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सरकारी वेबसाइट पर पॉर्न साइट

सरकारी वेबसाइट पर पॉर्न साइट

By पटना से संतोष सुमन

बिहार सरकार के ऑफिशियल वेबसाइट पर पॉर्न साइट खुल रहे हैं। बिहार स्टेट हेल्थ सोसाइटी के लिंक पर क्लिक करने से अश्लील वेबसाइट खुल रहे हैं। इसे सरकारी तंत्र हटा नहीं सकी। इस मुसीबत को सरकार अभी तक खत्म नहीं कर सकी है। इसी बीच बिहार सरकार की महिला और बाल विकास परियोजना की वेबसाइट पर पॉर्न और विदेशी अश्लील साइटों के लिंक भरे पड़े हैं। विदेशी भाषा में बनी ये बेवसाईटें अश्लीलता से भरी हुई है। वत्र्तमान जीतनराम मांझी की सरकार में रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, महंगाई, बढ़ते अपराध के अलावा राजधानी में जल जमाव, बिजली संकट, गंदगी के साथ-साथ सूबे में हर तरह के अवैध काम हो रहें हैं – क्या इसे जंगल राज नहीं कहेंगे? सरकारी तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सरकारी वेबसाइटों पर पॉर्न साइट खुल रहें हैं, आखिर इस राज्य में कौन सा कानून चल रहा है?

जिम्मवार कौन?
बिहार सरकार के आधे-अधूरे पोर्टल biharonline.gov.in को अश्लील वेबसाइट पॉर्न साइटों को हटाने में नाकाम रही सरकारी तंत्रों ने इस वेबसाइट को 15 सितंबर 2014 को ब्लॉक कर दिया। सरकारी पोर्टल पर स्टेट हेल्थ सोसाइटी का लिंक क्लिक करते ही पॉर्न साइट shbbihar.org खुल रही है। सरकारी वेबसाइट पोर्टल का निर्माण बिहार स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (ब्रेल्ट्रॉन)ने किया है, जो बिहार सरकार का उपक्रम है। बेल्ट्रॉन के जेनरल मैनेजर ओम प्रकाश ने अपनी जिम्मेवारी से बचते हुए कहा कि यह वेबसाइट ऐजेंसी ‘बेस्ट’ से बनवाया था, ‘बेस्ट’ की लापरवाही से ऐसा हुआ है। वहीं दूसरी ओर ‘बेस्ट’ के सीईओ वीरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि ” बेल्ट्रॉन ने पोर्टल बनाने का काम उसे दिया ही नहीं था। ट्रायल पोर्टल तैयार कर हम दिखा रहे थे ताकि हमारे काम के अधार पर वर्क ऑर्डर जारी हो, लेकिन काम नहीं दिया गया। ऐसे में ट्रायल पोर्टल की पूरी जिम्मदारी बेल्ट्रॉन के पास ही है। उसका लॉगिन अधिकार ‘बेस्ट’ के पास नहीं है।’

बिहार सरकार की महिला और बाल विकास परियोजना की वेबसाइट पर पॉर्न (अश्लील) और विदेशी साइट का लिंक है। विदेशी भाषा में बनी इस वेबसाइट पर अश्लील चित्र के साथ कई फोन नंबर भी दिए गए हैं। इसके जरिए जो वेबसाइट खुल रहे हैं, उन पर दर्जनों पॉर्न साइट का लिंक है। राज्य में बच्चों के विकास के लिए चल रही परियोजनाओं की जानकारी के लिए बिहार सरकार ने एक वेबसाइट www.icdshih.gov.in  बना रखी है। यह वेबसाइट विभाग के ही डाटा सेंटर से संचालित किया जाता है। वेबसाइट पर बाल विकास परियोजाओं के अलावा सबला और इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना (आईजीएमएसवाई) का भी लिंक है। सरकारी साइट पर दिए गए इस लिंक वेबसाइट पर 20 से अधिक अन्य लिंक हैं। जिनमें कुछ पर उत्तेजक तस्वीरें, तो कुछ पर यूटयूब का लिंक है। लिंक की तस्वीरों में पॉर्न साइट, पॉर्न गेम्स, दवाएं, शराब आदि के चित्र दिए गए है।

अश्लील वेबसाइट के लिंक को लेकर कोई भी सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी लेने से भाग रहा है, आखिर क्यों सरकार का अपने तंत्र पर कोई नियंत्रण नहीं है।

10 से 20 साल पुराना आंकड़ा

Gov.bih.nic.in का निर्माण बिहार सरकार ने अपनी अच्छी छवि बेहतर करने और लोगों को सरकारी कामकाज के बारे में अप-टू-डेट करने के लिए बनवाया था। लेकिन वेबसाइट वर्षों पुराने आंकड़ों से सजा हुआ है। पिछले 10 से 20 सालों से इसे अपडेट नहीं किया गया है। सरकार की वेबसाइट बनाने वाली एनआईसी मेंटेनेंस ने खुद को इस मामले से अपने अगल करते हुए, सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय वेबसाइट को अद्यतन आंकड़ा नहीं दिया, वहीं सांख्यिकी निदेशालय ने अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए कहा कि अब तक आंकड़ा मांगा नहीं गया है, इसलिए नहीं दिया गया। बिहार से झारखंड को अलग हुए 14 साल होने वाला है, लेकिन सरकारी वेबसाइट पर बिहार थ्री फीगर के अंतर्गत दिए गए आंकड़ों में से कई विभाजन के पहले के हैं। जैसे खनिज संपदा, वन, मिट्टी, मानव संसाधन आदि से संबंधित आंकड़े 2011 की जगह 1991 और 2001 की जनगणना पर अधारित है। वेबसाइट पर स्टेट प्रोफाइल में मात्र कुछ आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं, लेकिन बहुत ही संक्षित होने के कारण किसी काम के नहीं हैं। साल 1991 और 2001 की जनगणना पर आंकड़ें विस्तृत हैं, लेकिन वे 10 से 20 साल पुराने हैं।

56 विभागों में 8 सेवाएं
बिहार सरकार के 56 विभागों में से मात्र 8 विभागों के वेब पोर्टल हैं, वो आधे-अधूरे। सरकार के किसी भी विभाग का वेबसाइट अप-टू-डेड नहीं है। राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 19 फरवरी 2014 को bihar.gov.in का उद्घाटन किया था, इसी के साथ यह सेवा आंशिक रूप से शुरू हुई थी। साल 2011 के अंत में जब बिहार ऑनलाइन को सरकार ने औपचारिक स्वीकृति देने और इसके लिए बजट आवंटित करने की बात आयी तो इसे अचानक रोक दिया गया। यह निर्णय लिया गया कि केन्द्रीय योजना स्टेट पोर्टल एण्ड सर्विस डिलिवरी गेटवे (एसएसडीजी) राज्य के लिए ऑफिसियल पोर्टल बनायेगी। बिहार सरकार की योजना इधर ठंडे बस्ते में गई और उधर दिसंबर 2012 में एसएसडीजी ने बिहार सरकार के ऑफिशियल पोर्टल bihar.gov.in के लिए टेंडर जारी कर दिया। एलएनटी इंफोटेक को 5.4 करोड़ रुपये में अनुबंध किया गया और 2013 में पोर्टल पर काम शुरू हुआ। सरकारी पोर्टल पर थ्री फिगर में 118 डाटा पीडीफ में उपलबध हैं। इसमें से 80 फीसदी से अधिक आंकड़ें पुराने हैं। आंकड़ें भी 10 से 20 साल पुराने हैं। इसमें तीन साल पहले तक के आंकड़े भी उपलब्ध नहीं हैं।

बिहार सरकार के सरकारी वेबसाइट बनाने पर 5.4 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद 56 विभागों में मात्र 8 विभागों के वेबसाइट आधे-अधूरे बने हुए हैं। लेकिन सरकारी तंत्र में कोई भी अपनी जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं दिख रहा है। वहीं मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार इस पूरे मामले में चुप है। ऐसे कई सवालों के घेरे में मांझी सरकार फंसी हुई है।

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