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कांग्रेस बेनकाब

कांग्रेस बेनकाब

नागरिकता संशोधन अधिनियम को संसद ने लगभग एक महीने पहले ही पास कर दिया था। लेकिन इस पर विपक्ष का हंगामा अभी भी कम नहीं हुआ है। अब तो विपक्ष एक विपक्ष जैसा भी व्यवहार नहीं कर रहा और निराशा में शर्मनाक व्यवहार करने पर उतारू हो गया है। शाहीन बाग का प्रदर्शन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यही कारण है कि आजकल राहुल गांधी भाजपा नेताओं के निशाने पर हैं। क्योंकि वह सीएए का विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी और अन्य भाजपा नेता देशभर में लोगों को सीएए के बारे में जागरूक कर रहे हैं। मुख्यत: मुस्लिम समाज के पास जाकर भाजपा नेता यह समझा रहे हैं कि सीएए मुस्लिम समाज के विरूद्ध नहीं है।  जिस प्रकार से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने जेएनयू के टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन किया उससे कांग्रेस की सोच बिल्कुल ही स्पष्ट होती है। जहां एक तरफ कांग्रेस मुस्लिम समाज को भड़काने में लगी हैं, वही मुस्लिम समाज का वर्ग सरकार के साथ खड़ा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कश्मीर की आजादी के नाम पर टुकड़े-टुकड़े गैंग दूसरे विश्वविद्यालयों में भी घुसने लगा है। इस पृष्ठभूमि में यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि  मुम्बई के एक प्रोफेसर योगेश सुमन को छुट्टी पर भेज दिया गया। उनकी गतली यही थी कि उन्होंने राहुल गांधी के स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर दिये गये बयान की निंदा की थी। रिर्पोटों की माने तो उन्होंने फेसबुक के माध्यम से राहुल के बयान की निंदा की थी। ऐसा बताया जा रहा है कि वामपंथी और कांग्रेस समर्थित छात्रों द्वारा योगेश सुमन को भड़काया जा रहा है। क्या यह असहिष्णुता नहीं है? चूंकि महाराष्ट्र में कांग्रेस समर्थित सरकार है, अत: यह कहना गलत नहीं होगा कि योगेश सुमन की अभिव्यक्ति की आजादी को कुचला जा रहा है।

ऐसा मेरा मानना है कि विपक्ष सीएए से अधिक भाजपा के विरोध में है। इस सबके बावजूद सीएए को गैर भाजपा सरकार बदल भी सकती है यदि यह किसी के विरूद्ध है। लेकिन मेरी समझ में यह किसी के विरूद्ध में नहीं है। यहां यह भी बताना आवश्यक होगा कि ममता बनर्जी ने सीएए का विरोध कर रही कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टीयों के साथ हाथ नहीं मिलाया जो सीएए के विरोध पर विपक्ष की एकता को दर्शाता है। कांग्रेस ने अपनी ही गलती से अपनी राजनीतिक जमीन खोयी है और अब भाजपा को हराने के अवसर तलाश रही है। यही कारण है कि इसने अपने से अलग विचारधारा वाली शिवसेना से गठजोड़ कर लिया, ताकि भाजपा को शासन से दूर रख सके। मेरा मत यह है कि सीएए के विरोध के बारे में कुछ भी वैचारिक नहीं है और राजनीतिक रूप से इसका विरोध करना सुविधाजनक है। मैं यह भी मानता हूं कि राजनीतिक निर्णय का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव होता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि लोग इसका हिंसक रूप से विरोध करें और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करं। सीएए नागरिकता देने के लिए हैं, न की लेने के लिए। धर्मनिरपेक्षता एक समुदाय के आधार पर तय नहीं की जा सकती जैसाकि जो लोग सीएए का विरोध कर रहे हैं वे कर रहे हैं। इस देश के वामपंथी केवल मुस्लिम समाज की बात कर धर्मनिरपेक्षता को कम कर रहे हैं। उन्हें हिंदू समाज को बांटने का कोई अधिकार नहीं है। आज विपक्ष नि:सहाय हो चुका है और सारी चीजें इसके हाथों से फिसलती जा रही है। सच्चाई तो यह है कि वर्तमान सरकार कार्यों को जितनी शीघ्रता से कर रही है तो विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस के पास बोलने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। इसके अलावा, वर्तमान सरकार की कूटनीति के कारण, संसद में भी कांग्रेस की राजनीति नहीं चल रही है। यही कारण है की कांग्रेस ने अपनी राजनीति को सड़क पर उतार दिया है।

Deepak Kumar Rath

 

 दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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