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बंगाल में अपराध और हिंसा पर नहीं लग रही लगाम

बंगाल में अपराध और हिंसा पर नहीं लग रही लगाम

पश्चिम बंगाल में आपराधिक गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और गैरकानूनी कामों पर कोई अंकुश लगता नहीं दिख रहा है। इसी बीच गैरकानूनी कारोबार का एक नया चेहरा सामने आया तो लोगों के होश उड़ गए। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को जब इसकी जानकारी मिली तो दबिश दी गई और कई राज देखते ही देखते फाश हो गए। जिसने भी सुना उसे हैरत हुई। यहां बता दे कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारियों ने गुप्त जानकारी के आधार पर सैंडल के सोल में छिपाकर हांगकांग भेजे जा रहे ड्रग्स के एक कंसाइनमेंट को जब्त कर बड़ी सफलता हासिल की है। इस कंसाइनमेंट को कूरियर के जरिये विदेश भेजा जा रहा था। इस सिलसिले में एनसीबी की कोलकाता जोनल यूनिट ने दो ड्रग्स सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम मुर्तजा अजीम और रिजवान अली हैं। दोनों पोर्ट इलाके के खिदिरपुर के रहने वाले हैं। सभी सैंडल के सोल के अंदर से 5.780 किलो व सप्लायरों के पास से 2.031 किलो चरस जब्त की गयी है।

नारकोटिक्स विभाग को खबर मिली थी कि कोलकाता एयरपोर्ट से ड्रग्स हांगकांग भेजी जा रही है। ड्रग्स सप्लायर कूरियर कंपनी की मदद से यह माल हांगकांग भेज रहे हैं। इसके बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट के कार्गो विभाग में मौजूद सभी सामानों की जांच करने पर बड़ी संख्या में सैंडल हांगकांग भेजे जाने का पता चला। उन सैंडल की जांच में इनके सोल से भारी मात्रा में चरस भरा हुआ मिला। फिर सारा माल जब्त कर लिया गया। यह माल किसने बुक करवाया था, इसका पता कर खिदिरपुर से दोनों सप्लायरों मुर्तजा अजीम और रिजवान अली को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने बताया कि इससे पहले भी बच्चों के जूते व युवतियों के सैंडल के सोल में चरस भरकर वे इसकी सप्लाई हांगकांग, सिंगापुर, पटाया व बैंकॉक कर चुके हैं। दोनों से पूछताछ हो रही है। आपको बता दे कि इससे पहले भी इस तरह के गिरोहों का भंडाफोड़ हो चुका है, लेकिन कानूनी शिकंजे से छूटने के बाद वे फिर से सक्रिय हो गए।

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दूसरी तरफ प्रेसीडेंसी जेल से भी आपराधिक खबर आई तो लोगों को हैरानी हुई। महानगर के प्रेसिडेंसी जेल में एक विचाराधीन कैदी के रूप में सजा काट रहे अपने बेटे को पपीते के अंदर गांजा सप्लाई के आरोप में एक महिला को पकड़ा गया है। घटना प्रेसिडेंसी जेल के अंदर की है। महिला को पकड़कर हेस्टिंग्स थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया। पीडि़ता का नाम सईदा बेगम उर्फ साजिदा बीबी है। वह तपसिया इलाके के तिलजला रोड की रहने वाली है। जेल सूत्रों के मुताबिक महिला अपने बेटे मोहम्मद बाबू बिस्लेरी से मिलने आयी थी। इस दौरान वह साथ में तीन पके हुये पपीते लायी थी। उनके सामान के साथ पपीते को जब स्कैनर मशीन में डाला गया, तो पपीते के अंदर कुछ संदिग्ध सामान मौजूद होने का आभास हुआ। सुरक्षाकर्मियों ने जब पपीते को काटकर दो टुकड़े किये, तो तीनों पपीते के अंदर से गांजा पाया गया। इसके बाद जेल अधीक्षक सुप्रकाश राय ने हेस्टिंग्स थाने की पुलिस को इसकी सूचना दी। इसके बाद महिला को पुलिस के हवाले कर दिया गया। वह कहां से गांजा लायी थी और कब से बेटे को इस तरीके से ड्रग्स की सप्लाई कर रही थी, इस बारे में उससे पूछताछ की जा रही है। महिला ने स्वीकार किया कि इससे पहले भी वह बेटे को पपीते में गांजा छुपाकर कई बार पहुंचा चुकी है, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई।

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हिंसा के मामले में बंगाल सुर्खियों में है।  हिंसा के मामले में पश्चिम बंगाल की पूरे देश में एक अलग छवि बन चुकी है। इसे सुधारने की आवश्यकता है। सभी को प्रयास करना चाहिए कि 2020 में बंगाल एक शांतिपूर्ण राज्य के रूप में उभरे, जहां कानून और मर्यादा के खिलाफ कोई नहीं जाता है। ऐसा कहना है राज्यपाल जगदीप धनखड़ का विश्वभारती  विश्वविद्यालय में मारपीट की घटना के सवाल पर जवाब  देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनके पास जानकारी का एक ही स्त्रोत राज्य सरकार है। वह प्रयासरत हैं कि राज्यपाल को राज्य सरकार एक्सक्लूसिव जानकारी  देगी। जब भी जानकारी उनके पास आ जायेगी और उनके दायित्व में होगी, तब वह लक्ष्मण रेखा में रह कर उसके बारे में टिप्पणी कर सकते हैं। छात्रों को पीटे जाने पर, पूछने पर, उन्होंने कहा कि ये अपने ही प्रांत को बदनाम करने का काम हो  सकता है। पश्चिम बंगाल की पहचान किसी भी तरह से हिंसा से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। बंगाल में वह सब कुछ है, जो पूरी दुनिया को सीखा सकता है कि  हमें क्यों हिंसा नहीं करनी चाहिए। हिंसा कहीं भी नहीं होनी चाहिए, चाहे वह हमारा मन हो या विचार। राज्यपाल का ये भी कहना है कि यदि वह किसी बात से सहमत नहीं हैं, तो इसका  मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वह उस व्यक्ति के विरोधी हो गये। दो मत हैं, हमें एक-दूसरे के मत का सम्मान करना चाहिए। साथ ही योजना बनानी चाहिए कि असहमति को सजीदगी के साथ व्यक्त किया जा सकता है। राज्यपाल ने कहा कि मंत्रियों ने उनके किसी कार्य पर प्रश्न उठाया है, इस बात की खबर उन्हें जबतक राज्य सरकार से न मिले, वह कुछ नहीं कहेंगे। उन्होंने कहा कि मंत्री क्या कहते और करते हैं, ये संवाददाता बेहतर जानते हैं। श्री धनखड़ ने कहा कि वह जबतक किसी चीज को देख, सुन और पढ़ नहीं लेते, उन बातों पर विश्वास नहीं करते। इस संवाददाता को राज्यपाल ने कहा कि वीआइपी कल्चर को खत्म करने में प्रधानमंत्री की पहल सराही गयी। उन्होंने रेड लाइट कल्चर एक झटके में ही खत्म कर दी। प्रधानमंत्री खुद इस बात पर जोर देते हैं, जब वह सड़क से गुजरें, तो ट्रैफिक को कम से कम रोका जाये। वह स्वयं भी जब सड़क से गुजरें, तो ट्रैफिक नहीं रुकना चाहिए, नियंत्रित होना चाहिए। कुल मिलाकर बंगाल में आपराधिक गतिविधियां और हिंसा पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

 

कोलकाता से संजय सिन्हा

 

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