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जिंदगी और हम

जिंदगी और हम

यहीं कहीं होती थी जिंदगी नामक पुस्तक अजीत कौर द्वारा लिखी गई है। उनकी कहानियां बहुत सादगी के साथ व्यक्त की गयी हैं जो पाठकों की संवेदना में स्थान बना लेती हैं। पंजाबी से हिंदी में अनुवादित ये कहानियां विषयवस्तु की दृष्टि से नयापन लिए हैं और शिल्प के एतबार से पाठक को अजब सी राहत देती हैं। अजीत कौर मूलत: मानवीय नियति की रचनाकार हैं। समय की संधियों-दुरभिसंधियों में फंसा सुख-दुख या दिनमान उनकी रचनाओं में कई कथास्थितियों के बहाने आता है।

यहीं कहीं होती थी जिंदगी

लेखिका           : अजीत कौर

अनुवाद           : सुभाष नीरव

प्रकाशक           : किताबघर प्रकाशन

मूल्य               : ३०० रु.

पृष्ठ                : १८४

 

बेहद महीन तरीके से वे व्यवस्था, प्रेम परिवार राष्ट्रीयता और निजता के सवालों से दो-चार होती है। संग्रह की पहली कहानी ‘गर्दन पर खुखरी’ हिंसक व्यवस्था पर टिप्पणी है। ‘दूसरी दुनिया’ में मरणशील जीवन का संताप हैं। इसी तरह ‘मरण रुत’ में अकाल की छाया है। ‘युधिष्ठिर’ एक पुराख्यान की स्मृति जगाती रचना है। ‘आवाज सिर्फ केतली की’, ‘धूप वाला शहर’, ‘कटी लकीरें टूटे त्रिकोण’ व्यक्ति मन के अंजाने रहस्य खोलती रचनाएं हैं।’ यहीं कहीं होती थी जिदंगी’ एक लंबी रचना है। विकास को परिभाषा को सवालों से घेरती है।  यह एक महत्त्वपूर्ण कहानी संग्रह है न केवल पठनीयता से समृद्ध है बल्कि एक दार्शनिक वैचारिक संपदा से भी संपन्न हैं। अजीत कौर की रचनात्मक सुघड़ता तो सर्वोपरि है ही।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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