसे हैं, क्या मोदी जी को दिखाई नहीं देता?
अमरिन्दर सिंह को आज दिखाई दे रहा है, क्योंकि वो आज विपक्ष में हैं। अब मोदी जी बातचीत करेंगे तो देखेंगे कि आगे क्या हो सकता है। कोई इसका प्रमाण लेकर प्रस्तुत करे तो देखेंगे।

दिल्ली में भाजपा चुनाव कराने से पीछे क्यों हट रही है?
सवाल ही नहीं है। हम वार्ड-वार्ड में चुनाव के लिए तैयार हैं। हर जगह हमारी तैयारी चल रही है। हम कभी पीछे नहीं हैं। अभी चुनाव करा लें, हम लडऩे को तैयार हैं।

मैडिसन स्क्वॉयर पर प्रधानमंत्री ने तीन बिन्दुओं पर जोर दिया – लोकतंत्र, युवाशक्ति और बाजार की मांग। तो इन विषयों को राज्य सरकार तक भी ले जाने की योजना है आपकी?
हम हर प्रयास कर रहे हैं। झारखंड में स्वच्छता अभियान वाला मिशन है। झारखंड के गांव-गांव में झाड़ू लगाना शुरू हो गया है। लोग स्व-प्रेरित होकर कर रहे हैं। शुरूआत तो करनी पड़ेगी न कहीं न कहीं से। डिमांड ज्यादा है हमारे यहां इसलिए हमने यह बात कही। यूथ की डेमोग्राफी बड़ी है हमारे यहां और डेमोक्रेसी है हमारे यहां। इसलिए मोदीजी ने लोगों का आह्वान किया कि आइए और हमारा साथ दीजिए। उन्होंने इसीलिए कहा, क्योंकि यहां बहुत सारी संभावनाएं हैं। यहां अवसर है। इन तीन बड़ी चीजों का स्वागत करते हुए यहां आना चाहिए।

प्रधानमंत्री के कार्य को एक तरफ कर दें तो भाजपा के कैडर्स में आज कहीं न कहीं नाराजगी दिख रही है। मीडिया के साथ भी रिश्ते सही नहीं हैं…
ये सब छोटी-छोटी बातें हैं। देश का काम मीडिया भी करती है और देश का काम नेता भी करता है। सुरक्षा के कारण कभी ऐसी बातें हो जाती हैं। आप जानते हैं कि इस समय भारत का सबसे संवेदनशील व्यक्ति अगर कोई है तो वो हैं नरेन्द्र मोदी और दुनिया भर में उभरने वाले नेता को मारने और कुचलने की लोग कोशिश करते ही हैं। इस्लामिक आतंकवाद इतना भयानक हो चुका है कि आज पूरा विश्व चिंतित है। इस्लामिक स्टेट के प्रति अमेरिका का रवैया और इस्लामिक आतंकवाद के प्रति भारत का रवैया लगभग एक जैसा ही है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था तो बनाए रखनी होगी। अगर इसके नाम पर कुछ दूरी है तो मुझे नहीं लगता है कि इससे कोई अनपॉपुलरिटी हो रही है।

अटलजी की सरकार ने बहुत बढिय़ा काम किया था, लेकिन उसके मूल कैडर के लोगों ने ही उसे हरा दिया था…
नहीं…नहीं… ऐसा नहीं है। हमारी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ कभी नहीं जाते।

उनकी नाराजगी रही है कि उनका काम नहीं हुआ….
काम क्या होना है? मेरा कौन सा आदमी जेल में है, मेरा कौन सा आदमी अदालत में है? भारतीय जनता पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता ईमानदारी से काम करता है और उसे करना भी चाहिए। एक समर्पित कार्यकर्ता कभी भी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं बोलता।

मानव संसाधन विकास मंत्री रहने के दौरान मुरली मनोहर जोशी ने अपने दरवाजे पर नोटिस लगा रखा था कि स्थानांतरण या व्यक्तिगत कार्य के लिए आग्रह न करें। इसके कारण बहुत से कार्यकर्ता नाराज हो गए थे। अगले चुनाव में लोगों ने जोशी को बैनर दिखाया कि वोट मत मांगिए। वही स्थिति दुबारा हो गई है। जब कार्यकर्ता आपके पास आते हैं तो नेताओं के दरवाजे बंद हो जाते हैं…

बहुत खुले तौर पर कहता हूं कि किसी कार्यकर्ता का कोई स्थानांतरण का कार्य नहीं होता है। मेरे जैसा आदमी जो पिछले 8 साल से राज्यसभा का सदस्य रहा है, उसकी इतनी हैसियत नहीं बनी कि वो किसी का स्थानांतरण करा सके। क्या लेना-देना है हमें इन कामों से? नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार चलेगी और हम चलाएंगे संगठन। संगठन की इतनी दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए कि सरकार प्रभावित हो। हां इसमें कोई वास्तविक समस्या आती है तो लोग हमें बताएं।

आम लोगों का काम कौन करेगा?
झाड़ू लगाने का काम स्वयं प्रधानमंत्री ने शुरू की है, अब जनता करे। चोर-उचक्के होंगे वो जेल में बंद होंगे। उसे छुड़ाने का काम सरकार का नहीं है।

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