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सारधा घोटाले का काला साया

सारधा घोटाले का काला साया

By पश्चिम बंगाल से जॉयदीप दासगुप्ता

लंबे समय तक मौन रहने के बाद आखिरकार ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने शारदा समूह से ‘एक पाई’ भी नहीं लिया है। उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर ‘असली दोषियों’ को बचाने का आरोप भी लगाया है। एक स्थानीय टीवी चैनल को हाल ही में दिए अपने एक इंटरव्यू में ममता बनर्जी ने अपनी ईमानदारी और निष्ठा पर सवाल उठाने वाले राजनैतिक पार्टियों पर जवाबी सवाल दागा।

पश्चिम बंगाल में हाल के वर्षों में सबसे चर्चित सारधा घोटाले का काला साया हर रोज बड़ा होता जा रहा है और राज्य में बड़े-बड़ों के लिए यह दु:स्वप्न बनता जा रहा है। सीबीआई जांच से मानो हर रोज घोटाले का नया अध्याय खुलता जा रहा है और राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी तथा कॉरपोरेट जगत की कई शख्सियतों की रातों की नींद उड़ गई है।

इस घोटाले से करीब साल भर पहले परदा उठा, लेकिन राज्य की जांच एजेंसियों की जांच इतनी मंथर गति से चल रही थी कि वह कोई नतीजा नहीं दे पाई। फिर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह मामला केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई)और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)के जिम्मे पहुंचा। उसके बाद करोड़ों के इस घोटाले की परतें खुलने लगीं और संदिग्धों से पूछताछ तथा गिरफ्तारियां शुरू हुईं।

अब यह अनुमान लगाया जा सकता है कि सारधा घोटाला राज्य का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित होने जा रहा है और आने वाले दिनों में यह तृणमूल कांग्रेस सरकार प्रवर्तन निदेशालयतथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भारी झटका देने वाला है। राज्य में विपक्षी पार्टियों का आधार भी बढ़ता जा रहा है और घोटाले से उन्हें मौका मिलता दिख रहा है। हाल में उपचुनावों में प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने घोटाले में तृणमूल कांग्रेस का हाथ होने का आरोप लगाया था और कहा था कि केंद्र सरकार दोषियों को सजा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

शाह ने कोलकाता में सभा में कहा, ”आप (ममता) सारधा घोटाले में ठगे गए 17 लाख लोगों के लिए प्रदर्शन नहीं कर रही हैं, सड़कों पर नहीं उतर रही हैं, क्योंकि आपके अपने सहयोगी और पार्टी के लोग घोटाले में शामिल हैं। हमें इसका जवाब चाहिए कि सारधा घोटाले की रकम किसकी जेब में गई। हमें किसी से कोई डर नहीं है, क्योंकि हमारे कार्यकर्ता किसी घोटाले में शामिल नहीं हैं। सारधा हो या कोई और घोटाला, हम दोषियों को जेल में पहुंचा कर दम लेंगे।’’

दूसरी तरफ माकपा ने केंद्र सरकार से इस आरोप की जांच करने की मांग की कि  सारधा घोटाले की रकम बांग्लादेश के जरिए भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। माकपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी चुनौती दी कि वे सीबीआई जांच में क्लीनचिट हासिल कर दिखाएं। माकपा राज्य सचिवालय के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने मांग की, ”ऐसी खबरें छपी हैं कि सारधा समूह की रकम गैर-कानूनी ढंग से बांग्लादेश भेजी जाती रही है और वहां से उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है। इसकी जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय को करनी चाहिए, क्योंकि यह देश के लिए गंभीर खतरा है। इन सबके पीछे कौन है, इसका पता तो लगाया ही जाना चाहिए।’’

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने तो यह मांग भी की कि सीबीआई जब तक ममता को क्लीन चिट नहीं देती, उन्हें मुख्यमंत्री पद से हट जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”उन्हें (ममता को) फौरन पद छोड़ देना चाहिए। घोटाले में जैसे उनका नाम उछला है, इससे अगर वे मुख्यमंत्री बनी रहती हैं तो बंगाल की छवि खराब होती है।’’

लंबे समय तक मौन रहने के बाद आखिर ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने सारधा समूह से ”एक पाई’’ भी नहीं लिया। उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर ”असली दोषियों’’ को बचाने का आरोप लगाया। एक स्थानीय टीवी चैनल को हाल में ही दिए अपने एक इंटरव्यू में ममता ने अपनी ईमानदारी और निष्ठा पर सवाल उठाने वाले राजनैतिक पार्टियों पर जवाबी सवाल दागते हुए कहा, ”सारधा घोटाला कब हुआ? जब वाममोर्चा सत्ता में था। संचयिनी और संचिता जैसे चिटफंड घोटाले भी वाममोर्चा के राज (1977-2011) में हुए। कांग्रेस, भाजपा और वाम दल असली दोषियों को बचाना चाहते हैं। तृणमूल को सारधा समूह से एक पैसा भी नहीं मिला है।’’

लेकिन घोटाले की काली छाया तृणमूल पर लंबी होती दिखने लगी है। बंगाल में हाल में दो विधानसभा उपचुनावों में भाजपा बशीरहाट सीट जीतकर पहली बार पश्चिम बंगाल की विधानसभा में प्रवेश कर गई है।

क्या है सारधा घोटाला?
सारधा समूह की पोंजी स्कीम के 2013 में बैठ जाने से इस घोटाले का खुलासा हुआ। सारधा समूह 200 निजी कंपनियों का समूह है। ये सभी 200 कंपनियां पूरे पूर्वी भारत, खासकर पश्चिम बंगाल, ओडीशा और असम में सामूहिक निवेश की योजनाएं (चिट फंड)चलाती रही हैं। 2013 में सारधा समूह के बैठ जाने से करीब 17 लाख आम लोगों के 200-300 अरब रुपए डूब गए। घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय की जांच पूरी हो गई है, जबकि सीबीआई की जांच अभी जारी है।

क्या है पोंजी स्कीम?
पोंजी स्कीम आम लोगों को बेहतर फायदा देने का लालच देकर पैसे निवेश कराने का गोरखधंधा है। इसके संचालनकर्ता नए लोगों से पैसा लेकर पुराने लोगों को बेहतर फायदे के साथ पैसा लौटाते रहते हैं। वे अपने मुनाफे से निवेशकों को कुछ नहीं देते। पोंजी स्कीम में अमूमन अल्पावधि के लिए जमा पर अस्वाभाविक रूप से अधिक फायदा देने का लालच दिया जाता है।

कौन हैं प्रमुख आरोपी?

सुदीप्तो सेन

सुदीप्तो सेन सारधा समूह के चेयरमैन और मैनेजिंग डाइरेक्टर थे। सारधा समूह के दीवालिया होने के पहले सेन ने सीबीआई को तृणमूल सांसद कुणाल घोष के खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ एक चि_ी लिखी। सेन ने लिखा कि उन्होंने कई नेताओं को भारी रकम दी है। उन्होंने यह भी लिखा कि कुणाल घोष ने घाटे वाली मीडिया कंपनियों में पैसा लगाने को मजबूर किया। कथित तौर पर कुणाल घोष ने सेन को ब्लैकमेल किया और अपने एक चैनल को बाजार दर से कम दाम पर बेचने को मजबूर किया। सेन 10 अप्रैल 2013 को सीबीआई को चिट्ठी भेजने के बाद कोलकाता से भाग गए। बाद में वे कश्मीर में दो सहयोगियों के साथ पकड़े गए। फिलहाल वे कोलकाता की जेल में हैं।

देबजानी मुखर्जी

देबजानी 2010 में सारधा समूह में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर भर्ती हुई थी, लेकिन जल्दी ही वह कंपनी में नंबर दो की हैसियत पर पहुंच गई। वह सारधा समूह के एक्जिक्यूटिव डाइरेक्टर बन गई जिसके पास चेक पर दस्तखत करने के अधिकार थे। उसे सुदीप्तो सेन के साथ पकड़ा गया।

कुणाल घोष

तृणमूल के निलंबित सांसद कुणाल घोष को सीबीआई ने सारधा चिट फंड घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। कथित रूप वे सारधा समूह से हर महीने 16 लाख रुपए लेते रहे हैं। वे सारधा समूह के मीडिया समूह के सीईओ थे। उन्होंने हाल में तृणमूल नेतृत्व से पार्टी के दूसरे लोगों की शिरकत का पता लगाने के लिए एक आंतरिक जांच 72 घंटे में बैठाने की मांग की।

सारधा घोटाले से तृणमूल का नाता

कुणाल घोष के बाद सीबीआई ने 10 सितंबर 2014 को तृणमूल के राज्यसभा सांसद सृंजय बोस से पूछताछ की। बोस बांग्ला अखबार संबाद प्रतिदिन के सीईओ थे। सीबीआई ने 9 सितंबर 2014 को घोटाले के सिलसिले में राज्य सशस्त्र पुलिस के पूर्व महानिदेशक रजत मजूमदार को भी गिरफ्तार किया। मजूमदार तृणमूल के ताकतवर नेता भी हैं। सीबीआई ने तृणमूल नेता मुकुल रॉय के करीबी आसिफ खान से भी पूछताछ की। सीबीआई के पूछताछ के एक दिन बाद खान ने तृणमूल के पद से इस्तीफा दे दिया।

इसके पहले ईडी ने लोकप्रिय अभिनेता मिठुन चक्रवर्ती से पूछताछ की। वे तृणमूल के सांसद हैं और सारधा समूह की मीडिया शाखा के ब्रांड एंबेसेडर भी रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि भाजपा उसकी छवि खराब करने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि उन 17 लाख आम लोगों के जीवन की जमा-पूंजी के बारे में क्या कहा जाए?

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