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स्वास्थ्य मंत्रालय की सटीक प्लानिंग

स्वास्थ्य मंत्रालय की सटीक प्लानिंग

भारत में राजनीति के खेल ही निराले हैं। जिन मुद्दों पर पूरे देश को एक साथ खड़ा होना चाहिए, लोग उसमें भी राजनीति ढूंढ लेते हैं। अब मामला कोरोना वायरस का ही ले लें। चीन में कोरोना वायरस के कहर से मरने वालों की संख्या 2000 को पार कर गई है। अब तक 22 देशों में इसके संदिग्ध मामले सामाने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है। भारत में भी अब तक इसके तीन मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि, चीन इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। अब यहां यह भी जानना जरूरी है की कोरोना वायरस आखिर है क्या? कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है। इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए। अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्यू पेपर से ढककर रखें। जिन व्यक्तियों में कोल्ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें। अंडे और मांस के सेवन से बचें। जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें।

जब इस महामारी से देश को जहां एकजुट हो के लडऩे की जरूरत हैं वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी अपरिपक्वता का प्रदर्शन करते हुए एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा कि देश के लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना वायरस एक बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही और वक्त पर कार्रवाई जरूरी है। जिसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट कर बताया कि सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने और इसे लेकर देशभर में चल रही तैयारियों को मॉनिटर करने के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने  मीडिया से बातचीत में बताया कि देशभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए किस तरह की तैयारियां चल रही हैं और अब तक देश में कितने मामले सामने आए हैं।

उन्होंने कहा, ”भारत ने 17 जनवरी को ही कोरोना वायरस को संज्ञान में ले लिया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन से पहले ही हमने यह घोषित कर दिया था कि आगे चलकर ये ग्लोबल इमरजेंसी बन सकती है। हमने सरकार में हर स्तर पर मंत्रालयों सचिवालयों और देश के मुख्य सचिवों के साथ मिलकर इसे मॉनिटर करना जारी रखा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हम राज्य सरकारों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ संपर्क में हैं।’’

21 एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि पहले सात एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू की थी जिसमें कलकात्ता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, हैदराबाद और बेंगलुरू शामिल थे। शुरूआती दिनों में ही इन सब जगहों पर एक्सपर्ट्स की टीम भी भेजी गई। सी-पोर्ट पर भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई। इसमें चीन, इंग्लैंड, हांगकांग, सिंगापुर, जापान और कोरिया, इन छह देशों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है।

नेपाल में कोरोना वायरस का पहला केस सामने आने के बाद नेपाल से जुड़े बॉर्डर वाले राज्यों में भी अलर्ट किया। पंचायत, ग्राम सभा के स्तर पर भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी। साथ ही चीन से जुड़ी सीमा वाले राज्यों को भी अलर्ट जारी किया गया है।

देश में अब तक संक्रमण के तीन ऐसे मामले सामने आए हैं जिनकी पुष्टि हुई है। सारे मामले केरल के हैं जहां उन्हें भर्ती रखा गया है। ये सभी किसी न किसी तरह वुहान की यात्रा से जुड़े हैं। उनकी जांच की गई और पॉजिटिव पाए जाने पर ट्रीटमेंट दिया गया। फिलहाल ये नेगेटिव साबित हो गए हैं। उनमें से एक को डिस्चार्ज भी कर दिया है। बाकी दो को भी कुछ दिनों में डिस्चार्ज किया जा सकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ”हमने ट्रैवेल पॉलिसी में फिलहाल बदलाव किए हैं। लोगों को चीन ट्रैवेल करने से मना किया। जो वीजा पहले से जारी हो चुके थे उन्हें भी खत्म कर दिया है। विदेशी नागरिक जो चीन से भारत की यात्रा पर थे उनका वीजा खत्म कर दिया गया है।’’ डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि डायमंड क्वीन क्रूज जहाज पर सवार 3700 यात्रियों और चालक दल में कुछ भारतीय भी हैं। उन्होंने बताया कि क्रूज में 439 लोगों का टेस्ट किया गया जिसमें से अब तक 174 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि क्रूज पर चालक दल के 132 सदस्य और छह यात्री भारत के भी हैं जिन्हें अभी वहीं रोका गया है। उन्होंने कहा कि देश भर में लगभग 15991 लोगों को निगरानी पर रखा गया है जिसमें से करीब 497 लोगों को लक्षणों के आधार पर इलाज दिया जा रहा है। 41 लोगों को सबसे अलग

रखा गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को अस्पताल में सबसे अलग रख देने का मतलब ये नहीं है कि वो वायरस से पॉजिटिव है।

सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर शिकायत और सुझाव के लिए एक कॉल सेंटर शुरू किया जिसका नंबर है 01123978046, ये 24 घंटे काम करता है। इस पर अब तक चार हजार के करीब फोन आए हैं जिसमें लोग जानकारी भी ले रहे हैं और समस्याएं भी बता रहे हैं।


 

वैदिक संस्कृति का प्रभाव


 

कोरोना वायरस के कारणों पर शोध से चीन ने जो निष्कर्ष निकाला है वे परोक्ष रूप में भारतीय वैदिक संस्कृति का अनुमोदन करता है। जो कि इस प्रकार है :-

  • हमारे प्राचीन ऋषियों ने वेदों के अधार पर शवों को अग्नि में जलाकर दाह संस्कार करने का विधान बनाया है।
  • चीन ने घोषणा की है कि अगर शवों को जमीन में गाड़ देंगे, तो उनके शरीर में जो कोरोना वायरस या अन्य वायरस व बैक्टीरिया होते हैं वो जमीन में मिल जाएंगे और ये वायरस और बैक्टीरिया कभी नष्ट नहीं होंगे, बल्कि जमीन में ही फैलेंगे और जल तथा वायु को प्रदुषित करेंगे। शवों को जला देने से आग के जरिये वायरस और बैक्टीरिया सदा-सदा के लिए खत्म हो जाते हैं।
  • इसीलिए चीन ने घोषणा की है कि जितने भी लोग कोरोना वायरस से पीडि़त होकर मर रहे हैं, उन सभी का अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जायेगा।
  • वेद और वैदिक सहित्य में शाकाहार को ही मनुष्य का भोजन कहा गया है। मांसाहार रोगों को बढ़ाने वाला और महापाप की श्रेणी में आता है। जिसका सेवन स्पष्ट रूप में वर्जित है।
  • मांसाहार कितना खतरनाक होता है, इस बात की जानकारी चीन को ही नहीं सारे विश्व को कोरोना के कारण पता चली है। जिस प्राणियों को मांसाहारी खाते हैं वे कई प्रकार की घातक बीमारीयों से पीडि़त हो सकते हैं तथा उनके सेवन से मनुष्य उन बीमारियों की चपेट आ सकता है यह बात कारोना वायरस ने सिद्ध कर दिया है। अब पूरे विश्व को शाकाहार को ही अपनाना होगा

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  • हमारे ऋषियों ने यज्ञ को सर्व श्रेष्ठ कर्म कहा है क्योंकि शुद्ध जल और वायु मनुष्य के लिए परम अवाश्यक है। अग्नि में डाला गया घी और सामग्री वातावरण में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को भी समाप्त करता हैं।
  • चीन अब भारत में अपनाई जाने वाली यज्ञ पद्धत्ति से वायरस मिटने पर विचार कर रहा है। क्योंकि मांसाहार त्याग कर वायरस से कुछ सीमा तक तो बच सकते हंै लेकिन जो वायरस वायुमंडल में फैल चुके हैं उनका समाप्त करने का उपाय यज्ञ ही है।
  • वैदिक संस्कृति में आपसी मेल-जोल में शारीरिक स्पर्श जैसे हाथ मिलाना या गले मिलना या चूमना आदि का कोई स्थान नहीं है। एक दूसरे से मिलने पर हाथ जोड़कर नमस्ते करने का अदेश हैं। यह नियम हमारे ऋषियों की वैज्ञानिक व स्वास्थ्य की दृष्टि से उच्च कोटी सोच को दर्शाता है। अन्य अभिवादन के ढंग छूत रोग कारक है इसलिए हाथ जोड़कर नमस्ते करना ही स्वास्थ्य के लिए उचित है।
  • आज चीन में लोगो को कारोना वायरस से बचने के लिए शारीरिक स्पर्श से बचने के निर्देश दिये गये हैं। यह सब निर्देश वैदिक संस्कृति का ही समर्थन करते हैं। जिनको हमने करोड़ो वर्षों से अपनाया हुआ है।
  • आज चीन शव दाह संस्कार, शाकाहार, यज्ञ विज्ञान और भारतीय संस्कृति को अपना रहा है! वह दिन दूर नहीं जब पूरा विश्व भारतीय वैदिक संस्कृति को अपनाने को मजबूर होगा
  • भारत में ऋषि-मुनियों ने जो नियम धर्म और परम्पराओं के अधार पर बनाये हैं वही सर्वश्रेष्ठ हैं और इनको अपनाने से ही हर रोग से बचा जा सकता है।

 


थर्मल स्क्रीनिंग क्या है?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक थर्मल स्क्रीनिंग के जरिए कोरोना वायरस या फिर ऐसे ही किसी अन्य रोग से पीडि़त व्यक्ति की पहचान की जा सकती है।

दरअसल थर्मल स्क्रीनिंग से एक स्वस्थ्य व्यक्ति और किसी तरह के विषाणु से ग्रस्त व्यक्ति में साफ अंतर पता चलता है। इसकी खासियत यह भी है कि इससे निकलने वाली तरंगों का कोई दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता। हालांकि इसका इस्तेमाल विशेषज्ञों की देखरेख में किए जाने की ही सलाह दी जाती है।

थर्मल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया में लोगों को एक स्कैनर से होकर गुजरना पड़ता है। यह स्कैनर व्यक्ति के शरीर के तापमान के आधार पर संदिग्ध रोगी का पता लगाता है।

सामान्य व्यक्ति के मुकाबले कोरोना से पीडि़त शख्स के शरीर का तापमान अधिक होगा। संदिग्ध शख्स को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है। इसके साथ थर्मल स्कैनर एक इंफ्रारेड कैमरे की तरह काम करता है। इस स्कैनर के जरिए गुजरने वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं। विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है।

कोरोना वायरस साल 2020 के लिए नई महामारी बनकर चुनौती जरूर है, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि कुछ साल पहले ही सार्स (सीवियर एक्यूट रेसपेरेटरी सिंड्रोम), बर्डफ्लू, एच-1एन-1 जैसी घातक बीमारियां भी चीन से ही निकलीं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर ऐसा क्या है जो जबरदस्त संक्रमण से तबाही फैलाने वाली सारी बीमारियां चीन से ही शुरू होती हैं।? वहां क्या है जो पहला वायरस निकलकर दुनियाभर में फैल जाता है? इसका जवाब वेबदुनिया पर ऋतुपर्ण देव देते हैं और इसका जवाब बेहद चौंकाने वाला है और वह है चीन का सी-फूड मार्केट। उनका कहना है की पूरे चीन में सब्जी और मांस बाजार जहां-तहां फैले हुए हैं। चीनी लोग समुद्री जीवों के मांस को शौक से खाते हैं। इंटरनेट पर मौजूद सूची में वहां बिकने वाले मांस में जिंदा लोमड़ी, मगरमच्छ, भेडिय़ा, सैलामैंडर, सांप, बिल्ली, चूहे, मोर, साही, ऊंट सहित 112 तरह के मांस का जिक्र है। वहां के बाजार ऐसे मांस से पटे होते हैं। एक तो घनी आबादी दूसरा पास ही में दूकानों के चलते तरह-तरह की संक्रमित बीमारियों को फैलते देर नहीं लगती।

चीन में पशुधन भी बहुत ज्यादा है, जिससे जानवरों से इंसान के शरीर में पहुंचने वाले वायरस को मनमुताबिक वातावरण मिल जाता है। इसके अलावा चीन का दुनिया के तमाम देशों के साथ जबरदस्त व्यापारिक व राजनीतिक गठजोड़ भी है। इस कारण एयर नेटवर्क भी तगड़ा है जिससे संक्रमण तेजी से दुनिया के बाकी हिस्सों में पहुंच जाता है।

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दुनियाभर में जंगल तेजी से कम हो रहे हैं। इस कारण जानवरों की फार्मिंग का कारोबार खूब फल-फूल रहा है, जिससे मांस का कारोबार खूब बढ़ गया। जंगली जानवरों के वायरस फार्मिंग वाले जानवरों में आ जाते हैं और यहां से ये इंसान के शरीर तक पहुंच जाते हैं। चीन के मांस बाजार में कई जानवरों का मांस मिलता हैं। इसलिए वहां से नए-नए वायरस तेजी से फैलते हैं और संक्रामक होने की वजह से तमाम दुनिया में फैल जाते हैं। दरअसल मांस बाजार में जानवरों के मांस और खून का इंसानों के शरीर से संपर्क होता रहता है जो वायरस के फैलने की सबसे बड़ी वजह है। साथ ही हाईजीन में थोड़ी भी चूक वायरस फैलाने में मददगार होती है।

तमाम परीक्षणों और रिसर्च से भी यह साबित हुआ है कि कई खतरनाक वायरस जानवरों के मांस से इंसान में आए हैं और फिर इनका सक्रमण तेजी से फैला। हालात यह हैं कि 30 साल में 30 नई और खतरनाक संक्रामक बीमारियों के बारे में पता चला, जिसमें 75 फीसदी के वायरस जानवरों से इंसान में आए हैं। चीन का जो वुहान शहर सबसे ज्यादा प्रभावित है वहां एक करोड़ से ज्यादा आबादी है जो एक प्रमुख परिवहन केंद्र भी है।

सार्स के समय भी यह पाया गया था कि वन्य जीव बाजार में मिलने वाली कस्तूरी बिलाव में पहला सार्स वायरस मिला था। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि चमगादड़ों ने बिल्ली जैसे जीवों को इससे संक्रमित किया और फिर इंसानों द्वारा बिल्लियों को खाने से यह उनमें फैला।’

दरअसल चीन के वूहान प्रांत में इस वायरस का अटैक दिसंबर 2019 में ही हो चुका था। लेकिन इसे न केवल छुपाया गया बल्कि साधारण बीमारी बताकर दुनिया को गुमराह किया गया। झूठ की इन्तिहा तो तब हो गई जब कहा गया कि इससे किसी की मौत नहीं हुई। लेकिन जर्मनी की लैब जर्मन सेंटर फॉर इंफेक्शन रिसर्च ने इस बारे में जांच-पड़ताल शुरू की तो पाया कि कोरोना वायरस पहली बार चीन के वूहान में ही उभरा है, जिससे गंभीर निमोनिया होता है। तब इस वायरस की भयावहता का दुनिया को अहसास हुआ लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सबसे पहले सांस लेने में दिक्कत, गले में दर्द, जुकाम, खांसी और बुखार होता जो निमोनिया का रूप ले सकता है। इससे गुर्दे से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के दूसरे से संपर्क में आने पर फैलता है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका मांसहारी भोजन से बचना है। इससे बचाव को लेकर फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है।

 

नीलाभ कृष्ण

 

 

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