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स्वशक्ति को पहचानें

स्वशक्ति को पहचानें

By उपाली अपराजिता रथ

ये जीवन वास्तव में बहुत विचित्र है। जीवन को गणित और हम सब को विद्यार्थी माना जाए तो गलत नहीं होगा। जैसे गणित को बेहतरीन तरीके समझ ले तो कोई भी छात्र उसे आसानी से हल कर सकता है। उसी तरह यदि हम इस गणित रूपी जीवन को सही ढंग से समझ लें तो इसकी उलझनों को काफी हद तक सुलझा सकते हैं। हम में से ऐसे बहुत से लोग हैं जो अन्य सभी कार्य में दक्ष कहलाते हैं, लेकिन जीवन को समझने के मामले में वे एक असफल विद्यार्थी साबित होते हैं।

असल में यह सब योग का खेल है। हमारे जीवन में हमें कहां लाभ मिलता है और हमारा कब नुकसान होता है, हम खुद नहीं पहचान पाते हैं। जब हमें कुछ प्राप्त होता है तो हम खुशी महसूस करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे वही खुशी हमें कई अन्य खुशियों से वंचित कर देती है। परंतु हम उसे पहचान नहीं पाते। मनुष्य स्वयं एक शक्ति का भंडार है। हम जितना कार्य करते हैं, उतनी ही हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है। शक्ति का कभी क्षय नहीं होता, उसका तो बस रूपांतरण होता है। हर आदमी के अंदर कुछ विशेष करने की क्षमता निहित होती है। लेकिन, हम उस क्षमता का उपयोग नहीं कर क्षणिक खुशियों के लिए दूसरी वस्तु या मानव की सहायता लेते हैं। उदाहरणस्वरूप, घर का कोई काम करने के समय अगर हम किसी मशीन का प्रयोग करते हैं या किसी अन्य व्यक्ति की सहायता लेते हैं तो हम अपनी कार्यक्षमता को नकारते हैं। इस तरह हमारे जीवन में कुछ जुड़कर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाता है। हम उस सुविधा के आदी हो जाते हैं। सुविधा की कमी अंतत: हमें दुखी करने लगती है।

हमें जितनी सुविधा मिलती है, हम अपने अंदर की शक्ति का उतनी ही क्षय करते हैं। हर धर्म में यही बात कई रूपों में समझाने की कोशिश की गई है। हमारे नित्य जीवन में हम जितनी कम चीजों से जुड़े रहेंगे, हम अपने अंदर उतनी ही शांति महसूस करेंगे। बाहर की दुनिया अपने आप से दूर करती है। दुनिया में रहकर खुद को दूर रखना वास्तव में बहुत कठिन है। लेकिन, हम थोड़ा सा प्रयास करें तो सब कुछ संभव है।

आजकल हर इंसान के अंदर सहने की क्षमता कम होती जा रही है। हम सब अपने आपको इतना जोड़कर रखते हैं कि किसी भी सुविधा से खुद को अलग रखना हमारे लिए कठिन हो जाता है। उसका प्रभाव तुरंत हमारे अपने व्यवहार में प्रतिलक्षित हो जाता है। हम ऋषि-मुनियों की तरह सब कुछ त्याग कर जीवन निर्वाह नहीं कर सकते, लेकिन इतना  जरूर कर सकते हैं कि किसी प्रतिकूल परिस्थिति को अनुकूल मानकर जीवन को सरल और सुंदर बना सकते हैं।

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