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कोर्ट के आदेश के विरूद्व मॉल का उद्घाटन?

कोर्ट के आदेश के विरूद्व मॉल का उद्घाटन?

By पटना से संतोष सुमन

नगर आयुक्त कोर्ट और ट्रिब्यूनल ने राजधानी के पॉश एरिया फ्रेजर रोड पर बने ‘पटना सेन्ट्रल मॉल’ को तोडऩे तथा इसके उद्घाटन पर रोक लगा रखा था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री व जदयू के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार के करीबी मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह ने कोर्ट के आदेश के विरूद्ध 26 सितंबर 2014 को ‘पटना सेंट्रल मॉल’ का उद्घाटन कर सरकार, पुलिस व प्रशासन को खुली चुनौती दे डाली। फिर भी सरकारी तंत्र चुप है?

बाहुबली जदयू विधायक अनंत सिंह इस मॉल के मालिक हैं। राजधानी के पॉश एरिया फ्रेजर रोड पर आलीशान मॉल बनाने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। सीडब्लूजेसी संख्या 8152/2013 नरेन्द्र मिश्रा बनाम मामले में पटना हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण को रोकने के लिए निर्देश दिया था। पटना नगर निगम द्वारा बिल्डिंग वाइलॉज के विरूद्ध जदयू विधायक अनंत सिंह के अवैध निर्माणधीन मॉल पर रोक लगाते हुए निगरानी ने भी आदेश पारित किया था, लेकिन इसके बावजूद भवन का निर्माण किया गया।

पटना नगर निगम ने निगरानी के आदेश के बाद अपना अंतिम आदेश पारित किया कि विचलित अंश को तोड़े व बिना ऑक्यूपेंसी परमिशन के भवन का उपयोग नहीं किया जाए। इस मॉल का हर तल 18,000 वर्गफूट का है। पटना नगर निगम ने विवादित हिस्से को तोडऩे का आदेश दिया था। इसके बावजूद 26 सितंबर 2014 को इस मॉल के मालिक अनंत सिंह ने इस मॉल का उद्घाटन कर सरकार, प्रशासन व पुलिस को खुली चुनौती दे दी।

सबने झाड़ा पल्ला?
इस मॉल को लेकर पटना नगर निगम आयुक्त कुलदीप नारायण ने कहा कि पुलिस प्रशासन को चाहिए था कि उद्घाटन पर रोक लगाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमने एसपी और डीएम को पत्र भी लिखा, लेकिन नगर आयुक्त और हाईकोर्ट के फैसले की अवमानना करते हुए उद्घाटन किया गया। कानून का राज पुलिस प्रशासन को ही करना है और वह इसमें विफल रही है। वहीं सदर एसडीओ अमित कुमार ने कहा कि इसमें नगर निगम कार्यपालक अभियंता को एफआइआर करनी है। मॉल का उद्घाटन गैरकानूनी है, उसे बंद किया जायेगा।

पटना के पूर्व एसएसपी मनु महाराज ने कहा था कि नगर निगम द्वारा इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करायी जानी चाहिए थी। लेकिन, इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं करायी गयी? उक्त मामले को लेकर भाजपा नेता सुशील मोदी ने विरोध किया तो जदयू विधायक अनंत सिंह ने 28 सितंबर को सुशील मोदी पर मानहानि का केस करने की धमकी दे डाली है।

कई सवालों के घेरे में विवादपूर्ण मामले में जदयू विधायक अनंत सिंह ने कोर्ट के आदेश के विरूद्ध स्वयं उद्घाटन किया। लोकतंत्र में विपक्ष के सुशील मोदी ने आवाज उठायी तो मानहानि करने की धमकी दी गयी। बिहार में क्या कानून का राज्य है या अपराधियों की सरकार चल रही है, आखिर किसकी सरकार चल रही है?

पांच करोड़ रंगदारी मांगी

बिहार में किसकी सरकार है – लोकतंत्र में जनता द्वारा चुनी गयी सरकार या अपराधियों की समांनातर सरकार चल रही है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। राजधानी में एक साथ सौ लोगों को ईमेल के जरएि पहली बार पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गयी है। जेल में बंद अपराधियों द्वारा रंगदारी वसूली जा रही है। यहां अवैध हथियारों के कारोबार के साथ-साथ अवैध दवाईयों सहित सभी प्रकार के अवैध कारोबार चल रहे हैं। ऐसी घटनाएं राज्य में आये दिन हो रहें हैं।

सूबे के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि इस राज्य में वत्र्तमान और लालू-राबड़ी के पन्द्रह साल के शासनकाल में जंगलराज नहीं था। राज्य में अपराधियों के हौसले इतने बुंलद हैं कि पहली बार राजधानी के सौ व्यवसासियों को ईमेल भेजकर पांच-पांच लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई। रंगदारी नहीं देने पर व्यवसासियों और उनके परिवार के एक सदस्य को मौत के घाट उतारने की धमकी दी गयी। ईमेल भेजने वाले ने अपना नाम मनीष सिंह और स्थान जहानाबाद लिखा है। यहां यह बताना जरूरी है कि बिहार का जहानाबाद जिला अपराधियों और नक्सलियों का गढ़ है। इसी जहानाबाद जिले में एक दशक पहले नक्सलियों ने जेल ब्रेक कर अपने साथियों को जेल से छुड़ा लिया था।

ईमेल करने वाले का आईडी mkumar5593@gmail.com है, जिससे 25 सितबंर 2014 को सौ लोगों को एक साथ ईमेल भेजा गया था। ईमेल में स्पष्ट कहा है कि मेरा आदमी कॉल करेगा तो पांच लाख रुपये दे दिए जाएं, अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें।

ईमेल राजधानी के बड़े होटल संचालक, ऑटोमोबाइल डीलर, ट्रेवेल ऐजेंट, स्वर्ण व्यवसायी, कांसल्टेंसी सर्विस प्रोवाइडर, ट्रेडर, एजेंसी मालिक व बिल्डर को भेजे गए हैं। उक्त मामले में एडीजी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि मामला गंभीर है। वहीं दूसरी ओर पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि उन्हें अब तक जांच का ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है।

राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। एक साथ राजधानी के सौ व्यवसायियों का ईमेल आईडी कहां से उपलब्ध हुआ? आशंका यह भी जतायी जा रही कि अगले साल 2015 में बिहार  होने वाले हैं, ऐसे में किसके इशारे पर पांच करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने का टारगेट किसने बनाया है? नक्सलियों व उग्रविधानसभा चुनाववादियों के लिए यह पांच करोड़ रुपये जमा करने की योजना तो नहीं है? ऐसे कई सवाल खड़े हैं? जिसका जवाब सरकार, प्रशासन व पुलिस को देना है, लेकिन सब के सब चुप्पी साधे हुए हैं।

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