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तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक

तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक

अभी हाल ही में अमेरिका ने ईरान के बाहुबली कमांडर जनरल सुलेमानी को मौत की नींद सुला दिया। जिससे ईरान और अमेरिका में  घमासान युद्ध होने की संभावना है। इन दोनों देशों के युद्ध से पूरे विश्व में तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना बढ़ गई है। आज बहुत सारे देशों के पास एक से बढ़कर एक आधुनिक तकनीक वाले हथियार हैं, जिससे हमारी धरती का आस्तित्व खतरे में पड़ चुका है। सभी देश एक से बढ़कर एक हथियारों का आविष्कार कर रहे हैं, जिससे उनकी ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान सके और वो देश पूरे विश्व में अपने आप को सर्वप्रथम स्थान पर ले आये। अमेरिका एक सुपर पावर देश है, जिसके पास आधुनिक तकनीक वाले हथियार है, जोकि किसी भी देश को ध्वस्त करने में सक्षम है। सभी देश अमेरिका को सुपर पावर देश मानते हैं। कोई भी देश अमेरिका से दुश्मनी मोल नहीं लेता। लेकिन अमेरिका ने ईरान के कमांडर को मौत देकर ईरान के साथ-साथ पूरे विश्व में विश्वयुद्ध का बिगुल बजा दिया है।

मानवजाति का आस्तित्व खतरे में आ चुका है। इस भयानक विश्वयुद्ध में ऐसे रसायनों का प्रयोग हथियारों के माध्यम से होगा, जिससे पूरी मानवजाति विलुप्त हो जाएगी। लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे व काल के गाल में समा जाएंगे। धरती पर कुछ भी नहीं बचेगा। पेड़ पौधे, जीव-जन्तु, मनुष्य इत्यादि सब खत्म हो जाएंगे। आज हर देश एक-दूसरे देश को नीचा दिखाना चाहता है। हमारा भारत भी दिनोंदिन आधुनिक हथियारों के अविष्कार में लगा हुआ है। बहुत सारे देशों के पास परमाणु बमों का जखीरा भी है। हमारा देश भी उन्हीं देशों में से एक है। आज सभी देश बड़े से बड़े व खतरनाक परमाणु बमों के आविष्कारों में लगे हुए हैं। जिससे धरती का विनाश जल्द से जल्द हो जायेगा। पूरे विश्व में एक गंभीर स्थिति बनी हुई है। दुनिया में एक डर का माहौल है। कब सब लोगों की जीवनलीला समाप्त हो जाए, किसी को कुछ नहीं पता। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान एक विनाशकारी लीला जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में हो चुकी है। अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी इन दोनों शहरों में परमाणु बम गिराये थे, जिससे जापान के दोनों शहर पलभर में ही खाक हो गये थे। इस पीड़ा को जापान आजतक नहीं भूला है। और आज भी वहां के बच्चे किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित व अपंग पैदा होते हैं। ये त्रासदी पिछली शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदी थी। और बहुत ही भयावह मंजर था। आखिर युद्ध का अंजाम यही होता है। आने वाली नस्ले तक खराब हो जाती है। लोग भूखमरी व गंभीर बीमारियों के चलते मर जाते हैं। इस धरती ने हमें जीवन दिया है, और आज हम इस धरती के पीछे पड़े हुए है कि कब यह ग्रह नष्ट हो।

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आखिर इन युद्धों से मिलता क्या है? शांति मिलती है या जिंदगी सुकूनभरी हो जाती है? क्या यही जीवन है? क्या ईश्वर ने हमें इसीलिये ये बुद्धि दी है कि इसका उपयोग कर हम अपने ही जीवन को मृत्यु में बदल दें? मौत का सामान बनाकर अपने पर ही इस्तेमाल करें? ये बम, मिसाईल व अन्य घातक हथियार पूरी मानवजाति को खत्म कर देंगे। आज इनके परीक्षण के कारण जगह-जगह प्राकृतिक आपदाएं भी हो रही हैं। विनाशकारी भूकंप, जलप्रलय से लेकर ग्लेशियर तक पिघल रहे हैं। हमारी जीवनदायिनी हवा भी जहर बन चुकी है। आज हमारी सांसों में जहर घुल चुका है। एक तरफ प्रकृति का विकराल रूप हमारे सामने हैं और दूसरी तरफ हमारे द्वारा बनाए गए आधुनिक तकनीक से सुसज्जित हथियार हैं जो हमारी पूरी मानवजाति को लीलने में सक्षम है। हम सब दिन-प्रतिदिन विनाश की तरफ बढ़ते जा रहे हैं। आज लगभग सभी देशों में रसायनिक हथियारों को बनाने की होड़ लगी हुई है व बहुत सारे देशों के पास इन खतरनाक हथियारों का एक बहुत बड़ा जखीरा है। जिसके फलस्वरूप पृथ्वी पर प्रलय आ सकती है। वैसे कुछ भी हो, युद्ध से किसी का भी भला नहीं हुआ है। ये एक ऐसा दर्द है जो पूरी मानवजाति के लिए एक नासूर बन सकता है। पहले भी दो विश्वयुद्ध हो चुके हैं, जिनसे कई हजारों-लाखों लोगों की जाने गई है। कई लोग अपंग हो गए, बहुत सारे लोग बेघर हो गए, व गंभीर बीमारियों की जकड़ में भी आ गए। आज भी लोग इन युद्धों के बारे में सुनते हैं तो उनकी रूह कांप जाती है। सब लोग यही प्रार्थना करते है कि दोबारा कोई विश्वयुद्ध ना हो। पूरी दुनिया से शांति की अपील करते हैं।

जापान देश के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम की चपेट में आकर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। कई हजारों-लाखों की संख्या में लोग मारे गए थे। आज भी उस घड़ी को याद करके जापान के लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। इतना भयावह मंजर देखने के बाद जापान व अन्य कई देश पूरी दुनिया में शांति की अपील करते हैं। एवं सभी देशों को परमाणु बमों का इस्तेमाल ना करने के लिए कहते हैं, ताकि जापान जैसा दर्द कोई भी देश ना झेले। सब जानते हैं मानव की जिंदगी बड़ी कीमती होती है। फिर भी पूरी दुनिया इतनी बड़ी बेवकूफी क्यों कर रही हैं? सभी देश अपनी-अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पूरी मानवजाति को दांव पर क्यों लगा रहे हैं? पूरी दुनिया को जापान से सबक लेना चाहिए व कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए। जिससे हमारा पृथ्वी ग्रह नष्ट होने से बच जाए।

नितिन गोयल

 

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