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उद्धव की दो नावों पर सवारी

उद्धव की दो नावों पर सवारी

धर्म निरपेक्षता की पतवार थामकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हिन्दुत्व की नाव चला रहे हैं। ऐसे में वह अयोध्या, छत्रपति शिवाजी और पवार पालिटिक्स के बीच में फंस गए हैं। उद्धव का यह दर्द उनके चचेरे भाई, कभी बालासाहब ठाकरे के सिपहसालार रहे राज ठाकरे बढ़ा रहे हैं। राज ठाकरे की पार्टी ‘मनसे’ नौ सौ चूहे खाकर अब हिन्दुत्व के ट्रैक पर लौट आई है। उद्धव ने अपने बेटे आदित्य को राज्य सरकार में हैसियत देकर शिवसेना का उत्तराधिकारी बना दिया है। उन्हीं की राह पर चलकर राज ठाकरे ने भी अपने बेटे को राजनीति में उतारा है। राज ठाकरे आए दिन महाराष्ट्र सरकार के लिए ‘बाधा दौड़’ का आयोजन करा रहे हैं। दूसरी तरफ शरद पवार भी राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। इस खेल में पुराने शिव सैनिकों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। न वह मनसे नेता का राग समझ पा रहे हैं और न ही बालासाहब ठाकरे के पुत्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का हिन्दुत्व। अब कौन बताए सत्ता के लड्डू का स्वाद। जो खाए वो पछताए, जो न खाए वो भी पछताए।

 

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