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श्यामसुंदरजी हिंदी के लिए ढाल बने रहे

श्यामसुंदरजी हिंदी के लिए ढाल बने रहे

प्रभात प्रकाशन के संस्थापक, श्यामसुंदरजी हिंदी प्रकाशन जगत् में ऋषि-परंपरा के व्यक्ति थे। पुस्तकें उनके लिए जीने की ललक सरीखी थीं। उन्होंने जीवन भर राष्ट्रवादी और प्रेरणादायी साहित्य का विपुल प्रकाशन किया और वह भी ऐसा साहित्य, जो न केवल नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज जीवन और राष्ट्र जीवन में आदर्शों को बढ़ावा देता है। वे एक प्रखर हिंदी-सेवी के रूप में सदैव याद किये जाएंगे। उनका ध्येय था की विश्व की सभी भाषाओं का श्रेष्ठ साहित्य हिंदी पाठकों को भी उपलब्ध हो।

उनका जन्म और आधुनिक शिक्षा मथुरा में ही हुई। उसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक, स्नातकोत्तर और लॉ की डिग्री प्राप्त की। अपनी किशोरावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और इलाहाबाद में चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. रज्जू भैया के संपर्क में आये। वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ संघ के विस्तार का काम भी करते थे। सन् 1958 में उन्होंने दिल्ली में प्रभात प्रकाशन की नींव रखी और धीरे-धीरे प्रभात प्रकाशन एक विशिष्ट नाम बनकर उभरा। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखकों, जैसे- टालस्टाय, मार्क ट्वेन, आस्कर वाइल्ड, चाल्र्स  डिकेन्स, आंतोन चेखव की मूल रचनाओं के श्रेष्ठ हिंदी अनुवाद प्रकाशित किये। उन्होंने अनेक नवोदित लेखकों की पुस्तकें प्रकाशित कर उन्हें साहित्य-सेवा के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने हिन्दू धर्म, संस्कृत, दर्शन व अध्यात्म के पुरोधा स्वामी विवेकानन्द व स्वामी रामतीर्थ जैसे महर्षियों की पुस्तकों और विशिष्ट बांगला लेखकों- जैसे बंकिमचंद्र चटर्जी, शरतचंद चटोपाध्याय एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद भी प्रकाशन किया।

सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद उन्होंने आम जनता में अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम व अनुराग तथा स्वाभिमान जाग्रत् करने और भारतीय सशस्त्र बलों के अपने वीर रणबांकुरों के शौर्य और पराक्रम से परिचित कराने के लिए भी अनेक पुस्तकों का प्रकाशन किया, जिनका फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने अनुमोदन किया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति सर्वश्री राजेंद्र प्रसाद, शंकर दयाल शर्मा, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित पुस्तकें प्रकाशित करने का गौरव भी प्राप्त किया। साथ ही अनेक विशिष्ट साहित्यकारों, जैसे-वृदावनलाल वर्मा, महादेवी वर्मा, प्रभाकर माचवे, विजयेंद्र स्नातक तक, विष्णु प्रभाकर, विद्यानिवास मिश्र एवं अज्ञेय के साथ साहित्यक सत्संग करते थे। उन्होंने उनकी कई श्रेष्ठ पुस्तकों का प्रकाशन भी किया। इतना ही नहीं, विश्वप्रसिद्ध विभूतियों- जैसे बराक ओबामा, बिल क्लिंटन, हिलेरी क्लिंटन, नेपोलियन हिल, डेल कारनेगी, लुइस एल. हे जोसेफ मर्फी आदि की पुस्तकों का हिंदी अनुवाद भी प्रकाशित किया। 1995 में उन्होंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन, पं. विद्यानिवास मिश्र के नेतृत्व एवं तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की प्रेरणा से साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘साहित्य अमृत’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए श्यामसुंदरजी हमेशा याद रखे जायेंगे।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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